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  • क्या फिर लगेगा लॉकडाउन? हरदीप पुरी के बयान से साफ हुआ सरकार का प्लान

    क्या फिर लगेगा लॉकडाउन? हरदीप पुरी के बयान से साफ हुआ सरकार का प्लान


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध संकट के चलते दुनियाभर में कच्चे तेल से लेकर पेट्रोल-डीजल तक की कमी से हाहाकार मच गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने तेल की कीमतें बढ़ने को लेकर एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर लगभग 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं। देश में लॉकडाउन (Lockdown In India) को लेकर चल रही अफवाहों पर भी विराम लगाने का काम किया है।

    ”भारतीयों के लिए प्रतिबद्ध सरकार”
    केंद्रीय मंत्री हरदीर पुरी ने कहा कि केंद्र सरकार भारतीयों के हित के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार के पास दो विकल्प थे- एक तो कीमतों में बढ़ोतरी करे या फिर अपने वित्त पर बोझ उठाए। सरकार ने दूसरे उपाय को प्रयोग किया। हरदीप पुरी ने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल हो गई हैं जिसके कारण निर्यात टैक्स भी लगाया है और विदेशी देशों को निर्यात करने वाली किसी भी रिफाइनरी को एक्सपोर्ट टैक्स देना होगा

    Lockdown In India को लेकर स्थिति स्पष्ट की
    हरदीप पुरी ने कहा कि इस समय मीडिल ईस्ट का तनाव वैश्विक स्तर पर प्रभाव दिखा रहा है जिसके चलते ऊर्जा, सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। हालांकि उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार सुनिश्चि कर रही है कि ईंधन, ऊर्जा और अन्य जरूरी चीजों की आपूर्ति निर्बाध रूप से चलती रहे। लॉकडाउन को लेकर चल रही अटकलों पर भी हरदीप पुरी ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन की बातें निराधार हैं। सरकार ऐसे किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। इस तरह की स्थिति में अफवाह फैलाना और बेवजह डर का माहौल बनाना गैर-जिम्मेदाराना और हानिकारक है।

  • केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी

    केंद्र का बड़ा प्लान: रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन 5,000 टन तक पहुंचाने की तैयारी



    नई दिल्ली।  भारत ने रणनीतिक खनिजों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देश में दुर्लभ पृथ्वी खनिजों से बनने वाले स्थायी चुंबकों की घरेलू उत्पादन क्षमता वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 5,000 टन करने का लक्ष्य रखा गया है। यह कदम इलेक्ट्रिक व्हीकल, रक्षा और हाई-टेक सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

    क्या बोले Jitendra Singh?

    केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में बताया कि भारत दुर्लभ खनिजों और लिथियम की खोज में तेजी ला रहा है। सरकार का फोकस न सिर्फ इन खनिजों की खोज पर है, बल्कि इनके प्रोसेसिंग और उपयोग के लिए मजबूत घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना भी है।

    मांग तेजी से बढ़ रही, चुनौती भी बड़ी

    सरकार के मुताबिक, इस समय देश में दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबकों की जरूरत करीब 4,000 टन है, जो 2030 तक बढ़कर लगभग 8,000 टन तक पहुंच सकती है। ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके।

    नए प्रोजेक्ट्स से मिलेगी रफ्तार

    सरकार ने इस दिशा में कई अहम कदम उठाए हैं:

    नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन (NdFeB) चुंबकों की प्रायोगिक परियोजना शुरू
    विशाखापत्तनम में समैरियम-कोबाल्ट चुंबक प्लांट चालू
    शुरुआती उत्पादन क्षमता 500 टन/वर्ष, जिसे बढ़ाकर 2,000 टन और फिर 5,000 टन करने की योजना

    ये प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूत स्थिति दिलाने में मदद करेंगे।

    किन सेक्टरों के लिए जरूरी हैं ये खनिज?

    दुर्लभ पृथ्वी तत्व और लिथियम कई उभरती तकनीकों की रीढ़ माने जाते हैं, जैसे:

    इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
    नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)
    इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर
    रक्षा और एयरोस्पेस
    अंतरिक्ष तकनीक

    इनकी मांग आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

    आत्मनिर्भरता की ओर मजबूत कदम

    सरकार का लक्ष्य एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन बनाना है, जिससे भारत इन महत्वपूर्ण खनिजों के लिए दूसरे देशों पर कम निर्भर रहे। इसके लिए अलग-अलग मंत्रालय मिलकर काम कर रहे हैं और खनन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग तक पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जा रहा है।

    क्यों है यह रणनीतिक कदम?

    वैश्विक स्तर पर दुर्लभ पृथ्वी खनिजों पर कुछ ही देशों का दबदबा है। ऐसे में भारत का यह कदम न सिर्फ आर्थिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा, तकनीकी विकास और औद्योगिक क्षमता को नई मजबूती मिलेगी।