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  • पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    पीयूष गोयल बोले, बिहार की प्रतिभा और उत्पादों को मिल रही नई पहचान, मुक्त व्यापार समझौतों से बढ़ेंगे निर्यात के अवसर

    नई दिल्ली । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि बिहार की प्रतिभा और राज्य में तैयार होने वाले उत्पादों को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे नए मुक्त व्यापार समझौतों यानी एफटीए के माध्यम से बिहार के किसानों, छोटे उद्योगों, उद्यमियों और निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच के नए अवसर तैयार हो रहे हैं।

    गोयल ने कहा कि बिहार के कृषि और कृषि-प्रसंस्कृत उत्पादों के साथ टेक्सटाइल, चमड़ा, फुटवियर, इंजीनियरिंग, रसायन और फार्मास्युटिकल क्षेत्र से जुड़े उत्पादों के लिए दुनिया के विभिन्न बाजारों के दरवाजे खुल रहे हैं। इससे राज्य के उत्पादों को घरेलू बाजार से आगे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने और निर्यात बढ़ाने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस बदलाव को बिहार की आर्थिक क्षमता और स्थानीय प्रतिभा के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताया।

    केंद्र सरकार के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 863.1 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निर्यात दर्ज किया है। सरकार लगातार भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और मौजूदा बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रही है। मुक्त व्यापार समझौतों के जरिए भारतीय कंपनियों को विभिन्न देशों में व्यापार करने के लिए बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है। इससे निर्यात को अधिक विविध बनाने के साथ श्रम-प्रधान क्षेत्रों को भी मजबूत करने की उम्मीद है।

    सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में व्यापारिक साझेदार देशों के साथ कई महत्वपूर्ण मुक्त व्यापार समझौतों को आगे बढ़ाया है। इनमें भारत-मॉरीशस सीईसीपीए, भारत-यूएई सीईपीए, भारत-ऑस्ट्रेलिया ईसीटीए, भारत-ईएफटीए टीईपीए, भारत-ओमान सीईपीए, भारत-यूके सीईटीए और भारत-न्यूजीलैंड एफटीए जैसे समझौते शामिल हैं। इन समझौतों का उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के साथ भारतीय उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराना है।

    एफटीए के तहत व्यापारिक साझेदार देशों के बीच शुल्क और अन्य व्यापारिक बाधाओं को कम करने की दिशा में काम किया जाता है। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ सकती है। विशेष रूप से टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए ऐसे समझौते रोजगार और उत्पादन बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

    सरकार का कहना है कि व्यापार समझौतों को तैयार करते समय भारतीय उद्योग, किसानों, निर्यातकों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखा जा रहा है। इसके साथ ही विदेशी बाजारों में तकनीकी मानकों और नियमों से जुड़ी बाधाओं को कम करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। अलग-अलग देशों के मानकों को समझने और भारतीय उत्पादों को उनके अनुरूप तैयार करने से निर्यातकों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रवेश आसान हो सकता है।

    निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार निर्यात संवर्धन मिशन, विदेशों में भारतीय मिशनों, निर्यात संवर्धन परिषदों, उद्योग संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ मिलकर काम कर रही है। द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर लगातार बातचीत के जरिए भारतीय उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में बिहार के कृषि, विनिर्माण और श्रम-प्रधान क्षेत्रों के उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

  • अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव

    अमेरिका ईरान तनाव और महंगे कच्चे तेल ने बढ़ाई बाजार की बेचैनी शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार पर दबाव


    नई दिल्ली। वैश्विक बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई दिया। अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बढ़े सैन्य तनाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले ने निवेशकों का भरोसा कमजोर कर दिया। इसी दबाव के बीच घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत गिरावट के साथ हुई और शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स तथा निफ्टी दोनों लाल निशान में कारोबार करते नजर आए।

    बाजार खुलते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले करीब 250 से 300 अंकों की कमजोरी के साथ खुला जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी लगभग 80 से 100 अंकों की गिरावट के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। शुरुआती घंटों में निवेशकों ने नई खरीदारी से दूरी बनाई और सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया जिससे बाजार में दबाव बना रहा।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस समय वैश्विक घटनाक्रम भारतीय बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी भारत जैसे आयात आधारित देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है।

    एशियाई बाजारों का प्रदर्शन भी मिला जुला रहा। जापान के निक्केई और टॉपिक्स सूचकांक दबाव में रहे जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती गिरावट के बाद संभलता नजर आया। हांगकांग के हैंगसेंग फ्यूचर्स में हल्की मजबूती देखने को मिली लेकिन कुल मिलाकर एशियाई बाजारों में सतर्कता का माहौल बना रहा। निवेशक फिलहाल किसी बड़े फैसले से पहले वैश्विक घटनाओं पर नजर बनाए हुए हैं।

    वहीं अमेरिकी बाजारों में पिछले कारोबारी सत्र के दौरान बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। डॉव जोन्स एसएंडपी 500 और नैस्डैक तीनों प्रमुख सूचकांक दबाव में बंद हुए। फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने के बावजूद भू राजनीतिक तनाव ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। हालांकि बाद में अमेरिकी फ्यूचर्स में हल्की रिकवरी देखने को मिली लेकिन उसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार की शुरुआत पर नहीं दिखाई दिया।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश फैसले लेने से बचना चाहिए। वैश्विक हालात सामान्य होने तक बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में चरणबद्ध निवेश की रणनीति बेहतर मानी जा रही है जबकि अल्पकालिक निवेशकों को जोखिम प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

    आने वाले कारोबारी सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है और विदेशी बाजारों में स्थिरता लौटती है तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है। फिलहाल बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और निवेशक हर नए संकेत पर पैनी नजर रखे हुए हैं।

  • वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

    वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों ने बढ़ाया निवेशकों का भरोसा, सेंसेक्स 77 हजार के पार पहुंचा, शुरुआती कारोबार में दिखी चौतरफा तेजी

    नई दिल्ली । मजबूत वैश्विक संकेतों और घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी के चलते भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार को सकारात्मक शुरुआत की। कारोबार के शुरुआती चरण में ही सेंसेक्स 77 हजार अंक के स्तर को पार कर गया, जबकि निफ्टी भी उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार में आई इस मजबूती ने निवेशकों के बीच भरोसे को और मजबूत किया तथा अधिकांश प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का माहौल देखने को मिला।

    शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 683 अंकों की बढ़त के साथ 77,425 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 205 अंक मजबूत होकर 24,168 के करीब कारोबार करता दिखा। प्रमुख सूचकांकों में आई इस तेजी का असर व्यापक बाजार पर भी दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी अच्छी खरीदारी दर्ज की गई, जिससे यह संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्यम और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक माहौल बना रहा।

    बाजार की इस तेजी में सूचना प्रौद्योगिकी और मेटल सेक्टर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आईटी कंपनियों के शेयरों में मजबूत खरीदारी देखने को मिली, जिससे संबंधित सूचकांक प्रमुख बढ़त वाले सेक्टरों में शामिल रहे। इसके अलावा ऑयल एंड गैस, प्राइवेट बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और कमोडिटी क्षेत्र से जुड़े शेयरों ने भी बाजार को मजबूती प्रदान की। दूसरी ओर फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में सीमित दबाव देखने को मिला, हालांकि इसका व्यापक बाजार की दिशा पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा।

    प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी सकारात्मक रुझान दर्ज किया गया। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और मेटल क्षेत्र की कई बड़ी कंपनियों के शेयर शुरुआती कारोबार में बढ़त के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। इससे यह स्पष्ट हुआ कि निवेशकों का विश्वास विभिन्न सेक्टरों में व्यापक रूप से बना हुआ है और बाजार की तेजी केवल चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के कारोबारी सत्रों में बाजार में आई गिरावट के बाद निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी आने और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने भी बाजार की धारणा को मजबूत किया है। यही कारण है कि बाजार में निवेशकों का विश्वास लगातार बेहतर होता दिखाई दे रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय बाजारों का सकारात्मक रुख भी भारतीय बाजार के लिए सहायक साबित हुआ। एशिया के अधिकांश प्रमुख शेयर बाजार बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए, जबकि अमेरिकी बाजार भी पिछले कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ बंद हुए थे। वैश्विक स्तर पर निवेशकों के बेहतर रुझान का सीधा असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला, जिससे शुरुआती कारोबार में खरीदारी का दबदबा बना रहा।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों ने पिछले कारोबारी सत्र में सीमित निकासी दर्ज की, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाजार में उल्लेखनीय निवेश जारी रखा। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया और बाजार को स्थिरता प्रदान की। यही संतुलन शुक्रवार की शुरुआत में भी सकारात्मक माहौल बनाए रखने में महत्वपूर्ण रहा।

    बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और घरेलू निवेशकों की खरीदारी जारी रहती है, तो आने वाले कारोबारी सत्रों में भी भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान देखने को मिल सकता है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, विदेशी निवेश प्रवाह और कॉरपोरेट परिणामों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि यही कारक निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

  • शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

    शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 75,000 के नीचे फिसला, वैश्विक संकेतों का असर

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार में सोमवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत कमजोरी के साथ हुई, जहां वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों का सीधा असर देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक तेज गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार करते नजर आए, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।

    सुबह के सत्र में सेंसेक्स में करीब 850 अंकों से अधिक की गिरावट दर्ज की गई और यह 75,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। वहीं निफ्टी भी लगभग 250 अंकों की कमजोरी के साथ कारोबार करता दिखा। बाजार में यह गिरावट चौतरफा बिकवाली के कारण देखने को मिली, जिसमें लगभग सभी प्रमुख सेक्टर दबाव में रहे।

    निफ्टी के सेक्टोरल इंडेक्स में कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और रियल्टी सबसे ज्यादा नुकसान में रहे, जबकि मीडिया, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज, पीएसयू बैंक, ऊर्जा और कंजप्शन जैसे सेक्टर भी लाल निशान में कारोबार करते दिखे। बाजार में बड़ी कंपनियों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट दर्ज की गई, जिससे व्यापक स्तर पर दबाव स्पष्ट नजर आया।

    सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में आईटी सेक्टर की कुछ कंपनियां जैसे इन्फोसिस और टीसीएस हल्की मजबूती में रहीं, लेकिन ज्यादातर बड़ी कंपनियां नुकसान में रहीं। पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक, टाइटन, बजाज फाइनेंस, एलएंडटी और अन्य प्रमुख शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया। इससे बाजार में गिरावट और गहरी हो गई।

    वैश्विक बाजारों में भी इसी तरह का नकारात्मक रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, बैंकॉक, हांगकांग और जकार्ता जैसे प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे, जबकि केवल सोल का बाजार हरे निशान में रहा। इससे यह संकेत मिला कि वैश्विक निवेशक जोखिम से बचने की रणनीति अपना रहे हैं।

    अमेरिकी बाजारों में भी पिछले सत्र में गिरावट दर्ज की गई थी, जहां प्रमुख सूचकांक डाओ जोन्स और नैस्डैक में एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखने को मिली। इसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी पड़ा।

    बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा गिरावट के पीछे मुख्य कारण भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने की आशंका के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर महंगाई और आर्थिक दबाव की चिंता बढ़ गई है।

    इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में वृद्धि भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है, जिससे इक्विटी बाजारों से पूंजी निकलने का दबाव बन रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जबकि घरेलू निवेशकों की गतिविधियां भी सीमित रहीं।

    कुल मिलाकर, कमजोर वैश्विक संकेतों, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने भारतीय शेयर बाजार पर मिलकर दबाव बनाया है, जिससे निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है और बाजार में अस्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है।

  • शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव

    शेयर बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव, सेंसेक्स-निफ्टी हल्की बढ़त के साथ खुले, मिड और स्मॉलकैप पर दबाव


    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार ने शुक्रवार के कारोबारी सत्र की शुरुआत वैश्विक संकेतों के मिले-जुले रुख के बीच लगभग सपाट स्तर पर की। शुरुआती कारोबार में बाजार में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी हल्की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिल रहे मिश्रित संकेतों के कारण निवेशकों में सतर्कता का माहौल बना हुआ है, जिससे शुरुआती गति सीमित रही।

    सुबह के शुरुआती सत्र में सेंसेक्स में हल्की मजबूती देखी गई और यह मामूली बढ़त के साथ कारोबार करता नजर आया। वहीं निफ्टी भी सीमित बढ़त के साथ हरे निशान में बना रहा। हालांकि इस दौरान लार्जकैप शेयरों में स्थिरता देखने को मिली, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में निवेशकों की रुचि थोड़ी कमजोर रही।

    सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो आईटी और ऑटो सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट देने का काम किया। इन सेक्टरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे निफ्टी को सहारा मिला। इसके अलावा सर्विसेज, एफएमसीजी, हेल्थकेयर और फार्मा सेक्टर भी सकारात्मक दायरे में रहे। इसके विपरीत डिफेंस, मेटल, कमोडिटीज, रियल्टी, ऑयल एंड गैस और पीएसयू बैंकिंग सेक्टर में दबाव देखने को मिला, जिससे समग्र बाजार में असंतुलित रुझान बना रहा।

    वैश्विक बाजारों की बात करें तो एशिया के कई प्रमुख बाजारों में कमजोरी का रुख देखने को मिला, जबकि कुछ बाजारों में हल्की मजबूती बनी रही। अमेरिकी बाजारों ने पिछले कारोबारी सत्र में अच्छी तेजी के साथ बंद होकर सकारात्मक संकेत दिए थे, लेकिन एशियाई बाजारों की सुस्ती ने भारतीय बाजार की दिशा को सीमित रखा। इसी कारण घरेलू निवेशकों ने भी शुरुआत में सतर्क रुख अपनाया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में बदलाव भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत रहा। लंबे समय बाद विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय बाजार में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सपोर्ट मिला। इसके साथ ही घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी लगातार निवेश जारी रखा, जो बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मददगार साबित हुआ।

    इसके अलावा आर्थिक मोर्चे पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर भी बाजार की धारणा पर देखा गया। ईंधन कीमतों में वृद्धि से महंगाई और लागत दबाव को लेकर चिंता बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले दिनों में उपभोक्ता आधारित सेक्टरों पर पड़ सकता है।