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  • रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी

    रतन टाटा की भतीजी माया टाटा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, वेस्टसाइड के ग्लोबल विस्तार की कमान संभालेंगी


    नई दिल्ली । टाटा समूह में नई पीढ़ी की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। इसी क्रम में रतन टाटा की भतीजी और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा की बेटी माया टाटा को एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार माया अब ट्रेंट लिमिटेड के प्रमुख रिटेल ब्रांड वेस्टसाइड के ओवरसीज ई कॉमर्स और अंतरराष्ट्रीय मार्केटिंग विस्तार का नेतृत्व करेंगी। यह जिम्मेदारी ऐसे समय दी जा रही है जब कंपनी घरेलू बाजार के साथ विदेशों में भी अपनी मजबूत मौजूदगी बनाने की रणनीति पर तेजी से काम कर रही है।

    माया टाटा इससे पहले टाटा डिजिटल में अहम भूमिका निभा चुकी हैं और डिजिटल रिटेल तथा ऑनलाइन बिजनेस से जुड़ा अनुभव रखती हैं। माना जा रहा है कि अब उनका मुख्य फोकस वेस्टसाइड के ऑनलाइन कारोबार को वैश्विक स्तर पर विस्तार देने और नए बाजारों में ब्रांड की पहुंच बढ़ाने पर रहेगा। कंपनी अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म को मजबूत करने के साथ ऑफलाइन स्टोर नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार कर रही है।

    ट्रेंट लिमिटेड के लिए वेस्टसाइड सबसे अहम ब्रांड माना जाता है और कंपनी की आय का बड़ा हिस्सा इसी से आता है। हाल के वर्षों में ट्रेंट ने अपने विस्तार की रफ्तार तेज की है। कंपनी ने हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात में नया स्टोर शुरू किया है और हर साल करीब 50 नए वेस्टसाइड स्टोर खोलने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी ने 53 नए स्टोर शुरू किए जबकि उसका कुल रिटेल नेटवर्क बढ़कर 321 शहरों में 1286 स्टोर तक पहुंच गया। बीते वित्त वर्ष में कंपनी का कुल राजस्व लगभग 19700 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    माया टाटा ने अपनी पढ़ाई यूनाइटेड किंगडम से की है जहां उन्होंने बिजनेस और फाइनेंस की शिक्षा हासिल की। करियर की शुरुआत उन्होंने टाटा कैपिटल के टाटा अपॉर्च्युनिटीज फंड से की और बाद में टाटा डिजिटल का हिस्सा बनीं। वहां उन्होंने डिजिटल रिटेल और उपभोक्ता कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स पर काम किया।

    माया टाटा लंबे समय तक सार्वजनिक जीवन और मीडिया की सुर्खियों से दूर रही हैं। पहली बार वह उस समय चर्चा में आईं जब अपने पिता नोएल टाटा के साथ जमशेदपुर में टाटा समूह के स्थापना दिवस समारोह में दिखाई दीं। इसके बाद से समूह में उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर लगातार अटकलें लगाई जाती रही हैं।

    माया टाटा का संबंध केवल टाटा परिवार ही नहीं बल्कि मिस्त्री परिवार से भी है। उनकी मां आलू मिस्त्री उद्योगपति पालोनजी मिस्त्री की बेटी हैं। इस तरह माया दो प्रमुख कारोबारी परिवारों की विरासत से जुड़ी हुई हैं। वहीं उनकी दादी सिमोन टाटा ने लैक्मे जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड को नई पहचान दिलाने के साथ ट्रेंट के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

    विशेषज्ञों का मानना है कि माया टाटा की नई जिम्मेदारी केवल एक प्रबंधन बदलाव नहीं बल्कि टाटा समूह की अगली पीढ़ी को वैश्विक नेतृत्व देने की रणनीति का अहम हिस्सा है। आने वाले वर्षों में वेस्टसाइड के अंतरराष्ट्रीय विस्तार और डिजिटल कारोबार को नई दिशा देने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

  • समुद्री कारोबार में अदाणी ग्रुप की बड़ी तैयारी, अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ समझौते से बढ़ेगी ताकत

    समुद्री कारोबार में अदाणी ग्रुप की बड़ी तैयारी, अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ समझौते से बढ़ेगी ताकत


    नई दिल्ली ।
    Adani Ports and Special Economic Zone ने अपने समुद्री कारोबार को वैश्विक स्तर पर मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की समुद्री क्षेत्र से जुड़ी सब्सिडियरी ने अमेरिका की एक प्रमुख इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य अल्ट्रा-डीपवॉटर और सबसी ऑपरेशंस में विस्तार करना है, जिससे कंपनी की अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी और तकनीकी क्षमता दोनों को मजबूती मिलेगी।

    इस साझेदारी के जरिए जटिल समुद्री परियोजनाओं में नई संभावनाएं तलाशने की तैयारी की जा रही है। इसमें अंडरवॉटर कंस्ट्रक्शन, पाइपलाइन इंस्टॉलेशन, निरीक्षण, रखरखाव और गहरे समुद्री क्षेत्रों में तकनीकी संचालन जैसी सेवाओं को और बेहतर बनाया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता कंपनी को यूरोप समेत कई नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद कर सकता है।

    कंपनी लंबे समय से अपने समुद्री और लॉजिस्टिक्स कारोबार को एक बड़े वैश्विक प्लेटफॉर्म के रूप में विकसित करने की रणनीति पर काम कर रही है। इसी योजना के तहत आधुनिक तकनीक और हाई-स्पेसिफिकेशन जहाजों को अपने बेड़े में शामिल किया जा रहा है। हाल ही में कंपनी ने अपना पहला अल्ट्रा-डीपवॉटर जहाज भी शामिल किया है, जिसे अत्याधुनिक समुद्री तकनीकों से लैस बताया जा रहा है।

    कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यह साझेदारी केवल एक कारोबारी विस्तार नहीं, बल्कि भविष्य की समुद्री जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है। आधुनिक जहाजों और डीपवॉटर इंजीनियरिंग विशेषज्ञता के मेल से कंपनी अब अधिक जटिल और बड़े ऑफशोर प्रोजेक्ट्स को संभालने की क्षमता विकसित कर रही है।

    बताया गया है कि नया जहाज गहरे समुद्री क्षेत्रों में काम करने में सक्षम है और इसमें अत्याधुनिक सबसी सिस्टम लगाए गए हैं। इसके जरिए कंपनी कठिन समुद्री परिस्थितियों में भी तकनीकी संचालन को बेहतर तरीके से अंजाम दे सकेगी। जहाज में भारी क्षमता वाली क्रेन, विशेष सपोर्ट सिस्टम और कर्मचारियों के लिए आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जिससे लंबे समय तक समुद्र में संचालन आसान हो सकेगा।

    विशेषज्ञ इस साझेदारी को भारत के समुद्री और ऑफशोर सेक्टर के लिए भी महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर डीपवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में भारतीय कंपनियों का इस क्षेत्र में तेजी से विस्तार करना देश की समुद्री क्षमता को नई पहचान दिला सकता है।

    कंपनी ने आने वाले वर्षों के लिए बड़े लक्ष्य भी तय किए हैं। इसके तहत जहाजों के बेड़े का विस्तार, समुद्री कारोबार से राजस्व बढ़ाना और बड़े स्तर पर पूंजी निवेश शामिल है। माना जा रहा है कि यह रणनीति कंपनी को केवल भारतीय बाजार तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उसे वैश्विक समुद्री कारोबार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने में मदद करेगी।

  • एक पेड़ मां के नाम’ बना वैश्विक अभियान: इजराइल के नेवातिम में रोपे गए 300 पेड़, भारत–इजराइल दोस्ती हुई मजबूत

    एक पेड़ मां के नाम’ बना वैश्विक अभियान: इजराइल के नेवातिम में रोपे गए 300 पेड़, भारत–इजराइल दोस्ती हुई मजबूत

    नई दिल्‍ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी महत्वाकांक्षी पहल ‘एक पेड़ मां के नाम’ अब भारत की सीमाओं को पार कर वैश्विक स्वरूप लेती नजर आ रही है। इसी कड़ी में इजराइल के नेगेव क्षेत्र स्थित मोशव नेवातिम में 300 पेड़ लगाए गए, जिसने न केवल हरियाली का संदेश दिया बल्कि भारत और इजराइल के गहरे और ऐतिहासिक संबंधों को भी नई मजबूती प्रदान की। यह विशेष वृक्षारोपण कार्यक्रम यहूदी पर्व ‘तु बिश्वत’ के अवसर पर आयोजित किया गया, जिसे इजराइल में पेड़ों का नया साल और पर्यावरण जागरूकता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस तरह भारतीय पहल और यहूदी परंपरा का संगम प्रकृति, संस्कृति और साझा मूल्यों का प्रतीक बनकर सामने आया।

    नेवातिम में हरियाली के साथ दोस्ती का उत्सव

    मोशव नेवातिम में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों, बच्चों और समुदाय के सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भारत के दूतावास, केरेन कायेमेट ले इजराइल KKL-JNF और मोशव नेवातिम के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम के तहत कुल 300 पौधे लगाए गए।

    यह पहल केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसे भारत और इजराइल के बीच लोगों से लोगों के रिश्तों को मजबूत करने के एक सशक्त माध्यम के रूप में देखा गया। बच्चों की भागीदारी ने इस संदेश को और भी भावनात्मक बना दिया कि प्रकृति की रक्षा की जिम्मेदारी अगली पीढ़ियों के साथ साझा है।

    भारत–इजराइल की साझा सोच और प्रतिबद्धता

    कार्यक्रम में इजराइल के पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय के महानिदेशक रामी रोजेन, भारत के इजराइल में राजदूत जेपी सिंह और ब्नेई शिमोन क्षेत्रीय परिषद के प्रमुख निर जामिर की उपस्थिति ने आयोजन को और भी खास बना दिया। सभी वक्ताओं ने सतत विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर भारत और इजराइल की साझा प्रतिबद्धता पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज केवल किसी एक देश का मुद्दा नहीं, बल्कि यह एक वैश्विक जिम्मेदारी है। ऐसे में ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी पहलें दुनिया को यह संदेश देती हैं कि विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना संभव है।

    राजदूत जेपी सिंह का भावनात्मक संबोधन

    भारतीय राजदूत जेपी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि ‘तु बिश्वत’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ दोनों ही परंपराएं प्रकृति, समुदाय और भावनात्मक जुड़ाव को केंद्र में रखती हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां जीवन का आधार होती है, उसी तरह पेड़ धरती पर जीवन को संजोए रखते हैं।राजदूत ने विश्वास जताया कि नेवातिम में लगाए गए ये पेड़ आने वाले वर्षों में भारत–इजराइल मित्रता के स्थायी प्रतीक बनेंगे और जब ये पेड़ बड़े होंगे, तो वे आने वाली पीढ़ियों को दोनों देशों के बीच गहरे रिश्तों की कहानी सुनाएंगे।

    भारतीय विरासत से गहराई से जुड़ा नेवातिम

    नेवातिम का भारत से ऐतिहासिक रिश्ता भी इस आयोजन को विशेष बनाता है। इस मोशव की स्थापना भारत के कोचीन क्षेत्र से आए यहूदियों ने की थी। आज भी नेवातिम में भारतीय यहूदी विरासत जीवंत रूप में मौजूद है। यहां स्थित भारतीय यहूदी विरासत केंद्र और कोचिनी शैली का सिनेगॉग इस ऐतिहासिक संबंध की गवाही देते हैं।हाल ही में यहां भारतीय महाराजा जाम साहिब की प्रतिमा का अनावरण भी किया गया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदी शरणार्थियों की मदद के लिए जाने जाते हैं। यह प्रतिमा भारत और यहूदी समुदाय के बीच मानवीय रिश्तों की एक और मजबूत कड़ी है।

    एक पहल, कई संदेश

    कुल मिलाकर, इजराइल के नेवातिम में आयोजित यह वृक्षारोपण कार्यक्रम केवल पेड़ लगाने का आयोजन नहीं था, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक जुड़ाव और भारत–इजराइल मित्रता का एक जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक पेड़ मां के नाम’ पहल अब एक वैश्विक संदेश बनती दिख रही है ऐसा संदेश, जिसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, मां के प्रति भावनात्मक जुड़ाव और भविष्य की पीढ़ियों के लिए जिम्मेदारी एक साथ जुड़ी हुई है।