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  • नई उड़ान की तैयारी: भारतीय रिसर्च और स्टार्टअप्स जुड़ेंगे दुनिया के बड़े अंतरिक्ष और तकनीकी भागीदारों से

    नई उड़ान की तैयारी: भारतीय रिसर्च और स्टार्टअप्स जुड़ेंगे दुनिया के बड़े अंतरिक्ष और तकनीकी भागीदारों से

    नई दिल्ली । भारत के शिक्षा और तकनीकी क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आकार ले रहा है, जहां अब उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे वैश्विक नवाचार और अंतरिक्ष तकनीक के केंद्र के रूप में उभरेंगे। इस नई पहल का उद्देश्य देश के शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और तकनीकी विशेषज्ञों को अंतरराष्ट्रीय मंच से जोड़ना है, ताकि उनके विचार और तकनीक दुनिया के सामने पहुंच सकें।

    इस योजना के तहत भारतीय विश्वविद्यालयों, तकनीकी संस्थानों और स्टार्टअप्स को एक साझा वैश्विक मंच पर लाया जाएगा, जहां वे अपने शोध और नवाचार प्रस्तुत करेंगे। यह मंच उन्हें अंतरराष्ट्रीय निवेशकों, अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े संगठनों और वैश्विक तकनीकी विशेषज्ञों के साथ सीधा संवाद करने का अवसर देगा। इससे भारत के युवा वैज्ञानिकों और उद्यमियों को नई दिशा और वैश्विक पहचान मिलेगी।

    पिछले कुछ वर्षों में भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों ने शोध और नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। अब ये संस्थान केवल शैक्षणिक केंद्र नहीं रहे, बल्कि उन्नत तकनीक विकसित करने वाले नवाचार केंद्र बनते जा रहे हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अंतरिक्ष तकनीक, डेटा साइंस और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारतीय शोध लगातार आगे बढ़ रहा है।

    नई पहल के तहत 100 से अधिक डीप-टेक स्टार्टअप्स और प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों को एक साथ जोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य विभिन्न तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना और नवाचार को वैश्विक स्तर पर ले जाना है। इससे भारतीय स्टार्टअप्स को न केवल निवेश के अवसर मिलेंगे, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी प्राप्त होगा।

    इस पूरी प्रक्रिया में अंतरिक्ष तकनीक से जुड़े स्टार्टअप्स और कंपनियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। ये संस्थान उपग्रह निर्माण, अंतरिक्ष उपकरण, और उन्नत सैटेलाइट तकनीक जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इनके द्वारा विकसित तकनीकें अब वैश्विक बाजार में अपनी जगह बना रही हैं, जिससे भारत की अंतरिक्ष क्षमता को नई पहचान मिल रही है।

    कुछ भारतीय तकनीकी कंपनियां पहले ही अपने उत्पाद और सेवाएं कई देशों तक पहुंचा चुकी हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भारत अब अंतरराष्ट्रीय तकनीकी प्रतिस्पर्धा में मजबूत स्थिति में है। ये कंपनियां उपग्रह आधारित समाधान, पृथ्वी निगरानी और रणनीतिक तकनीकों के विकास में सक्रिय हैं, जो आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

    यह पूरी पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सोच को आगे बढ़ाती है, जिसमें शिक्षा, अनुसंधान और उद्योग के बीच मजबूत संबंध बनाने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे युवा तैयार करना है जो केवल नौकरी खोजने वाले न होकर, नए समाधान और तकनीक विकसित करने वाले नवप्रवर्तक बनें।

    भारत अब उस दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां उसका तकनीकी और वैज्ञानिक विकास वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा कर सके। उच्च शिक्षा संस्थानों और स्टार्टअप्स का यह संयुक्त प्रयास देश को नवाचार और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है। यह केवल एक शैक्षणिक पहल नहीं बल्कि भारत की भविष्य की तकनीकी शक्ति को मजबूत करने की एक रणनीतिक दिशा है।

  • नई दिल्ली घोषणापत्र: 91 देशों और वैश्विक संगठनों ने किया एआई सहयोग का ऐतिहासिक समर्थन

    नई दिल्ली घोषणापत्र: 91 देशों और वैश्विक संगठनों ने किया एआई सहयोग का ऐतिहासिक समर्थन


    नई दिल्ली, फ़रवरी 2026 । आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ ने दुनिया भर के देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसार, अब तक इस घोषणापत्र में 91 देशों और वैश्विक संगठनों ने समर्थन दिया है।

    पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित ‘एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का समापन इस घोषणापत्र को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणा एआई के उपयोग को आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण और समावेशी प्रौद्योगिकी के लिए वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने का एक संकेतक माना जा रहा है। प्रारंभ में 21 फ़रवरी 2026 तक 88 देशों और संगठनों ने इसका समर्थन किया था। इसके तुरंत बाद बांग्लादेश, कोस्टा रिका और ग्वाटेमाला के शामिल होने से इस संख्या बढ़कर 91 हो गई।

    घोषणापत्र का मूल संदेश ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत से प्रेरित है। इसका मकसद एआई के लाभ को पूरी मानवता तक समान रूप से पहुँचाना और तकनीकी असमानताओं को कम करना है। बयान में यह स्पष्ट किया गया है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और बहु-हितधारक भागीदारी को मजबूत करना, राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान करना और भरोसेमंद तथा सुलभ ढांचे के माध्यम से एआई को आगे बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    घोषणापत्र में आर्थिक परिवर्तन में एआई की भूमिका को विशेष महत्व दिया गया है। ओपन-सोर्स और सुलभ एआई इकोसिस्टम को बढ़ावा देना, ऊर्जा-कुशल एआई अवसंरचना का निर्माण और विज्ञान, शासन तथा सार्वजनिक सेवा वितरण में एआई की भूमिका को मजबूत करना इसमें शामिल हैं। इसके साथ ही वैश्विक सहयोग को मजबूत करना और डिजिटल अवसंरचना तथा किफ़ायती कनेक्टिविटी के माध्यम से एआई की पूरी क्षमता का उपयोग सुनिश्चित करना भी प्रमुख बिंदु हैं।

    ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत के अनुसार, घोषणापत्र एआई संसाधनों की वहनीयता और पहुँच बढ़ाने के महत्व को स्वीकार करता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी देश अपने नागरिकों के लिए एआई का विकास, अपनाना और उपयोग कर सकें। इसके अतिरिक्त, सुरक्षित, भरोसेमंद और मजबूत एआई को बढ़ावा देना समाज और अर्थव्यवस्था के लिए विश्वास निर्माण की बुनियाद के रूप में देखा गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह घोषणापत्र केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक नीति और नैतिकता के स्तर पर भी एआई के संतुलित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देता है। नई दिल्ली घोषणापत्र 91 देशों और संगठनों के हस्ताक्षर से यह संदेश देता है कि एआई अब केवल तकनीकी क्षेत्र की बात नहीं रही, बल्कि यह वैश्विक विकास, सामाजिक कल्याण और समान अवसरों की दिशा में एक साझा प्रयास बन गया है।

  • भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर

    भारत-फ्रांस मिलकर बनाएंगे एवरेस्ट ऊंचाई तक उड़ने वाला हेलीकॉप्टर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया कि भारत और फ्रांस मिलकर विश्व का पहला हेलीकॉप्टर बनाएंगे, जो माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकेगा।

    पीएम मोदी ने इस अवसर पर कहा:

    फ्रांस भारत का सबसे पुराना स्ट्रैटजिक पार्टनर है। दोनों देश अब स्पेशल, ग्लोबल और स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप के रूप में संबंधों को आगे बढ़ा रहे हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य वैश्विक स्थिरता और प्रगति सुनिश्चित करना है। भारत और फ्रांस मिलकर इंडस्ट्री और इनोवेशन में सहयोग करेंगे, और स्टूडेंट और रिसर्च एक्सचेंज को बढ़ावा देंगे।

    हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भी भारत-फ्रांस संबंधों में अभूतपूर्व गति लाएगा। यह परियोजना दोनों देशों के उच्च तकनीक और एविएशन अनुसंधान में सहयोग को भी दर्शाती है और हेलीकॉप्टर उद्योग में नई प्रौद्योगिकी के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

    एवरेस्ट तक उड़ान भरने वाला हेलीकॉप्टर: दुनिया में पहला भारत-फ्रांस तकनीकी और औद्योगिक सहयोग ग्लोबल स्ट्रैटिजिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूती शिक्षा और रिसर्च एक्सचेंज को सुगम बनाना यह घोषणा भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते तकनीकी, औद्योगिक और वैश्विक सहयोग का प्रतीक है।

    तीन दिन का आधिकारिक दौरा
    फ्रांस के राष्ट्रपति 17 से 19 फरवरी तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा दौरा है और मुंबई में उनका पहला आधिकारिक कार्यक्रम है। राष्ट्रपति मैक्रों भारत सरकार के निमंत्रण पर एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन में भाग लेने आए हैं। इस दौरे के दौरान वह 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में भी शामिल होंगे।

    भारत रवाना होने से पहले क्या बोले मैक्रों
    भारत आने से पहले राष्ट्रपति मैक्रों ने एक्स पर लिखा था कि वह मुंबई से नई दिल्ली तक तीन दिन के दौरे पर आ रहे हैं, ताकि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और आगे बढ़ाया जा सके। उन्होंने बताया कि उनके साथ व्यापार, उद्योग, संस्कृति और डिजिटल क्षेत्र से जुड़े प्रमुख लोग भी भारत आ रहे हैं, जो दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। उन्होंने आगे लिखा, साथ मिलकर हम अपने सहयोग को और आगे बढ़ाएंगे। कल मिलते हैं, मेरे प्यारे दोस्त नरेंद्र मोदी।