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  • शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत

    शाजापुर कलेक्ट्रेट में ग्रामीणों का प्रदर्शन: शासकीय भूमि पर कब्जे के आरोप, कलेक्टर के आश्वासन के बाद मामला शांत


    शाजापुर। शाजापुर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को जनसुनवाई के दौरान पोलायखुर्द गांव के ग्रामीणों ने शासकीय भूमि पर कथित कब्जे के मामले को लेकर जमकर प्रदर्शन किया। करीब दो घंटे तक उनकी शिकायत पर सुनवाई नहीं होने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।

    स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारी कलेक्टर की वाहन पार्किंग के पास पहुंच गए और वहीं धरने पर बैठकर विरोध जताने लगे। ग्रामीणों ने कलेक्टर के खिलाफ भी नारे लगाए, जिससे परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    पुलिस और प्रशासन ने संभाली स्थिति
    घटना की सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। कलेक्टर उस समय जनसुनवाई कक्ष में मौजूद थीं। सुंदरसी थाना प्रभारी मनीष शर्मा ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाइश दी और स्थिति को नियंत्रित किया। लंबी समझाइश के बाद ग्रामीणों ने शांत रुख अपनाया और अपने पांच प्रतिनिधियों को कलेक्टर से बातचीत के लिए भेजा गया।

    कलेक्टर के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
    प्रतिनिधिमंडल की कलेक्टर से मुलाकात के दौरान उन्हें मामले की जांच और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। आश्वासन मिलने के बाद ग्रामीणों ने अपना प्रदर्शन समाप्त कर दिया और स्थिति सामान्य हो गई।

    शासकीय भूमि पर कब्जे और फर्जी नामांतरण का आरोप
    ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ग्राम पोलायखुर्द स्थित शासकीय भूमि सर्वे क्रमांक 1396 (रकबा 2.045 हेक्टेयर) पर कुछ लोगों ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी नामांतरण कर लिया है।

    ग्रामीणों का कहना है कि उक्त भूमि पर गांव का प्राचीन मंदिर और बच्चों का श्मशान स्थल स्थित है, जिससे यह जमीन सामाजिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ग्राम पंचायत द्वारा अनुसूचित जाति समाज के लिए मांगलिक भवन निर्माण का प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है।

    जातिसूचक गाली और धमकी देने का भी आरोप
    प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने पर संबंधित लोगों द्वारा उन्हें जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया और जान से मारने की धमकी भी दी गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि फर्जी नामांतरण को तत्काल निरस्त किया जाए और दोषियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना और अवैध कब्जे का मामला दर्ज किया जाए।

  • कब्जा हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव: सरपंच प्रतिनिधि को धमकी, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू

    कब्जा हटाने की कार्रवाई के बाद तनाव: सरपंच प्रतिनिधि को धमकी, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू


    शाजापुर । शाजापुर जिले के हिरपुर भज्जा भरड़ क्षेत्र में शासकीय जमीन से अवैध कब्जा हटाने को लेकर दो पक्षों के बीच गंभीर विवाद हो गया। सोमवार रात हुए इस घटनाक्रम का वीडियो मंगलवार को सामने आने के बाद मामला और तूल पकड़ गया। विवाद के बाद सरपंच प्रतिनिधि सवाई सिंह ने कोतवाली थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    घर के सामने पहुंचकर गाली-गलौज और हंगामे का आरोप
    फरियादी सवाई सिंह (49), पिता हीरालाल, निवासी हिरपुर भज्जा भरड़ ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि 25 मई 2026 की रात करीब 10 बजे लखन अहिरवार, उनकी मां रामकुंवर बाई और पत्नी उनके घर के सामने पहुंचे। आरोप है कि तीनों शासकीय जमीन से गुमटी हटाने के मुद्दे को लेकर हंगामा करने लगे और जोर-जोर से गाली-गलौज की।
    सवाई सिंह के अनुसार, उस समय वह अपने साथी जगदीश सोलिया के साथ गांव से घर लौटे थे। उन्होंने जब गाली-गलौज का विरोध किया, तो आरोपियों ने कथित तौर पर उन्हें भी अपशब्द कहे और माहौल तनावपूर्ण हो गया।

    जान से मारने की धमकी देने का आरोप
    शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विवाद बढ़ने पर आरोपियों ने सरपंच प्रतिनिधि को झूठे केस में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी। इस घटना से पूरे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई, हालांकि मौके पर मौजूद लोगों ने विवाद को देखा और स्थिति को शांत करने की कोशिश की।

    मौके पर मौजूद लोगों ने देखा पूरा घटनाक्रम
    घटना के दौरान ब्रम्हानंद गोवा, शुभम (भवानी सिंह के पुत्र) और जगदीश सोलिया मौके पर मौजूद थे। इन गवाहों की मौजूदगी में पूरा विवाद हुआ। बताया जा रहा है कि इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और हंगामा साफ दिखाई दे रहा है।

    पुलिस ने दर्ज किया मामला, जांच शुरू
    कोतवाली पुलिस ने सवाई सिंह की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों के अनुसार, शासकीय जमीन से कब्जा हटाने को लेकर लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई थी, जो अब खुले विवाद में बदल गई।