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  • पेट्रोल महंगा, डीजल-एटीएफ सस्ता? टैक्स स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव

    पेट्रोल महंगा, डीजल-एटीएफ सस्ता? टैक्स स्ट्रक्चर में हुआ बदलाव


    नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात से जुड़े टैक्स ढांचे में अहम बदलाव करते हुए पेट्रोल पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) बढ़ा दिया है, जबकि डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर राहत दी गई है। सरकार के इस फैसले को वैश्विक तेल बाजार में बढ़ती अस्थिरता और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

    वित्त मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर अब 3 रुपये प्रति लीटर का अतिरिक्त शुल्क लगाया जाएगा। वहीं डीजल पर निर्यात शुल्क घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही पेट्रोल और डीजल दोनों पर लागू सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस को शून्य कर दिया गया है।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस संशोधन से घरेलू ईंधन की कीमतों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और यह बदलाव केवल निर्यात से जुड़े ढांचे पर लागू होगा। नए आदेश को शनिवार से प्रभावी कर दिया गया है।

    गौरतलब है कि पश्चिम एशिया संकट के बाद पहली बार पेट्रोल निर्यात पर शुल्क लगाया गया है, जबकि डीजल और एटीएफ पर लगातार बदलावों के बाद अब दरों में कटौती की गई है। डीजल पर पहले 21.5 रुपये प्रति लीटर, फिर 55.5 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि और बाद में 23 रुपये प्रति लीटर तक कमी की गई थी, जिसे अब घटाकर 16.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

    इसी तरह एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर भी कई बार संशोधन किया गया। पहले यह शुल्क 29.5 रुपये प्रति लीटर था, जिसे बढ़ाकर 42 रुपये और फिर 33 रुपये किया गया था। अब इसे घटाकर 16 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, विंडफॉल टैक्स ढांचे के तहत यह बदलाव वैश्विक बाजार में अस्थिरता के बीच घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने और निर्यात प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया है जब अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

    पश्चिम एशिया तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक गतिरोध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। ऐसे में भारत का यह टैक्स संशोधन नीति संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

  • पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार

    पेट्रोल-डीजल कीमतें स्थिर, एक्साइज में कटौती से तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई करेगी सरकार


    नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। हालांकि, एक्साइज ड्यूटी में की गई कटौती का फायदा सीधे उपभोक्ताओं को नहीं मिलेगा, बल्कि इसका उपयोग सरकारी तेल कंपनियों के नुकसान की भरपाई के लिए किया जाएगा। सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है।

    तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान

    पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—लागत से कम कीमत पर ईंधन बेच रही हैं। मौजूदा हालात में पेट्रोल पर लगभग 26 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर करीब 81.90 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। कुल मिलाकर, ये कंपनियां रोजाना लगभग 2,400 करोड़ रुपए का घाटा झेल रही हैं, जो लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है।

    एक्साइज ड्यूटी में कटौती का मकसद

    सरकार ने पेट्रोल और डीजल दोनों पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। इस कदम से तेल कंपनियों के नुकसान में आंशिक राहत मिलेगी। मंत्रालय का कहना है कि इससे प्रति लीटर करीब 10 रुपए तक की भरपाई हो सकेगी, जिससे कंपनियां बिना किसी बाधा के ईंधन की सप्लाई जारी रख पाएंगी और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर

    वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और सप्लाई चेन में बाधाओं के कारण तेल की कीमतें चार हफ्तों में लगभग 75% बढ़कर 70 डॉलर प्रति बैरल से 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। ऐसे में कई देशों में ईंधन की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है—दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में 30-50%, उत्तरी अमेरिका में करीब 30% और यूरोप में लगभग 20% तक।

    भारत ने रखा स्थिर रुख

    इन वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद भारत ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखा है। सरकार का मानना है कि इससे आम लोगों को महंगाई के झटके से बचाया जा सकता है। हालांकि, इस स्थिरता की कीमत सरकार और तेल कंपनियों को उठानी पड़ रही है, जिसे एक्साइज कटौती और अन्य उपायों से संतुलित किया जा रहा है।

    वित्त मंत्री का बयान

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी से बचाया जा सके। उन्होंने यह भी बताया कि पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर शून्य हो गई है।

    निर्यात पर भी लगाया गया शुल्क

    सरकार ने डीजल और एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) के निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। डीजल पर 21.5 रुपए प्रति लीटर और एटीएफ पर 29.5 रुपए प्रति लीटर का शुल्क तय किया गया है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में इन उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

    आम लोगों के लिए क्या मायने?

    आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत की बात यह है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ेंगी। हालांकि, एक्साइज कटौती का सीधा फायदा उन्हें नहीं मिलेगा। यह कदम बाजार में स्थिरता बनाए रखने और ईंधन की लगातार आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

  • ईंधन कीमतों पर नियंत्रण: पीएम मोदी की नीति से उपभोक्ताओं को राहत-हरदीप पुरी

    ईंधन कीमतों पर नियंत्रण: पीएम मोदी की नीति से उपभोक्ताओं को राहत-हरदीप पुरी


    नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर बनाए रखना केंद्र सरकार का बड़ा फैसला माना जा रहा है। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बीच देश के नागरिकों को राहत देने के लिए ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की।

    उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि पिछले एक महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसके चलते दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है।

    दुनिया में महंगाई, भारत में राहत

    एशिया से लेकर यूरोप तक कीमतों में उछाल, भारत में स्थिरता बरकरार पुरी के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों में ईंधन की कीमतें 30% से 50% तक बढ़ी हैं, जबकि उत्तरी अमेरिका में करीब 30%, यूरोप में 20% और अफ्रीकी देशों में 50% तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।से हालात में भारत सरकार के सामने दो विकल्प थे—या तो वैश्विक ट्रेंड के अनुसार कीमतें बढ़ाई जाएं या फिर खुद वित्तीय बोझ उठाकर आम जनता को राहत दी जाए। सरकार ने दूसरा रास्ता चुना और नागरिकों को महंगाई के सीधे असर से बचाने का फैसला किया।

    एक्साइज ड्यूटी में कटौती से दी राहत

    पेट्रोल पर 3 रुपये, डीजल पर शून्य हुआ टैक्स सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखने के लिए सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह समाप्त कर शून्य कर दिया गया है। पुरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेजी के कारण ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को भारी नुकसान हो रहा है—पेट्रोल पर करीब 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार ने कर राजस्व में कटौती कर आम लोगों को राहत देने का फैसला लिया है।

    निर्यात शुल्क और रणनीतिक कदम

    घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए अतिरिक्त कदम सरकार ने घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता बनाए रखने के लिए निर्यात पर भी शुल्क लगाया है। अब विदेशी देशों को पेट्रोल-डीजल निर्यात करने वाली रिफाइनरियों को अतिरिक्त कर देना होगा, जिससे देश के भीतर पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है।