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  • होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, दुनिया को मिल सकती है राहत; 30 दिन में सामान्य हो सकती है जहाजों की आवाजाही

    होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, दुनिया को मिल सकती है राहत; 30 दिन में सामान्य हो सकती है जहाजों की आवाजाही




    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच दुनिया के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। ईरान ने
    संकेत दिए हैं कि रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य जल्द फिर से सामान्य रूप से खुल सकता है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले 30 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही युद्ध से पहले के स्तर पर लौट सकती है। इससे वैश्विक तेल और गैस संकट कम होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    ईरान की समाचार एजेंसी तस्नीम ने वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में सकारात्मक प्रगति हुई है। यदि बातचीत सफल रहती है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल टैंकर और कारोबारी जहाज पहले की तरह गुजरने लगेंगे। यही समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक माना जाता है, जहां से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल और गैस दुनिया तक पहुंचाता है।

    28 फरवरी को ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद इस क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर कड़ी निगरानी और कई स्तरों पर रोक लगा दी थी। अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों और क्षेत्रीय सैन्य तनाव के कारण इस समुद्री रूट पर ट्रैफिक लगभग ठप हो गया था। युद्ध से पहले यहां से रोजाना 125 से 140 जहाज गुजरते थे, लेकिन संघर्ष के बाद संख्या में भारी गिरावट आ गई।

    इसका असर दुनिया के कई देशों, खासकर भारत और एशियाई देशों पर पड़ा, जो खाड़ी देशों से तेल और गैस आयात पर निर्भर हैं। ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखने को मिला और कई देशों में ईंधन संकट की आशंका बढ़ गई।

    भारत दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने भी संकेत दिए कि ईरान के साथ बातचीत में बड़ी सफलता मिल सकती है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि अमेरिका और ईरान समझौते के बेहद करीब हैं। उनके मुताबिक, यदि यह डील फाइनल होती है तो युद्ध खत्म होने के साथ होर्मुज स्ट्रेट भी पूरी तरह खुल जाएगा।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान इस पूरे समझौते में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। हाल के दिनों में पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल लगातार ईरान के दौरे कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना प्रमुख असीम मुनीर की तेहरान यात्रा के बाद पाकिस्तान ने कहा कि वार्ता में “उत्साहजनक प्रगति” हुई है और अंतिम सहमति की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।

    हालांकि ईरान ने अभी तक अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी तरह की रियायत देने की पुष्टि नहीं की है। लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि संभावित समझौते में युद्धविराम, समुद्री व्यापार की बहाली और ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में राहत जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो इसका सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ेगा और दुनिया को लंबे समय से चले आ रहे तेल-गैस संकट से बड़ी राहत मिल सकती है।

  • हॉर्मुज संकट से दुनिया पर तेल संकट का खतरा, तेजी से खाली हो रहे ऑयल रिजर्व ने बढ़ाई चिंता

    हॉर्मुज संकट से दुनिया पर तेल संकट का खतरा, तेजी से खाली हो रहे ऑयल रिजर्व ने बढ़ाई चिंता



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के चलते दुनिया एक बड़े ऊर्जा संकट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। हॉर्मुज स्ट्रेट में जारी बाधाओं और तेल आपूर्ति में भारी गिरावट के कारण वैश्विक ऑयल रिजर्व तेजी से घट रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो दुनिया को महंगे ईंधन, आर्थिक दबाव और सप्लाई संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल हॉर्मुज स्ट्रेट से वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा गुजरती है। लेकिन मौजूदा संघर्ष और समुद्री तनाव के कारण इस रास्ते से तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। कई रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व से तेल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

    ऊर्जा विश्लेषकों के मुताबिक, फरवरी के अंत से अब तक वैश्विक बाजार से करोड़ों बैरल तेल कम हो चुका है। सऊदी अरब, इराक, ईरान और कुवैत जैसे प्रमुख तेल उत्पादक देशों के उत्पादन में भारी गिरावट देखी गई है। इससे दुनिया अब पहले से जमा तेल भंडार और रणनीतिक रिजर्व पर निर्भर होती जा रही है।

    अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी चेतावनी दी है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो तेल की मांग सप्लाई से कहीं ज्यादा हो जाएगी। एजेंसी के अनुसार, दुनिया भर के व्यावसायिक तेल भंडार रिकॉर्ड गति से खाली हो रहे हैं और कई देशों के पास केवल कुछ हफ्तों का स्टॉक बचा है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि संकट केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा। तेल की कमी से परिवहन, बिजली उत्पादन, विमानन, खाद उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर भी बड़ा असर पड़ सकता है। अगर हॉर्मुज स्ट्रेट जल्द पूरी तरह नहीं खुला, तो वैश्विक बाजार में ईंधन संकट और महंगाई तेजी से बढ़ सकती है।

    सऊदी अरामको के CEO अमीन नासिर और जेपी मॉर्गन के विश्लेषकों ने भी कहा है कि दुनिया का “सुरक्षा कवच” यानी तेल भंडार तेजी से कमजोर हो रहा है। फिलहाल देशों द्वारा रणनीतिक रिजर्व का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन यह लंबे समय तक पर्याप्त नहीं रहेगा।

    भारत समेत कई एशियाई देश इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं, क्योंकि उनकी बड़ी तेल जरूरतें मध्य पूर्व से पूरी होती हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन लागत और महंगाई पर असर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।