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  • सोने में बड़ी गिरावट जारी, 18 साल की सबसे तेज मासिक गिरावट, चांदी भी 43% सस्ती हुई

    सोने में बड़ी गिरावट जारी, 18 साल की सबसे तेज मासिक गिरावट, चांदी भी 43% सस्ती हुई


    नई दिल्ली। सोने की कीमतों में गिरावट का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, सोना 18 साल की सबसे बड़ी मासिक गिरावट दर्ज कर रहा है। अक्टूबर 2008 के बाद पहली बार कीमती धातु बाजार में इस तरह का तेज दबाव देखा जा रहा है। 1 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कॉमेक्स गोल्ड में एक बार फिर गिरावट दर्ज की गई, जिससे सोने की कीमतें 4,000 डॉलर के नीचे आ गईं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना फिसला
    वैश्विक बाजार में सोना 22 डॉलर से अधिक गिरकर 3,985 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इससे पहले सोना 4,005.69 डॉलर प्रति औंस पर खुला था, लेकिन दिनभर में इसमें लगातार गिरावट देखने को मिली। इस गिरावट के साथ ही सोना एक बार फिर 4,000 डॉलर के अहम स्तर से नीचे चला गया है।

    MCX पर भी भारी गिरावट
    घरेलू बाजार MCX पर भी सोने में तेज गिरावट देखने को मिली है। साल 2026 की शुरुआत में 10 ग्राम सोना 1.92 लाख रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि जून 2026 में ही सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

    आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ एक महीने में सोना करीब 19,700 रुपये तक सस्ता हुआ। महीने की शुरुआत में जहां यह लगभग 1.60 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर था, वहीं 30 जून तक यह घटकर करीब 1.40 लाख रुपये पर आ गया।

    रिकॉर्ड स्तर से 20% नीचे आया सोना, चांदी 43% तक टूटी
    साल 2026 के शुरुआती छह महीनों में कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सोना अपने हालिया उच्च स्तर से करीब 20 प्रतिशत तक टूट चुका है। वहीं चांदी में इससे भी तेज गिरावट दर्ज की गई है और यह करीब 43 प्रतिशत तक सस्ती हो चुकी है।

    क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?
    विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई वैश्विक कारण हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई में इजाफा हुआ है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बढ़ गया है।

    नए संभावित फेड चेयरमैन केविन वॉर्श के सख्त रुख को भी बाजार में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे में ऊंची ब्याज दरों के चलते निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं।

    इसके अलावा डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग पर असर डाला है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और शेयर बाजार में कमजोर सेंटिमेंट के चलते निवेशक अपने निवेश को संतुलित करने के लिए सोने से पैसा निकाल रहे हैं, जिससे कीमतों पर और दबाव बढ़ गया है।

  • सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं

    सोने-चांदी की कीमतों में लगातार दूसरी गिरावट, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर टिकीं


    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों में बुधवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीमती धातुओं पर दबाव स्पष्ट रूप से देखा गया। बाजार में आई इस गिरावट के बाद निवेशकों और कारोबारियों के बीच सतर्कता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक संकेतों और आगामी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।

    इंडिया बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के ताजा आंकड़ों के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत में 1,539 रुपये प्रति 10 ग्राम की गिरावट दर्ज की गई है, जिसके बाद इसका भाव 1,56,072 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया है। इससे पहले यह कीमत 1,57,611 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। इसी तरह 22 कैरेट सोना भी सस्ता होकर 1,42,962 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया है, जबकि पहले यह 1,44,372 रुपये प्रति 10 ग्राम था। 18 कैरेट सोने के दाम में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 1,17,054 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

    चांदी के बाजार में भी बड़ी गिरावट देखने को मिली है। चांदी का भाव 5,296 रुपये प्रति किलो कम होकर 2,60,917 रुपये प्रति किलो पर आ गया है। इससे पहले यह 2,66,213 रुपये प्रति किलो था। चांदी की कीमतों में आई इस तेज गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, क्योंकि एक ही दिन में इतनी बड़ी कमी को निवेशक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देख रहे हैं।

    वायदा बाजार में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर सोने और चांदी दोनों के कॉन्ट्रैक्ट में गिरावट दर्ज की गई है। 5 जून 2026 के लिए सोने का कॉन्ट्रैक्ट और 3 जुलाई 2026 के लिए चांदी का कॉन्ट्रैक्ट दोनों ही दबाव में रहे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों के दाम नीचे आए हैं।

    वैश्विक बाजार में कॉमेक्स पर भी कीमती धातुओं में कमजोरी दर्ज की गई है, जहां सोना और चांदी दोनों में प्रतिशत के आधार पर गिरावट देखी गई। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशक फिलहाल अमेरिका में आने वाले महंगाई और जीडीपी से जुड़े आर्थिक आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जिनके आधार पर आगे की दिशा तय होगी। इन आंकड़ों के जारी होने से वैश्विक बाजार में डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों की उम्मीदों पर भी असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव सोने और चांदी की कीमतों पर दिखाई देगा।

    बाजार विश्लेषकों का कहना है कि जब तक वैश्विक संकेत स्पष्ट नहीं होते, तब तक कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय प्रतीक्षा की रणनीति अपना रहे हैं, जिससे बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक डेटा इस रुझान को और स्पष्ट कर सकता है और सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

  • सोना-चांदी बाजार में भूचाल, एक दिन में 11,700 रुपए तक टूटी कीमतें..

    सोना-चांदी बाजार में भूचाल, एक दिन में 11,700 रुपए तक टूटी कीमतें..


    नई दिल्ली । वैश्विक वित्तीय बाजारों में शुक्रवार को एक बार फिर बड़ी हलचल देखने को मिली जब मजबूत डॉलर के दबाव ने सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज कराई। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में इन धातुओं पर बिकवाली का दबाव बढ़ गया, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। विशेषज्ञों के अनुसार डॉलर इंडेक्स में आई मजबूती इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह मानी जा रही है।

    घरेलू वायदा बाजार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर चांदी में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जहां इसके जुलाई 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में एक ही दिन में हजारों रुपए की कमजोरी दर्ज हुई। कारोबारी सत्र की शुरुआत से ही चांदी दबाव में रही और दिन के दौरान इसमें लगभग चार प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। कीमतों में इस गिरावट ने बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी और ट्रेडर्स के बीच मुनाफावसूली का दौर तेज हो गया।

    सोने के बाजार में भी कमजोरी का असर साफ दिखाई दिया, हालांकि चांदी की तुलना में सोने में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। जून 2026 के कॉन्ट्रैक्ट में सोना हल्की गिरावट के साथ खुला और दिनभर सीमित दायरे में कारोबार करता रहा। शुरुआती गिरावट के बाद कुछ समय के लिए कीमतों में सुधार की कोशिश जरूर हुई, लेकिन अंततः बाजार दबाव में ही बना रहा। निवेशकों की नजर अब आने वाले वैश्विक संकेतों पर टिकी हुई है, जो सोने की दिशा तय कर सकते हैं।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला, जहां सोना और चांदी दोनों में गिरावट दर्ज की गई। डॉलर इंडेक्स में लगातार मजबूती के चलते अन्य मुद्राओं में खरीदारों के लिए कीमती धातुएं महंगी हो गईं, जिससे मांग में कमी आई। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर इंडेक्स पिछले कई हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है, जिससे सोने और चांदी पर दबाव और बढ़ गया है।

    डॉलर इंडेक्स की मजबूती को वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों और निवेशकों की सुरक्षित निवेश रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। जब डॉलर मजबूत होता है तो अन्य मुद्राओं के मुकाबले सोने की कीमतें अपने आप दबाव में आ जाती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कीमती धातुओं में गिरावट का रुझान देखने को मिला।

    बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल सोने की कीमतें एक सीमित दायरे में बनी रह सकती हैं। निवेशकों की नजर आने वाले आर्थिक आंकड़ों, ब्याज दरों और वैश्विक नीतिगत फैसलों पर रहेगी, जो आगे की दिशा तय करेंगे। कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि मौजूदा गिरावट लंबे समय तक जारी नहीं रहेगी, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के समय सोना अब भी एक सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।

    चांदी में आई तेज गिरावट को औद्योगिक मांग और निवेश मांग दोनों से जोड़कर देखा जा रहा है। वैश्विक आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के संकेतों ने चांदी की मांग को प्रभावित किया है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। वहीं सोने में अपेक्षाकृत स्थिरता बनी रहने की संभावना जताई जा रही है, हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

  • सोना महंगा होने के बावजूद क्यों चमक रहे हैं Titan और Senco के शेयर? 17% तक तेजी की उम्मीद

    सोना महंगा होने के बावजूद क्यों चमक रहे हैं Titan और Senco के शेयर? 17% तक तेजी की उम्मीद

    नई दिल्ली । सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सरकार की ओर से आयात शुल्क में वृद्धि के बावजूद ज्वेलरी सेक्टर से जुड़ी प्रमुख कंपनियों के शेयरों को लेकर बाजार में सकारात्मक रुख बना हुआ है। आम तौर पर माना जाता है कि सोना महंगा होने पर आभूषणों की मांग पर दबाव पड़ता है, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग दिखाई दे रही है। निवेशकों और ब्रोकरेज हाउसेस का ध्यान विशेष रूप से टाइटन और सेनको जैसी संगठित कंपनियों पर केंद्रित है, जिनमें आगे चलकर 15 से 17 प्रतिशत तक तेजी की संभावना जताई जा रही है।

    हाल ही में सरकार ने सोने पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिससे उद्योग जगत में चिंता का माहौल था। आशंका जताई गई थी कि इससे सोने की कीमतें और बढ़ेंगी, जिसका सीधा असर ग्राहकों की खरीदारी पर पड़ सकता है। लेकिन इसके बावजूद बाजार के बड़े विश्लेषकों का मानना है कि संगठित ज्वेलरी कंपनियों की स्थिति मजबूत बनी हुई है और मांग में उम्मीद से कम गिरावट देखने को मिल रही है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में सोने की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव के बावजूद ग्राहकों का रुझान पूरी तरह से कमजोर नहीं हुआ है। वित्त वर्ष 2026 में टाइटन के ज्वेलरी कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जहां बिक्री और परिचालन मुनाफे दोनों में मजबूत सुधार देखा गया है। इसी तरह सेनको ने भी अपने प्रदर्शन में स्थिरता दिखाई है, जिससे निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।

    बाजार विश्लेषण में यह भी सामने आया है कि अब ज्वेलरी कंपनियां उपभोक्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुसार रणनीति अपना रही हैं। भारी गहनों की बजाय हल्के वजन वाले डिजाइन पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इससे ग्राहकों के लिए खरीदारी आसान हो जाती है और कीमतों का बोझ भी अपेक्षाकृत कम रहता है। यही कारण है कि महंगे सोने के बावजूद मांग पूरी तरह से प्रभावित नहीं हो रही है।

    इसके अलावा संगठित ज्वेलरी कंपनियों को पारदर्शी प्रणाली और ब्रांड वैल्यू का लाभ मिल रहा है। बाजार में अब बीआईएस हॉलमार्किंग और अन्य नियामक व्यवस्थाओं के कारण असंगठित कारोबार की तुलना में संगठित कंपनियों की पकड़ मजबूत हुई है। इससे ग्राहकों का भरोसा इन ब्रांड्स पर बढ़ा है और निवेशकों के लिए भी यह सेक्टर आकर्षक बना हुआ है।

    हालांकि, आयात शुल्क बढ़ने के बाद सोने की तस्करी को लेकर चिंता भी जताई जा रही है, लेकिन इस बार सख्त निगरानी व्यवस्था के चलते स्थिति पहले जैसी नहीं मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि पारदर्शिता बढ़ने से संगठित कंपनियों को फायदा होगा, जबकि असंगठित बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।

  • बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच टाइटन पर निवेशकों का भरोसा कायम, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट

    बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच टाइटन पर निवेशकों का भरोसा कायम, ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट

    नई दिल्ली । सोने की कीमतें लगातार रिकॉर्ड स्तर के आसपास बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय ज्वैलरी बाजार की बड़ी कंपनियों की रफ्तार धीमी नहीं हुई है। खासकर Titan Company ने इस चुनौतीपूर्ण माहौल में भी ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने बाजार का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

    हालिया तिमाही परिणामों के बाद कंपनी को लेकर निवेशकों की धारणा और मजबूत हुई है। कंपनी ने न केवल मुनाफे में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की है, बल्कि राजस्व में भी प्रभावशाली वृद्धि दिखाई है। यही कारण है कि इसके शेयर को लेकर बाजार में नई उम्मीदें पैदा हुई हैं।

    कंपनी का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष इसका ज्वैलरी बिजनेस माना जा रहा है, जो लगातार नए ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। इसके अलावा कंपनी अब केवल पारंपरिक सोने और हीरे के आभूषणों तक सीमित नहीं रही, बल्कि स्टडेड ज्वैलरी, प्रीमियम कलेक्शन, डिजिटल ज्वैलरी और लैब-ग्रोथ डायमंड जैसे आधुनिक सेगमेंट में भी तेजी से विस्तार कर रही है। इस विविधता ने कंपनी की पकड़ को और मजबूत बना दिया है।

    साथ ही वॉच और अन्य उभरते कारोबार भी कंपनी की कुल ग्रोथ में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बदलते उपभोक्ता रुझानों के बीच ब्रांडेड ज्वैलरी की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका सीधा फायदा टाइटन को मिल रहा है।

    हालांकि शेयर बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है और हाल ही में शेयर में गिरावट भी दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद दीर्घकालिक दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत ब्रांड वैल्यू और स्थिर बिजनेस मॉडल कंपनी को आने वाले वर्षों में और ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय ज्वैलरी सेक्टर में संगठित कंपनियों की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है और टाइटन इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभार्थी बनकर उभर रहा है। शहरीकरण, बढ़ती आय और ब्रांडेड प्रोडक्ट्स के प्रति झुकाव ने इस सेक्टर को नई गति दी है।

  • सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता

    सोना-चांदी में हल्की चमक, फेड के फैसले से पहले बाजार में सतर्कता


    नई दिल्ली | अमेरिकी फेड के अहम फैसले से पहले बुधवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने की कीमतों में हल्की तेजी दर्ज की गई। 5 जून 2026 का सोना कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 1,50,027 रुपये के मुकाबले 693 रुपये यानी 0.46 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,50,720 रुपये पर खुला।

    हालांकि शुरुआती तेजी के बाद इसमें हल्का दबाव भी देखने को मिला। सुबह 9:55 बजे तक सोना 19 रुपये यानी 0.01 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 1,50,008 रुपये पर कारोबार कर रहा था। दिनभर के कारोबार में सोने ने 1,49,720 रुपये का निचला स्तर और 1,51,527 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार फिलहाल किसी बड़े ट्रेंड की बजाय इंतजार की स्थिति में है।

    चांदी में भी सीमित तेजी, निवेशकों की नजर फेड के फैसले पर

    चांदी ने भी बुधवार को हल्की मजबूती दिखाई। 3 जुलाई 2026 का चांदी कॉन्ट्रैक्ट पिछली क्लोजिंग 2,42,763 रुपये के मुकाबले 826 रुपये यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 2,43,589 रुपये पर खुला।
     दिन के दौरान चांदी 712 रुपये यानी 0.29 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,43,475 रुपये पर कारोबार करती रही। इस दौरान इसका न्यूनतम स्तर 2,42,972 रुपये और अधिकतम स्तर 2,43,835 रुपये दर्ज किया गया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी तेजी का रुख

    वैश्विक बाजारों में भी सोना और चांदी मजबूती के साथ कारोबार करते दिखे। सोना 0.19 प्रतिशत की बढ़त के साथ 4,616 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 0.81 प्रतिशत की तेजी के साथ 73.81 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही थी।

    फेड का फैसला बना सबसे बड़ा फैक्टर

    विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की नजर अब पूरी तरह अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले पर टिकी है, जो देर रात आने की उम्मीद है। यह फैसला ऐसे समय पर आ रहा है जब कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण महंगाई को लेकर चिंता बनी हुई है।

    विश्लेषकों का मानना है कि यदि फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है या भविष्य में बढ़ोतरी के संकेत देता है, तो इसका असर सोने की कीमतों पर नकारात्मक पड़ सकता है और इसमें दबाव बढ़ सकता है।

    एक साल में शानदार रिटर्न, निवेशकों की बढ़ी दिलचस्पी

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच सोना और चांदी ने पिछले एक साल में निवेशकों को मजबूत रिटर्न दिया है। डॉलर में सोना लगभग 40 प्रतिशत तक चढ़ा है, जबकि चांदी ने करीब 120 प्रतिशत का शानदार रिटर्न दर्ज किया है। इसी वजह से इनकी मांग और निवेश रुचि लगातार बनी हुई है।

    फिलहाल सोना और चांदी दोनों ही फेड के फैसले से पहले ‘वेट एंड वॉच’ मोड में हैं। आने वाले समय में अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीति ही इनकी दिशा तय करेगी—तेजी या दबाव, दोनों की संभावनाएं खुली हुई हैं।

  • Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य

    Iran युद्ध के बीच सोने की कीमतों में जोरदार उछाल… 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचा कुल बाजार मूल्य


    नई दिल्ली।
    ईरान युद्ध (Iran America War) के कारण दुनियाभर के बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है। दूसरी तरफ, इस अनिश्चितता के बीच सोने (Gold) की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा जा रहा है। लिहाजा, निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में तेजी से सोने की ओर रुख कर रहे हैं। इस वजह से वैश्विक स्तर पर सोने का कुल बाजार मूल्य लगभग 30 से 35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। यह मूल्य भारत और ब्रिटेन यानी यूनाइटेड किंगडम (UK) की संयुक्त अर्थव्यवस्था यानी साझा GDP से भी काफी बड़ा माना जा रहा है।

    विश्लेषकों के अनुसार अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में ईरान की सैन्य कार्रवाई के बाद वैश्विक बाजारों में भारी अस्थिरता आई है। इसी वजह से निवेशकों ने जोखिम वाले निवेश से पैसा निकालकर सोने में लगाना शुरू कर दिया है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत 5,400 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच गई है और यह 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंचने वाली है।


    क्यों कहा जा रहा है ‘फाइनेंशियल सुपरपावर’?

    एक रिपोर्ट के मुताबिक सोने की कीमतों में इस तेज बढ़ोत्तरी के कारण दुनिया में मौजूद कुल सोने का अनुमानित मूल्य 30–35 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। तुलनात्मक रूप से देखें तो भारत की कुल जीडीपी फिलहाल लगभग 3.5 से 4 ट्रिलियन डॉलर के बीच है जिसके जल्द ही 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की उम्मीद है। दूसरी तरफ यूनाइडेट किंगडम यानी ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की है। इस तरह सोने का कुल मूल्य दोनों देशों की संयुक्त जीडीपी से कई गुना बड़ा हो गया है। इसी कारण कुछ विश्लेषक इसे “गोल्ड सुपरपावर” कह रहे हैं।


    निवेशकों के लिए सुरक्षित ठिकाना

    जब दुनिया में युद्ध, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक सोने को सबसे सुरक्षित और भरोसेमंद संपत्ति मानते हैं। इसलिए हर बार किसी बड़े भू-राजनीतिक तनाव के दौरान सोने की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार हाल के महीनों में सोने की कीमत बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों द्वारा बड़े पैमाने पर सोने की खरीद, महामारी के बाद बढ़ी महंगाई, डॉलर और अन्य मुद्राओं पर बढ़ती अनिश्चितता।


    आगे क्या होगा?

    हालांकि विशेषज्ञों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ का मानना है कि यदि ईरान संघर्ष कम होता है, वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है या ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। वहीं कई विश्लेषकों का मानना है कि दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कागजी मुद्राओं पर कम होते भरोसे के कारण सोना लंबे समय तक मजबूत निवेश बना रह सकता है। बहरहाल, ईरान युद्ध और वैश्विक अस्थिरता के बीच सोना एक बार फिर दुनिया की सबसे बड़ी सुरक्षित संपत्ति के रूप में उभर रहा है, जिसका कुल मूल्य कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से भी अधिक हो चुका है।

  • कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट

    कीमतें आसमान पर… आम आदमी की पहुंच से दूर हुआ सोना, मांग में भारी गिरावट


    नई दिल्ली।
    कीमतों के रिकॉर्ड स्तर (Record levels Prices) पर पहुंचने और उपभोक्ताओं के खरीद व्यवहार में बदलाव के कारण वर्ष 2025 में भारत (India) की सोने की मांग (Gold Demand) में 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (World Gold Council) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने की कुल मांग 2025 में गिरकर 710.9 टन रह गई, जो 2024 में 802.8 टन थी। परिषद का अनुमान है कि 2026 में देश में सोने की मांग 600 से 700 टन के बीच रह सकती है। हालांकि, कीमतों में भारी उछाल के कारण मूल्य के संदर्भ में सोने की मांग 30 प्रतिशत बढ़कर 7,51,490 करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष यह 5,75,930 करोड़ रुपये थी।

    डब्ल्यूजीसी ने बताया, ‘वर्ष, 2025 की चौथी तिमाही में सोने की मांग पर ऊंची कीमतों और उपभोक्ताओं के बदलते व्यवहार का असर स्पष्ट दिखा। मात्रा के आधार पर इस तिमाही में मांग नौ प्रतिशत गिरकर 241.3 टन रही, लेकिन मूल्य के आधार पर यह 49 प्रतिशत बढ़कर करीब 3,03,470 करोड़ रुपये हो गई।

    वर्ष 2025 के दौरान आभूषणों की कुल मांग 24 प्रतिशत घटकर 430.5 टन रही, जो 2024 में 563.4 टन थी। हालांकि, मूल्य के लिहाज से यह 12 प्रतिशत बढ़कर 4,54,390 करोड़ रुपये रही, जो इससे पिछले साल 4,04,510 करोड़ रुपये रही थी। शादियों के सीजन के बावजूद ऊंची कीमतों और महंगाई के कारण आभूषणों की बिक्री में 23 प्रतिशत की कमी आई। 2025 में सोने ने 60 प्रतिशत से अधिक का रिटर्न दिया और 53 बार सर्वकालिक उच्च स्तर को छुआ। इसके विपरीत, निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है। चौथी तिमाही में निवेश मांग 26 प्रतिशत बढ़कर 96 टन रही, जबकि इसका मूल्य 108 प्रतिशत उछलकर 1,20,700 करोड़ रुपये हो गया।


    सोने की वैश्विक मांग 5,000 टन से अधिक हुई

    वैश्विक स्तर पर सोने की मांग 2025 में 5,000 टन से अधिक होकर एक नए सर्वकालिक उच्चस्तर पर पहुंच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल सोने की मांग 2025 में 5,002 टन के नए ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई, जो पिछले वर्ष 4,961.9 टन थी। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से निवेश मांग में तेज उछाल के कारण हुई, जो 2025 में बढ़कर 2,175.3 टन हो गई जबकि यह 2024 में 1,185.4 टन थी। चालू वित्त वर्ष की अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में उपभोक्ता मांग दो प्रतिशत बढ़कर 1,345.3 टन हो गई जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,318.5 टन थी।

  • सोने की कीमतों में उछाल का दौर जारी… 2026 में भी जारी रहेगी जबरदस्त तेजी!

    सोने की कीमतों में उछाल का दौर जारी… 2026 में भी जारी रहेगी जबरदस्त तेजी!


    नई दिल्ली।
    सोने की कीमतों (Gold Price) में जबरदस्त तेजी का दौर 2026 में भी थमता नहीं दिख रहा है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमती धातु अब एक और मजबूत ऊपरी रैली के लिए तैयार है। ब्रोक्रेज फर्म वेंचुरा (Brokerage firm Ventura) ने एक ताजा रिपोर्ट में कहा है कि केंद्रीय बैंकों (Central Banks) की खरीदारी, बनी रहने वाली मुद्रास्फीति (Inflation), अमेरिकी घाटे में बढ़ोतरी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था व टैरिफ को लेकर चिंताओं से बना “एक कॉकटेल” सोने की कीमतों को आने वाले वर्ष में $4,600 से $4,800 के लक्षित सीमा में पहुंचा सकता है। नए साल 2026 में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा 75 बीपीएस की दरों में कटौती की उम्मीद से बोलीदाताओं की दिलचस्पी बनी रहेगी।


    सोने ने इस साल 67 प्रतिशत का मुनाफा दिया

    सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की चमक बरकरार है और इस साल घरेलू बाजार में इसने अबतक लगभग 67 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां और रुपये–डॉलर की दर लगभग समान बनी रहती है या रुपया कमजोर होता है, तो 2026 में सोने की कीमत पांच प्रतिशत से 16 प्रतिशत प्रति 10 ग्राम और चढ़ सकती हैं। उनका यह भी कहना है कि चूंकि सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई के करीब हैं, इसलिए अनुशासित और सोच-विचार कर निवेश करना जरूरी है।


    संस्थागत निवेशक बढ़ा रहे हैं दबाव

    वेंचुरा ने जोर दिया कि सोने का तेजी का चक्र “अभी खत्म होने से बहुत दूर” है क्योंकि संस्थागत निवेशक मुद्रास्फीति से बचाव के लिए इसे तेजी से चुन रहे हैं, जिसके बाद खुदरा और सट्टेबाजी भागीदारी बढ़ रही है। फर्म का कहना है कि मांग की यह स्तरित प्रकृति सोने की लंबे समय के लिए रैली की नींव को मजबूत कर रही है।


    ड्यूश बैंक और मॉर्गन स्टैनली का नजरिया

    पिछले महीने ड्यूश बैंक ने निवेशकों के स्थिर फंड फ्लो और केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीदारी का हवाला देते हुए अपना 2026 के सोने की कीमत का पूर्वानुमान पहले के $4,000 से बढ़ाकर $4,450 प्रति औंस कर दिया। बैंक अब अगले साल सोने के $3,950 से $4,950 की सीमा में कारोबार करने की उम्मीद करता है।

    मॉर्गन स्टैनली ने एक पहली रिपोर्ट में भविष्यवाणी की थी कि एक धुंधली वैश्विक आर्थिक आउटलुक के बीच ईटीएफ की सॉलिड फिजिकल डिमांड और केंद्रीय बैंकों की चल रही खरीदारी से सपेार्ट पाकर सोना मध्य-2026 तक $4,500 प्रति औंस तक बढ़ सकता है।


    निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज का कहना है कि लगातार मुद्रास्फीति, वास्तविक ब्याज दरों के कम होने की उम्मीदों और फिएट मुद्राओं में विश्वास कमजोर होने के बीच सोने की निवेश अपील में काफी मजबूती आई है। ब्रोकरेज ने प्रमुख पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं में भू-राजनीतिक संघर्ष, बाजार की अस्थिरता और खराब हो रही वित्तीय स्थितियों के खिलाफ बचाव के लिए सोने की क्षमता पर जोर दिया है।

    एचडीएफसी सिक्योरिटीज निवेशकों को सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं में अपने पोर्टफोलियो का 5-10% आवंटित करने की सलाह देता है, जोखिम के आधार पर इसमें धीरे-धीरे वृद्धि की गुंजाइश के साथ।


    नौ लगातार तिमाहियों में रिकॉर्ड हाई

    वेंचुरा के अनुसार, गोल्ड ने लगातार नौ तिमाहियों (2025 की चौथी तिमाही सहित) में नए हाई लेवल दर्ज किए हैं। यह उछाल फिएट मुद्रा मूल्य में एक व्यवस्थित गिरावट का संकेत देता है, एक प्रवृत्ति जो इस तथ्य से और मजबूत होती है कि सोना अब वैश्विक केंद्रीय बैंकों के बीच दूसरी सबसे महत्वपूर्ण रिजर्व संपत्ति बन गया है।


    भारत में स्थिति और तकनीकी पहलू

    भारत में संरचनात्मक कारकों के कारण तेजी और भी तीव्र प्रतीत होती है। घरेलू सोने की कीमतें दुबई की तुलना में लगभग 15% अधिक हैं, यह अंतर आयात शुल्क और लगातार कमजोर रुपए से प्रेरित है।

    वेंचुरा ने यह भी जोर दिया कि वैश्विक अनिश्चितताएं ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जो निरंतर मांग का समर्थन करती हैं। 9 अक्टूबर, 2025 को $4,398 के अपने शिखर के बाद, सोने में $3,891 तक 11% की गिरावट देखी गई, फिर दिसंबर 2025 में $4,299 की ओर मजबूती से वापसी हुई। तकनीकी रूप से, वेंचुरा ने भविष्यवाणी की है कि मजबूत समर्थन $4,200 और $4,056 पर और प्रतिरोध स्तर $4,255–$4,300 के पास होने की उम्मीद है, और अगर ये स्तर टूटते हैं तो आगे $4,381–$4,441 तक की बढ़त हो सकती है।