Tag: Gold Silver Rate

  • Gold Silver Price Today: 22 अगस्त को सोने-चांदी के दाम ने बदली करवट, खरीदारी से पहले जान लें कीमतों का हाल

    Gold Silver Price Today: 22 अगस्त को सोने-चांदी के दाम ने बदली करवट, खरीदारी से पहले जान लें कीमतों का हाल

    नई दिल्ली । सोने और चांदी की कीमतों पर नजर रखने वाले लोगों के लिए 22 अगस्त का दिन अहम है। घरेलू सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतें कई कारकों के असर से बदलती रहती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की चाल से लेकर डॉलर की स्थिति कच्चे तेल की कीमतें वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां और निवेशकों की खरीदारी तक इन धातुओं के भाव को प्रभावित करती है। ऐसे में अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो केवल एक दिन के भाव को देखकर फैसला करने के बजाय बाजार की मौजूदा दिशा को समझना जरूरी है।

    सोने की कीमतों में तेजी या गिरावट का सीधा असर आभूषण खरीदने वालों के बजट पर पड़ता है। खासकर शादी विवाह या किसी बड़े पारिवारिक आयोजन के लिए सोना खरीदने वाले लोग कीमत में मामूली बदलाव को भी गंभीरता से लेते हैं। 24 कैरेट सोना सबसे शुद्ध माना जाता है जबकि आभूषणों के लिए आम तौर पर 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। इसलिए बाजार में सोने का भाव जानने के साथ यह भी देखना जरूरी है कि कीमत किस कैरेट के सोने की बताई जा रही है।

    चांदी की बात करें तो इसकी कीमत भी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुख पर निर्भर करती है। चांदी को केवल आभूषणों और पारंपरिक खरीदारी तक सीमित नहीं माना जाता बल्कि इसका इस्तेमाल औद्योगिक क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स सोलर पैनल और कई तकनीकी उत्पादों में चांदी की मांग बनी रहती है। यही वजह है कि वैश्विक औद्योगिक मांग में बदलाव का असर भी चांदी की कीमत पर दिखाई दे सकता है। निवेशकों की गतिविधियां बढ़ने पर चांदी में तेज उतार चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    22 अगस्त को सोने और चांदी की खरीदारी करने वालों को एक और महत्वपूर्ण बात ध्यान में रखनी चाहिए। बाजार में बताए जाने वाले सोने के भाव में कई बार मेकिंग चार्ज जीएसटी और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते हैं। इसलिए यदि आप आभूषण खरीद रहे हैं तो दुकान पर मिलने वाली अंतिम कीमत बाजार भाव से अलग हो सकती है। अलग अलग शहरों और ज्वेलर्स के बीच भी कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। इसी कारण खरीदारी से पहले स्थानीय सर्राफा बाजार में उसी दिन का ताजा रेट और बिल में लगने वाले सभी शुल्क जरूर जांचें।

    वर्तमान वैश्विक माहौल में निवेशकों की नजर अमेरिकी ब्याज दरों डॉलर की चाल और दुनिया की आर्थिक अनिश्चितताओं पर भी बनी हुई है। जब बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने को अक्सर सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर देखा जाता है। इससे सोने की मांग बढ़ सकती है। वहीं चांदी में निवेश का रुख औद्योगिक मांग और निवेश दोनों से प्रभावित होता है।

    अगर आप सोना या चांदी निवेश के उद्देश्य से खरीदना चाहते हैं तो केवल तेजी देखकर जल्दबाजी में बड़ी रकम लगाने से बचना बेहतर है। कीमतों में कभी भी बदलाव हो सकता है। जरूरत और बजट के अनुसार खरीदारी करना और शुद्धता तथा बिल की पूरी जानकारी लेना जरूरी है। सोने में हॉलमार्क और चांदी में शुद्धता की जांच जरूर करें। 22 अगस्त के भाव को देखते हुए खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ताजा रेट की पुष्टि करना सबसे सुरक्षित तरीका रहेगा।

  • पेट्रोल 100 के पार, सोना-चांदी में नरमी-जानिए आज के ताजा भाव

    पेट्रोल 100 के पार, सोना-चांदी में नरमी-जानिए आज के ताजा भाव


    नई दिल्ली |  देशभर में आज 29 अप्रैल को पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन कुछ शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गया है। वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों और आम लोगों दोनों की नजर बाजार पर बनी हुई है।

    पेट्रोल-डीजल की कीमतें: कहां कितना रेट?
    तेल कंपनियां हर रोज सुबह 6 बजे नए रेट जारी करती हैं। आज भी कई शहरों में कीमतें स्थिर हैं, लेकिन राज्यों के हिसाब से फर्क देखने को मिल रहा है।

    दिल्ली: पेट्रोल ₹94.77 | डीजल ₹87.67
    मुंबई: पेट्रोल ₹103.54 | डीजल ₹90.03
    चेन्नई: पेट्रोल ₹100.80 | डीजल ₹92.39
    कोलकाता: पेट्रोल ₹105.45 | डीजल ₹92.02
    बेंगलुरु: पेट्रोल ₹102.92 | डीजल ₹90.99
    अमरावती: पेट्रोल ₹110.10 | डीजल ₹97.92
    जयपुर: पेट्रोल ₹104.88 | डीजल ₹90.36
    लखनऊ: पेट्रोल ₹94.65 | डीजल ₹87.76

    क्या चुनाव के बाद बढ़ेंगी कीमतें?
    सरकार ने साफ किया है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कंपनियों के नुकसान को देखते हुए भविष्य में बढ़ोतरी की अटकलें बनी हुई हैं।

    सोने की कीमत में गिरावट
    देश में सोने के भाव में गिरावट आई है। 18 से लेकर 24 कैरेट तक सभी कैटेगरी में कीमतें नीचे आई हैं।

    दिल्ली: 24 कैरेट: ₹1,51,070 प्रति 10 ग्राम
    22 कैरेट: ₹1,38,490 प्रति 10 ग्राम
    मुंबई/कोलकाता: 24 कैरेट: ₹1,50,920
    22 कैरेट: ₹1,38,340
    चेन्नई: 24 कैरेट: ₹1,53,810
    22 कैरेट: ₹1,40,990
    बेंगलुरु/पुणे: 24 कैरेट: ₹1,50,920
    22 कैरेट: ₹1,38,340

    क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
    विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मजबूत डॉलर के कारण सोने-चांदी पर दबाव बना है। जब ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक बॉन्ड की तरफ ज्यादा आकर्षित होते हैं, जिससे सोने-चांदी की मांग घटती है।

    चांदी भी हुई सस्ती
    चांदी की कीमत में भी गिरावट दर्ज की गई है आज का भाव: ₹2,59,900 प्रति किलोग्राम, अंतरराष्ट्रीय बाजार: $73.18 प्रति औंस, एक तरफ जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं, वहीं सोना और चांदी सस्ते हुए हैं। ऐसे में निवेश करने वालों के लिए यह अच्छा मौका हो सकता है, जबकि आम लोगों को ईंधन की कीमतों में राहत बनी हुई है।

  • अनिवेशकों सावधान! कच्चे तेल के चलते 15 साल के सबसे बड़े संकट की ओर बाजार, सोना और चांदी भी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त

    अनिवेशकों सावधान! कच्चे तेल के चलते 15 साल के सबसे बड़े संकट की ओर बाजार, सोना और चांदी भी डॉलर की मजबूती के आगे पस्त


    नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भारतीय निवेशकों की नींद उड़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान स्थिति निवेश के हर मोर्चे-चाहे वह शेयर बाजार हो, सोना-चांदी हो या म्यूचुअल फंड-के लिए बड़ा झटका साबित हो रही है। इस पूरे संकट की धुरी “कच्चा तेल” बना हुआ है, जिसके बेतहाशा बढ़ते दाम वैश्विक अर्थव्यवस्था के पहियों को जाम कर रहे हैं। यदि तनाव बढ़ता है और होर्मुज जलमार्ग Strait of Hormuzपर तेल की आपूर्ति 4 से 8 सप्ताह तक बाधित रहती है, तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए शेयर बाजार में भारी गिरावट और आसमान छूती महंगाई का दोहरा संकट खड़ा होना तय है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में भारतीय बाजार ने कई युद्ध और वैश्विक संकट देखे हैं, लेकिन यह पहली बार है जब सभी एसेट क्लास Asset Classesमें एक साथ गिरावट दर्ज की जा रही है। इसका सीधा असर विदेशी संस्थागत निवेशकों FPI के व्यवहार पर दिख रहा है, जिन्होंने इस महीने भारतीय बाजार से लगभग 52,704 करोड़ रुपये की भारी बिकवाली की है। निवेशक अब जोखिम भरे इक्विटी मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित माने जाने वाले डॉलर और बॉन्ड्स की ओर रुख कर रहे हैं। गौरतलब है कि कच्चे तेल के दाम संघर्ष की शुरुआत के समय 72.48 डॉलर प्रति बैरल थे, जो मार्च तक 65% की उछाल के साथ 119 डॉलर के पार निकल गए थे, और अब एक बार फिर 100 डॉलर के ऊपर बने हुए हैं।

    इस अनिश्चितता का सबसे चौंकाने वाला असर सोने और चांदी पर पड़ा है। आम तौर पर युद्ध के समय सोने की कीमतें बढ़ती हैं, लेकिन इस बार डॉलर की मजबूती ने इसे फीका कर दिया है। फरवरी के अंत से अब तक सोना 6% और चांदी 9% तक टूट चुकी है। चूंकि कच्चे तेल का व्यापार डॉलर में होता है, तेल की कीमतें बढ़ने से डॉलर की मांग और मजबूती बढ़ जाती है, जिसका सीधा दबाव कीमती धातुओं पर पड़ता है। वहीं, म्यूचुअल फंड सेक्टर में भी घबराहट साफ देखी जा सकती है; फरवरी में जहां 65.7 लाख नए SIP खाते खुले, वहीं लगभग 49.7 लाख खाते बंद भी हो गए, जिससे ‘एसआईपी स्टॉपेज अनुपात’ बढ़कर 76% के खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।

    हालांकि, विशेषज्ञों का एक धड़ा यह भी मानता है कि भारतीय बाजार हर बड़े झटके से उबरने का माद्दा रखता है। उदाहरण के तौर पर, 2020 के कोविड संकट के दौरान बाजार ने जितनी बड़ी गिरावट देखी थी, उसके अगले कुछ ही वर्षों में निवेशकों को 21-22% तक का शानदार रिटर्न भी दिया। फिलहाल ऑटो, बैंकिंग और कंज्यूमर सेक्टर के शेयरों पर बिकवाली का सबसे ज्यादा दबाव है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए इतिहास गवाह है कि संकट के बाद बाजार हमेशा मजबूती से वापसी करता है। आगे की राह इस बात पर टिकी है कि मध्य-पूर्व का यह तनाव कितनी जल्दी शांत होता है।