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  • वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..

    वैश्विक व्यापार में भरोसे के लिए पीयूष गोयल ने सदस्य देशों से सर्वसम्मति की अपील..


    नई दिल्ली:  Piyush Goyal ने कैमरून के Yaounde में आयोजित विश्व व्यापार संगठन की 14वीं मंत्रीस्तरीय बैठक (MC14) के दूसरे दिन भारत का नेतृत्व करते हुए सर्वसम्मति आधारित फैसलों पर जोर दिया उन्होंने कहा कि किसी भी देश पर ऐसे नियम नहीं थोपे जाने चाहिए जिनसे वह सहमत न हो

    गोयल ने मौजूदा गतिरोध को खत्म करने और सदस्य देशों के बीच भरोसा दोबारा बनाने की जरूरत बताई उन्होंने कहा कि डब्ल्यूटीओ में चर्चाएं पूरी तरह पारदर्शी, समावेशी और सदस्य देशों के नेतृत्व में होनी चाहिए और अगर संस्थागत ढांचे में बिखराव हुआ तो वैश्विक व्यापार प्रणाली कमजोर हो जाएगी

    भारत ने समान अवसर (level playing field) बनाए रखने की बात की और कहा कि उरुग्वे दौर से उत्पन्न असमानताओं को दूर करना जरूरी है साथ ही खाद्य सुरक्षा, पब्लिक स्टॉकहोल्डिंग (PSH), स्पेशल सेफगार्ड मैकेनिज्म (SSM) और कपास जैसे लंबित मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही गई

    डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान तंत्र की कमजोर स्थिति पर भारत ने चिंता जताई और कहा कि सही तरीके से फैसले नहीं होंगे तो नियम लागू नहीं हो पाएंगे और इसका सबसे अधिक असर छोटे देशों पर पड़ेगा इसके अलावा पारदर्शिता के नाम पर व्यापारिक जवाबी कार्रवाई या घरेलू नीतियों को चुनौती देने के प्रयासों पर सावधानी बरतने को कहा गया

    बैठक में Rajesh Aggarwal ने डब्ल्यूटीओ सुधारों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने और स्पष्ट लक्ष्य तय करने की आवश्यकता पर बल दिया

    पीयूष गोयल ने इस दौरान अमेरिका, चीन, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड, कनाडा, मोरक्को और ओमान के प्रतिनिधियों से अलग-अलग मुलाकात भी की जिसमें व्यापार संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई

    यह डब्ल्यूटीओ सम्मेलन 26 मार्च से शुरू होकर 29 मार्च तक चलेगा और इसमें वैश्विक व्यापार की दिशा तय करने वाले कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी

  • भारत-अमेरिका ट्रेड डील: तेल खरीदने की रणनीति पर गोयल ने दिया स्पष्टीकरण

    भारत-अमेरिका ट्रेड डील: तेल खरीदने की रणनीति पर गोयल ने दिया स्पष्टीकरण


    नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका से तेल खरीदना भारत के रणनीतिक हित में है, क्योंकि इससे देश को स्रोत में विविधता मिलती है। वहीं, रूसी तेल को लेकर उन्होंने स्पष्ट जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस मामले में विदेश मंत्रालय अधिक उपयुक्त जवाब दे सकता है।

    तेल खरीद निर्णय खरीददारों पर निर्भर

    गोयल ने कहा, अमेरिका से कच्चा तेल, एलएनजी या एलपीजी खरीदना रणनीतिक हित में है। लेकिन यह फैसला घरेलू खरीदार खुद ही लेते हैं। ट्रेड डील यह तय नहीं करती कि कौन किससे क्या खरीदेगा। उन्होंने बताया कि व्यापार समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच कारोबार को आसान बनाना और विशेष पहुंच प्रदान करना है। गोयल ने कहा, “एफ़टीए का मतलब ही होता है कि प्रतिस्पर्धियों की तुलना में विशेष पहुंच मिले। जब हम पर 18 प्रतिशत का पारस्परिक शुल्क है, तो हमें दूसरे विकासशील देशों पर बढ़त मिलती है।

    500 अरब डॉलर का व्यापार भी कोई चुनौती नहीं
    मीडिया से बातचीत में गोयल ने कहा कि भारत अगले पांच वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर मूल्य के उत्पाद खरीदने में सक्षम है। उन्होंने इसे अत्यंत रूढ़िवादी आंकड़ा बताया। इसके अंतर्गत ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला शामिल हैं। गोयल ने कहा, “तेल, एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल के अलावा केवल विमानन क्षेत्र के लिए ही कम से कम 100 अरब डॉलर से अधिक की आवश्यकता होगी।

    डील का रणनीतिक महत्व
    साथ ही उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत अमेरिका से लगभग 300 अरब डॉलर मूल्य के ऐसे सामान आयात कर सकता है, जो अब तक अन्य देशों से खरीदे जा रहे थे। यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को गति देने और प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाने के लिए किया गया है।
  • मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस

    मोदी-ट्रंप की दोस्ती ने आसान की राह, लेकिन डील वार्ताकारों ने गढ़ी: मोबियस


    नई दिल्ली । अरबपति निवेशक और उभरते बाजारों के दिग्गज विशेषज्ञ मार्क मोबियस ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ हालिया व्यापारिक समझौता अमेरिका के लिए एक स्पष्ट संकेत था, जिसके बाद उसने भारत के साथ अपने समझौते को तेजी से अंतिम रूप देने की दिशा में कदम बढ़ाए।

    नई दिल्ली में आईएएनएस से बातचीत के दौरान मोबियस ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच अच्छे व्यक्तिगत संबंधों ने इस प्रक्रिया को आसान जरूर बनाया, लेकिन समझौते को वास्तविक आकार दोनों देशों के पेशेवर वार्ताकारों ने ही दिया है।मोबियस ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को फादर ऑफ ऑल ट्रेड डील कहना सही नहीं होगा। उनके अनुसार, भारत का यूरोपीय संघ के साथ हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से कहीं अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

    उन्होंने कहा कि भारत का यूरोपीय संघ के साथ आगे बढ़ना उसकी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति को दर्शाता है। इसी कदम ने संभवतः अमेरिका को यह एहसास कराया कि भारत वैश्विक व्यापार में विकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे अमेरिका को भी अपने समझौते में तेजी लानी पड़ी।जब उनसे पूछा गया कि क्या प्रधानमंत्री मोदी अपनी व्यक्तिगत कूटनीति के चलते अमेरिका से बेहतर शर्तें हासिल कर पाए, तो मोबियस ने कहा कि अच्छे नेताओं के संबंध प्रक्रिया को सुगम बना सकते हैं, लेकिन किसी भी समझौते की बुनियाद पेशेवर बातचीत और तकनीकी वार्ताओं पर ही टिकी होती है।

    भारत की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए मोबियस ने भरोसा जताया कि देश निकट भविष्य में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर मजबूती से अग्रसर है। उन्होंने कहा कि अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भारत की विकास दर कहीं अधिक स्थिर और मजबूत है।शेयर बाजार को लेकर मोबियस ने सतर्क रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार का एक लाख का आंकड़ा छूना मुश्किल दिखता है, क्योंकि इसके लिए लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि जरूरी होगी, जो मौजूदा परिस्थितियों में बहुत तेज़ मानी जाएगी।

    हालांकि, उन्होंने भारत की दीर्घकालिक विकास संभावनाओं को बेहद सकारात्मक बताया। मोबियस के अनुसार, देश की युवा आबादी, तेज़ शहरीकरण और बढ़ता उपभोक्ता आधार आर्थिक मजबूती की बड़ी वजह हैं। इसके साथ ही निर्यात में लगातार हो रही बढ़ोतरी भी भारत को आने वाले वर्षों में उच्च विकास दर बनाए रखने में मदद करेगी।

  • भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला  एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार

    भारत ने ट्रंप के टैरिफ का तोड़ निकाला एफटीए बना सबसे बड़ा हथियार


    नई दिल्ली । 2025 का वर्ष वैश्विक व्यापार के लिए एक चुनौतीपूर्ण दौर साबित हुआ खासकर भारत के लिए जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका फर्स्ट नीति को एक नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए भारत पर 50% आयात शुल्क लगा दिए। इस टैरिफ ने भारत के निर्यातकों को गंभीर रूप से प्रभावित किया क्योंकि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था। खासकर कपड़ा रत्न-आभूषण दवा समुद्री उत्पाद और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे क्षेत्रों पर इस फैसले का असर पड़ा।

    लेकिन भारत ने इस चुनौती का सामना बड़े ही समझदारी से किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी को मजबूत करते हुए मुक्त व्यापार समझौतों का सहारा लिया जिससे न केवल निर्यात में वृद्धि हुई बल्कि कई देशों के साथ संबंध भी मजबूत हुए। नतीजतन नवंबर 2025 में भारत के कुल निर्यात में 19.4% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और अमेरिका को निर्यात में 22% से ज्यादा उछाल आया जो एक बड़ा आश्चर्य था।

    भारत ने एफटीए पर काम तेज किया

    अमेरिकी टैरिफ से जूझते हुए भारत ने तेजी से मुक्त व्यापार समझौतों पर काम करना शुरू कर दिया। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक भारत इस समय यूरोपीय संघ न्यूजीलैंड और चिली के साथ उन्नत स्तर की एफटीए वार्ता कर रहा है। इसी कड़ी में भारत ने ओमान के साथ पहला एफटीए समझौता करने की योजना बनाई जिस पर नवंबर में हस्ताक्षर किए गए। यह एफटीए दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा देने खासकर इंजीनियरिंग उत्पादों वस्त्र फार्मास्यूटिकल्स और कृषि उत्पादों के निर्यात को नई गति देने के लिए महत्वपूर्ण था।

    एफटीए भारत की आर्थिक रणनीति का अहम हिस्सा

    भारत की आर्थिक रणनीति में एफटीए अब एक महत्वपूर्ण स्तंभ बन चुके हैं। ये समझौते भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में गहरी हिस्सेदारी दिलाने निर्यात में निरंतर वृद्धि और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के अवसर प्रदान करते हैं। एफटीए के माध्यम से व्यापार टैरिफ में कटौती और स्थिर व्यापार नियम भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखने में मदद करते हैं साथ ही नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने का अवसर भी प्रदान करते हैं।

    अमेरिकी टैरिफ और वैश्विक चुनौतियां

    अमेरिकी टैरिफ की चुनौती के बावजूद भारत ने वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं से बचने के लिए एफटीए पर तेजी से काम किया। व्यापार विशेषज्ञ अजय श्रीवास्तव के मुताबिक भारत एफटीए को एक रणनीतिक औजार की तरह इस्तेमाल कर रहा है जिससे निर्यात बाजारों में विविधता लाई जा सके और अमेरिका के ऊंचे टैरिफ के असर को कम किया जा सके। भारत के पास फिलहाल 26 देशों के साथ 15 एफटीए हैं और 26 अन्य देशों के साथ प्राथमिकता व्यापार समझौते हैं।

    भारत की एफटीए नीति से बढ़ा भरोसा

    हाल के वर्षों में भारत ने यूएई और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापक आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते किए हैं जिससे इन देशों के साथ द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी साल मई में भारत और ब्रिटेन ने भी लंबे समय से लंबित एफटीए पर सहमति की घोषणा की थी जिसके तहत भारतीय खाद्य उत्पादों और मसालों को ब्रिटेन के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। इन समझौतों ने तेज और स्पष्ट व्यापार ढांचे की जरूरत को और मजबूत किया है।

    सरकार का रुख और भविष्य की दिशा

    भारत सरकार वैश्विक व्यापार में चुनौतीपूर्ण माहौल के बावजूद एफटीए वार्ताओं को आगे बढ़ा रही है। व्यापार सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि आगामी वर्ष में इन समझौतों से अच्छे नतीजे मिलेंगे। हालांकि भारत के व्यापारिक साझेदारों से ज्यादा बाजार पहुंच की मांग और छोटे किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा की चिंता बनी हुई है।

    भारत और अमेरिका के रिश्ते

    भारत और अमेरिका के रिश्तों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव आए हैं खासकर रूस से रियायती कच्चे तेल की निरंतर खरीद को लेकर। हालांकि हाल ही में दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों में नरमी के संकेत मिले हैं। पीएम मोदी ने ट्रंप की शांति योजना की सराहना की और दोनों नेताओं ने फोन पर व्यापार और अन्य मुद्दों पर बातचीत की।

    कई देशों से हाथ मिलाने का कारण

    वैश्विक व्यापार में अनिश्चितता के दौर में भारत अब एक स्थिर और आकर्षक पार्टनर के रूप में उभर रहा है। विकसित देशों जैसे ब्रिटेन यूरोपीय संघ और ईएफटीए के देशों के लिए भारत का बड़ा बाजार और सस्ते उत्पाद आकर्षण का कारण बन रहे हैं जबकि उभरते बाजार जैसे ओमान चिली क्रिटिकल मिनरल्स और ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग देख रहे हैं
    भारत की एफटीए नीति वैश्विक व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच उसके निर्यात और आर्थिक विकास को नई दिशा देने के लिए एक मजबूत रणनीतिक कदम साबित हो रही है। यह भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में और अधिक महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगा साथ ही उसकी अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।