Tag: Global Oil Prices

  • होर्मुज संकट के बीच तेल बाजार में बढ़ा तनाव, रूस-अमेरिका से आई दो बड़ी खबरों ने बढ़ाई चिंता

    होर्मुज संकट के बीच तेल बाजार में बढ़ा तनाव, रूस-अमेरिका से आई दो बड़ी खबरों ने बढ़ाई चिंता



    नई दिल्ली। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट में चल रहे तनाव के कारण दबाव में है, और अब दो नई घटनाओं ने स्थिति और गंभीर कर दी है। एक तरफ अमेरिका ने रूस के कच्चे तेल पर दी गई अस्थायी छूट (waiver) को समाप्त कर दिया है, तो दूसरी ओर रूस के रियाज़ान शहर में यूक्रेनी ड्रोन हमले ने एक बड़ी ऑयल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाया है।

    अमेरिकी प्रशासन के इस फैसले के बाद अब रूस से तेल खरीदने पर पहले जैसी राहत कई देशों को नहीं मिलेगी। मार्च और अप्रैल में दी गई सीमित छूट केवल पहले से लदे टैंकरों तक ही सीमित थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से वैश्विक तेल आपूर्ति पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब मिडिल ईस्ट में पहले से ही अस्थिरता बनी हुई है।

    दूसरी ओर रूस के रियाज़ान में हुए ड्रोन हमले में एक बड़ी रॉसनेफ्ट रिफाइनरी को निशाना बनाया गया, जिससे भीषण आग लग गई। इस घटना में कम से कम चार लोगों की मौत और कई के घायल होने की खबर है। यह रिफाइनरी सालाना करोड़ों टन कच्चा तेल प्रोसेस करती है, जिससे इसकी क्षति को रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और सैटेलाइट इमेज में आग और धुएं का विशाल गुबार देखा गया, जिसने तेल बाजार को और अधिक अस्थिर कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन घटनाओं का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों पर सीधे तौर पर पड़ सकता है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत समेत कई तेल-आयातक देशों पर दबाव बढ़ने की आशंका है, क्योंकि वैश्विक सप्लाई पहले से ही सीमित और अस्थिर बनी हुई है।

  • मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार

    मिडिल ईस्ट संकट गहराया, Crude Oil की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल पार


    नई दिल्ली।मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर साफ दिखाई देने लगा है। गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया और कीमतें फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गईं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों में चिंता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ा है।

    ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई में तेज उछाल
    अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude की कीमत 9 प्रतिशत से अधिक बढ़कर लगभग 100.76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक कच्चे तेल WTI Crude का भाव भी करीब 9 प्रतिशत की तेजी के साथ लगभग 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता नजर आया। तेल बाजार में इस तेज उछाल ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।

    आईईए ने इमरजेंसी रिजर्व से तेल जारी करने का फैसला
    कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए International Energy Agency (आईईए) ने बड़ा कदम उठाया है। 32 सदस्य देशों वाले इस संगठन ने अपने आपातकालीन भंडार से 400 मिलियन बैरल कच्चा तेल जारी करने की घोषणा की है। यह आईईए के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा इमरजेंसी रिलीज माना जा रहा है। इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों में तेजी को कुछ हद तक नियंत्रित करना है।

    अमेरिका ने भी रणनीतिक भंडार से तेल जारी करने की घोषणा की
    आईईए के फैसले के अलावा United States Department of Energy ने भी अलग से बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग ने अपने Strategic Petroleum Reserve से 172 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है। अमेरिकी ऊर्जा सचिव Chris Wright के अनुसार इस तेल की आपूर्ति अगले सप्ताह से शुरू हो सकती है और इसे पूरा होने में लगभग 120 दिन का समय लग सकता है।

    पहले भी 119 डॉलर तक पहुंच चुका है कच्चा तेल
    विशेषज्ञों के अनुसार हाल के दिनों में मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतें पहले भी तेजी से बढ़ी थीं और एक समय यह 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। हालांकि बाद में बाजार में कुछ स्थिरता आने के बाद कीमतें गिरकर लगभग 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक आ गई थीं। लेकिन मौजूदा हालात ने फिर से बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना चिंता का केंद्र
    तेल बाजार में तेजी की एक बड़ी वजह Strait of Hormuz में बढ़ता तनाव भी है। यह मध्य पूर्व का एक संकरा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया में उत्पादित होने वाले करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल का व्यापार होता है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।

    तेल टैंकरों पर हमलों से बढ़ी चिंता
    मध्य पूर्व में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तेल टैंकरों को भी निशाना बनाया जा रहा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने का खतरा बढ़ गया है। यही कारण है कि निवेशकों और ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है और कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट

    मिडिल ईस्ट तनाव में नरमी के संकेत, कच्चे तेल की कीमतों में 6% की बड़ी गिरावट


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में Iran के साथ तनाव कम होने की उम्मीद के बीच मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। बाजार में अचानक आई इस नरमी के कारण कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया।

    अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क Brent Crude फ्यूचर्स की कीमत 6.51 डॉलर यानी लगभग 6.6 प्रतिशत गिरकर 92.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी मानक West Texas Intermediate (WTI) कच्चे तेल की कीमत 6.12 डॉलर या 6.5 प्रतिशत गिरकर 88.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।

    ट्रंप के बयान के बाद बाजार में आई नरमी
    तेल की कीमतों में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान “बहुत जल्द” समाप्त हो सकता है।

    ट्रंप ने कहा कि इस अभियान की सफलता का मतलब यह होगा कि तेहरान के पास ऐसे हथियार विकसित करने की क्षमता नहीं रहेगी जो अमेरिका, Israel या उसके सहयोगी देशों के लिए खतरा बन सकें। उनके इस बयान से वैश्विक बाजारों को संकेत मिला कि क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है, जिससे तेल आपूर्ति बाधित होने का जोखिम घट सकता है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दी चेतावनी
    ट्रंप ने ईरान को Strait of Hormuz के जरिए वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को बाधित करने की किसी भी कोशिश के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यह जलडमरूमध्य सुरक्षित रहेगा क्योंकि वहां अमेरिकी नौसेना के कई जहाज तैनात हैं।

    होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों से निर्यात होने वाला कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी तरह का खतरा वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए बड़ी चिंता बन सकता है।

    इजरायल के साथ संयुक्त अभियान का असर
    इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने Iran की सैन्य और परमाणु क्षमताओं को कमजोर करने के उद्देश्य से Israel के साथ संयुक्त सैन्य अभियान चलाया था। इस अभियान के तहत ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए गए थे। इन घटनाओं के चलते वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई थी और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला था। हालांकि अब तनाव कम होने की उम्मीद से बाजार में राहत का माहौल बना है।

    सोमवार को कई साल के उच्च स्तर पर पहुंचा था तेल
    गौरतलब है कि इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं। उस समय Brent Crude की कीमत 119.50 डॉलर प्रति बैरल और West Texas Intermediate की कीमत 119.48 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, जो 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर था। इसके बाद मंगलवार को बाजार में मुनाफावसूली और भू-राजनीतिक तनाव कम होने की उम्मीद से कीमतों में तेज गिरावट आ गई।

    भारत में महंगाई पर असर सीमित रहने की उम्मीद
    इस बीच भारत की वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने सोमवार को संसद में कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हालिया वृद्धि का भारत की मुद्रास्फीति दर पर फिलहाल बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    उन्होंने बताया कि देश में महंगाई दर अभी “निम्नतम सीमा” के करीब बनी हुई है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी 2026 को भू-राजनीतिक तनाव शुरू होने से पहले तक भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल की कीमतें लगभग एक साल से लगातार गिर रही थीं।

  • जंग की आंच से महंगाई तेज: कच्चे तेल में उछाल, भारत में गैस महंगी, पड़ोस में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर

    जंग की आंच से महंगाई तेज: कच्चे तेल में उछाल, भारत में गैस महंगी, पड़ोस में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर


    नई दिल्ली:मिडिल ईस्ट में बढ़ते युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। तेल बाजार में आई तेज उथल-पुथल ने कई देशों में महंगाई की आग भड़का दी है और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है। हाल ही में रसोई गैस यानी एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है और सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

    माना जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और युद्ध की वजह से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। इसी कारण सरकार को आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए देश की ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश देने पड़े। हालांकि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम जिस तेजी से बढ़ रहे हैं उससे आने वाले समय में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    युद्ध की वजह से वैश्विक तेल बाजार में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है। एक सप्ताह के भीतर ही कच्चे तेल की कीमतों में करीब 35 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी क्रूड ऑयल के फ्यूचर्स में यह अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त मानी जा रही है। WTI Crude Oil की कीमत लगभग 9.89 डॉलर बढ़कर करीब 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है जबकि Brent Crude भी करीब 7.28 डॉलर की तेजी के साथ 92.69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने दुनिया भर के देशों की चिंता बढ़ा दी है क्योंकि इससे ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बढ़ जाता है।

    हालांकि भारत सरकार ने फिलहाल लोगों को भरोसा दिलाया है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तुरंत कोई बढ़ोतरी नहीं होने दी जाएगी। इसके बावजूद कई शहरों में लोगों के बीच आशंका का माहौल बन गया है और पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। पुणे मसूरी और नोएडा जैसे शहरों में लोग एहतियात के तौर पर अपनी गाड़ियों की टंकी फुल कराने पहुंच रहे हैं ताकि संभावित बढ़ोतरी से पहले ईंधन का स्टॉक किया जा सके।

    जहां भारत में फिलहाल कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जा रही है वहीं पड़ोसी देश Pakistan में ईंधन की कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी कर दी गई है। वहां पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 55 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा किया गया है। लगभग 20 प्रतिशत की इस बढ़ोतरी के बाद पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत करीब 335.86 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 321.17 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है।

    अगर भारत की बात करें तो राजधानी Delhi में 8 मार्च 2026 को पेट्रोल की कीमत लगभग 94.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 87.67 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। वहीं सीएनजी की कीमत करीब 77.09 रुपये प्रति किलो और पीएनजी लगभग 47.89 रुपये प्रति एससीएम के आसपास है।

    दरअसल इस पूरे संकट की एक बड़ी वजह मिडिल ईस्ट का रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz भी है जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है। युद्ध के चलते इस मार्ग पर जोखिम बढ़ने के बाद भारत ने वैकल्पिक रास्तों से तेल आयात बढ़ाने की रणनीति अपनाई है और अन्य मार्गों से तेल खरीद में करीब 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

    ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक तेल बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है और इसका असर पेट्रोल डीजल तथा गैस की कीमतों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल सरकार कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर सबकी नजर बनी हुई है।