Tag: government action

  • स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश

    स्कूल में छात्र बनकर पहुंचे कमिश्नर धनंजय सिंह, पढ़ाई में मिली लापरवाही, कई अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश


    जबलपुर । मध्यप्रदेश के जबलपुर में प्रशासनिक व्यवस्था की हकीकत जानने के लिए संभागायुक्त धनंजय सिंह ने शुक्रवार को अचानक मझौली तहसील का दौरा किया। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत किए गए इस निरीक्षण में उन्होंने स्कूल से लेकर स्वास्थ्य केंद्र और आंगनवाड़ी तक विभिन्न सरकारी संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सबसे ज्यादा चर्चा पौंडा गांव के शासकीय स्कूल के निरीक्षण की रही जहां कमिश्नर खुद छात्र बनकर बेंच पर बैठ गए और शिक्षकों से पढ़ाई की स्थिति जानी। जब उन्हें अध्यापन का स्तर अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिला तो उन्होंने शिक्षकों को फटकार लगाई और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कई अन्य व्यवस्थाओं में भी सुधार की जरूरत सामने आई।
    पौंडा गांव के शासकीय स्कूल में संभागायुक्त ने विद्यार्थियों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई और रोजाना होने वाली शैक्षणिक गतिविधियों के बारे में जानकारी ली। उन्होंने यह भी पूछा कि बच्चों को कक्षा में किस तरह पढ़ाया जाता है और उनके भविष्य को लेकर करियर काउंसलिंग की क्या व्यवस्था है। निरीक्षण के दौरान अध्यापन कार्य संतोषजनक नहीं मिलने पर उन्होंने शिक्षकों को अपनी कार्यशैली सुधारने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित विकासखंड शिक्षा अधिकारी यानी बीईओ और विकासखंड स्रोत समन्वयक यानी बीआरसी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए कहा। इस निरीक्षण का उद्देश्य स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता और अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था को परखना था।
    इसके बाद संभागायुक्त ने पौंडा स्थित सहकारी संस्था का निरीक्षण किया और खाद वितरण की व्यवस्था के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों को खाद की उपलब्धता और वितरण प्रक्रिया की स्थिति जानने के साथ संयुक्त आयुक्त सहकारिता को वितरण का सत्यापन करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसानों से जुड़ी व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। खाद वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
    स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जानने के लिए धनंजय सिंह ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने चिकित्सकीय स्टाफ और मरीजों से बातचीत कर उपचार की गुणवत्ता और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली। उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता एएनसी पंजीयन और मरीजों के स्वास्थ्य परीक्षण की स्थिति की समीक्षा की। इसके अलावा ओपीडी पंजी का निरीक्षण कर टीकाकरण जननी सुरक्षा योजना और प्रसूति सहायता योजना से जुड़े मामलों की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाओं को निर्देश दिए कि मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार मिले और जरूरी दवाओं की उपलब्धता लगातार बनी रहे। गर्भवती महिलाओं के पंजीयन और स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित निगरानी पर भी जोर दिया गया।
    संभागायुक्त ने आंगनवाड़ी केंद्र पहुंचकर बच्चों के पोषण वजन खेलकूद और शैक्षणिक गतिविधियों का जायजा लिया। केंद्र के संचालन की पर्याप्त निगरानी नहीं होने पर उन्होंने संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी यानी सीडीपीओ के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने गौशाला का निरीक्षण कर संचालकों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। जल जीवन मिशन के तहत गांव में चल रही एकल नलजल योजना की भी समीक्षा की गई। काम समयसीमा में पूरा नहीं होने और उचित मॉनिटरिंग की कमी के मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक यंत्री के विरुद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
    दौरे के दौरान संभागायुक्त ने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर पेयजल खाद और राशन की उपलब्धता के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को जनहित से जुड़ी योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के निर्देश दिए। इस निरीक्षण के जरिए प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकारी संस्थाओं में लापरवाही और निगरानी की कमी को गंभीरता से लिया जाएगा। अब संबंधित विभागों की जिम्मेदारी होगी कि वे कमियों को दूर करें और शिक्षा स्वास्थ्य पोषण तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाएं।
  • राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई

    राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले में राशन वितरण में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बदरवास क्षेत्र के बड़ोखरा गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुई जांच में लापरवाही और अनियमितता सामने आने पर प्रशासन ने कार्रवाई की। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश के बाद टीम ने सेल्समैन के खिलाफ कदम उठाते हुए सरकारी जमीन पर बने अवैध मकान को जेसीबी की मदद से ढहा दिया। इसके साथ ही जिले में राशन वितरण से जुड़े मामलों में छह विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया की गई है।

    मामला बड़ोखरा गांव की उचित मूल्य दुकान से जुड़ा है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अचानक दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने सेल्समैन योगेश जाट पर राशन वितरण में मनमानी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने राशन लेने के लिए फिंगरप्रिंट भी लगाए थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें करीब तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिल रहा था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने अपनी मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण कराया और सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

    प्रशासन के निर्देश के बाद भी सेल्समैन लगातार दुकान से गायब रहा। इसके बाद गुरुवार को तहसीलदार सचिन भार्गव के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम उसके गांव सेमरी पहुंची। यहां जांच के दौरान सरकारी जमीन पर एक मकान बना मिला। प्रशासन ने निर्माण को अवैध मानते हुए कार्रवाई की और जेसीबी से मकान को ढहा दिया। इस कार्रवाई के बाद राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई।

    प्रशासन ने केवल एक मामले तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में राशन दुकानों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कोलारस क्षेत्र की बामोरखुर्द और श्रीपुरा राशन दुकानों में पीओएस मशीन के रिकॉर्ड में खाद्यान्न दर्ज था लेकिन मौके पर राशन उपलब्ध नहीं मिला। इस मामले में विक्रेता माधौ सिंह यादव और धनपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा गया।

    इसी तरह रन्नौद तहसील की अकोदा राशन दुकान में भी वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने के बाद विक्रेता गोलू लोधी पर कार्रवाई की गई। पिछोर क्षेत्र में भी निवोदा के पुष्पेंद्र सिनावलकलां के भगवानलाल और बघावारा के सतेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। इन मामलों में भी आरोपित विक्रेताओं को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों का मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पीओएस मशीन में दर्ज खाद्यान्न और वास्तव में हितग्राहियों को वितरित किए गए राशन में किसी तरह का अंतर नहीं होना चाहिए। पात्र लोगों को समय पर उनका राशन मिले और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे इस पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि राशन वितरण में अनियमितता मिलने पर जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • जबलपुर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 96 मामलों में 6 करोड़ का जुर्माना, प्रशासन का सख्त रुख

    जबलपुर में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई: 96 मामलों में 6 करोड़ का जुर्माना, प्रशासन का सख्त रुख


    मध्यप्रदेश
    के जबलपुर जिले में अवैध उत्खनन और खनिजों के अनधिकृत परिवहन के खिलाफ प्रशासन ने अब तक की सबसे सख्त और व्यापक कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है, जिसमें जिला प्रशासन ने 96 मामलों में सुनवाई के बाद कुल 6 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई कलेक्टर न्यायालय के माध्यम से की गई, जहां खनिज विभाग द्वारा दर्ज किए गए प्रकरणों की विस्तृत जांच और सुनवाई के बाद यह निर्णय लिया गया। प्रशासन के इस कदम को जिले में अवैध खनन गतिविधियों पर लगाम कसने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है, जिससे खनिज संसाधनों के अनियंत्रित दोहन पर सख्त संदेश गया है। जानकारी के अनुसार यह पूरा मामला वर्ष 2022 से लंबित था, जब खनिज विभाग ने अवैध उत्खनन और परिवहन से जुड़े कई मामलों को दर्ज कराया था, जिन पर समय-समय पर कलेक्टर कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। लंबी प्रक्रिया के बाद अब इन मामलों में एक साथ बड़ा फैसला सुनाया गया है, जिससे प्रशासनिक सख्ती और कानूनी कार्रवाई की गंभीरता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    इस फैसले के तहत सबसे उल्लेखनीय बात यह रही कि एक अकेले प्रकरण में ही 40 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया, जो इस कार्रवाई की गंभीरता और पैमाने को दर्शाता है। अभिलाष तिवारी सहित अन्य संबंधित मामलों में यह कठोर निर्णय लिया गया है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला है कि अवैध खनन और परिवहन में शामिल किसी भी व्यक्ति या समूह को अब राहत नहीं दी जाएगी। प्रशासन ने यह कार्रवाई ऐसे समय में की है जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ क्षेत्रों में खनिज संसाधनों का अवैध रूप से दोहन किया जा रहा है, जिससे न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंच रहा है बल्कि पर्यावरणीय संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

    जिला प्रशासन के इस निर्णय को खनिज माफियाओं के खिलाफ एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में सक्रिय बताए जाते हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की सख्त आर्थिक दंडात्मक कार्रवाई से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति कम होगी। इसके साथ ही यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि इस निर्णय के बाद खनिज परिवहन और उत्खनन से जुड़े नियमों का पालन अधिक सख्ती से किया जाएगा।

    इस पूरी कार्रवाई को प्रशासन की उस नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत अवैध गतिविधियों पर त्वरित और प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। लंबे समय से लंबित मामलों पर एक साथ निर्णय आने से यह भी स्पष्ट हुआ है कि अब प्रशासन इस तरह के मामलों में देरी के बजाय कठोर और समयबद्ध कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ रहा है। कुल मिलाकर यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह जिले में खनिज संसाधनों के संरक्षण और कानून व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम भी माना जा रहा है।

  • सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई

    सरकारी कार्रवाई: वन भूमि पर कब्जे के आरोप में पंचायत सचिव की नौकरी गई


    नई दिल्ली । विदिशा वन मंडल में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। ग्राम पंचायत बीजूखेड़ी, जनपद पंचायत लटेरी के पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। यह कार्रवाई वन भूमि पर कब्जे के गंभीर आरोपों और जांच में दोष सिद्ध होने के बाद की गई है।
    मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वन परिक्षेत्र उत्तर लटेरी की देहरीपामा बीट के कक्ष क्रमांक पी-410 में वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण की शिकायत सामने आई। इस पर वन विभाग ने 21 जुलाई 2024 को वन अपराध प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच में सामने आया कि पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर पर ही इस अतिक्रमण का आरोप था।
    वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 80 ‘अ’ के तहत संबंधित सचिव को दो बार कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन आरोपी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। इससे मामला और गंभीर हो गया।
    जांच में आरोप प्रमाणित होने के बाद वनमंडलाधिकारी विदिशा ने अतिक्रमण हटाने का आदेश जारी किया था, लेकिन इसके बावजूद भूमि से कब्जा नहीं हटाया गया। आदेश की अवहेलना के बाद विभाग ने जिला पंचायत को कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए पत्र लिखा।
    इसके बाद जिला पंचायत ने कार्रवाई करते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर 8 मई 2026 को पंचायत सचिव किशन सिंह गुर्जर को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
    वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकारी और वन भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, चाहे वह किसी भी पद पर क्यों न हों।
    इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती के रूप में देखा जा रहा है, जिससे सरकारी भूमि संरक्षण को लेकर एक सख्त संदेश दिया गया है।

  • जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी

    जनगणना में लापरवाही पर बड़ी कार्रवाई: 289 कर्मचारियों को नोटिस, FIR तक की चेतावनी


    नई दिल्ली।  इंदौर में जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। निगम कमिश्नर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी क्षितिज सिंघल ने कुल 289 अधिकारी-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
    यह कार्रवाई उन कर्मचारियों के खिलाफ की गई है जो 1 मई से लगातार सूचना दिए जाने के बावजूद ड्यूटी पर उपस्थित नहीं हुए। प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता मानते हुए कहा है कि यह मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियमों का उल्लंघन है।
     सख्त कार्रवाई की चेतावनी
    नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि अनुपस्थित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच प्रस्तावित की गई है। साथ ही जनगणना अधिनियम 1948 के तहत एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
    प्रशासन ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी तत्काल ड्यूटी पर लौटें और अपना जवाब 4 मई शाम 5:30 बजे तक प्रस्तुत करें। तय समय सीमा में संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर एकतरफा कार्रवाई की जाएगी।
    प्रशासन का सख्त संदेश
    अधिकारियों ने साफ किया है कि जनगणना कार्य जैसे महत्वपूर्ण कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह देश की नीतियों और योजनाओं के लिए बेहद जरूरी डेटा संग्रह प्रक्रिया है।

    इंदौर प्रशासन की यह कार्रवाई स्पष्ट संदेश देती है कि सरकारी कार्यों में अनुशासन सर्वोपरि है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि कर्मचारी समय पर जवाब देते हैं या उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होती है।

  • रीवा में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा, दूसरी जांच में भी नहीं सुधरी गलती

    रीवा में फर्जी रिपोर्ट का खुलासा, दूसरी जांच में भी नहीं सुधरी गलती


    मध्य प्रदेश रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले में सरकारी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़े का एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक पटवारी ने तालाब और खाली जमीन को भी गेहूं की फसल बता दिया। मामला सामने आते ही प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए संबंधित पटवारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

    तालाब और खाली जमीन पर दिखा दी फसल

    त्योंथर तहसील के ग्राम चन्दई में पटवारी शारदा प्रसाद तिवारी ने करीब 3000 वर्ग फीट के तालाब और खाली पड़ी जमीन को गेहूं की फसल के रूप में दर्ज कर दिया। यह गड़बड़ी तब सामने आई जब विभाग को शिकायत मिली और जांच शुरू की गई।

    मौके पर जाकर भी दी गलत रिपोर्ट

    जांच में यह बात सामने आई कि पटवारी ने मौके पर जाकर ही रिपोर्ट तैयार की थी, इसके बावजूद गलत जानकारी दर्ज की गई। इसे गंभीर लापरवाही और कदाचार माना गया। यही वजह रही कि प्रशासन ने बिना देरी किए सख्त कदम उठाया।

    दोबारा जांच में भी नहीं सुधारी गलती

    शिकायत के बाद अधिकारियों ने दोबारा सत्यापन कराया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में कोई सुधार नहीं किया। इससे यह साफ हो गया कि गड़बड़ी जानबूझकर की गई थी।

    फायदा होने से पहले ही पकड़ा गया मामला

    प्रशासन की सतर्कता के चलते यह फर्जीवाड़ा समय रहते पकड़ में आ गया। अगर यह मामला आगे बढ़ता, तो सरकारी योजनाओं के तहत आर्थिक लाभ उठाया जा सकता था।

    कलेक्टर के निर्देश पर सख्त कार्रवाई

    जिले के कलेक्टर सोमवंशी के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने साफ किया कि भ्रष्टाचार और लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

     नियमों के तहत निलंबन

    पटवारी पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई की गई है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय त्योंथर तहसील रहेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।

     प्रशासन का सख्त संदेश

    इस कार्रवाई से साफ संकेत है कि अब सरकारी रिकॉर्ड में किसी भी तरह की हेराफेरी पर तुरंत सख्त कदम उठाए जाएंगे।