Tag: Government Hospital

  • मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं

    मंडला में स्वास्थ्य सिस्टम की पोल खुली, हाईकोर्ट में पहुंचा मामला-प्रसूति वार्ड में फर्श पर लेटती महिलाएं


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के Jabalpur स्थित हाईकोर्ट में मंडला जिला अस्पताल की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसने पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल जिले में चिकित्सा सुविधाएं बेहद कमजोर हैं और मरीजों को बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा है।
    याचिकाकर्ता के अनुसार मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें अधिकांश लोग ग्रामीण और आदिवासी समुदाय से आते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी बनी हुई है। 42 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 17 डॉक्टर ही वर्तमान में तैनात हैं।
    याचिका में यह भी बताया गया है कि कई अहम विशेषज्ञ पद वर्षों से खाली पड़े हैं। कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति के कारण गंभीर मरीजों को इलाज के लिए जबलपुर या नागपुर रेफर करना पड़ता है। रेडियोलॉजिस्ट न होने से सोनोग्राफी जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं भी बाधित हैं, जिससे मरीजों को निजी केंद्रों पर महंगे परीक्षण कराने पड़ते हैं।
    सबसे चिंताजनक स्थिति प्रसूति वार्ड की बताई गई है, जहां बिस्तरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर लेटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसे याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।
    मामले की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश Sanjeev Sachdeva और न्यायमूर्ति विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब देने का आदेश दिया है। अगली सुनवाई जून में होगी।
    याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि स्थिति सुधारने के लिए कई बार प्रदर्शन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
    कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि प्रसूति वार्ड में तत्काल अतिरिक्त बिस्तरों की व्यवस्था की जाए, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति समयबद्ध तरीके से हो और स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। फिलहाल यह मामला न सिर्फ मंडला की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि पूरे राज्य की ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को भी उजागर कर रहा है।

  • ग्वालियर के सरकारी अस्पताल में कमाल: जटिल सर्जरी से महिला की बच्चेदानी बचाई, फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी

    ग्वालियर के सरकारी अस्पताल में कमाल: जटिल सर्जरी से महिला की बच्चेदानी बचाई, फाइब्रॉइड गांठ हटाकर दी नई जिंदगी


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं ने एक बार फिर अपनी क्षमता और भरोसे को साबित किया है। सिविल अस्पताल हजीरा के डॉक्टरों ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 28 वर्षीय महिला की बच्चेदानी को सुरक्षित बचा लिया।

    यह मामला इटावा निवासी ज्योति सिंह का है, जो लंबे समय से बच्चेदानी में बड़ी फाइब्रॉइड गांठ की समस्या से जूझ रही थीं। अत्यधिक रक्तस्राव और गंभीर पेट दर्द के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हो चुकी थी। कई निजी अस्पतालों में उन्हें बच्चेदानी निकालने की सलाह दी गई थी, लेकिन आर्थिक कारणों से वे उपचार नहीं करा पा रही थीं।

    इसके बाद उन्होंने सिविल अस्पताल हजीरा में संपर्क किया। यहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत नायक के मार्गदर्शन में विशेषज्ञ टीम ने विस्तृत जांच के बाद ऑपरेशन की योजना बनाई। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने सावधानीपूर्वक बड़ी फाइब्रॉइड गांठ को सफलतापूर्वक हटा दिया और बच्चेदानी को सुरक्षित रखा।

    इस जटिल ऑपरेशन को सफल बनाने में डॉ. राहुल श्रीवास्तव और डॉ. अनुपम कुलश्रेष्ठ सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पूरी प्रक्रिया विशेषज्ञ निगरानी में पूरी तरह सुरक्षित तरीके से संपन्न की गई।

    डॉक्टरों की इस उपलब्धि से न केवल मरीज को नई जिंदगी मिली, बल्कि सरकारी अस्पतालों की सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत हुआ है। मरीज और उनके परिजनों ने अस्पताल स्टाफ और डॉक्टरों का आभार जताते हुए कहा कि यहां बेहतर इलाज और समर्पित सेवाएं मिलना सराहनीय है।

    अस्पताल प्रशासन ने भी आम लोगों से अपील की है कि वे आधुनिक सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का लाभ उठाएं, क्योंकि यहां कई जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।

  • रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत

    रणझी की छोटी विक्टोरिया बनी बड़ी उम्मीद 45 करोड़ का 100 बेड अस्पताल दो लाख लोगों को देगा राहत


    जबलपुर के उपनगरीय क्षेत्र रणझी में स्थित सिविल अस्पताल जिसे लोग वर्षों से छोटी विक्टोरिया के नाम से जानते हैं अब इतिहास रचने जा रहा है यह वही अस्पताल है जो अब तक केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गया था लेकिन अब इसकी पहचान पूरी तरह बदलने वाली है करीब 45 करोड़ रुपये की लागत से तैयार चार मंजिला हाईटेक 100 बिस्तरों वाला नया अस्पताल भवन क्षेत्र के लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत बनकर सामने आया है

    इस अस्पताल के शुरू होने के बाद रणझी और आसपास के इलाकों के लगभग दो लाख लोगों को इलाज के लिए शहर की ओर दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी अब तक हार्ट अटैक ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज जैसे गंभीर मामलों में मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता था इस प्रक्रिया में 20 से 25 मिनट का कीमती समय निकल जाता था जो कई बार मरीज की जान के लिए खतरा बन जाता था

    नए भवन के संचालन में आने के बाद हालात पूरी तरह बदलने की उम्मीद है अस्पताल में आधुनिक जांच मशीनें स्थापित की गई हैं 100 बिस्तरों की सुविधा शुरू होने के साथ ही डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी साथ ही नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की भी पर्याप्त तैनाती होगी इससे सामान्य बीमारियों के साथ साथ गंभीर रोगों का इलाज भी यहीं संभव हो सकेगा

    रणझी सिविल अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन औसतन 300 से 350 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण अब तक उन्हें सीमित सुविधाएं ही मिल पाती थीं नए अस्पताल भवन के शुरू होने से मरीजों को बेहतर जांच सही समय पर उपचार और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलेगी

    रणझी के छह वार्डों के अलावा मटामर सोनपुर मानेगांव मोहनिया खमरिया पिपरिया और उमरिया जैसे क्षेत्रों की बड़ी आबादी इसी अस्पताल पर निर्भर है इन इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं है मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ संजय मिश्रा के अनुसार नए भवन के चालू होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा काफी बढ़ जाएगा अस्पताल में जरूरी जांच सुविधाएं विशेषज्ञ चिकित्सक और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराया जाएगा जिससे गंभीर मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा

    इस चार मंजिला अस्पताल भवन की संरचना भी पूरी तरह आधुनिक है पहली मंजिल पर प्रशासनिक ब्लॉक बनाया गया है दूसरी मंजिल पर पुरुष और महिला वार्ड की सुविधा है तीसरी मंजिल पर अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं भवन में सीढ़ी रैंप और तीन लिफ्ट की सुविधा दी गई है साथ ही बाहर पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है

    अस्पताल में दो आधुनिक ऑपरेशन थिएटर बनाए गए हैं जहां माइनर ऑपरेशन की सुविधा उपलब्ध होगी इसके अलावा एक पैथोलॉजी लैब भी बनाई गई है जिसमें जरूरी जांच की सुविधाएं होंगी नई ओपीडी वार्ड इमरजेंसी वार्ड और अन्य संसाधन भी मरीजों को उपलब्ध कराए जाएंगे कुल मिलाकर छोटी विक्टोरिया के नाम से पहचाने जाने वाले इस अस्पताल का यह नया रूप रणझी और आसपास के इलाकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं में एक नई शुरुआत साबित होगा जहां समय पर इलाज मिलने से न सिर्फ लोगों की जान बचेगी बल्कि शहर पर स्वास्थ्य सेवाओं का दबाव भी कम होगा