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  • ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    ग्लोबल संकेतों के बीच बाजार धड़ाम, निफ्टी 1.5% गिरा और 23,500 के अहम स्तर से नीचे फिसला

    नई दिल्ली ।  सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों की संपत्ति को बड़ा नुकसान हुआ। वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू बाजार दबाव में आ गया। कारोबार की शुरुआत भले ही सकारात्मक रही हो, लेकिन दिन के आगे बढ़ने के साथ बाजार में कमजोरी बढ़ती गई और अंतिम घंटे में तेज बिकवाली ने स्थिति को और बिगाड़ दिया।

    कारोबार के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,775.74 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई का निफ्टी 50 भी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत टूटकर 23,547.75 के स्तर पर बंद हुआ। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 76,220.02 का ऊपरी स्तर और 74,589.11 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 24,002.80 के हाई से फिसलकर 23,484.75 के निचले स्तर तक पहुंच गया।

    बाजार में यह गिरावट व्यापक स्तर पर देखने को मिली, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी दबाव में रहे। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.85 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरवार देखें तो तेल एवं गैस, मेटल और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख सेक्टरों में दो प्रतिशत से अधिक की गिरावट ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव बनाया। वहीं ऑटो, फार्मा, हेल्थकेयर और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर भी कमजोर रहे, जबकि आईटी सेक्टर में हल्की बढ़त देखने को मिली।

    निफ्टी 50 के प्रमुख शेयरों में टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, विप्रो, नेस्ले इंडिया और एलएंडटी जैसे स्टॉक्स में मामूली तेजी रही, लेकिन दूसरी ओर पावरग्रिड, इंडिगो, ओएनजीसी, मैक्स हेल्थ, आयशर मोटर्स और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। कुल मिलाकर बाजार में बिकवाली का दबाव इतना अधिक रहा कि एक ही सत्र में निवेशकों को लगभग 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति का नुकसान झेलना पड़ा।

    विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण देखने को मिली। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में हालिया नरमी से कुछ राहत के संकेत मिले हैं, लेकिन मध्य पूर्व में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े घटनाक्रम अभी भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट से आयात बिल और महंगाई पर कुछ सकारात्मक असर की उम्मीद जरूर जताई जा रही है, लेकिन निवेशकों का भरोसा अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है।

    मुद्रा बाजार में रुपये ने डॉलर के मुकाबले हल्की मजबूती दिखाई है, जिससे कुछ हद तक घरेलू बाजार को सहारा मिला है। लेकिन तकनीकी विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के 23,500 के नीचे फिसलने से निकट भविष्य में बाजार पर दबाव बना रह सकता है और इसमें आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    कुल मिलाकर, सप्ताह का अंत भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोर रहा और आने वाले सत्रों में वैश्विक संकेत, कच्चे तेल की चाल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे।

  • शेयर बाजार में बड़ी गिरावट, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में खुले, ग्लोबल टेंशन से निवेशकों में घबराहट

    कमजोर वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ खुला। सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसल गया और निफ्टी में भी तेज गिरावट देखी गई।

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    भारतीय शेयर बाजार सप्ताह के पहले कारोबारी सत्र में भारी दबाव के साथ खुला, जहां वैश्विक संकेतों की कमजोरी का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई और यह 75,000 के स्तर के नीचे फिसल गया। निफ्टी भी कमजोर रुख के साथ खुला और इसमें भी महत्वपूर्ण अंकों की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों के बीच सतर्कता और चिंता का माहौल बन गया।

    सुबह के समय बाजार खुलते ही चौतरफा बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिनमें ऑटो, रियल्टी, बैंकिंग, मीडिया और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे सेक्टर शामिल थे। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह साफ हुआ कि दबाव केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापक स्तर पर बाजार प्रभावित हुआ है।

    विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है, जो आयात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय माना जाता है। इसके साथ ही अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी बाजारों में गिरावट ने भी निवेशकों के भरोसे को कमजोर किया है।

    एशियाई बाजारों में भी मिलाजुला रुख देखने को मिला, जहां कई प्रमुख बाजार लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा और निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए बिकवाली का रास्ता चुना। इसके साथ ही विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया, जहां लगातार बिकवाली का रुझान देखने को मिला।

    सेंसेक्स और निफ्टी में आई इस गिरावट ने यह संकेत दिया है कि फिलहाल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और वैश्विक घटनाक्रम आने वाले दिनों में भी निवेश धारणा को प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थिति स्थिर नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    ग्लोबल सपोर्ट से बाजार में तेजी का माहौल: बैंकिंग सेक्टर की मजबूती से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

    नई दिल्ली।
    बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार की शुरुआत मजबूत रुख के साथ हुई और पूरे सत्र में सकारात्मक माहौल बना रहा। वैश्विक बाजारों से मिले अच्छे संकेतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला, जिससे निवेशकों के बीच खरीदारी का रुझान बढ़ गया। शुरुआती कारोबार में ही प्रमुख सूचकांकों में तेजी दर्ज की गई और बाजार ने मजबूती के साथ अपनी दिशा तय की।

    बाजार में सबसे ज्यादा असर बैंकिंग सेक्टर का देखने को मिला, जहां लगातार खरीदारी ने पूरे बाजार को सहारा दिया। बैंकिंग शेयरों में आई इस तेजी ने न केवल प्रमुख सूचकांकों को ऊपर उठाया, बल्कि निवेशकों के भरोसे को भी मजबूत किया। वित्तीय सेक्टर की मजबूती के कारण बाजार में स्थिरता बनी रही और तेजी का रुझान दिनभर कायम रहा।

    इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। छोटे और मध्यम कंपनियों के शेयरों में आई तेजी ने यह संकेत दिया कि निवेशक केवल बड़े स्टॉक्स तक सीमित नहीं हैं, बल्कि व्यापक बाजार में भी अवसर तलाश रहे हैं। ऑटो, आईटी और मेटल सेक्टर्स में भी सकारात्मक रुझान बना रहा, जिससे बाजार की गति और मजबूत हुई।

    हालांकि कुछ सेक्टर्स में हल्का दबाव भी देखने को मिला, जहां एफएमसीजी और एनर्जी सेक्टर में मामूली गिरावट दर्ज की गई। लेकिन इन कमजोरियों का असर पूरे बाजार पर ज्यादा नहीं पड़ा और कुल मिलाकर बाजार हरे निशान में ही बना रहा। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बाजार में खरीदारी का दबाव मजबूत बना हुआ है।

    वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में सकारात्मक माहौल रहा, जिसका लाभ भारतीय बाजार को मिला। अंतरराष्ट्रीय संकेतों में सुधार और कुछ महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के चलते निवेशकों के बीच जोखिम लेने की भावना बढ़ी, जिसका सीधा असर इक्विटी बाजार पर दिखाई दिया। एशियाई बाजारों में भी तेजी का रुख रहा, जिससे घरेलू निवेशकों का मनोबल और मजबूत हुआ।

    निवेश प्रवाह के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली देखने को मिली, जबकि घरेलू निवेशकों ने बाजार में खरीदारी जारी रखी। घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को संतुलन और मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। इसी वजह से विदेशी बिकवाली के बावजूद बाजार में गिरावट नहीं आई और तेजी का रुख बना रहा।

    कुल मिलाकर देखा जाए तो भारतीय शेयर बाजार इस समय सकारात्मक चरण में दिखाई दे रहा है, जहां वैश्विक संकेत, मजबूत सेक्टोरल प्रदर्शन और घरेलू निवेशकों की सक्रियता मिलकर बाजार को सपोर्ट कर रहे हैं। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम और आर्थिक संकेतों पर निर्भर करेगी, लेकिन फिलहाल रुझान मजबूत और स्थिर बना हुआ है।

  • वैश्विक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी 2% लुढ़के

    वैश्विक तनावों के बीच लाल निशान में बंद हुआ शेयर बाजार, सेंसेक्स और निफ्टी 2% लुढ़के


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों और अमेरिकी-ईरान युद्ध में बढ़ते तनाव के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन लाल निशान में बंद हुआ। प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी50 दोनों में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।

    सेंसेक्स और निफ्टी की स्थिति
    सेंसेक्स: दिन के अंत में 1,690.23 अंक यानी 2.25% की गिरावट के साथ 73,583.22 पर बंद हुआ।
    निफ्टी50: 486.85 अंक यानी 2.09% की गिरावट के साथ 22,819.60 पर बंद हुआ।

    दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स ने 74,883.79 पर खुलकर 1,736 अंक यानी 2.30% से अधिक गिरकर 73,534.41 के निचले स्तर को छुआ। वहीं निफ्टी50 23,173.55 से शुरू होकर 501 अंक यानी 2.15% गिरकर 22,804.55 तक पहुंच गया।

    व्यापक बाजार और सेक्टर प्रदर्शन
    निफ्टी मिडकैप: 2.23% की गिरावट
    निफ्टी स्मॉलकैप: 1.74% की गिरावट

    सबसे अधिक प्रभावित सेक्टर:

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक (PSU) – 3.86% गिरावट
    निफ्टी रियल्टी – 3.17%
    निफ्टी ऑटो – 2.82%
    निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज – 2.69%
    निफ्टी प्राइवेट बैंक – 2.01%

    सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला सेक्टर:

    निफ्टी आईटी – केवल 0.44% की गिरावट
    शेयरों का दिनभर का प्रदर्शन

    सकारात्मक प्रदर्शन: केवल 6 कंपनियों में तेजी

    ओएनजीसी: +4.03%
    विप्रो: +1.22%
    भारती एयरटेल: +0.82%
    टीसीएस: +0.42%
    कोल इंडिया: +0.32%
    पावरग्रिड: +0.24%

    सबसे अधिक नुकसान:

    श्रीराम फाइनेंस: -5.54%
    टीएमपीवी: -4.92%
    रिलायंस: -4.61%
    इंडिगो: -4.48%
    बजाज फाइनेंस: -4.11%
    कुल बाजार पूंजीकरण और निवेशकों को नुकसान

    दिन के कारोबार में निवेशकों को लगभग 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 431 लाख करोड़ रुपए से घटकर 422 लाख करोड़ रुपए रह गया।

  • शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके

    शेयर बाजार में जोरदार उछाल सेंसेक्स 1500 अंक उछला बैंक और डिफेंस स्टॉक्स चमके


    नई दिल्ली:मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूत शुरुआत की और निवेशकों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिला। बाजार खुलते ही प्रमुख सूचकांकों में जबरदस्त उछाल दर्ज किया गया।

    बेंचमार्क इंडेक्स SENSEX 1516.08 अंक यानी 2.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74212.47 के स्तर पर खुला। वहीं NIFTY 50 365.80 अंक यानी 1.62 प्रतिशत की तेजी के साथ 22878.45 पर पहुंच गया। इस तेजी ने पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया।

    शुरुआती कारोबार में लगभग सभी सेक्टर हरे निशान में नजर आए और चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी इंडिया डिफेंस, निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसे सेक्टर टॉप गेनर्स की लिस्ट में शामिल रहे।

    लार्जकैप के साथ साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मजबूती देखने को मिली। NIFTY Midcap 100 करीब 772 अंक यानी 1.47 प्रतिशत की बढ़त के साथ 53490 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं NIFTY Smallcap 100 भी 219 अंक यानी 1.45 प्रतिशत की तेजी के साथ 15318 पर कारोबार करता नजर आया। इससे साफ है कि बाजार में केवल बड़े शेयर ही नहीं बल्कि छोटे और मिड साइज कंपनियों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।

    ब्रोकरेज हाउस चॉइस ब्रोकिंग के टेक्निकल एनालिस्ट आकाश शाह के अनुसार निफ्टी फिलहाल अपने शॉर्ट टर्म सपोर्ट जोन से नीचे ट्रेड कर रहा है जिससे बाजार का रुझान अभी कमजोर बना हुआ है। उन्होंने बताया कि 22650 से 22700 के स्तर पर मजबूत रुकावट देखी जा रही है जबकि 22300 से 22400 के बीच सपोर्ट जोन है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले समय में बाजार में गिरावट और गहरी हो सकती है।

    सेंसेक्स पैक में कई बड़े स्टॉक्स ने मजबूती दिखाई। एशियन पेंट्स, इंडिगो, ट्रेंट, टाइटन, बीईएल, अल्ट्राटेक सीमेंट, एलएंडटी, अदाणी पोर्ट्स, टेक महिंद्रा, कोटक महिंद्रा, एचडीएफसी बैंक, टाटा स्टील, बजाज फिनसर्व, मारुति सुजुकी और एसबीआई जैसे शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। केवल पावर ग्रिड एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो लाल निशान में ट्रेड कर रहा था।

    ग्लोबल मार्केट की बात करें तो एशियाई बाजारों में भी तेजी देखने को मिली। टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक और सोल जैसे प्रमुख बाजार हरे निशान में खुले। वहीं अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे जहां डाओ और नैस्डैक इंडेक्स में करीब 1.38 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई।

    बाजार में आई इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत और वैश्विक स्तर पर बेहतर निवेश माहौल को माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार अमेरिकी पक्ष द्वारा ईरान के पावर प्लांट्स पर संभावित हमले को फिलहाल टालने के फैसले से तनाव में कमी आई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और बाजार में खरीदारी तेज हुई है।

  • ईरान-इजरायल टकराव का तेल बाजार पर पड़ा असर, कच्चा तेल 80 डॉलर के पार

    ईरान-इजरायल टकराव का तेल बाजार पर पड़ा असर, कच्चा तेल 80 डॉलर के पार


    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिनकी जद में दुबई और अबू धाबी जैसे प्रमुख शहरों के साथ कतर, बहरीन, सऊदी अरब और ओमान भी आए। इस घटनाक्रम ने ऊर्जा आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ा दी हैं और निवेशकों में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।

    कीमतों में तेज उछाल
    तनाव बढ़ते ही कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी दर्ज की गई। वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड, जो शुक्रवार को 72 डॉलर प्रति बैरल के सात महीने के उच्च स्तर पर बंद हुआ था और 2026 के पहले दो महीनों में करीब 19% चढ़ चुका था, अब 12% की छलांग लगाकर 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह स्तर पिछले साल जून के बाद पहली बार देखा गया है।

    वहीं अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट में भी करीब 8% की तेजी आई और यह 70 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर निकल गया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तनाव लंबा खिंचता है तो कीमतों में और अस्थिरता देखी जा सकती है।

    ईरान की उत्पादन क्षमता और वैश्विक सप्लाई

    भले ही क्षेत्रीय राजनीति में ईरान की स्थिति समय के साथ बदली हो, लेकिन ऊर्जा बाजार में उसकी भूमिका अब भी अहम है। ओपेक+ गठबंधन में वह चौथा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले इस समूह के कुल उत्पादन में ईरान की हिस्सेदारी लगभग 12% है। ईरान प्रतिदिन करीब 3.3 मिलियन बैरल तेल उत्पादन की क्षमता रखता है, जो वैश्विक उत्पादन का लगभग 3% है। उसकी सबसे बड़ी रिफाइनरी की क्षमता लगभग 5 लाख बैरल प्रतिदिन बताई जाती है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी निगाहें

    संकट का सबसे संवेदनशील पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। इस समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% और एलएनजी की बड़ी खेप गुजरती है। यही कारण है कि इसे वैश्विक ऊर्जा सप्लाई का ‘चोक पॉइंट’ माना जाता है। ईरान का लगभग 90% तेल निर्यात भी इसी रास्ते चीन तक पहुंचता है।

    हालांकि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने एक इंटरव्यू में स्पष्ट किया है कि जलडमरूमध्य को बंद करने का कोई इरादा नहीं है। फिर भी बाजार में आशंकाएं बनी हुई हैं और समुद्री यातायात को लेकर विरोधाभासी रिपोर्टें सामने आ रही हैं।

    100 डॉलर तक पहुंचने की आशंका

    विश्लेषकों, जिनमें बार्कलेज जैसी वित्तीय संस्थाएं शामिल हैं, का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहता है तो तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि यदि हालात जल्द सामान्य हो जाते हैं तो मौजूदा ऊंचे स्तर टिकाऊ नहीं रहेंगे।

    इसी बीच ओपेक+ ने अपनी मासिक बैठक में अप्रैल से उत्पादन बढ़ोतरी की रफ्तार तेज करने पर सहमति जताई है। समूह के प्रमुख सदस्य सऊदी अरब और रूस, जिन्होंने पहली तिमाही में उत्पादन वृद्धि रोकी थी, अब अप्रैल से प्रतिदिन 2,06,000 बैरल अतिरिक्त तेल बाजार में उतारेंगे। यह बढ़ोतरी पिछले दिसंबर में घोषित 1,37,000 बैरल प्रतिदिन की वृद्धि से करीब डेढ़ गुना ज्यादा है।

    मौजूदा हालात में तेल बाजार पूरी तरह भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर नजर आ रहा है। यदि तनाव और बढ़ता है तो कीमतों में और उछाल संभव है, जबकि कूटनीतिक समाधान की स्थिति में बाजार को कुछ राहत मिल सकती है।