मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश सरकार ने भू संपदा नियमन व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय लेते हुए मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी को मध्यप्रदेश भू संपदा अपीलीय अधिकरण का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस संबंध में नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने शुक्रवार को भोपाल से विधिवत नियुक्ति आदेश जारी कर दिए हैं। यह नियुक्ति राज्य शासन द्वारा रियल एस्टेट विनियमन और विकास अधिनियम 2016 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए की गई है।
सरकार ने यह नियुक्ति भू संपदा विनियमन और विकास अधिनियम 2016 की धारा 45 तथा धारा 47 के प्रावधानों के तहत की है। आदेश के मुताबिक अध्यक्ष के वेतन भत्ते सेवा शर्तें और अन्य सुविधाएं मध्यप्रदेश भू संपदा विनियमन और विकास नियम 2017 के नियम 30 के अनुसार निर्धारित की जाएंगी। इससे स्पष्ट है कि उनकी नियुक्ति पूरी तरह वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप की गई है।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राज्यपाल के नाम से यह नियुक्ति स्वीकृत की गई है। आदेश पर विभाग के उप सचिव प्रमोद कुमार शुक्ला के डिजिटल हस्ताक्षर हैं। आदेश की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय मुख्य सचिव कार्यालय सामान्य प्रशासन विभाग वित्त विभाग विधि एवं विधायी कार्य विभाग मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग सहित संबंधित विभागों को भी भेजी गई है ताकि नियुक्ति से जुड़ी सभी औपचारिक प्रक्रियाएं समय पर पूरी की जा सकें।
मध्यप्रदेश भू संपदा अपीलीय अधिकरण रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े विवादों और अपीलों के निस्तारण का महत्वपूर्ण न्यायिक मंच है। यहां रेरा से जुड़े मामलों में अपीलों की सुनवाई की जाती है। ऐसे में अनुभवी न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति से लंबित मामलों के त्वरित और प्रभावी निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है। जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी न्यायिक सेवा में लंबे अनुभव के साथ उच्च न्यायालय में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर चुके हैं। उनके अनुभव का लाभ अब भू संपदा अपीलीय अधिकरण को मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नियुक्ति से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने निवेशकों का विश्वास मजबूत करने और बिल्डर तथा खरीदारों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों के समयबद्ध समाधान को गति मिलेगी। राज्य सरकार का यह कदम रियल एस्टेट नियामक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
