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  • वित्त विभाग सख्त! पांच विभागों के 38 हजार कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं खंगाली जाएंगी

    वित्त विभाग सख्त! पांच विभागों के 38 हजार कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाएं खंगाली जाएंगी


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने पांच प्रमुख विभागों में कार्यरत करीब 38 हजार कर्मचारियों के सेवा अभिलेखों और वेतन निर्धारण की व्यापक जांच कराने का फैसला किया है। वित्त विभाग ने विशेष अभियान चलाकर लंबित मामलों के निराकरण और नियमों के विपरीत दिए गए वित्तीय लाभों की समीक्षा के निर्देश जारी किए हैं।

    रिटायरमेंट से पहले खंगाला जाएगा पूरा सर्विस रिकॉर्ड
    राज्य सरकार अब उन कर्मचारियों के सेवा रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराएगी, जो कार्यभारित, आकस्मिकता निधि से वेतन प्राप्त करने वाले या अन्य श्रेणियों में कार्यरत हैं। जांच के दौरान कर्मचारियों की नियुक्ति से लेकर वर्तमान स्थिति तक पूरे सेवाकाल के रिकॉर्ड, वेतन निर्धारण, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और अन्य वित्तीय लाभों का परीक्षण किया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी को नियमों के विरुद्ध लाभ दिए जाने या वेतन निर्धारण में त्रुटि मिलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    पांच विभागों पर रहेगा विशेष फोकस
    वित्त विभाग द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह विशेष अभियान मुख्य रूप से पांच बड़े विभागों में चलाया जाएगा। इनमें लोक निर्माण विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास विभाग तथा स्कूल शिक्षा विभाग शामिल हैं। इन विभागों में बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके वेतन निर्धारण और सेवा संबंधी प्रकरण वर्षों से लंबित बताए जा रहे हैं। सरकार का मानना है कि इन मामलों के समाधान से कर्मचारियों को राहत मिलने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी।

    लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के निर्देश
    वित्त विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे वेतन निर्धारण, वेतनमान स्वीकृति, समयमान वेतनमान, क्रमोन्नति और सेवानिवृत्ति लाभों से जुड़े लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण करें।

    आदेश में कहा गया है कि अनेक कर्मचारी लंबे समय से अपने वित्तीय मामलों के निराकरण का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में वेतनमान और सेवानिवृत्ति लाभों को लेकर विवाद भी बने हुए हैं, जिससे कर्मचारियों को अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए विभागवार विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है ताकि लंबित प्रकरणों का समयबद्ध समाधान किया जा सके।

    सेवा पुस्तिकाओं की होगी विशेष जांच
    वित्त विभाग ने आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) तथा विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे कर्मचारियों की सेवा पुस्तिकाओं का परीक्षण करें और उनमें दर्ज त्रुटियों को तत्काल सुधारें। यदि किसी मामले में पूर्व अनुमोदन या अतिरिक्त प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता हो तो उसे भी समय रहते पूरा करने को कहा गया है। विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सेवा अभिलेख अद्यतन और नियमों के अनुरूप हों।

    छह महीने में पूरा करना होगा अभियान
    सरकार ने इस विशेष अभियान के लिए छह माह की समयसीमा निर्धारित की है। इस अवधि के भीतर सेवा अभिलेखों, वेतन निर्धारण और अन्य वित्तीय लाभों से जुड़े लंबित मामलों का निराकरण करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही विभागों को अभियान की प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से वित्त विभाग को भेजनी होगी। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।

    कर्मचारियों और सरकार दोनों पर पड़ेगा असर
    विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभियान से एक ओर कर्मचारियों के लंबित वित्तीय मामलों का समाधान होगा, वहीं दूसरी ओर वेतन निर्धारण में हुई संभावित अनियमितताओं का भी पता चल सकेगा। सेवानिवृत्त और सेवा में कार्यरत कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा के बाद जहां पात्र कर्मचारियों को उनका वैध लाभ मिलेगा, वहीं नियमों के विरुद्ध हुए भुगतान या स्वीकृतियों की स्थिति में सुधारात्मक कार्रवाई भी संभव होगी।

  • यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ

    यूपी सरकार का बड़ा फैसला: 16 लाख कर्मचारियों का DA 60% हुआ



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य कर्मचारियों को राहत देते हुए महंगाई भत्ते (DA) में 2% की बढ़ोतरी का आदेश जारी कर दिया है। इसके साथ ही अब राज्य कर्मचारियों का DA बढ़कर 58% से 60% हो गया है।यह निर्णय करीब 16 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े कर्मियों को सीधे लाभ देगा।

    कब से मिलेगा फायदा?
    सरकारी आदेश के अनुसार:

    बढ़ा हुआ DA 1 जनवरी 2026 से लागू माना जाएगा

    इसका भुगतान मई 2026 की सैलरी के साथ नकद किया जाएगा

    जनवरी से अप्रैल 2026 तक का बकाया (arrears) अलग से दिया जाएगा

    किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ?
    यह बढ़ोतरी इन सभी श्रेणियों पर लागू होगी:

    नियमित राज्य कर्मचारी

    सहायता प्राप्त शिक्षण एवं तकनीकी संस्थानों के कर्मचारी

    शहरी स्थानीय निकायों के कर्मचारी

    UGC वेतनमान में कार्यरत अधिकारी

    रिटायर कर्मचारियों के लिए खास प्रावधान
    सरकार ने रिटायरमेंट से जुड़े मामलों पर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं:

    जिनकी सेवा आदेश से पहले या बीच में समाप्त हुई है

    जो आने वाले 6 महीनों में रिटायर होंगे

    उन्हें DA का पूरा बकाया नकद (cash) में दिया जाएगा

    यह फैसला क्यों अहम है?
    महंगाई बढ़ने के बीच DA बढ़ोतरी:

    कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ाएगी

    राज्य अर्थव्यवस्था में खपत (consumption) को सपोर्ट करेगी

    केंद्र सरकार के DA संशोधन के बाद एक “aligning step” माना जा रहा है

  • बिहार सरकार का बड़ा फैसला: 9 लाख कर्मचारियों-पेंशनर्स का DA बढ़ाकर 60% किया

    बिहार सरकार का बड़ा फैसला: 9 लाख कर्मचारियों-पेंशनर्स का DA बढ़ाकर 60% किया


    नई दिल्ली। पटना Samrat Choudhary सरकार ने बिहार के करीब 9 लाख सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी राहत देते हुए महंगाई भत्ता (DA) बढ़ाने का फैसला किया है। बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में डीए को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने को मंजूरी दे दी गई। यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से प्रभावी मानी जाएगी।
    वित्त विभाग के अनुसार, इस फैसले से राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स की मासिक आय में बढ़ोतरी होगी। महंगाई और बढ़ती जरूरतों के बीच इसे कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
    कैबिनेट बैठक में पांचवें वेतनमान के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भी फायदा दिया गया है। उनका महंगाई भत्ता 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस कदम से पुरानी वेतन संरचना वाले कर्मचारियों को भी आर्थिक राहत मिलेगी।
    हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद आयोजित यह पहली कैबिनेट बैठक थी, जिसमें कुल 18 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें प्रशासनिक, शिक्षा, पुलिस व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई फैसले शामिल हैं।
    गृह विभाग के प्रस्ताव पर सरकार ने पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सीवान जिलों में ग्रामीण पुलिस अधीक्षक (SP) के पांच नए पद सृजित करने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को और मजबूत किया जा सकेगा।
    इसके अलावा वैशाली जिले में 100 एकड़ भूमि पर राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (NIFTEM) स्थापित करने के लिए भूमि अधिग्रहण को मंजूरी दी गई है। इस परियोजना से शिक्षा, रिसर्च और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई जा रही है।
    शिक्षा विभाग से जुड़े एक मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई करते हुए भोजपुर, आरा के तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी मो. इरशाद अंसारी को गबन और अनियमितताओं के आरोप सिद्ध होने पर बर्खास्त कर दिया है।
    कैबिनेट ने बिहार इलेक्ट्रिक वाहन (संशोधन) नीति 2026 को भी मंजूरी दी है। सरकार का कहना है कि नई नीति से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी। सरकार के इन फैसलों को प्रशासनिक सुधार और कर्मचारियों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

  • 8वें वेतन आयोग पर दिल्ली में निर्णायक मंथन: रेलवे और रक्षा कर्मियों की सैलरी-पेंशन में बड़े बदलाव की उम्मीद

    8वें वेतन आयोग पर दिल्ली में निर्णायक मंथन: रेलवे और रक्षा कर्मियों की सैलरी-पेंशन में बड़े बदलाव की उम्मीद

    नई दिल्ली । देश के लाखों सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर उम्मीदें एक बार फिर तेज हो गई हैं। लंबे समय से जिन बदलावों का इंतजार किया जा रहा था, अब वे धीरे-धीरे चर्चा के केंद्र में आते दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में दिल्ली में होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक को इस पूरे प्रक्रिया का निर्णायक चरण माना जा रहा है, जहां रेलवे और रक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी संगठनों की भागीदारी विशेष रूप से अहम रहने वाली है।

    इस बैठक का उद्देश्य केवल औपचारिक बातचीत नहीं बल्कि कर्मचारियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को समझना और भविष्य की वेतन संरचना की दिशा तय करना है। महंगाई के बढ़ते दबाव और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए कर्मचारी संगठनों ने फिटमेंट फैक्टर में सुधार और शुरुआती वेतन में बढ़ोतरी की मांग को प्रमुखता से उठाया है। इसके साथ ही महंगाई भत्ता, पदोन्नति प्रणाली और पेंशन संरचना जैसे मुद्दे भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।

    इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आयोग ने इस बार बैठकों में शामिल होने की प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से जोड़ दिया है, जिससे केवल पंजीकृत और अधिकृत प्रतिनिधि ही चर्चा का हिस्सा बन सकेंगे। इसके लिए एक विशेष पहचान प्रक्रिया निर्धारित की गई है, जिसमें ऑनलाइन आवेदन और एक विशिष्ट पहचान संख्या का निर्माण अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि केवल योग्य और आधिकारिक प्रतिनिधित्व रखने वाले संगठन ही अपनी बात रख सकें।

    कर्मचारी संगठनों के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पहली बार नीति निर्धारण की शुरुआती अवस्था में ही उनकी राय को औपचारिक रूप से शामिल किया जा रहा है। इससे पहले कई बार यह शिकायत रही है कि सुझाव अंतिम चरण में शामिल होते हैं, लेकिन इस बार प्रक्रिया को शुरुआत से ही अधिक सहभागी बनाने की कोशिश की जा रही है।

    बैठक के दौरान विभिन्न विभागों की आवश्यकताओं और आर्थिक परिस्थितियों का भी विस्तृत आकलन किया जाएगा। विशेष रूप से रेलवे और रक्षा जैसे बड़े क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों की सेवा शर्तों, जोखिम भत्तों और पेंशन ढांचे पर गहराई से चर्चा होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं के आधार पर एक प्रारंभिक ढांचा तैयार किया जाएगा, जो आगे चलकर अंतिम रिपोर्ट का आधार बनेगा।

    इस पूरे आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने के लिए सीमित समय दिया गया है, ऐसे में शुरुआती बैठकें बेहद निर्णायक मानी जा रही हैं। इन बैठकों के परिणाम न केवल वर्तमान वेतन संरचना को प्रभावित करेंगे, बल्कि आने वाले वर्षों में सरकारी नौकरी की आर्थिक आकर्षण क्षमता पर भी असर डाल सकते हैं।

    फिलहाल देशभर के कर्मचारियों की नजरें दिल्ली में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रक्रिया से वेतन और पेंशन व्यवस्था में ऐसे बदलाव सामने आएंगे, जो लंबे समय से चली आ रही मांगों को आंशिक या पूर्ण रूप से संबोधित कर सकेंगे।

  • कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

    कर्मचारियों की सैलरी पर बड़ा मंथन, 8वें वेतन आयोग में 10 साल की बजाय 5 साल रिव्यू की मांग तेज

    नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा लगातार तेज हो रही है। इसी बीच कर्मचारी यूनियनों ने एक अहम मांग उठाई है कि वेतन आयोग की समीक्षा हर 10 साल की बजाय हर 5 साल में की जानी चाहिए। उनका कहना है कि मौजूदा समय में जिस तेजी से महंगाई बढ़ रही है, उसके मुकाबले वेतन में होने वाली बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं रह जाती।

    यूनियनों का मानना है कि लंबे अंतराल में वेतन संरचना असंतुलित हो जाती है। निचले स्तर के कर्मचारियों और उच्च अधिकारियों के वेतन के बीच अंतर समय के साथ और ज्यादा बढ़ता जाता है, जिससे असमानता की स्थिति बनती है। इसका सीधा असर आम कर्मचारियों की जीवनशैली और उनकी क्रय शक्ति पर पड़ता है।

    कर्मचारियों का यह भी कहना है कि जब वेतन में बढ़ोतरी होती है, तो वह प्रतिशत के आधार पर तय होती है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ सभी वर्गों को समान रूप से नहीं मिलता। कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत कम फायदा होता है, जबकि अधिक वेतन पाने वालों को उसी अनुपात में अधिक लाभ मिल जाता है।

    यूनियनों का सुझाव है कि अगर वेतन आयोग की समीक्षा छोटे अंतराल पर की जाए, तो महंगाई और वेतन के बीच संतुलन बनाए रखना आसान हो सकता है। इससे कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में स्थिरता आएगी और उनकी वास्तविक आय पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

    इस बीच वेतन आयोग से जुड़े मुद्दों पर आगे की चर्चाओं के लिए बैठकों का दौर भी जारी है। इन बैठकों में कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, जिसमें वेतन, पेंशन और भत्तों जैसे विषय शामिल हैं।

    फिलहाल 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों की उम्मीदें और मांगें दोनों बढ़ गई हैं। आने वाले समय में इस पर क्या फैसला होता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • 8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    8वां वेतन आयोग: महंगाई के बीच सैलरी बढ़ाने की मांग तेज, जानिए कैसे तय होती है कर्मचारियों की तनख्वाह

    नई दिल्ली| देशभर में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बीच 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत में लगातार हो रही वृद्धि के कारण अब कर्मचारी सैलरी में बड़े इजाफे की मांग कर रहे हैं। शिक्षक, पोस्टमैन समेत कई वर्गों का कहना है कि मौजूदा वेतन उनकी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है, ऐसे में सरकार को वेतन ढांचे में बड़ा बदलाव करना चाहिए।

    कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने की है। फिटमेंट फैक्टर वह अहम फॉर्मूला होता है, जिसके जरिए पुरानी बेसिक सैलरी को नई सैलरी में बदला जाता है। 7वें वेतन आयोग में इसे 2.57 गुना रखा गया था, लेकिन अब कर्मचारी इसे बढ़ाकर 3.5 गुना या उससे अधिक करने की मांग कर रहे हैं। अगर ऐसा होता है, तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में सीधा बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।

    सैलरी तय करने का गणित केवल फिटमेंट फैक्टर तक सीमित नहीं होता। इसके साथ महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रैवल अलाउंस (TA) जैसे कई भत्ते भी जुड़े होते हैं, जो कुल वेतन को प्रभावित करते हैं। महंगाई भत्ता खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह सीधे तौर पर बढ़ती कीमतों के असर को संतुलित करने के लिए दिया जाता है। जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती है, DA में भी वृद्धि की जाती है, जिससे कर्मचारियों को राहत मिलती है।

    इसके अलावा, पे मैट्रिक्स सिस्टम के तहत हर कर्मचारी का एक लेवल तय होता है। इसी लेवल के आधार पर उसकी बेसिक सैलरी और प्रमोशन के बाद होने वाली बढ़ोतरी निर्धारित होती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस बार वेतन तय करते समय परिवार के वास्तविक खर्च को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए, ताकि सैलरी मौजूदा आर्थिक हालात के अनुरूप हो।

    8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को क्या फायदा मिल सकता है, यह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि अगर मांगों को माना गया, तो खासकर निचले स्तर के कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। इससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि उनकी क्रय शक्ति भी बढ़ेगी, जिसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी सकारात्मक रूप से पड़ सकता है।

    हालांकि, अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में है और वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी। फिलहाल, लाखों कर्मचारियों की नजर इस पर टिकी है कि सरकार उनकी उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

  • भारत के इस पड़ोसी देश में सरकारी कर्मियों को महीने में दो बार मिलेगी सैलरी…

    भारत के इस पड़ोसी देश में सरकारी कर्मियों को महीने में दो बार मिलेगी सैलरी…


    काठमांडू।
    भारत (India) के पड़ोसी देश नेपाल (Neighboring country Nepal) में युवा सरकार आने के बाद लगातार रिफॉर्म्स हो रहे हैं। इसी क्रम में रविवार को बालेन सरकार (Balen Government) के वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि अब से नेपाली सरकारी कर्मचारियों (Nepali Government Employees) को एक महीने में दो बारे वेतन मिलेगी।

    एजेंसी के मुताबिक नेपाली सरकार के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि 17 अप्रैल को बालेन सरकार ने इस फैसले पर मुहर लगाई है। अब से नेपाल के सिविल सेवकों, पुलिसकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को हर 15 दिन के अंतर पर सैलरी मिलेगी।

    नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, सरकार का यह निर्णय अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने के प्रयास के फलस्वरूप लिया गया है। क्योंकि सरकार का मानना है कि महीने में दो बार वेतन मिलने से कर्मचारियों के खर्च में वृद्धि हो सकती है, जिससे बाजार में ज्यादा पैसा आएगा और नकदी सुधार संभव होगा।

    बालेन सरकार के इस फैसले पर नेपाली कर्मचारियों की वेतन नियंत्रित करने वाली संस्था का भी बयान सामने आया है। एफसीजीओ के प्रवक्ता दीपक लामिछाने ने कहा, “तकनीकी रूप से, हमें इस प्रणाली को लागू करने में कोई समस्या नहीं है। हम सिविल सेवकों, नेपाल सेना, पुलिस, सशस्त्र पुलिस बल और अन्य सरकारी कर्मचारियों का वेतन किसी भी समय जारी कर सकते हैं।” हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नए फैसले को लागू करने के लिए कानूनी संसोधनों की आवश्यकता होगी।

    बता दें, नेपाल के संविधान के अनुसार प्रत्येक सरकारी कर्मचारी को महीने के अंत में वेतन देने का प्रावधान है। लामिछाने ने कहा कि सरकार अपने इस फैसले को लेकर प्रतिबद्ध है। वह जल्दी ही कोई रास्ता निकालकर इस फैसले को लागू करेगी।

  • MP: होली पर CM ने सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, डीए 3% बढ़ाकर केन्द्र के समान 58 प्रतिशत किया

    MP: होली पर CM ने सरकारी कर्मचारियों को दिया बड़ा तोहफा, डीए 3% बढ़ाकर केन्द्र के समान 58 प्रतिशत किया


    भोपाल।
    होली (Holi) से दो दिन पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने सरकारी कर्मचारियों (Government Employees) को बड़ा तोहफा दिया है। सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) में 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के इस एलान के बाद यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है। इसका फायदा राज्य के करीब 7.30 लाख कर्मचारियों को मिलेगा।

    मोहन यादव ने होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा ‘होली के पावन पर्व पर, मैं प्रदेश के सभी भाई-बहनों और देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। होली आपसी मेल-जोल को मजबूत करने, कड़वाहट मिटाने और प्रेम बढ़ाने का त्योहार है। सभी को मेरी तरफ से हार्दिक बधाई और होली की मंगलकामनाएं। इस अवसर पर राज्य सरकार ने शासकीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में 3 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी करने का फैसला लिया है, जिससे यह बढ़कर 58 प्रतिशत हो गया है।’

    करीब 10 महीने बाद बढ़ा डीए
    करीब 10 महीने पहले 27 अप्रैल 2025 को कर्मचारियों का डीए 5 फीसदी बढ़ाया गया था जिससे यह तब केंद्रीय कर्मचारियों के सामान हो गया था। कर्मचारियों को एरियर की राशि का भुगतान किया गया था। इससे पहले 28 अक्तूबर 2024 को इसमें 4 फीसदी तो 14 मार्च 2024 को 4 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी। 19 जुलाई 2023 और 27 जनवरी 2023 को भी 4-4 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी। वहीं 22 अगस्त 2022 को 3 फीसदी तो 21 मार्च 2022 को 11 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई थी।

    आपको बता दें कि सरकार महंगाई से निपटने के लिए सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता देती है। इसकी दरें ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेंक्स के आधार पर तय की जाती हैं। कर्मचारियों के मंहगाई भत्ते में साल में दो बार (हर 6 महीने में) बढ़ोत्तरी की जाती है।

    जनजातीय बहुल बड़वानी जिले में सोमवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कृषि कैबिनेट की बैठक की। बैठक के बाद उन्हें कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार किसी जनजातीय इलाके में हुई इस बैठक में किसानों को कई सौगात देने पर मुहर लगी। मोहन यादव की पहली कृषि कैबिनेट में किसानों के लिए 27,746 करोड़ रुपये की राशि का प्रस्ताव रखा है।

  • फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में वंदे मातरम और जन-गण-मन का सामूहिक गायन

    फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर मंत्रालय में वंदे मातरम और जन-गण-मन का सामूहिक गायन


    भोपाल : मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में फरवरी माह के प्रथम शासकीय कार्य दिवस पर सोमवार को राष्ट्र-गीत  वंदे मातरम और राष्ट्र-गान  जन-गण-मन का सामूहिक गायन किया गया। इस अवसर पर पुलिस बैंड ने मधुर धुनों से कार्यक्रम को भव्य बनाया और उपस्थित सभी अधिकारियों-कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाया।

    इस सामूहिक गायन कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण तथा विमुक्त, घुमन्तु, अर्द्धघुमन्तु कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार श्रीमती कृष्णा गौर भी उपस्थित रही। उन्होंने कार्यक्रम में भाग लेकर राष्ट्र-गीत और राष्ट्र-गान की महत्ता पर बल दिया।

    अपर मुख्य सचिव श्री अशोक बर्णवाल, श्री मनु श्रीवास्तव, श्री संजय कुमार शुक्ला, सचिव श्री एम. रघुराज के साथ-साथ मंत्रालय वल्लभ भवन और सतपुड़ा-विंध्याचल भवन के अधिकारी-कर्मचारी एवं पुलिस अधिकारी भी उपस्थित थे। सभी ने सामूहिक रूप से राष्ट्र-गीत और राष्ट्र-गान का गायन कर देशभक्ति की भावना का परिचय दिया।इस कार्यक्रम से मंत्रालय में कार्यदिवस की शुरुआत देशभक्ति के स्फूर्तिदायक वातावरण में हुई। अधिकारियों और कर्मचारियों ने एकजुट होकर राष्ट्र की गरिमा और सम्मान को महसूस किया और कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित की।

  • सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ

    सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी-पेंशन में बड़ा इजाफा 93,000 से अधिक लोगों को मिलेगा लाभ


    नई दिल्ली।केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए खुशियों की खबर दी है। वित्त मंत्रालय की घोषणा के अनुसार, वेतन और पेंशन में संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियां, NABARD और RBI के हजारों परिवारों को सीधा लाभ मिलेगासरकारी आंकड़ों के अनुसार इस फैसले से 46,322 कार्यरत कर्मचारियों की सैलरी बढ़ेगी जबकि 23,570 सेवानिवृत्त कर्मचारियों और 23,260 पारिवारिक पेंशनधारकों की आय में भी वृद्धि होगी

    PSU बीमा कंपनियों में इस संशोधन के लिए अनुमानित खर्च 8,170.30 करोड़ रुपये है जिसमें एरियर के लिए 5,822.68 करोड़ और पारिवारिक पेंशन के लिए 2,097.47 करोड़ रुपये शामिल हैंनाबार्ड के कर्मचारियों के लिए वेतन संशोधन 1 नवंबर 2022 से लागू होगा इसके कारण सालाना 170 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा और बकाया भुगतान के लिए करीब 510 करोड़ रुपये खर्च होंगे

    RBI और NABARD के पेंशनर्स के लिए भी संशोधन किया गया है इसके तहत 1 नवंबर 2022 से मूल पेंशन और महंगाई भत्ते में 10 प्रतिशत की वृद्धि होगी साथ ही पात्र लाभार्थियों को बकाया राशि का एकमुश्त भुगतान किया जाएगाइस फैसले से सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी और पारिवारिक पेंशनधारकों की भी जीवनशली में सुधार होगा