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  • नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नाना पाटेकर का अंतिम संस्कार देर रात क्यों हुआ? बेटे मल्हार ने बताई वजह, सुबह निधन के बाद लिया था फैसला

    नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा में निधन हो गया। 8 अक्टूबर की सुबह उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और उनकी पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना को अंतिम विदाई देने के लिए परिवार के सदस्यों के साथ उनके करीबी और फिल्म जगत से जुड़े कई लोग पहुंचे। अंतिम संस्कार देर रात किए जाने को लेकर जब मल्हार से सवाल पूछा गया, तो उन्होंने इसकी वजह बताई।

    मल्हार पाटेकर से पूछा गया कि अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया, जबकि कई अन्य लोग और फिल्म जगत की हस्तियां भी नाना को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंचना चाहती थीं। सवाल में यह भी कहा गया कि बॉलीवुड के कई लोग अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सके, ऐसे में उसी रात अंतिम विदाई देने की क्या जरूरत थी। इस पर मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार के फैसले के पीछे ऐसी कोई खास वजह नहीं थी, जैसा सवाल में पूछा जा रहा था।

    मल्हार ने बताया कि नाना पाटेकर के साथ यह घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई विशेष कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार रात में ही करना जरूरी था या अगले दिन नहीं किया जा सकता था। परिवार ने परिस्थितियों को देखते हुए उसी दिन उन्हें विदाई देने का निर्णय लिया। इस तरह मल्हार ने देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया।

    नाना पाटेकर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग शामिल हुए। नाना के चाहने वाले और करीबी भी उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा।

    नाना पाटेकर की तबीयत गोवा स्थित उनके फ्लैट में बिगड़ी थी। जानकारी के मुताबिक, उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद उनके बेटे मल्हार के अनुसार, घर पर मेडिकल टीम बुलाई गई। टीम जब पहुंची, तब नाना बेहोशी की हालत में थे। उन्हें बचाने की कोशिश की गई और फिर तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए प्रयास जारी रखे।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर नाना पाटेकर को बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। 75 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। मल्हार के बयान के अनुसार, सुबह घटना होने और काफी समय बीत जाने के कारण परिवार ने देर रात अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार में मौजूद लोगों ने नाना को श्रद्धांजलि दी और उन्हें याद किया।

  • नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नाना पाटेकर का देर रात क्यों हुआ अंतिम संस्कार? बेटे मल्हार ने बताई वजह, 75 साल की उम्र में हुआ निधन

    नई दिल्ली: हिंदी और मराठी सिनेमा के अभिनेता नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया। गोवा में उनके निधन के बाद गुरुवार, 8 अक्टूबर की देर रात उनका अंतिम संस्कार किया गया। बेटे मल्हार पाटेकर और पत्नी ने उन्हें मुखाग्नि दी। नाना पाटेकर के अंतिम दर्शन और विदाई के लिए उनके परिवार के सदस्यों, करीबी लोगों और फिल्म जगत से जुड़े कई कलाकारों ने पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। हालांकि, देर रात अंतिम संस्कार किए जाने को लेकर सवाल भी उठे। इस पर उनके बेटे मल्हार ने स्पष्ट किया कि परिवार ने किसी विशेष वजह से अंतिम संस्कार में देरी नहीं की थी। उन्होंने बताया कि नाना पाटेकर के निधन की घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था। इसी कारण परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।

    नाना पाटेकर के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे मल्हार से पूछा गया कि जब फिल्म जगत के कई लोग और अन्य परिचित उन्हें अंतिम विदाई देना चाहते थे, तो अंतिम संस्कार इतनी देर रात क्यों किया गया। सवाल में यह भी कहा गया कि देर होने के कारण फिल्म उद्योग से जुड़े कई लोग अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंच सके। इस पर मल्हार ने कहा कि ऐसी कोई विशेष बात नहीं थी कि अंतिम संस्कार देर रात ही करना जरूरी था। उन्होंने बताया कि परिवार के सामने ऐसा कोई कारण नहीं था कि अंतिम संस्कार अगले दिन किया जाता। चूंकि घटना सुबह जल्दी हुई थी और तब तक काफी समय बीत चुका था, इसलिए परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। उनके बयान से स्पष्ट हुआ कि अंतिम विदाई का समय परिवार के फैसले के अनुसार तय किया गया था।

    नाना पाटेकर को अंतिम विदाई राजकीय सम्मान के साथ दी गई। उनके अंतिम सफर के दौरान मौजूद लोगों ने श्रद्धांजलि दी और ‘नाना साहेब अमर रहें’ के नारे भी सुनाई दिए। उनके निधन से फिल्म जगत में शोक का माहौल रहा। अंतिम संस्कार में अभिनेता जैकी श्रॉफ, फिल्म निर्देशक अनिल शर्मा, प्रवीण तरड़े, फिल्म ‘क्रांतिवीर’ के निर्देशक मेहुल कुमार, ‘नटसम्राट’ के लेखक किरण और महेश मांजरेकर की पत्नी मेधा मांजरेकर सहित कई लोग पहुंचे। इन लोगों ने नाना पाटेकर को अंतिम विदाई दी। उनके लंबे फिल्मी करियर और अभिनय के कारण उन्हें जानने वाले लोगों के लिए उनका निधन एक बड़ी क्षति है। अंतिम संस्कार में शामिल लोगों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

    नाना पाटेकर का निधन गोवा स्थित उनके फ्लैट में सीने में तेज दर्द होने के बाद हुआ। जानकारी के मुताबिक, उनकी तबीयत बिगड़ने पर घर पर मेडिकल टीम पहुंची। उस समय वह बेहोशी की हालत में मिले। उन्हें बचाने के लिए चिकित्सकीय प्रयास किए गए और इसके बाद तुरंत मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश जारी रखी। बताया गया कि डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर दिया, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद सुबह 5 बजकर 20 मिनट पर उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। नाना पाटेकर 75 वर्ष के थे। उनके निधन के बाद परिवार ने उसी दिन अंतिम संस्कार करने का फैसला किया और देर रात उन्हें अंतिम विदाई दी गई। उनके बेटे मल्हार ने अंतिम संस्कार के समय को लेकर उठे सवालों पर परिवार का पक्ष स्पष्ट किया।

  • नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नाना पाटेकर ने सालों पहले कर ली थी अंतिम संस्कार की तैयारी, 12 मन सूखी लकड़ी को बताया था अपनी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’

    नई दिल्ली: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार सुबह गोवा स्थित उनके घर पर निधन हो गया। वह 75 वर्ष के थे। उनके निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर है। नाना पाटेकर के निधन के बाद उनके वर्षों पुराने एक बयान की चर्चा भी हो रही है, जिसमें उन्होंने अपने अंतिम संस्कार को लेकर अपनी इच्छा के बारे में बताया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें पता है कि एक दिन उन्हें दुनिया से जाना है और उनके अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पर्याप्त होगी। अभिनेता ने इसे अपनी आखिरी संपत्ति तक बताया था।

    नाना पाटेकर ने सितंबर 2023 में एक इंटरव्यू के दौरान मौत और अंतिम संस्कार को लेकर खुलकर बात की थी। उन्होंने कहा था कि वह मौत में विश्वास रखते हैं और जानते हैं कि एक दिन उन्हें जाना ही होगा। अपने अंतिम संस्कार के बारे में उन्होंने बेहद साधारण अंदाज में कहा था कि उन्हें 12 मन लकड़ी की जरूरत पड़ेगी। उन्होंने कहा था कि यही उनकी ‘फाइनल प्रॉपर्टी’ है और इसके साथ ही वह दुनिया से चले जाएंगे। उनके इस बयान से यह स्पष्ट था कि वह जीवन के अंतिम पड़ाव को लेकर व्यावहारिक सोच रखते थे।

    अभिनेता ने यह भी बताया था कि उन्होंने अपने अंतिम संस्कार के लिए 12 मन लकड़ी पहले से ही जमा करके रखी है। उन्होंने खास तौर पर इच्छा जताई थी कि उनके अंतिम संस्कार में सूखी लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए। उनका कहना था कि जो लकड़ी उन्होंने जमा कर रखी है, वह सूखी है और उसी से उनका अंतिम संस्कार किया जाए। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि गीली लकड़ी का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर की यह बात उनके सहज और अलग अंदाज को भी दिखाती है, जिसमें उन्होंने गंभीर विषय को भी अपने खास हास्य के साथ सामने रखा था।

    सूखी लकड़ी के इस्तेमाल को लेकर नाना पाटेकर ने मजाकिया अंदाज में इसकी वजह भी बताई थी। उन्होंने कहा था कि अगर गीली लकड़ी का इस्तेमाल किया गया तो आंखों में आंसू आ सकते हैं। ऐसे में मरते समय यह गलतफहमी हो सकती है कि लोग उनके लिए रो रहे हैं। उन्होंने कहा था कि कम से कम मरते समय ऐसी गलतफहमी नहीं होनी चाहिए। उनके इस बयान में मौत जैसे गंभीर विषय के बीच उनका चिर-परिचित हास्य नजर आया था।

    नाना पाटेकर के आखिरी समय की बात करें तो गुरुवार सुबह गोवा में उनके घर पर अचानक तबीयत बिगड़ गई थी। मणिपाल हॉस्पिटल के डॉ. शेखर सालकर के अनुसार, रात करीब 2:30 बजे नाना पाटेकर ने एक दोस्त से कहा था कि उन्हें अच्छा महसूस नहीं हो रहा है और सीने के बाईं ओर दर्द हो रहा है। इसके बाद उनका दोस्त डोना पाउला स्थित घर पहुंचा, जहां उन्हें तकलीफ में पाया गया। इसके बाद केयरटेकर को बुलाया गया और एम्बुलेंस भी बुलाई गई।

    नाना पाटेकर को सुबह करीब 4:20 बजे मणिपाल हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की कोशिश की। हालांकि, सुबह करीब 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। उनकी मौत कार्डियक अरेस्ट की वजह से होने की बात सामने आई है। मौत की सही वजह का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम किया जाएगा। अभिनेता के निधन के बाद उनके पुराने बयान में कही गई अंतिम संस्कार की इच्छा भी चर्चा में आ गई है।

  • SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, बिना सुनवाई नाम हटाने पर कानून का पालन करने को कहा

    SIR प्रक्रिया पर बॉम्बे हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को फटकार, बिना सुनवाई नाम हटाने पर कानून का पालन करने को कहा


    नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। गोवा में SIR के दौरान एक ही परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी पूछा कि किस कानून के तहत किसी व्यक्ति को सुनवाई का मौका दिए बिना मतदाता सूची से उसका नाम हटाया जा सकता है। अदालत ने चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई भी मतदाता सूची से छूट न जाए।

    मामला गोवा में SIR के दौरान एक परिवार के छह सदस्यों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने से जुड़ा है। इस मामले में परिवार का नाम हटाने से पहले उन्हें सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। इसी बिंदु पर सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जाना है तो उससे पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। अदालत ने बिना सुनवाई के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग से संबंधित कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा।

    सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग से तकनीक के बजाय कानून और नियमों के अनुसार प्रक्रिया अपनाने को कहा। अदालत ने SIR के दौरान इस्तेमाल की जा रही प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए। कोर्ट की टिप्पणी थी कि मौजूदा प्रक्रिया को देखने पर ऐसा लग रहा है कि कानून और नियमों को कुछ समय के लिए किनारे कर दिया गया है और काम सॉफ्टवेयर के हिसाब से किया जा रहा है। इस टिप्पणी के जरिए अदालत ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में तकनीकी प्रक्रिया के साथ कानूनी प्रावधानों के पालन के महत्व पर सवाल उठाया।

    अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित चुनाव अधिकारी को भी कोर्ट में बुलाया है। हाईकोर्ट की सुनवाई का केंद्र यह रहा कि मतदाता सूची से किसी व्यक्ति या परिवार के सदस्यों के नाम हटाने की कार्रवाई किस कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और क्या संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट रूप से चुनाव आयोग से उस कानून का आधार बताने को कहा जिसके तहत बिना सुनवाई के किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है। मामले में गोवा के परिवार के छह सदस्यों के नाम हटाए जाने की कार्रवाई इसी प्रक्रिया के संदर्भ में जांच के दायरे में है।

    बॉम्बे हाईकोर्ट की इस सुनवाई में SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया, सुनवाई का अवसर और कानून के पालन से जुड़े सवाल प्रमुख रहे। अदालत ने कहा कि तकनीकी व्यवस्था के आधार पर प्रक्रिया चलाने के बजाय संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए। साथ ही, मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है कि किसी मतदाता का नाम अनावश्यक रूप से छूट न जाए। मामले में संबंधित चुनाव अधिकारी को अदालत के समक्ष बुलाए जाने के बाद अब नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार से जुड़े पहलुओं पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।

  • अजय देवगन ने कपिल शर्मा के गोवा वाले मजाक का दिया मजेदार जवाब, फेनी पर छिड़ी बातचीत ने हंसी बढ़ाई

    अजय देवगन ने कपिल शर्मा के गोवा वाले मजाक का दिया मजेदार जवाब, फेनी पर छिड़ी बातचीत ने हंसी बढ़ाई

    नई दिल्ली ।अजय देवगन और कपिल शर्मा की मुलाकात एक बार फिर हंसी-मजाक से भरपूर रही। अजय देवगन अपनी आगामी फिल्म ‘दृश्यम-द कन्क्लूजन’ के प्रमोशन के लिए कपिल शर्मा के कॉमेडी शो में पहुंचे थे। बातचीत के दौरान कपिल ने अजय की फिल्मों और गोवा से उनके जुड़ाव को लेकर मजाक किया। हालांकि, इस बार कपिल का मजाक उन्हीं पर भारी पड़ गया और अजय देवगन ने पलटकर उनकी ही टांग खींच दी।

    अजय देवगन की कई फिल्मों की शूटिंग गोवा में हुई है। ‘गोलमाल’, ‘सिंघम’ और ‘दृश्यम’ जैसी फिल्मों का गोवा से जुड़ाव रहा है। उनकी आगामी फिल्म ‘दृश्यम-द कन्क्लूजन’ की भी ज्यादातर शूटिंग गोवा में हुई है। फिल्म के पिछले हिस्सों की शूटिंग भी काफी हद तक इसी जगह हुई थी और कहानी की पृष्ठभूमि भी गोवा पर आधारित है।

    इसी वजह से बातचीत के दौरान कपिल शर्मा ने अजय देवगन से सवाल किया कि उनकी फिल्मों में गोवा का इतना कनेक्शन क्यों दिखाई देता है। कपिल ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अजय की ज्यादातर फिल्में गोवा में शूट हुई हैं और उनकी आगामी फिल्म का ट्रेलर भी गोवा में ही लॉन्च किया गया था।

    इसके बाद कपिल ने अजय को छेड़ते हुए गोवा को लेकर एक मजेदार सवाल किया। उन्होंने कहा कि क्या अजय को वास्तव में गोवा की खूबसूरती पसंद है या फिर वहां मिलने वाली फेनी इसकी वजह है। कपिल ने यह भी मजाक किया कि शायद वहां पोमफ्रेट मछली सस्ती मिलती है।

    कपिल के सवाल का जवाब देते हुए अजय देवगन ने कहा कि गोवा उन्हें सुकून देने वाली जगह लगता है। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि वह फेनी नहीं पीते हैं। अजय के इस जवाब के बाद भी बातचीत यहीं खत्म नहीं हुई और कपिल ने एक बार फिर फेनी को लेकर मजाक किया।

    कपिल ने कहा कि अगर अजय खुद फेनी नहीं पीते हैं तो क्या वह किसी और के लिए वहां से फेनी ला सकते हैं। इस सवाल पर अजय देवगन ने कपिल की ही बात को पलटते हुए मजेदार जवाब दिया। उन्होंने कहा, “तेरी जिंदगी में फेनी ने बहुत गड़बड़ की है पहले ही, याद रखना।”

    अजय का यह जवाब सुनकर बातचीत का अंदाज और मजेदार हो गया। शो की जज अर्चना पूरण सिंह भी इस मजाक में शामिल होती नजर आईं। उन्होंने कपिल की टांग खींचते हुए कहा कि अगर उसे मुफ्त में कुछ मिल जाए तो वह कुछ भी पी लेगा।

    इस पूरे मजाकिया संवाद में दोनों कलाकारों के बीच की सहज बातचीत देखने को मिली। कपिल जहां अजय की फिल्मों के गोवा कनेक्शन को लेकर लगातार सवाल कर रहे थे, वहीं अजय ने भी मौका मिलते ही जवाब पलटकर कपिल की ही खिंचाई कर दी।

    अजय देवगन की आगामी फिल्म ‘दृश्यम-द कन्क्लूजन’ को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। फिल्म की कहानी का संबंध गोवा से है और इसके पिछले हिस्सों की तरह इस फिल्म की शूटिंग में भी गोवा की अहम भूमिका रही है। इसी वजह से प्रमोशन के दौरान भी गोवा से जुड़े सवाल सामने आए।

    शो में हुई यह बातचीत अजय देवगन के फिल्म प्रमोशन के साथ-साथ कपिल शर्मा के साथ उनके मजाकिया अंदाज की वजह से भी चर्चा में रही। फेनी को लेकर शुरू हुआ कपिल का सवाल आखिरकार अजय के जवाब से उन्हीं पर लौट आया।

  • गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    गोवा में भी उत्तराखंड जैसा UCC लागू करके दिखाएं, असदुद्दीन ओवैसी ने अमित शाह पर साधा निशाना

    नई दिल्ली ।AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधा है। ओवैसी ने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह समान नागरिक संहिता लागू करना चाहती है तो गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा कानून लागू करके दिखाए।

    ओवैसी ने अमित शाह के उस संदर्भ पर सवाल उठाया, जिसमें वह लोगों से ‘क्रोनोलॉजी समझने’ की बात करते हैं। उन्होंने कहा कि अगर सरकार UCC को लेकर अपनी बात स्पष्ट करना चाहती है तो उसे गोवा जाकर यह ऐलान करना चाहिए कि वहां भी वही कानून लागू किया जाएगा, जो उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू किया गया है।

    उन्होंने दावा किया कि सरकार ऐसा नहीं करेगी। ओवैसी ने आरोप लगाया कि गुजरात में UCC की बात करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने गोवा के मौजूदा कानूनों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

    ओवैसी के मुताबिक, गोवा में कुछ परिस्थितियों में हिंदू दंपति के बच्चों से जुड़ी स्थिति के आधार पर पति को दूसरी शादी की अनुमति देने से संबंधित प्रावधान मौजूद हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कैथोलिक समुदाय को कुछ विशेष छूट मिली हुई है।

    उन्होंने कहा कि गोवा में कैथोलिक विवाहों के पंजीकरण की व्यवस्था भी अलग है। ओवैसी के अनुसार, कुछ मामलों में कैथोलिक विवाह का पंजीकरण सरकार के बजाय चर्च के पादरी कर सकते हैं। उन्होंने इस व्यवस्था का उल्लेख करते हुए गोवा में मौजूद वैवाहिक कानूनों में समुदाय आधारित अंतर की ओर ध्यान दिलाया।

    ओवैसी ने यह भी कहा कि चर्च की धार्मिक संस्थाएं ईसाइयों से जुड़े वैवाहिक मामलों में कुछ फैसले ले सकती हैं। इसके विपरीत, उनके मुताबिक दूसरे समुदायों के लोगों को तलाक या वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में अदालत का सहारा लेना पड़ता है।

    उन्होंने आगे दावा किया कि गोवा के कानून में कुछ परिस्थितियों में चर्च ट्रिब्यूनल को विवाह को अमान्य घोषित करने से जुड़े अधिकार भी हासिल हैं। ओवैसी ने इसकी तुलना गैर-ईसाइयों की व्यवस्था से करते हुए कहा कि उन्हें ऐसे मामलों में अदालत जाना पड़ता है।

    AIMIM प्रमुख ने इन्हीं प्रावधानों के आधार पर गोवा को पूरी तरह समान नागरिक संहिता का मॉडल बताए जाने पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि जब अलग-अलग समुदायों के लिए अलग व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो गोवा को UCC का पूरी तरह समान मॉडल बताना उचित नहीं है।

    ओवैसी ने सरकार से गोवा में भी उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसा UCC लागू करने की चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ऐसा कर सकती है तो उसे इसे करके दिखाना चाहिए। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि गोवा के UCC का उदाहरण बार-बार देकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।

  • दृश्यम 3 का ट्रेलर रिलीज, अजय देवगन के विजय सलगांवकर के सामने आखिरी लड़ाई में तबू और जयदीप अहलावत आमने-सामने

    दृश्यम 3 का ट्रेलर रिलीज, अजय देवगन के विजय सलगांवकर के सामने आखिरी लड़ाई में तबू और जयदीप अहलावत आमने-सामने


    नई दिल्ली ।
    अजय देवगन की क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’, जिसे ‘दृश्यम 3’ के नाम से भी जाना जा रहा है, का बहुप्रतीक्षित ट्रेलर रिलीज हो गया है। यह फिल्म साल 2015 में रिलीज हुई ‘दृश्यम’ की कहानी का कन्क्लूजन बताई जा रही है। फिल्म के जरिए सलगांवकर परिवार की क्राइम हिस्ट्री के आखिरी अध्याय को सामने लाया जाएगा। ट्रेलर रिलीज होने के साथ ही फिल्म की कहानी को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।

    ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ का ट्रेलर गोवा में आयोजित एक खास कार्यक्रम के दौरान लॉन्च किया गया। इस मौके पर फिल्म के मेकर्स, प्रोड्यूसर्स और पूरी स्टारकास्ट मौजूद रही। ट्रेलर को सस्पेंस और रहस्य से भरपूर रखा गया है। इसमें एक बार फिर विजय सलगांवकर के सामने कई ऐसे सवाल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं, जिनके जवाब कहानी के आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है।

    ट्रेलर की शुरुआत तबू से होती है। वह सौरभ शुक्ला के किरदार से विजय की कहानी को लेकर सवाल करती नजर आती हैं। तबू पूछती हैं कि अगर उन्हें विजय की कहानी का सीक्वल लिखना पड़े तो उनके हिसाब से इस बार विजय क्या करेगा। इसके जवाब में सौरभ शुक्ला कहते हैं कि विजय क्या करेगा और क्या नहीं करेगा, यह विजय जानता है या फिर अल्लाह जानता है।

    इसके बाद अजय देवगन की आवाज सुनाई देती है। वह सवाल करते हैं कि जब कहा जा रहा है कि उनके खिलाफ मजबूत सबूत हैं, तो आखिर किस सबूत की बात की जा रही है। इसी दौरान स्क्रीन पर श्रिया और ईशिता को परेशान हालत में कुछ कागज जलाते हुए दिखाया जाता है। ये दृश्य कहानी में पुराने राज और नए सवालों के बीच संबंध को लेकर रहस्य बनाए रखते हैं।

    ट्रेलर में रजत कपूर का किरदार अपने बेटे के लिए न्याय की मांग करता नजर आता है। वहीं तबू का किरदार न्याय से आगे बढ़कर बदले की बात करता है। इससे दोनों पक्षों के बीच टकराव और कहानी में मौजूद तनाव का अंदाजा मिलता है। इसके बाद प्रकाश राज की दमदार एंट्री होती है, जहां वह वकील की भूमिका में दिखाई देते हैं। उनके किरदार का संवाद विजय को हल्के में न लेने का संकेत देता है।

    ट्रेलर में जयदीप अहलावत की भी अहम एंट्री दिखाई गई है। वह एसपी क्राइम ब्रांच के किरदार में नजर आते हैं और उनका अंदाज काफी सख्त दिखाई देता है। जयदीप का किरदार विजय के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बेहद आत्मविश्वासी नजर आता है। उनके संवाद से भी यह संकेत मिलता है कि वह जिस व्यक्ति पर नजर डालते हैं, उसके लिए मुश्किल समय शुरू हो जाता है।

    ‘दृश्यम द कन्क्लूजन’ में अजय देवगन एक बार फिर विजय सलगांवकर की भूमिका में नजर आएंगे। फिल्म की कहानी में पुराने मामलों, सबूतों, न्याय और बदले के बीच संघर्ष दिखाई दे रहा है। ट्रेलर में कई किरदारों की मौजूदगी ने यह सवाल खड़ा किया है कि इस बार विजय अपने परिवार को बचाने के लिए क्या कदम उठाएगा और क्या वह आखिरी लड़ाई में भी अपने राज को सुरक्षित रख पाएगा। फिल्म 2 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

  • यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    यूपी समेत पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू, फरवरी-मार्च 2027 में मतदान की तैयारी तेज होने के संकेत

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी और प्रशासनिक तैयारियां तेज होती दिखाई दे रही हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा परिस्थितियों और प्रशासनिक तैयारियों को देखते हुए इन राज्यों में फरवरी से मार्च के बीच मतदान कराए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    पांचों राज्यों में उत्तर प्रदेश सबसे बड़ा चुनावी राज्य है और यहां विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल 22 मई 2027 को समाप्त होगा। इसके बावजूद चुनाव इससे काफी पहले कराए जा सकते हैं। यदि फरवरी या मार्च में मतदान होता है, तो उत्तर प्रदेश के मतदाताओं को विधानसभा का कार्यकाल समाप्त होने से करीब दो महीने पहले ही अपने प्रतिनिधियों के चुनाव का मौका मिल जाएगा।

    मौजूदा समय में पांचों राज्यों के विधानसभा कार्यकाल समाप्त होने की तारीखों पर नजर डालें तो सबसे पहले मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च 2027 को पूरा होगा। इसके अगले दिन यानी 14 मार्च को गोवा विधानसभा का कार्यकाल खत्म होगा। पंजाब विधानसभा का कार्यकाल 16 मार्च और उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 को समाप्त होना है। उत्तर प्रदेश में सबसे बाद में 22 मई 2027 को मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल पूरा होगा।

    ऐसे में चुनाव कार्यक्रम इस तरह तैयार किए जाने की संभावना है कि पांचों राज्यों में मतदान की प्रक्रिया 13 मार्च से पहले पूरी हो जाए। निर्वाचन प्रक्रिया पूरी करने और परिणाम घोषित करने के लिए चुनाव आयोग को पर्याप्त समय की जरूरत होगी। इसी वजह से फरवरी से मतदान शुरू होने की संभावना महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    चुनाव की तैयारियों में जनगणना और मतदाता सूची से जुड़े काम भी महत्वपूर्ण हैं। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब और गोवा में जनगणना का काम 1 दिसंबर 2026 से 4 जनवरी 2027 के बीच पूरा किए जाने की योजना है। चुनाव और जनगणना दोनों में बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों की ड्यूटी लगती है। खासतौर पर शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों की तैनाती दोनों प्रक्रियाओं में होने के कारण इनके बीच समय का तालमेल बेहद जरूरी होता है।

    जनगणना की तारीखों में बदलाव से चुनावी प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर संभावित टकराव कम होने की उम्मीद है। इससे चुनाव आयोग और राज्य प्रशासन के लिए चुनावी तैयारियों को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।

    मतदाता सूची को लेकर भी पांचों राज्यों में प्रक्रिया चल रही है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के बाद उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 13.4 करोड़ बताई गई है। गोवा में यह संख्या करीब 10.6 लाख और मणिपुर में करीब 19.3 लाख रह गई है। पंजाब और उत्तराखंड की अंतिम मतदाता सूची जारी होने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी।

    आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दलों ने भी अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सीटों के समीकरण, उम्मीदवारों के चयन, गठबंधन की संभावनाओं और क्षेत्रीय मुद्दों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है। खासकर उत्तर प्रदेश में चुनावी मुकाबला राष्ट्रीय राजनीति पर भी व्यापक असर डाल सकता है।

    हालांकि मतदान की सटीक तारीखों की आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। अंतिम चुनाव कार्यक्रम निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित किया जाएगा। फिलहाल प्रशासनिक तैयारियों और विधानसभा कार्यकाल की समयसीमा को देखते हुए फरवरी-मार्च 2027 का दौर पांचों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • गोवा ट्रैवल गाइड: शानदार बीच, ऐतिहासिक चर्च और रंगीन नाइटलाइफ का परफेक्ट प्लान

    गोवा ट्रैवल गाइड: शानदार बीच, ऐतिहासिक चर्च और रंगीन नाइटलाइफ का परफेक्ट प्लान


    नई दिल्ली। अगर आप छुट्टियों में किसी ऐसी जगह की तलाश कर रहे हैं जहां प्राकृतिक सुंदरता, एडवेंचर, इतिहास और मस्ती सब कुछ एक साथ मिले, तो गोवा आपके लिए बेस्ट डेस्टिनेशन है। अरब सागर के किनारे बसा यह छोटा सा राज्य हर साल लाखों पर्यटकों को आकर्षित करता है।

    गोवा के बीचेज इसकी सबसे बड़ी पहचान हैं। उत्तर गोवा में स्थित Baga Beach और Calangute Beach अपनी वॉटर स्पोर्ट्स एक्टिविटीज और बीच पार्टीज़ के लिए मशहूर हैं। यहां पैरासेलिंग, जेट स्कीइंग और बनाना राइड जैसे एडवेंचर टूरिस्ट्स को रोमांच से भर देते हैं। वहीं, शांत वातावरण चाहने वालों के लिए अंजुना और वागाटोर बीच बेहतरीन विकल्प हैं।

    इतिहास और संस्कृति की बात करें तो गोवा में कई शानदार चर्च और किले मौजूद हैं। Basilica of Bom Jesus यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट है, जहां सेंट फ्रांसिस जेवियर के अवशेष रखे गए हैं। यह जगह न सिर्फ धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि इसकी वास्तुकला भी पर्यटकों को आकर्षित करती है। इसके अलावा Fort Aguada अरब सागर के किनारे स्थित एक ऐतिहासिक किला है, जहां से समुद्र का नजारा बेहद मनमोहक दिखाई देता है। गोवा की राजधानी Panaji भी घूमने लायक जगहों में से एक है।

    यहां की रंग-बिरंगी गलियां, पुर्तगाली वास्तुकला और नदी किनारे का शांत वातावरण पर्यटकों को एक अलग अनुभव देता है।

    अगर आप नाइटलाइफ के शौकीन हैं, तो गोवा आपके लिए जन्नत से कम नहीं है। बीच शैक, क्लब्स और ओपन एयर पार्टियों में रातभर मस्ती का माहौल रहता है। संगीत, डांस और समुद्री हवा का संगम गोवा की नाइटलाइफ को खास बनाता है।

    गोवा ट्रिप का सबसे अच्छा तरीका यह है कि आप 4 से 5 दिन का प्लान बनाएं। पहले दो दिन बीच और वाटर स्पोर्ट्स के लिए रखें, एक दिन चर्च और किले घूमने के लिए, और बाकी समय नाइटलाइफ और लोकल मार्केट्स एक्सप्लोर करने के लिए रखें। यहां की लोकल फूड, खासकर सी-फूड और गोअन फिश करी, ट्रिप को और यादगार बना देती है।

    गोवा सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक अनुभव है जहां हर मोड़ पर आपको नई ऊर्जा, आज़ादी और खुशी का एहसास होता है।

  • इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई

    इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में हाई-प्रोफाइल ड्रग पार्टियां: 15000 में एंट्री, युवतियों को पैडलर बनाकर 5 राज्यों में एमडी ड्रग सप्लाई


    नई दिल्ली। इंदौर पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसमें भोपाल का अबान शकील मुख्य आरोपी बताया जा रहा है। पुलिस ने अबान को इंदौर में ड्रग डिलीवरी के इंतजार के दौरान गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अबान गोवा, इंदौर, मुंबई, दिल्ली और भोपाल जैसे कई बड़े शहरों में एमडी ड्रग की सप्लाई में सक्रिय था। इस गिरोह में दो युवतियां भी पैडलर के रूप में शामिल थीं, जिन्हें अबान और उसके साथी वैभव उर्फ बाबा शर्मा मोटे कमीशन और ड्रग की फ्री खुराक का लालच देकर तस्करी के काम में जोड़ते थे।
    पुलिस ने अबान की निशानदेही पर दो युवतियों और बाबा शर्मा को भी गिरफ्तार किया है।

    इंदौर पुलिस की जांच में यह भी स्पष्ट हुआ है कि अबान और बाबा शर्मा अंतरराज्यीय एमडी तस्कर गिरोह के सदस्य हैं और यह गिरोह चार से पांच राज्यों में ड्रग तस्करी कर रहा था। जांच के दौरान यह तथ्य भी उजागर हुआ कि इवेंट मैनेजमेंट की आड़ में आरोपी बाबा शर्मा, अलीशा मसीह और नेहा पार्टीज का आयोजन करते थे। इन पार्टियों में एंट्री फीस 10 से 15 हजार रुपए तक ली जाती थी और रईसजादों को ड्रग खपाने का काम किया जाता था।

    पुलिस ने बताया कि अबान अपनी पार्टीज के जरिए युवाओं को आकर्षित करता था और बाद में उन्हें एमडी की खुराक देकर पार्टी कल्चर के नाम पर नशे का आदी बनाता था। इसके बाद वही युवतियां और अन्य सदस्य ड्रग सप्लाई के लिए आगे काम करते थे। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से गोवा, दिल्ली, इंदौर, भोपाल, मुंबई सहित अन्य शहरों में पार्टीज आयोजित करते रहे हैं।

    अब तक इस मामले में कुल चार गिरफ्तारियां हुई हैं।

    इंदौर पुलिस ने अबान के साथ कनाड़िया, मुंबई और देवास से गिरोह के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपी वैभव उर्फ बाबा ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह अबान और युवतियों के साथ मिलकर एमडी ड्रग्स की तस्करी करता था।

    पुलिस के मुताबिक, गिरोह गोवा सहित कई राज्यों के पब, बार और क्लबों में एमडी ड्रग की सप्लाई करता था और इसकी कीमत लगभग 10 हजार रुपए प्रति ग्राम थी। पुलिस अभी आरोपी से एमडी ड्रग्स के सोर्स के बारे में पूछताछ कर रही है और उसके बाद गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी भी संभव है।

    इस बीच, अबान शकील का नाम ड्रग तस्करी में फंसने के बाद भोपाल डिवीजन क्रिकेट एसोसिएशन (बीडीसीए) ने उसे अपनी प्रारंभिक सदस्यता से बर्खास्त कर दिया है। बीडीसीए ने एक बयान जारी कर इसकी पुष्टि की है। अबान बीडीसीए का आजीवन सदस्य भी था। पुलिस ने बताया कि अबान कोहेफिजा इलाके में स्थित सैफिया कॉलेज मैदान के पास बने करोड़ों रुपए कीमत के बंगले में रहता था और उसके घर के पोर्च पर लग्जरी कारें खड़ी रहती थीं।
    इस मामले में इंदौर के कनाड़िया थाने में अपराध क्रमांक 37/2025 के तहत धारा 8/22 एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। अब तक आरोपियों से कुल 15.95 ग्राम एमडी ड्रग्स, बिना नंबर की इको स्पोर्ट्स कार, थार और एक एसयूवी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि अबान थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था और उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं।

    इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाड़िया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अबान की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस ने मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच तेज कर दी है, जिससे जल्द ही गिरोह के अन्य सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना है।