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  • सरकारी अस्पतालों के पानी में E. coli का खतरा, 15 में से 5 सैंपल फेल, MYH समेत कई अस्पतालों पर उठे सवाल

    सरकारी अस्पतालों के पानी में E. coli का खतरा, 15 में से 5 सैंपल फेल, MYH समेत कई अस्पतालों पर उठे सवाल


    इंदौर । इंदौर के सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को उपलब्ध कराए जा रहे पानी की गुणवत्ता को लेकर नगर निगम की जांच में चिंताजनक स्थिति सामने आई है। नगर निगम की वाटर टेस्टिंग लैब ने अलग अलग सरकारी अस्पतालों और उनके परिसरों से पानी के 15 सैंपल लिए थे। जांच रिपोर्ट में 6 सैंपल में Coliform Bacteria और 5 सैंपल में E. coli पाए गए हैं। रिपोर्ट को नेता प्रतिपक्ष की ओर से सार्वजनिक किए जाने के बाद अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    पानी की जांच के लिए निर्धारित मानकों के मुताबिक 100 एमएल पानी में Coliform और E. coli की मौजूदगी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में जिन सैंपल में इन बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। खासतौर पर अस्पतालों में यह स्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां पहले से बीमार मरीजों के अलावा बच्चे बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग भी इलाज के लिए आते हैं।

    जांच में सबसे ज्यादा बैक्टीरिया पीसी सेठी अस्पताल के बोरवेल के पानी में पाया गया। यहां Coliform की मात्रा 118 MPN प्रति 100 एमएल और E. coli की मात्रा 24 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज की गई। इसी अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर स्थित RO यूनिट के पानी में भी दोनों बैक्टीरिया की मौजूदगी मिली। अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों के इस्तेमाल वाले पानी की गुणवत्ता को देखते हुए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    गोविंद बल्लभ पंत जिला अस्पताल के वाटर कूलर से लिए गए सैंपल में भी Coliform और E. coli मिला। जांच में Coliform 64 और E. coli 5 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज हुआ। वाटर कूलर का पानी मरीजों और उनके परिजन पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में पानी में बैक्टीरिया की मौजूदगी स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़ा विषय बन जाती है।

    चाचा नेहरू अस्पताल में भी पानी के अलग अलग स्रोतों में बैक्टीरिया पाए गए। अस्पताल की बिल्डिंग में स्थित बोरवेल के पानी में Coliform 10 और E. coli 4 मिला। मुख्य गेट के पास स्थित RO यूनिट के पानी में Coliform 26 और E. coli 16 MPN प्रति 100 एमएल दर्ज किया गया। इससे साफ है कि केवल बोरवेल ही नहीं बल्कि कुछ RO यूनिट के पानी के सैंपल भी जांच में मानकों के अनुरूप नहीं मिले।

    एमवाय अस्पताल के पास लिए गए बोरवेल के पानी के सैंपल में भी Coliform 9 और E. coli 7 MPN प्रति 100 एमएल पाया गया। हालांकि नर्मदा बल्क कनेक्शन और छठी मंजिल के टैप से लिए गए पानी के सैंपल में इन बैक्टीरिया की मात्रा नहीं मिली। मानसिक अस्पताल बाणगंगा के बोरिंग के पानी में भी Coliform पाया गया जबकि वहां के कुछ RO सैंपल में भी बैक्टीरिया की मौजूदगी दर्ज हुई।

    विशेषज्ञों के मुताबिक दूषित पानी में मौजूद बैक्टीरिया शरीर में पहुंचने पर दस्त पेट दर्द उल्टी मरोड़ और पाचन तंत्र से जुड़ी दूसरी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ज्यादा संक्रमण या पानी की कमी होने पर डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन सकती है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए ऐसी समस्या अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है क्योंकि वे पहले से ही किसी बीमारी का इलाज करा रहे होते हैं।

    जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब अस्पतालों में पानी के स्रोतों की सफाई और गुणवत्ता सुधारने की जरूरत पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। खासतौर पर जिन स्थानों के सैंपल में E. coli और Coliform मिले हैं वहां पानी के स्रोतों की दोबारा जांच और आवश्यक सुधार की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

  • स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर नहीं माने इंटर्न डॉक्टर, MP में OPD का बहिष्कार: हमीदिया में इलाज प्रभावित, CM हाउस के रास्ते बंद

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर नहीं माने इंटर्न डॉक्टर, MP में OPD का बहिष्कार: हमीदिया में इलाज प्रभावित, CM हाउस के रास्ते बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब और तेज हो गया है। सोमवार सुबह से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रखने का फैसला किया है। भोपाल के साथ ही इंदौर रतलाम और अन्य शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है। ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से इलाज और जांच के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है।

    राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर से कमला पार्क क्षेत्र की सड़क पर बैठे हुए हैं। डॉक्टरों ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर आधिकारिक रूप से बातचीत नहीं होती और स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में भी पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ओपीडी सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। प्रदर्शन के कारण ओपीडी पूरी तरह बंद रही जबकि ऑपरेशन थिएटर के काम का भी बहिष्कार किया जा रहा है। इलाज और जांच के लिए दूरदराज से पहुंचे मरीजों को परेशान होना पड़ा। अस्पताल के तीन गेटों में से केवल गेट नंबर दो से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी गेट बंद होने के कारण आपातकालीन मरीजों को भी इसी गेट से अस्पताल में प्रवेश करना पड़ रहा है जिससे अस्पताल के बाहर वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ गई है और ट्रैफिक पर भी दबाव बना हुआ है।

    इधर इंदौर में भी इंटर्न डॉक्टरों ने एमवाय अस्पताल परिसर में विरोध रैली निकालकर आंदोलन को समर्थन दिया। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर एकजुट हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। उनका आरोप है कि भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया जिसके विरोध में अब प्रदेश के अलग अलग शहरों में भी प्रदर्शन तेज हो गया है।

    आंदोलन के बीच डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई। बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई जिसमें स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा शामिल रहा। स्वास्थ्य मंत्री ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के वापस आने के बाद इस मुद्दे पर फिर से चर्चा किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे केवल मौखिक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनका साफ कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा। डॉक्टरों ने यह भी तर्क दिया है कि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया गया है इसलिए मध्यप्रदेश सरकार को भी इस दिशा में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

    फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है लेकिन आंदोलन समाप्त होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर सरकार समाधान के लिए बातचीत कर रही है तो दूसरी ओर इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आंदोलन का सीधा असर सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है और लोगों की नजर अब सरकार और डॉक्टरों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हुई है।