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  • धनतेरस पर सोना खरीदने का बदला तरीका, अब घर में रखे बिना भी खरीद सकेंगे असली गोल्ड, जानें क्या है गोल्ड वॉल्ट

    धनतेरस पर सोना खरीदने का बदला तरीका, अब घर में रखे बिना भी खरीद सकेंगे असली गोल्ड, जानें क्या है गोल्ड वॉल्ट


    नई दिल्ली। धनतेरस का त्योहार आते ही बाजार में सोने की खरीदारी बढ़ जाती है। भारतीय परिवारों में सोना खरीदना केवल धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि भविष्य के लिए संपत्ति जुटाने का एक महत्वपूर्ण तरीका भी माना जाता है। हालांकि सोने की पारंपरिक खरीदारी के साथ कई तरह की परेशानियां भी जुड़ी होती हैं। गहनों की शुद्धता की जांच करवाना हो या खरीदे गए सोने को सुरक्षित रखने के लिए बैंक लॉकर की व्यवस्था करनी हो। इन सबके लिए अतिरिक्त समय और खर्च करना पड़ता है। अब तकनीक ने सोना खरीदने का तरीका भी बदलना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में धन एप का गोल्ड वॉल्ट एक नए विकल्प के रूप में सामने आया है। इसके जरिए निवेशक डिजिटल माध्यम से वास्तविक सोना खरीद सकते हैं और उसे सुरक्षित स्थान पर रखवा सकते हैं।

    क्या है गोल्ड वॉल्ट की सुविधा

    गोल्ड वॉल्ट एक ऐसा फीचर है जिसके माध्यम से निवेशक मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX से जुड़े निर्धारित कॉन्ट्रैक्ट्स के आधार पर भौतिक सोना और चांदी खरीद सकते हैं। सामान्य डिजिटल गोल्ड प्लेटफॉर्म से इसकी व्यवस्था अलग बताई गई है। इसमें खरीदारी एक्सचेंज के कॉन्ट्रैक्ट और भौतिक निपटान से जुड़ी होती है। इस व्यवस्था में बाजार की लाइव कीमतों के आधार पर ऑर्डर दिया जाता है। लेनदेन पूरा होने के बाद खरीदी गई कमोडिटी की रसीदें निवेशक के खाते में दर्ज होती हैं। यह व्यवस्था संबंधित एक्सचेंज और नियामकीय नियमों के तहत संचालित होती है।

    कैसे काम करता है गोल्ड वॉल्ट

    इस सुविधा का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले यूजर को धन एप में गोल्ड वॉल्ट को एक्टिव करना होता है। इसके बाद उसका कमोडिटी रिसीट्स होल्डिंग खाता बनाया जाता है। इसे शेयर बाजार के डीमैट खाते की तरह समझा जा सकता है जहां खरीदी गई कमोडिटी से जुड़ी रसीदें दर्ज रहती हैं। इसके बाद निवेशक एप में उपलब्ध कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार सोना खरीदने का ऑर्डर दे सकता है। ऑर्डर MCX पर निष्पादित होता है और निर्धारित निपटान प्रक्रिया पूरी होने के बाद सोने की रसीदें खाते में दिखाई देने लगती हैं। खरीदा गया सोना एक्सचेंज से स्वीकृत सुरक्षित तिजोरी में रखा जाता है। जरूरत पड़ने पर निवेशक अपने पंजीकृत पते पर भौतिक डिलीवरी का अनुरोध भी कर सकता है। हालांकि डिलीवरी के लिए अलग शुल्क और शर्तें लागू हो सकती हैं।

    सोने की शुद्धता के लिए तय हैं अलग मानक

    गोल्ड वॉल्ट में सोने की शुद्धता कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार निर्धारित होती है। एक ग्राम के गोल्ड पेटल और आठ ग्राम के गोल्ड गिनी के साथ दस ग्राम के गोल्ड टेन कॉन्ट्रैक्ट में 999 शुद्धता का मानक बताया गया है। वहीं 100 ग्राम के गोल्ड मिनी और एक किलोग्राम के गोल्ड कॉन्ट्रैक्ट में 995 शुद्धता निर्धारित है। इसलिए निवेश करने से पहले यह समझना जरूरी है कि किस कॉन्ट्रैक्ट के तहत कितना शुद्ध सोना खरीदा जा रहा है।

    गोल्ड वॉल्ट के फायदे और नुकसान

    इस सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि निवेशक को घर में सोना रखने की चिंता नहीं करनी पड़ती। चोरी या सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम हो जाते हैं। बाजार की कीमतों से जुड़ी खरीदारी होने के कारण कीमतों में पारदर्शिता मिल सकती है। धनतेरस के विशेष ऑफर के तहत 19 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक शून्य ब्रोकरेज और शून्य मार्कअप की सुविधा देने की जानकारी दी गई है।

    हालांकि इस सुविधा की कुछ सीमाएं भी हैं। इसमें 100 या 500 रुपये जैसी मनचाही छोटी रकम से निवेश नहीं किया जा सकता। खरीदारी एक्सचेंज के निर्धारित कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार ही करनी होती है। इसके अलावा जीएसटी और स्टांप ड्यूटी के साथ स्टोरेज तथा डिलीवरी शुल्क भी कुल लागत बढ़ा सकते हैं। इसलिए केवल सोने की लाइव कीमत देखकर निवेश का फैसला करना सही नहीं होगा।

    धनतेरस पर गोल्ड वॉल्ट के जरिए सोना खरीदने की योजना बना रहे लोगों को सभी शुल्क और नियम पहले समझ लेने चाहिए। साथ ही यह भी जांचना चाहिए कि भौतिक डिलीवरी कब और किन शर्तों पर मिलेगी। किसी भी निवेश से पहले अपनी जरूरत और बजट के अनुसार विकल्पों की तुलना करना जरूरी है।

  • सोने की कीमतों में उछाल फिर भी चीन नहीं रुका! अगस्त में खरीदा 20 टन से ज्यादा गोल्ड लगातार 22 महीने की खरीदारी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता

    सोने की कीमतों में उछाल फिर भी चीन नहीं रुका! अगस्त में खरीदा 20 टन से ज्यादा गोल्ड लगातार 22 महीने की खरीदारी ने बढ़ाई दुनिया की चिंता


    नई दिल्ली । चीन एक बार फिर अपने गोल्ड रिजर्व को लेकर पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और इसके बावजूद चीन ने सोने की खरीदारी रोकने के बजाय इसे और तेज कर दिया है। अगस्त 2026 में चीन के केंद्रीय बैंक ने अपने गोल्ड रिजर्व में 20 टन से ज्यादा सोना जोड़ा है। खास बात यह है कि चीन की यह खरीदारी लगातार 22वें महीने भी जारी रही है। यानी करीब दो साल से ड्रैगन लगातार अपने सोने के भंडार को बढ़ाने में जुटा है।

    चीन के इस कदम को सामान्य निवेश की तरह नहीं देखा जा रहा है क्योंकि सोने की कीमतों में तेजी के बावजूद उसकी खरीदारी जारी है। ताजा खरीदारी के बाद चीन का गोल्ड रिजर्व बढ़कर करीब 2387 टन हो गया है। रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में चीन के गोल्ड रिजर्व में जुलाई के मुकाबले करीब 650000 औंस की बढ़ोतरी हुई है। यह अक्टूबर 2023 के बाद किसी एक महीने में चीन की सबसे बड़ी सोने की खरीदारी बताई गई है। अक्टूबर 2023 में चीन के रिजर्व में करीब 740000 औंस का इजाफा हुआ था।

    चीन की लगातार जारी गोल्ड खरीदारी के पीछे उसकी लंबी अवधि की आर्थिक रणनीति को अहम वजह माना जा रहा है। चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार को ज्यादा मजबूत और संतुलित बनाना चाहता है। इसके लिए वह केवल अमेरिकी डॉलर पर निर्भर रहने के बजाय सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों में भी अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में लगातार बदलते हालात के बीच सोने को एक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है और चीन इसी वजह से अपने रिजर्व में इसकी मात्रा बढ़ाता दिखाई दे रहा है।

    चीन का यह कदम उसकी आर्थिक रणनीति का बड़ा हिस्सा माना जा सकता है। लगातार 22 महीने तक गोल्ड खरीदना बताता है कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है बल्कि इसके पीछे लंबी अवधि की योजना काम कर रही है। चीन अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ ही वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहता है। सोने के बढ़ते भंडार से उसे विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने का मौका मिलता है और किसी एक मुद्रा या संपत्ति पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

    चीन की यह खरीदारी साल 2015 के बाद सबसे लंबे गोल्ड खरीदारी अभियान के रूप में भी सामने आई है। 22 महीने से लगातार जारी यह सिलसिला इस बात का संकेत है कि बीजिंग सोने को अपने आर्थिक सुरक्षा कवच के तौर पर देख रहा है। दुनिया में आर्थिक और भू राजनीतिक अनिश्चितता के बीच चीन का यह कदम अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले समय में अगर चीन इसी रफ्तार से सोना खरीदता रहा तो उसके गोल्ड रिजर्व में और बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

  • मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं

    मुनाफावसूली के बाद भी सोने में तेजी के संकेत, एक्सपर्ट बोले- इस रेंज में खरीदारी का मौका न गंवाएं


    नई दिल्ली । सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ने के संकेत नहीं दे रही है। पिछले चार वर्षों में जिस रफ्तार से सोने की कीमतों ने ऊंचाई हासिल की है उसने निवेशकों और खरीदारों दोनों को हैरान कर दिया है। सितंबर 2022 में करीब 50 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास रहने वाला 24 कैरेट सोना अब सितंबर 2026 में करीब 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया है। यानी चार साल में सोने ने करीब 210 फीसदी का जबरदस्त रिटर्न दिया है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में मुनाफावसूली जरूर देखने को मिली है लेकिन बाजार विशेषज्ञ इसे तेजी के दौर का अंत नहीं बल्कि लंबे बुल रन के बीच सामान्य करेक्शन मान रहे हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 29 जनवरी को 5608 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद कीमतों में करीब 20 फीसदी की गिरावट आई और फिलहाल सोना लगभग 4500 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है। हालांकि बाजार जानकारों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 4400 डॉलर प्रति औंस का महत्वपूर्ण स्तर बना रहता है तब तक सोने की तेजी को मजबूत समर्थन मिलता रहेगा। घरेलू बाजार में भी करीब 1.49 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक बाजार में बड़ी गिरावट नहीं आती है तो दीपावली तक सोने का भाव 1.60 लाख से 1.62 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

    सोने की तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की लगातार बढ़ती खरीदारी है। वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। इसे डी डॉलराइजेशन की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। कई देशों को अब यह चिंता है कि विदेशी मुद्रा या दूसरे देशों के वित्तीय साधनों पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है जबकि अपने पास रखा सोना अधिक सुरक्षित संपत्ति माना जाता है। यही वजह है कि चीन जैसे देश लगातार अपने स्वर्ण भंडार में इजाफा कर रहे हैं और अन्य केंद्रीय बैंक भी बड़ी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

    सोने की मजबूती की दूसरी बड़ी वजह इसकी मौद्रिक परिसंपत्ति के रूप में बढ़ती अहमियत है। पहले सोने को मुख्य रूप से महंगाई और आर्थिक संकट से बचाव के साधन के तौर पर देखा जाता था लेकिन अब वैश्विक स्तर पर इसे करेंसी के अवमूल्यन और वित्तीय जोखिमों के खिलाफ मजबूत सुरक्षा कवच माना जा रहा है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में निवेशकों और देशों दोनों के लिए सोना भरोसेमंद संपत्ति बनकर उभरा है।

    इसके अलावा भारत और चीन जैसे बड़े बाजारों में त्योहारों और शादी के सीजन के दौरान बढ़ने वाली भौतिक मांग भी कीमतों को मजबूत आधार दे रही है। आपूर्ति की सीमित स्थिति और संस्थागत खरीदारी के कारण सोने पर दबाव कम दिखाई दे रहा है। हालांकि कीमतों में बीच बीच में गिरावट संभव है लेकिन लंबी अवधि का रुझान अभी भी मजबूत माना जा रहा है।

    खरीदारी को लेकर विशेषज्ञों की सलाह है कि शादी या अन्य जरूरी जरूरतों के लिए सोना खरीदने वालों को बहुत बड़ी गिरावट का इंतजार नहीं करना चाहिए। यदि कीमत 1.45 लाख से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में नीचे आती है तो चरणबद्ध तरीके से खरीदारी की जा सकती है। एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय जरूरत और बजट के हिसाब से 40 से 50 फीसदी खरीदारी पहले की जा सकती है। हालांकि निवेशकों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सोने की कीमतें वैश्विक बाजार और रुपये की चाल से प्रभावित होती हैं इसलिए तेजी की उम्मीद के बावजूद निवेश से पहले अपनी वित्तीय जरूरत और जोखिम क्षमता का आकलन जरूर करना चाहिए।

  • सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    सोने पर बढ़ा दुनिया का भरोसा: केंद्रीय बैंक बढ़ा रहे गोल्ड रिजर्व, कीमतों में बड़ी तेजी के संकेत

    नई दिल्ली । वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ती अनिश्चितताओं के बीच सोना एक बार फिर सबसे भरोसेमंद निवेश विकल्प के रूप में उभर रहा है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ा रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के ताजा वार्षिक सर्वेक्षण ने यह संकेत दिया है कि आने वाले वर्षों में यह रुझान और तेज हो सकता है। इससे न केवल गोल्ड रिजर्व का महत्व बढ़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

    सर्वेक्षण में 76 केंद्रीय बैंकों ने हिस्सा लिया, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है। इसमें शामिल 84 प्रतिशत केंद्रीय बैंकों का मानना है कि अगले पांच वर्षों में वैश्विक भंडार में सोने की हिस्सेदारी मौजूदा स्तर की तुलना में काफी अधिक होगी। दिलचस्प बात यह है कि विकसित देशों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक भी इस मुद्दे पर लगभग एक जैसी राय रखते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक वित्तीय प्रणाली में हो रहे बदलावों के कारण केंद्रीय बैंक अपनी आरक्षित संपत्तियों में विविधता लाने की कोशिश कर रहे हैं। लंबे समय तक अमेरिकी डॉलर को सबसे सुरक्षित रिजर्व मुद्रा माना जाता रहा, लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक तनाव, आर्थिक प्रतिबंधों और वैश्विक व्यापार में बदलावों के चलते कई देशों ने वैकल्पिक सुरक्षित संपत्तियों की तलाश शुरू कर दी है। सोना इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आया है।

    अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के आंकड़े भी इस बदलाव की पुष्टि करते हैं। वैश्विक विदेशी मुद्रा भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी लगातार घट रही है। सर्वेक्षण में शामिल 74 प्रतिशत रिजर्व प्रबंधकों का अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में डॉलर की हिस्सेदारी और कम हो सकती है। ऐसे में सोना केंद्रीय बैंकों के लिए सुरक्षा कवच की भूमिका निभा सकता है।

    बाजार विशेषज्ञ और केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का कहना है कि दीर्घकालिक दृष्टि से सोने का रुख बेहद मजबूत बना हुआ है। हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई के दबाव के कारण निकट भविष्य में सोने पर कुछ दबाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी संभावनाएं सकारात्मक हैं। उनका अनुमान है कि अगले एक वर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना नई ऊंचाइयों को छू सकता है।

    सोने की बढ़ती मांग केवल निवेशकों तक सीमित नहीं है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार को मजबूत आधार प्रदान कर रही है। जब दुनिया के सबसे बड़े वित्तीय संस्थान अपनी संपत्तियों का बड़ा हिस्सा सोने में स्थानांतरित करते हैं, तो यह निवेशकों के लिए भी एक मजबूत संकेत माना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक संकट, युद्ध, महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन जैसी परिस्थितियों में सोने की मांग तेजी से बढ़ जाती है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक अनिश्चितता बनी रहती है और केंद्रीय बैंक इसी तरह सोना खरीदते रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में गोल्ड मार्केट में नई तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशकों के लिए यह संकेत है कि सोना केवल आभूषण नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा और दीर्घकालिक निवेश का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बनता जा रहा है।

  • सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?

    सोना-चांदी में आग! एक दिन में ₹3000 उछला गोल्ड, ₹2.46 लाख पहुंची चांदी, क्या अभी खरीदना सही या खतरा?



    नई दिल्ली। 6 मई को सर्राफा बाजार में फिर तेज उछाल देखने को मिला और सोना-चांदी के दाम नई ऊंचाई की ओर बढ़ गए। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 24 कैरेट सोना 10 ग्राम पर ₹3000 की जोरदार बढ़त के साथ ₹1.51 लाख तक पहुंच गया। इससे पहले यह ₹1.48 लाख पर कारोबार कर रहा था। वहीं चांदी ने भी बड़ी छलांग लगाते हुए ₹6000 की तेजी के साथ ₹2.46 लाख प्रति किलो का स्तर छू लिया, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    अगर पूरे साल के ट्रेंड पर नजर डालें तो 2026 में सोना अब तक ₹18 हजार महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में 31 दिसंबर 2025 को जहां सोना ₹1.33 लाख प्रति 10 ग्राम था, वहीं अब यह ₹1.51 लाख तक पहुंच चुका है। इसी तरह चांदी ने भी निवेशकों को चौंकाते हुए ₹16 हजार की बढ़त दर्ज की है। साल की शुरुआत में ₹2.30 लाख प्रति किलो रही चांदी अब ₹2.46 लाख के स्तर पर कारोबार कर रही है। हालांकि, इससे पहले जनवरी में सोना ₹1.76 लाख और चांदी ₹3.86 लाख का ऑलटाइम हाई भी छू चुकी है, जो बाजार की जबरदस्त अस्थिरता को दर्शाता है।

    विशेषज्ञों के मुताबिक सोने-चांदी में यह तेजी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग की वजह से आ रही है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि बाजार में तेजी जितनी तेज होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ जाता है।

    अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद अहम है। सबसे पहले, हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें, जिससे उसकी शुद्धता की गारंटी मिलती है। इसके अलावा खरीदारी से पहले सोने की कीमत को अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें, क्योंकि 24, 22 और 18 कैरेट के हिसाब से कीमतें अलग होती हैं।

    वहीं चांदी खरीदते समय भी सावधानी जरूरी है। असली चांदी की पहचान के लिए मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और क्लॉथ टेस्ट जैसे आसान तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। असली चांदी चुंबक से नहीं चिपकती और उस पर बर्फ जल्दी पिघलती है।

    कुल मिलाकर, सोना-चांदी की कीमतों में आई यह तेजी जहां निवेशकों के लिए अवसर लेकर आई है, वहीं आम खरीदारों के लिए चिंता भी बढ़ा रही है। ऐसे में बाजार की चाल समझकर ही निवेश या खरीदारी करना समझदारी होगी।

  • अनिश्चितता के दौर में गोल्ड ETF बना सुरक्षित विकल्प, AUM पहुंचा 1.7 लाख करोड़

    अनिश्चितता के दौर में गोल्ड ETF बना सुरक्षित विकल्प, AUM पहुंचा 1.7 लाख करोड़


    नई दिल्ली। वैश्विक अस्थिरता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच निवेशकों का भरोसा एक बार फिर सोने पर मजबूत होता दिख रहा है। खासतौर पर डिजिटल निवेश के रूप में Gold ETF ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। मार्च 2026 में गोल्ड ETF का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹1,71,468 करोड़ हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना उछाल को दर्शाता है।
    पांच साल में धमाकेदार ग्रोथ

    ICRA Analytics की रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड ETF ने पिछले पांच वर्षों में करीब 64.76% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल की है। मार्च 2021 में जहां AUM सिर्फ ₹14,122 करोड़ था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है।

    सिर्फ एक साल में ही AUM ₹58,887 करोड़ (मार्च 2025) से बढ़कर ₹1.71 लाख करोड़ पहुंच गया—यानी करीब 191% की जोरदार बढ़ोतरी।
     इनफ्लो भी मजबूत, लेकिन मासिक आधार पर गिरावट

    मार्च 2026 में गोल्ड ETF में ₹2,265 करोड़ का शुद्ध निवेश (इनफ्लो) आया, जबकि पिछले साल इसी महीने ₹77 करोड़ की निकासी हुई थी। हालांकि फरवरी 2026 के ₹5,254 करोड़ के मुकाबले मार्च में इनफ्लो करीब 56% घटा है।

    इस गिरावट की वजह सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी और वैश्विक जोखिम में अस्थायी कमी मानी जा रही है।
     क्यों बढ़ रहा है गोल्ड ETF में निवेश?

    विशेषज्ञों के अनुसार, दो बड़े कारण इस उछाल के पीछे हैं—
    वैश्विक अनिश्चितता और तनाव
    सोने की लगातार मजबूत कीमतें
    इन हालात में निवेशक सुरक्षित विकल्प की तलाश में रहते हैं और सोना पारंपरिक रूप से “सेफ हेवन” माना जाता है। इसलिए Gold ETF तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
     पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का पसंदीदा विकल्प

    फिलहाल बाजार में 26 गोल्ड ETF स्कीम उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 नई स्कीम वित्त वर्ष 2025-26 में लॉन्च हुई हैं।

    इन फंड्स ने पिछले एक साल में करीब 58% से 62% तक का रिटर्न दिया है, जबकि 5 साल का CAGR रिटर्न लगभग 26% के आसपास रहा है।

    विशेषज्ञ मानते हैं कि गोल्ड ETF निवेश पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और लॉन्ग टर्म रिटर्न के लिए बेहतर विकल्प है, जबकि फिजिकल गोल्ड अधिकतर पारंपरिक उपयोग के लिए खरीदा जाता है।

     गिरावट के बावजूद भरोसा कायम

    हालांकि हाल के महीनों में इनफ्लो में थोड़ी कमी आई है, लेकिन निवेश पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। इससे साफ है कि निवेशकों का भरोसा अब भी इस एसेट क्लास पर कायम है और आगे भी इसमें स्थिर ग्रोथ की संभावना बनी हुई है।

  • सोना दो दिन में ₹4 हजार महंगा, 10 ग्राम 24 कैरेट का भाव ₹1.59 लाख पहुंचा, चांदी की कीमतें गिरीं

    सोना दो दिन में ₹4 हजार महंगा, 10 ग्राम 24 कैरेट का भाव ₹1.59 लाख पहुंचा, चांदी की कीमतें गिरीं


    नई दिल्ली । आज यानी 24 फरवरी को सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,021 बढ़कर ₹1,59,241 प्रति 10 ग्राम हो गया है। इससे पहले यह ₹1,58,220 पर था। यानी दो कारोबारी दिनों में सोना लगभग ₹4 हजार महंगा हुआ है।

    वहीं, चांदी के दामों में गिरावट देखने को मिली। एक किलो चांदी की कीमत आज ₹1,163 घटकर ₹2,62,912 पर आ गई, जबकि कल यह ₹2,64,075 प्रति किलो थी।इस साल सोने और चांदी की कीमतों में पहले से ही तेजी रही है। 2026 में अब तक सोना ₹26,000 और चांदी ₹33,000 महंगी हो चुकी है। जनवरी में 29 तारीख को सोने ने ₹1,76,000 और चांदी ने ₹3,86,000 प्रति किलो का ऑल टाइम हाई भी छुआ था।

    पिछले साल 2025 में भी सोने और चांदी ने निवेशकों को बड़ा लाभ दिया। 31 दिसंबर 2024 को 10 ग्राम 24 कैरेट सोना ₹76,000 का था, जो 31 दिसंबर 2025 को ₹1,33,000 हो गया, यानी लगभग ₹57,000 की बढ़ोतरी। चांदी में भी 167% का इजाफा हुआ। 31 दिसंबर 2024 को एक किलो चांदी ₹86,000 थी, जो साल के अंत तक ₹2,30,000 प्रति किलो हो गई।

    आने वाले समय में सोने की कीमतों को लेकर UBS जैसी इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनियों ने अनुमान लगाया है कि मांग और खरीदारी और बढ़ सकती है। 2025 में दुनिया के केंद्रीय बैंकों ने 863 टन सोना खरीदा था, जबकि 2026 में यह आंकड़ा 950 टन तक पहुंचने का अनुमान है। गोल्ड ईटीएफ में निवेश भी 825 टन तक होने की उम्मीद है। रिपोर्ट के अनुसार साल के मध्य तक सोना $6,200 प्रति औंस तक जा सकता है, यानी भारतीय बाजार में 10 ग्राम सोने का भाव ₹1.80 लाख तक पहुंच सकता है।

    सोना खरीदते समय ध्यान रखें ये बातें:

    सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड हॉलमार्क वाला सोना खरीदें। हॉलमार्क नंबर अल्फान्यूमेरिक होता है जैसे AZ4524, जिससे कैरेट पता चलता है। कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का वजन और कीमत दिन के हिसाब से कई सोर्सेज से चेक करें। 24, 22 और 18 कैरेट सोने का भाव अलग होता है। सोने और चांदी में निवेश करते समय सही समय और प्रमाणित गोल्ड चुनना सबसे जरूरी है, ताकि लाभ सुरक्षित और लंबे समय तक टिकाऊ रहे।