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  • वैश्विक मजबूती का असर: भारतीय शेयर बाजार की दमदार शुरुआत, सेंसेक्स 75,500 के पार, निफ्टी में भी तेज उछाल

    वैश्विक मजबूती का असर: भारतीय शेयर बाजार की दमदार शुरुआत, सेंसेक्स 75,500 के पार, निफ्टी में भी तेज उछाल


    नई दिल्ली । वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को सकारात्मक रुख के साथ कारोबार की शुरुआत की। शुरुआती सत्र में निवेशकों का भरोसा मजबूत नजर आया और प्रमुख सूचकांक हरे निशान में खुले। सेंसेक्स में तेजी के साथ उछाल देखा गया, जबकि निफ्टी ने भी मजबूती के साथ कारोबार शुरू किया। बाजार की यह चाल वैश्विक आर्थिक संकेतों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बनी सकारात्मक स्थिति से प्रभावित मानी जा रही है।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में तेज बढ़त दर्ज की गई और यह 75 हजार के ऊपर कारोबार करता नजर आया। निफ्टी ने भी मजबूत शुरुआत करते हुए 23 हजार के ऊपर अपना स्तर बनाए रखा। बाजार में खासतौर पर डिफेंस सेक्टर के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिसने पूरे बाजार के मूड को सकारात्मक बनाए रखा। इसके अलावा पीएसयू बैंक, रियल्टी, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंजप्शन और प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में भी तेजी का रुख देखा गया। लगभग सभी प्रमुख सेक्टर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ ट्रेड करते नजर आए, जिससे बाजार में व्यापक स्तर पर मजबूती का संकेत मिला।

    मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी हुई दिखाई दी। दोनों सेगमेंट में तेजी के साथ खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह संकेत मिला कि सिर्फ बड़े शेयर ही नहीं बल्कि मध्यम और छोटे शेयरों में भी निवेशकों का भरोसा कायम है। इससे पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना रहा और निवेश गतिविधियां बढ़ीं।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में कई बड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में तेजी देखी गई। बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटो और कंज्यूमर सेक्टर से जुड़े शेयरों ने बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। वहीं कुछ आईटी और फार्मा शेयरों में हल्की गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन इसका प्रभाव व्यापक बाजार पर सीमित रहा।

    एशियाई बाजारों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां टोक्यो, शंघाई, हांगकांग और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार करते नजर आए। दूसरी ओर कुछ बाजारों में हल्की कमजोरी भी देखने को मिली, लेकिन कुल मिलाकर वैश्विक स्तर पर निवेशकों का मूड सकारात्मक बना रहा। अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में अच्छी तेजी दर्ज की गई, जिसने एशियाई और भारतीय बाजारों को अतिरिक्त समर्थन दिया।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार वैश्विक संकेतों के साथ-साथ कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और डॉलर में कमजोरी भी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक कारक साबित हुए हैं। इन सभी कारणों ने मिलकर निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बाजार में खरीदारी को प्रोत्साहित किया।

    हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का दबाव बना हुआ है, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत खरीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है। लगातार निवेश के चलते बाजार में संतुलन बना हुआ है और तेजी का रुझान कायम है। कुल मिलाकर, मौजूदा परिस्थितियों में भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत वैश्विक संकेतों का सकारात्मक लाभ उठाते हुए दिन की शुरुआत मजबूती के साथ की है।

  • अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल

    अमेरिकी नाकाबंदी से रुका निर्यात…. ईरान पुराने और कबाड़ टैंकों में स्टोर कर रहा तेल


    तेहरान।
    ईरान (Iran) अपने तेल (Oil) को इकट्ठा करने के लिए नए तरीके खोजने में जुटा है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी (American naval blockade) ने उसके निर्यात (Export) को लगभग रोक दिया है। ईरान पूरी तरह उत्पादन बंद करना नहीं चाहता। ऐसे में वह पुराने और कबाड़ टैंकों में बिना बिके तेल को भरने में जुटा है। ईरान के भीतर तेल का भंडार बढ़ने के साथ ही वह अब जंक स्टोरेज (कबाड़ भंडारण) के रूप में जाने जाने वाले पुराने स्थलों को फिर से चालू कर रहा है। वह कामचलाऊ कंटेनरों का उपयोग कर रहा है।

    इसके साथ ही रेल के जरिये चीन को कच्चा तेल भेजने की कोशिश भी कर रहा है। वह किसी टैंक, जहाज, कामचलाऊ जगह या फिर उसे जमीन के नीचे ही छोड़ने पर काम कर रहा है। ये असामान्य कदम बुनियादी ढांचे के संकट को टालने और हॉर्मुज को लेकर जारी गतिरोध में वाशिंगटन के दबाव को कम करने के लिए उठाए जा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच यह युद्ध अब इस बात की होड़ बन गया कि पहले कौन झुकता है।


    रेल से भेजने की कोशिश काफी महंगी

    ईरान के तेल-निर्यातक संघ के प्रवक्ता हामिद हुसैनी के अनुसार, ईरान अब रेल के जरिये चीन को तेल भेजने की कोशिश कर रहा है। रेल मार्ग तेहरान को चीन के यीवू और शीआन शहरों से जोड़ता है। हालांकि, यह समुद्री मार्ग की तुलना में बहुत महंगा है।

    तेल न बिक पाना और उसे इकट्ठा करना देश की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव डालता है। इससे वह देश बातचीत की मेज पर आने या युद्ध की स्थिति में झुकने को मजबूर हो सकता है।


    तेल रखने की जगह जल्द खत्म होगी

    रिपोर्ट के अनुसार, यदि नाकाबंदी जारी रही तो मई के मध्य तक ईरान का उत्पादन मौजूदा स्तर से आधे से भी कम (12 से 13 लाख बैरल रोज) गिर सकता है। ईरान के पास तेल रखने की जगह दो हफ्ते से भी कम समय में खत्म हो सकती है। ईरान के पास जमीन पर मौजूद तेल का भंडार नाकाबंदी के दौरान 46 लाख बैरल बढ़कर अब लगभग 4.9 करोड़ बैरल हो गया।

    1. सबसे पहले तेल को बड़े-बड़े जमीनी टैंकों में भरा जाता है। जब ये टैंक भर जाते हैं, तो वे पुराने या कबाड़ टैंकों का भी इस्तेमाल करते हैं।

    2. जब जमीन पर जगह खत्म हो जाती है, तो तेल को समुद्री जहाजों में भरकर समुद्र में ही खड़ा कर दिया जाता है। इसे फ्लोटिंग स्टोरेज कहते हैं।

    3. अधिक तेल को निकालने के लिए देश भारी छूट पर तेल बेचने लगते हैं ताकि खरीदार आकर्षित हों।

    4. अगर भंडारण की जगह बिल्कुल खत्म होने वाली हो, तो तेल के कुओं को बंद करना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सबसे आखिरी और जोखिम भरा रास्ता है। क्योंकि, कुओंको दोबारा शुरू करना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा होता है।

  • मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान

    मजबूत वैश्विक संकेतों से शेयर बाजार में तेजी, डिफेंस और ऑटो सेक्टर ने संभाली कमान


    नई दिल्ली। बुधवार सुबह 9:18 बजे भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। सेंसेक्स 306 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,193 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 88 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की तेजी के साथ 24,085 पर कारोबार करता नजर आया। वैश्विक संकेतों में सुधार और निवेशकों की मजबूत धारणा के चलते बाजार में शुरुआती खरीदारी हावी रही।

    डिफेंस और ऑटो सेक्टर बने बाजार के स्टार परफॉर्मर

    शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा तेजी डिफेंस और ऑटो सेक्टर में देखने को मिली। निफ्टी इंडिया डिफेंस और निफ्टी ऑटो इंडेक्स टॉप गेनर्स में रहे। इसके अलावा इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, FMCG, एनर्जी और फार्मा सेक्टर भी मजबूती के साथ हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि दूसरी ओर मेटल, फाइनेंशियल सर्विसेज और पीएसई सेक्टर में हल्की गिरावट देखने को मिली, जिससे बाजार में सेक्टोरल मिक्स ट्रेंड बना रहा।

    मिडकैप और स्मॉलकैप में भी खरीदारी जारी

    बाजार में सिर्फ लार्जकैप ही नहीं बल्कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेजी देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 149 अंक यानी 0.83 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,125 पर पहुंच गया।
    निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 208 अंक यानी 0.35 प्रतिशत की तेजी के साथ 60,628 पर कारोबार कर रहा था। इससे साफ है कि व्यापक बाजार में भी निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

    सेंसेक्स के प्रमुख शेयरों में मारुति सुजुकी, आईटीसी, टेक महिंद्रा, भारती एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, इन्फोसिस, बीईएल, अदाणी पोर्ट्स, एचयूएल, टीसीएस और एसबीआई जैसे शेयरों में मजबूती दर्ज की गई। वहीं टाटा स्टील, एनटीपीसी, आईसीआईसीआई बैंक, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक में हल्का दबाव देखने को मिला।

    वैश्विक बाजारों और तेल की कीमतों का असर

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार यूएई के ओपेक से बाहर होने के बाद कच्चे तेल की कीमतों पर थोड़ा दबाव देखने को मिला है, हालांकि अमेरिका-ईरान तनाव के कारण तेल अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है, जिसका फैसला आज रात आने वाला है। यह निर्णय वैश्विक बाजारों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है।

    एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख

    एशियाई बाजारों में भी बुधवार को मजबूती देखने को मिली। शंघाई, हांगकांग, सोल, जकार्ता और बैंकॉक के बाजार हरे निशान में कारोबार कर रहे थे। हालांकि जापानी बाजार राष्ट्रीय अवकाश के कारण बंद रहे।

    अमेरिकी बाजारों में कमजोरी

    इसके विपरीत, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। डाओ जोन्स 0.05 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे वैश्विक बाजारों में मिश्रित संकेत देखने को मिले।

    कुल मिलाकर वैश्विक संकेतों और घरेलू खरीदारी के दम पर भारतीय शेयर बाजार ने मजबूत शुरुआत की है। हालांकि निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड के फैसले पर है, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय कर सकता है।

  • US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….

    US-ईरान के बीच बातचीत की उम्मीद से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के दामों में नरमी….


    तेहरान।
    यूएस-इजरायल और ईरान (US-Israel and Iran) के बीच चल रही जंग में एक बार फ‍िर से समझौते की कोश‍िश की जा रही है. शांत‍ि की उम्‍मीद में शुक्रवार को 110 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंचने वाले क्रूड ऑयल के दाम (Crude Oil Price) में ग‍िरावट देखी जा रही है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Iranian Foreign Minister Abbas Araghchi) के उच्‍च स्‍तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ इस्लामाबाद पहुंचने के बाद ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की उम्‍मीद की जा रही है. इससे बाजार को मजबूती म‍िली है. दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का यह दूसरा दौर हो सकता है. हालांकि, ईरान ने शांति वार्ता में सीधा ह‍िस्‍सा लेने से साफ मना क‍िया है।

    शुक्रवार के कारोबारी सत्र के दौरान क्रूड ऑयल का दाम चढ़कर 106 डॉलर प्रत‍ि बैरल के करीब पहुंच गया था. लेक‍िन शाम होते-होते ईरान के प्रत‍िन‍िध‍िमंडल के पाक‍िस्‍तान पहुंचने के बाद इसमें ग‍िरावट देखी गई. WTI क्रूड का दाम ग‍िरकर 94.40 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. ब्रेंट क्रूड के दाम में भी नरमी देखी जा रही है और यह 105 डॉलर प्रत‍ि बैरल पर पहुंच गया. 28 फरवरी को इजरायल की तरफ से ईरान पर हमला क‍िये जाने के बाद क्रूड के दाम में उठा-पटक बनी हुई है।


    तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी

    होर्मुज बंद होने से तेल की ग्‍लोबल लेवल पर सप्‍लाई चेन टूट चुकी है. इससे आने वाले समय में भी तेल की कीमत में उठा-पटक बनी रहेगी. इससे पहले गुरुवार को भी तेल की कीमत 3% से ज्यादा बढ़ गई थीं. क्रूड ऑयल के दाम में प‍िछले पांच द‍िन से तेजी देखी जा रही थी. अगर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत नहीं बनी तो लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है और तेल के दाम और ज्यादा बढ़ सकते हैं. कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है क‍ि यद‍ि स्थिति और बिगड़ी तो दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं।


    भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम

    सोशल मीडिया पर जारी क‍िये जा रहे दावों को खारिज करते हुए पेट्रोलियम म‍िन‍िस्‍टर ने कहा है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम में इजाफा करने का फिलहाल कोई प्‍लान नहीं है. मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा गया कि फिलहाल इसे लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने उन रिपोर्ट्स को फेक करार दिया, जिसमें दावे किए जा रहे हैं कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद तेल कंपनियां पेट्रोल-डीजल के दाम में 25 से 28 रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है.

    आज द‍िल्‍ली में पेट्रोल-डीजल के रेट

    – दिल्ली में पेट्रोल ₹94.77 और डीजल ₹87.71

    – मुंबईमें पेट्रोल ₹103.54, डीजल ₹90.01

    – कोलकाता में पेट्रोल ₹105.45, डीजल ₹91.81

    – चेन्नई में पेट्रोल ₹100.84, डीजल ₹92.38

  • अमेरिका ग्रीनलैंड विवाद से निवेशकों में चिंता बाजार में उतार चढ़ाव जारी रहने के संकेत

    अमेरिका ग्रीनलैंड विवाद से निवेशकों में चिंता बाजार में उतार चढ़ाव जारी रहने के संकेत


    नई दिल्ली।ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की प्रस्तावित योजना के कारण वैश्विक बाजारों में निवेशकों की चिंता बनी हुई है एक रिपोर्ट के अनुसार इस मुद्दे से जुड़े कई अनिश्चित पहलुओं के चलते निकट भविष्य में बाजार में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है निवेशक फिलहाल अमेरिका और अन्य देशों के बीच होने वाली बातचीत के नतीजों का इंतजार कर रहे हैंबैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में कहा गया है कि निवेशक इस प्रस्ताव से जुड़ी और जानकारी मिलने तक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं रिपोर्ट के अनुसार बातचीत की दिशा और उसमें आने वाली संभावित बाधाएं यह तय करेंगी कि बाजार में स्थिरता आएगी या अस्थिरता बनी रहेगी

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इस सौदे से जुड़े कुछ अहम मुद्दे ऐसे हैं जिनके कारण आगे चलकर बातचीत पटरी से उतर सकती है इसी वजह से निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है और बाजार में लगातार उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता हैविशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीनलैंड को लेकर प्रस्तावित व्यवस्था अमेरिका और डेनमार्क के बीच वर्ष 1951 में हुए सुरक्षा समझौते का एक विस्तारित रूप हो सकती है हालांकि इसके स्वरूप और शर्तों को लेकर अभी तक पूरी तस्वीर साफ नहीं है

    बैंक ऑफ बड़ौदा की अर्थशास्त्री अदिति गुप्ता के अनुसार आगामी बातचीत में ग्रीनलैंड में अमेरिकी सेना की मौजूदगी वहां के खनिज संसाधनों के उपयोग और ग्रीनलैंड की संप्रभुता जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है ये सभी पहलू भू राजनीतिक जोखिम को और बढ़ा सकते हैंरिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में अमेरिका की रुचि को राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर देखा है वहीं ग्रीनलैंड में मौजूद तेल गैस और दुर्लभ खनिज तत्व भी अमेरिका के लिए आकर्षण का बड़ा कारण हैं

    हालांकि अमेरिका और नाटो के बीच एक फ्रेमवर्क समझौते की घोषणा से निवेशकों को कुछ राहत जरूर मिली है लेकिन इस समझौते की शर्तें और दायरा अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है जिससे अनिश्चितता बनी हुई हैग्रीनलैंड को लेकर बयानबाजी तेज होने के बाद भू राजनीतिक तनाव और बढ़ गया और इसका असर सीधे बाजारों पर पड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ग्रीनलैंड को अपने में शामिल करने की बात कहने और विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर आर्थिक कदम उठाने की धमकी से हालात और बिगड़ गए

    इसके जवाब में फ्रांस जर्मनी और स्वीडन समेत कई यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य तैनाती बढ़ा दी जिससे तनाव और गहरा गयाडोनाल्ड ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि फरवरी 2026 से कई यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर अतिरिक्त टैक्स लगाया जाएगा जो जून 2026 से और बढ़ सकता था हालांकि बाद में दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान उन्होंने टैरिफ लगाने की धमकी से पीछे हटने के संकेत दिए जिससे बाजारों को कुछ राहत मिली

  • गुड न्यूज… वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था

    गुड न्यूज… वैश्विक बाजारों में मची हलचल के बीच तेजी से बढ़ेगी भारतीय अर्थव्यवस्था


    वाशिंगटन ।
    पूरी दुनिया (Whole World) के बाजारों में इस वक्त हलचल मची हुई है. कहीं वॉरकी वजह से टेंशन के हालात हैं तो कहीं ट्रेड को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. लेकिन इन सबके बीच भारत (India) के लिए एक साथ दो ऐसी खबरें आई हैं, जो बताती हैं कि आने वाला समय हमारा है. संयुक्त राष्ट्र (United Nations-UN) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India-SBI) दोनों ने अपनी ताजा रिपोर्ट्स में माना है कि साल 2026 में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। जब दुनिया के बाकी देश अपनी रफ्तार बचाने के लिए संघर्ष कर रहे होंगे, तब भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से दौड़ रहा होगा।

    संयुक्त राष्ट्र की ‘विश्व आर्थिक स्थिति और संभावनाएं 2026’ रिपोर्ट में भारत को लेकर बहुत पॉजिटिव बात कही गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2026 में जब पूरी दुनिया की विकास दर महज 2.7 प्रतिशत रहने का अनुमान है, तब भारत 6.6 प्रतिशत की दमदार रफ्तार से आगे बढ़ेगा। यूएन का कहना है कि भारत की घरेलू मांग इतनी मजबूत है कि दुनिया में होने वाली किसी भी उथल-पुथल का इस पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. भले ही वैश्विक स्तर पर व्यापार करने के तरीके बदल रहे हों, लेकिन भारत अपनी मजबूती बनाए रखने में कामयाब रहेगा।

    यूएन के बाद देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई (SBI) ने तो भारत की तरक्की को लेकर और भी बड़ा अनुमान लगाया है. एसबीआई की रिपोर्ट कहती है कि भारत की जीडीपी साल 2025-26 में 7.5 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ सकती है. यह सरकार और आरबीआई के अनुमानों से भी थोड़ा ज्यादा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत का काम-काज और टैक्स कलेक्शन इतना अच्छा है कि घाटे की चिंता कम है. एसबीआई का मानना है कि भारत की आर्थिक नींव इतनी मजबूत हो चुकी है कि वह हर चुनौती को पार करने के लिए तैयार है.


    दुनिया में मंदी का खतरा, भारत क्यों है सुरक्षित?

    संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि दुनिया की अर्थव्यवस्था लंबे समय तक सुस्त रह सकती है. अमेरिका जैसे देशों में व्यापार नियमों में बदलाव और भू-राजनीतिक तनाव ने माहौल को थोड़ा खराब किया है. महंगाई के कारण दुनिया भर के परिवारों का बजट बिगड़ा हुआ है. लेकिन भारत के मामले में कहानी अलग है. भारत एकमात्र ऐसी प्रमुख अर्थव्यवस्था होगी जो 6 प्रतिशत से ज्यादा की ग्रोथ रेट हासिल करेगी. भारत सरकार का भी अनुमान यही कहता है कि चालू वित्त वर्ष में जीडीपी 7.4 प्रतिशत की रफ्तार से आगे बढ़ेगी.


    आम आदमी पर क्या होगा असर?

    जब देश की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो इसका सीधा असर आम लोगों के जीवन पर पड़ता है. इससे नए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं और लोगों की आमदनी बढ़ने का रास्ता साफ होता है. भले ही दुनिया भर में सप्लाई चेन बिगड़ने का खतरा हो या महंगाई का दबाव हो, भारत की मजबूत ग्रोथ यह भरोसा दिलाती है कि हमारा बाजार सुरक्षित है. सरकार के नए आंकड़ों से भी साफ है कि भारत आत्मनिर्भर बनने की दिशा में सही कदम बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले समय में अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.