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  • सरकारी दफ्तरों में सफेद तौलिये का राज आया सामने, आखिर क्यों अफसरों की कुर्सियों पर आज भी कायम है यह पुरानी परंपरा

    सरकारी दफ्तरों में सफेद तौलिये का राज आया सामने, आखिर क्यों अफसरों की कुर्सियों पर आज भी कायम है यह पुरानी परंपरा

    नई दिल्ली ।  सरकारी दफ्तरों में अगर आपने कभी किसी बड़े अधिकारी के केबिन में कदम रखा हो, तो एक चीज जरूर आपकी नजरों में आई होगी—कुर्सी की पीठ पर सलीके से रखा सफेद तौलिया। वर्षों से यह दृश्य सरकारी कार्यालयों की पहचान बना हुआ है। बदलते दौर, आधुनिक फर्नीचर और एयर कंडीशन ऑफिसों के बावजूद यह परंपरा आज भी कायम है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आखिर सरकारी अफसरों की कुर्सियों पर सिर्फ सफेद तौलिया ही क्यों लगाया जाता है? लाल, नीला या कोई दूसरा रंग क्यों नहीं? इसके पीछे छिपी वजह बेहद दिलचस्प और इतिहास से जुड़ी हुई है।

    दरअसल, इस परंपरा की शुरुआत ब्रिटिश शासनकाल से मानी जाती है। उस दौर में सरकारी कार्यालयों में आज जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद नहीं थीं। न एयर कंडीशनर होते थे और न ही बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था। गर्मी और उमस के बीच अधिकारी लंबे समय तक काम करते थे, जिससे कुर्सियों पर पसीने और धूल का असर जल्दी दिखाई देता था। ऐसे में कुर्सियों को साफ और सुरक्षित रखने के लिए उन पर तौलिया डालने की शुरुआत की गई। सफेद रंग इसलिए चुना गया क्योंकि उस पर गंदगी तुरंत नजर आ जाती थी और उसे समय-समय पर बदलना आसान होता था।

    कुछ जानकारों के अनुसार, उस समय भारतीय लोगों में बालों में तेल लगाने की आदत आम थी। इससे कुर्सियों के कवर जल्दी खराब हो जाते थे। अंग्रेज अधिकारियों ने कुर्सियों को तेल और गंदगी से बचाने के लिए सफेद तौलिये का इस्तेमाल शुरू किया। धीरे-धीरे यह केवल सफाई तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सरकारी पद और अधिकार का प्रतीक बन गया। समय बीतने के साथ सफेद तौलिया अफसरों की पहचान में शामिल हो गया और यह परंपरा सरकारी संस्कृति का हिस्सा बन गई।

    आज भी कई सरकारी कार्यालयों में वरिष्ठ अधिकारियों की कुर्सियों पर सफेद तौलिया अनिवार्य रूप से दिखाई देता है। खास बात यह है कि कई जगहों पर इन्हें नियमित रूप से बदला भी जाता है ताकि साफ-सफाई बनी रहे। सफेद तौलिया अब केवल स्वच्छता का साधन नहीं, बल्कि अनुशासन और प्रशासनिक गरिमा का प्रतीक माना जाता है। बड़े अधिकारियों की कुर्सियों पर इसका होना उनके पद और जिम्मेदारी को दर्शाने वाला संकेत भी बन चुका है।

    हालांकि आधुनिक दौर में ऑफिसों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। शानदार इंटीरियर, आरामदायक कुर्सियां, एयर कंडीशनर और आधुनिक सुविधाएं लगभग हर बड़े सरकारी कार्यालय में मौजूद हैं, लेकिन सफेद तौलिये की परंपरा अभी भी खत्म नहीं हुई। कई लोग इसे सरकारी सिस्टम की पुरानी पहचान मानते हैं, तो कुछ इसे एक तरह का स्टेटस सिंबल भी समझते हैं।

    दिलचस्प बात यह है कि निजी कंपनियों और कॉर्पोरेट ऑफिसों में यह परंपरा लगभग दिखाई नहीं देती, जबकि सरकारी दफ्तरों में इसका महत्व आज भी बरकरार है। यही वजह है कि सफेद तौलिया अब सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि भारतीय सरकारी व्यवस्था की एक खास पहचान बन चुका है। वर्षों पुरानी यह परंपरा आज भी उसी मजबूती के साथ जारी है और शायद आने वाले समय में भी सरकारी दफ्तरों की संस्कृति का हिस्सा बनी रहेगी।

  • स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत

    स्कूलों, HC, सरकारी दफ्तरों को बम से उड़ाने की धमकी देने वाला गिरफ्तार… 1100 ईमेल भेजे, फैलाई दशहत


    नई दिल्ली।
    राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (Delhi) समेत देश के कई राज्यों में स्कूलों (Schools), हाईकोर्ट (High Court) और सरकारी दफ्तरों (Government offices.) में बम की धमकी (Bomb threat) देकर दहशत फैलाने वाला शातिर श्रीनिवास लुईस (47) मैसूर से पकड़ा गया। आरोपी ने धमकी के 1,100 से ज्यादा ई-मेल किए थे। दिल्ली पुलिस ने उसे कर्नाटक पुलिस के सहयोग से दबोचा। ट्रांजिट रिमांड पर पुलिस उसे दिल्ली लेकर आ रही है। उसके पास से एक लैपटॉप और कई सिम कार्ड जब्त किए गए हैं।

    दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, श्रीनिवास को बृहस्पतिवार को मैसूर के वृंदावन लेआउट में मकान से दबोचा गया। वह पहचान छिपाने के लिए अलग-अलग जगहों से धमकी भरे ईमेल और मैसेज भेजता था। दिल्ली हाईकोर्ट के जज को भी धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था। उनकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। पुलिस ने बताया, कई हफ्तों तक चली तकनीकी पड़ताल के बाद संदिग्ध की पहचान हो पाई। आरोपी ने धमकी भरे मैसेज भेजने की बात कबूली है।


    पोस्टग्रेजुएट, लेकिन बेरोजगार है आरोपी

    बंगलूरू का रहने वाला श्रीनिवास पोस्टग्रेजुएट है। फिलहाल बेरोजगार है और अपनी मां के साथ रहता है। उसकी मां रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी हैं।
    शुरुआती जांच से लगता है कि वह शायद मानसिक तनाव से जूझ रहा था। अधिकारियों ने कहा कि उसने जान-बूझकर अदालतों और स्कूलों, कॉलेजों को निशाना बनाया, ताकि ज्यादा दहशत फैलाई जा सके।
    श्रीनिवास की इन झूठी धमकियों की वजह से सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने पड़े, कई जगहों से लोगों को बाहर निकालना पड़ा और कई संस्थानों का कामकाज भी ठप हो गया।

  • MP: भोपाल में MP नगर स्थित सरकारी दफ्तर को बम से उड़ाने की धमकी, मचा हड़कंप

    MP: भोपाल में MP नगर स्थित सरकारी दफ्तर को बम से उड़ाने की धमकी, मचा हड़कंप


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की राजधानी भोपाल (Bhopal) के व्यस्त इलाके एमपी नगर स्थित नापतौल विभाग के दफ्तर (Metrology Department Office) में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक ईमेल के जरिए विभाग को बम से उड़ाने की धमकी दी गई. ईमेल में दावा किया गया था कि दफ्तर के भीतर साइनाइड गैस के 16 सिलेंडर रखे गए हैं.

    दफ्तर के सुपरिटेंडेंट श्यामू सोलंकी ने बताया, “ईमेल चेक करते समय सुबह 10:20 बजे मुझे एक मैसेज मिला, जिसमें लिखा था कि विभाग के दफ्तर के अंदर साइनाइड गैस से भरे 16 सिलेंडर रखे गए हैं और वे दोपहर करीब 1 बजे फट जाएंगे.”

    इसके बाद अपने सीनियर अधिकारियों से संपर्क किया और पुलिस को इसकी सूचना दी गई. उन्होंने बताया कि बम निरोधक दस्ते के जवान और खोजी कुत्तों के साथ पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और पूरे परिसर की तलाशी ली. उन्होंने आगे बताया कि एहतियात के तौर पर दफ्तर को खाली करा लिया गया था.

    सोलंकी ने बताया कि पुलिस को दफ़्तर में कोई सिलेंडर या विस्फोटक सामग्री नहीं मिली. इससे पहले भी भोपाल में पीपल्स यूनिवर्सिटी और AIIMS को इसी तरह के धमकी भरे ईमेल भेजे गए थे, लेकिन वे अलर्ट भी झूठे निकले थे.

    भोपाल सिटी जोन 2 के पुलिस उपायुक्त (DCP) विवेक सिंह ने बताया कि ईमेल भेजने वाले की पहचान करने के लिए जांच चल रही है. उन्होंने शक जाहिर किया कि पूरे देश में इस तरह के ईमेल भेजने के पीछे किसी गिरोह का हाथ हो सकता है, जो नकली नामों का इस्तेमाल कर रहा है. दोपहर 1:10 बजे से अपना काम फिर से शुरू कर दिया।