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  • ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक पसंद बनी मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ 13 नवंबर को छह भाषाओं में सिनेमाघरों में होगी रिलीज

    ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक पसंद बनी मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ 13 नवंबर को छह भाषाओं में सिनेमाघरों में होगी रिलीज

    नई दिल्ली । मराठी थ्रिलर फिल्म ‘गोंधल’ अब देशभर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। 99वें अकादमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में चुनी गई यह फिल्म 13 नवंबर को रिलीज होगी। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है, क्योंकि इसकी कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा ‘गोंधल’ के इर्द-गिर्द बुनी गई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी यह फिल्म मराठी के साथ हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ भाषाओं में भी प्रदर्शित की जाएगी। इस तरह दर्शक इसे कुल छह भाषाओं में देख सकेंगे।

    ‘गोंधल’ को भारत की आधिकारिक ऑस्कर प्रविष्टि के रूप में 18 सितंबर को चुने जाने की घोषणा की गई थी। इस चयन के दौरान फिल्म ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़ा। इसके बाद से ही फिल्म को लेकर चर्चा बढ़ गई थी। अब सिनेमाघरों में इसकी रिलीज की तारीख सामने आने के बाद दर्शकों को इसकी कहानी बड़े पर्दे पर देखने का अवसर मिलेगा। फिल्म का निर्माण और निर्देशन संतोष दावखर ने किया है। इसकी पटकथा भी उन्होंने ही लिखी है। फिल्म का निर्माण दावखर फिल्म्स के बैनर तले किया गया है।

    फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र की पृष्ठभूमि में आगे बढ़ती है। इसमें आधी रात को आयोजित होने वाले पारंपरिक गोंधल समारोह को कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। गोंधल महाराष्ट्र की एक पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा है, जिसे फिल्म में कहानी को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख तत्व के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसी समारोह के दौरान पात्रों के जीवन से जुड़े रहस्य सामने आने लगते हैं और घटनाएं धीरे-धीरे गंभीर मोड़ लेती हैं।

    फिल्म में इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला की भूमिका निभा रही हैं। सुमन की शादी एक अमीर परिवार में होती है, लेकिन वह अपनी जिंदगी से परेशान रहती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है। इस मुलाकात के बाद उसकी जिंदगी में कई बदलाव आते हैं। कहानी आगे बढ़ने के साथ रिश्तों की जटिलताएं, धोखे और विश्वासघात जैसे पहलू उभरते हैं। घटनाक्रम धीरे-धीरे हत्या की साजिश तक पहुंच जाता है। रातभर चलने वाला गोंधल समारोह इन घटनाओं को जोड़ने और कहानी के रहस्य को गहरा करने में अहम भूमिका निभाता है।

    ‘गोंधल’ में किशोर कदम, इशिता देशमुख, योगेश सोहोनी, निषाद भोईर और अनुज प्रभु प्रमुख भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म में कलाकारों के अभिनय के साथ इसकी कहानी और पारंपरिक सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। ग्रामीण महाराष्ट्र का वातावरण और धार्मिक समारोह कथानक को विशिष्ट पहचान देते हैं।फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी दिग्गज संगीतकार इलैयाराजा ने संभाली है। वहीं, अमलेंदु चौधरी ने सिनेमैटोग्राफी की है। संगीत और दृश्यांकन के जरिए फिल्म के वातावरण तथा घटनाओं को प्रभावी रूप से पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

    ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि चुने जाने के बाद ‘गोंधल’ की पहचान देश के बाहर भी बढ़ने की संभावना है। हालांकि, फिल्म की अगली महत्वपूर्ण परीक्षा सिनेमाघरों में होगी, जहां दर्शकों की प्रतिक्रिया उसके प्रदर्शन को लेकर तस्वीर साफ करेगी। 13 नवंबर को रिलीज होने वाली यह मराठी थ्रिलर छह भाषाओं में दर्शकों तक पहुंचेगी। अब देखना होगा कि महाराष्ट्र की पारंपरिक धार्मिक संस्कृति, रहस्य और रिश्तों की उलझनों पर आधारित यह कहानी दर्शकों को कितना प्रभावित करती है।

  • गोंधल की ऑस्कर एंट्री पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी के बाद डायरेक्टर संतोष डावखर ने दिया जवाब

    गोंधल की ऑस्कर एंट्री पर अनुराग कश्यप की टिप्पणी के बाद डायरेक्टर संतोष डावखर ने दिया जवाब

    नई दिल्ली ।गोंधल फिल्म के भारत की ओर से ऑस्कर 2027 के लिए आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद फिल्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। फिल्मकार अनुराग कश्यप ने गोंधल के चयन पर सवाल उठाते हुए कहा था कि भारत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में इसलिए पीछे रह जाता है क्योंकि कई बार फिल्मों के चयन में सही विकल्प नहीं चुने जाते। अब गोंधल के निर्देशक संतोष डावखर ने इस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है और कहा है कि किसी भी फिल्म पर फैसला सुनाने से पहले उसे देखना जरूरी है।

    संतोष डावखर के मुताबिक उन्होंने गोंधल के बारे में अनुराग कश्यप से पहले भी बातचीत की थी। उन्होंने बताया कि एक फ्लाइट के दौरान उन्होंने अनुराग को अपनी फिल्म के बारे में जानकारी दी थी। उस समय अनुराग ने फिल्म देखने की बात कही थी। हालांकि, संतोष का दावा है कि इसके बाद फिल्म उन्हें दिखाई नहीं गई और मुंबई में भी फिल्म उपलब्ध नहीं है।

    फिल्म के चयन और उस पर हो रही चर्चाओं के बीच संतोष ने लोगों से अपील की कि वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गोंधल को जरूर देखें। उनका कहना है कि फिल्म को लेकर राय बनाने से पहले उसे समझना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि एक फिल्मकार के तौर पर वह इस जिम्मेदारी को समझते हैं कि उनकी फिल्म अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रही है।

    संतोष डावखर ने कहा कि गोंधल एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म है, जिसमें मराठी संस्कृति के साथ वैश्विक दर्शकों को ध्यान में रखकर कहानी और प्रस्तुति तैयार की गई है। उनके अनुसार फिल्म को बड़े पर्दे के लिए बनाया गया है और इसका उद्देश्य केवल ओटीटी दर्शकों तक सीमित रहना नहीं है।

    उन्होंने दर्शकों से फिल्म को थिएटर में देखने की अपील करते हुए कहा कि दोबारा रिलीज होने पर लोग इसे बड़े पर्दे पर देखें और इसके बाद अपना फैसला सुनाएं। संतोष ने यह भी कहा कि उन्हें पता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी है और वह अपने देश को निराश नहीं करना चाहते।

    वहीं, अनुराग कश्यप ने अपनी पिछली टिप्पणी में कहा था कि भारत कई बड़े पुरस्कारों में अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर पाता, क्योंकि कई बार फिल्मों का चयन सही तरीके से नहीं होता। उन्होंने उदाहरण देते हुए कुछ ऐसी भारतीय फिल्मों का भी उल्लेख किया था, जिन्हें उनके मुताबिक सही चयन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों में सफलता नहीं मिली।

    अनुराग ने यह भी कहा था कि किसी फिल्म को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भेजने से पहले उसे विदेशों के प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में ले जाना और अमेरिकी वितरण की संभावनाओं को देखना महत्वपूर्ण होना चाहिए। उनके अनुसार गोंधल को पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी चाहिए थी।

    गोंधल साल 2025 में रिलीज हुई मराठी भाषा की ड्रामा थ्रिलर फिल्म है। इसका लेखन और निर्देशन संतोष डावखर ने किया है। फिल्म को 99वें अकादमी पुरस्कार यानी ऑस्कर 2027 में बेस्ट इंटरनेशनल फीचर फिल्म श्रेणी के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में चुना गया है। अब फिल्म को लेकर उठी बहस के बीच निर्देशक ने दर्शकों से अपील की है कि वे पहले फिल्म देखें और उसके बाद ही उसके चयन या कहानी को लेकर अपनी राय बनाएं।

  • महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म

    महाराष्ट्र की अनोखी परंपरा पर बनी गोंधल फिल्म की ऑस्कर में एंट्री आखिर क्या है यह रस्म


    नई दिल्ली। मराठी सिनेमा की फिल्म गोंधल ने 2027 में होने वाले 99वें अकादमी अवॉर्ड्स यानी ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री के रूप में जगह बनाई है। संतोष दावखर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने 33 अन्य फिल्मों को पीछे छोड़कर यह उपलब्धि हासिल की है। फिल्म की कहानी महाराष्ट्र की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा गोंधल के इर्द गिर्द बुनी गई है। फिल्म के ऑस्कर तक पहुंचने के बाद अब महाराष्ट्र की इस लोक परंपरा को लेकर भी देशभर में उत्सुकता बढ़ गई है।

    गोंधल महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक रस्म है जिसमें भक्ति गीत संगीत नृत्य और देवी देवताओं की पूजा का विशेष महत्व होता है। इस रस्म को आमतौर पर गोंधली समुदाय के लोग करते हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ भक्ति गीत गाए जाते हैं और नृत्य के जरिए देवी देवताओं का आह्वान किया जाता है। गोंधल का आयोजन खास तौर पर रात के समय होने वाले धार्मिक और पारिवारिक कार्यक्रमों से जुड़ा रहा है। महाराष्ट्र में शादी जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर भी इस परंपरा का आयोजन किया जाता है।

    गोंधल के दौरान ढोल सहित कई पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। तुंतुणे और धातु से बने वाद्य भी इसकी प्रस्तुति का हिस्सा होते हैं। कई आयोजनों में मशाल या दीपक की रोशनी के बीच कलाकार गीत और नृत्य प्रस्तुत करते हैं। पूरी रस्म भक्ति और सामूहिक सहभागिता के माहौल में आगे बढ़ती है और अंत में आरती के साथ इसका समापन होता है।

    महाराष्ट्र में गोंधल का महत्व केवल एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं माना जाता। यह लंबे समय से सामाजिक और पारिवारिक जीवन का भी हिस्सा रहा है। ऐसे आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग एक साथ जुटते हैं और पूजा पाठ के साथ रातभर भक्ति संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में शामिल होते हैं। फिल्म में नजर आने वाले अभिनेता किशोर कदम ने भी अपने गांव में गोंधल देखने की याद साझा की है। उनके अनुसार यह ऐसा सामुदायिक आयोजन रहा है जिसमें लोग रातभर एक साथ प्रार्थना और उत्सव का हिस्सा बनते थे।

    निर्देशक संतोष दावखर ने अपने बचपन के अनुभवों से प्रेरणा लेकर गोंधल को फिल्म की कहानी का केंद्र बनाया है। फिल्म की कहानी ग्रामीण महाराष्ट्र में आधी रात के समय होने वाले एक गोंधल समारोह के दौरान आगे बढ़ती है। इसमें इशिता देशमुख सुमन नाम की महिला का किरदार निभाती हैं। शादी के बाद सुमन एक अमीर परिवार में अपनी जिंदगी से परेशान नजर आती है। इसी दौरान उसकी मुलाकात साहेबा नाम के एक आकर्षक गोंधली कलाकार से होती है।

    इसके बाद कहानी में रिश्तों के बदलते समीकरण सामने आते हैं। विश्वास और धोखे के बीच घटनाएं आगे बढ़ती हैं और मामला हत्या की साजिश तक पहुंचता है। पूरी कहानी में रातभर चलने वाला गोंधल समारोह सिर्फ पृष्ठभूमि नहीं बल्कि कथा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर सामने आता है।

    अब फिल्म के ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक एंट्री चुने जाने के बाद महाराष्ट्र की यह पारंपरिक रस्म अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचने की राह पर है। गोंधल फिल्म के माध्यम से इस परंपरा को केवल धार्मिक रस्म के रूप में नहीं बल्कि महाराष्ट्र की लोक संस्कृति और सामुदायिक विरासत के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में भी देखने का अवसर मिलेगा।