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  • मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप

    मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर लगाए जनता की जेब पर आर्थिक दबाव बढ़ाने के गंभीर आरोप


    नई दिल्ली। देश में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गरमा गया है। ईंधन दरों में हालिया बढ़ोतरी ने आम जनता की चिंताओं को बढ़ा दिया है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि को लेकर सरकार को निशाने पर लिया और आरोप लगाया कि देश में आम नागरिकों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीते कुछ दिनों के दौरान ईंधन की कीमतों में कई बार बदलाव हुआ है, जिससे आम लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ा है। उनके अनुसार यह केवल कीमतों में बढ़ोतरी का मामला नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव महंगाई और रोजमर्रा की आवश्यकताओं पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है।

    खड़गे ने कहा कि लगातार बढ़ती कीमतों ने लोगों की आर्थिक योजनाओं को प्रभावित किया है और आम परिवारों के लिए अतिरिक्त खर्च का बोझ बढ़ा दिया है। उनका मानना है कि पेट्रोल और डीजल की दरों में तेजी केवल परिवहन लागत तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर बाजार की लगभग हर वस्तु और सेवा पर पड़ता है। ऐसे में आम आदमी को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में ईंधन से जुड़े फैसलों के कारण जनता पर अप्रत्यक्ष आर्थिक दबाव बढ़ा है और लोगों की बचत तथा खर्च दोनों पर इसका असर देखने को मिला है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच खड़गे ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस समय आम जनता महंगाई और बढ़ते खर्च से जूझ रही है, उस समय ईंधन कीमतों में लगातार वृद्धि लोगों की परेशानी को और बढ़ाने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामाजिक चिंता का विषय भी बनती जा रही है। उनका कहना है कि जब ईंधन महंगा होता है तो उसका असर हर वर्ग पर पड़ता है, चाहे वह नौकरीपेशा व्यक्ति हो, व्यापारी हो या फिर ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला किसान।

    उन्होंने यह भी कहा कि हालिया मूल्य वृद्धि के बाद सरकारी तेल कंपनियों के प्रदर्शन में तेजी देखने को मिली, जिसे लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उनका आरोप है कि नीतिगत फैसलों का लाभ आम जनता तक पहुंचने के बजाय कुछ विशेष क्षेत्रों को अधिक मिलता दिखाई दे रहा है। इस मुद्दे को लेकर उन्होंने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग भी की और कहा कि जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

    ईंधन की कीमतें लंबे समय से देश में आर्थिक और राजनीतिक बहस का विषय रही हैं। जैसे-जैसे कीमतों में बदलाव होता है, वैसे-वैसे इसका असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर भी दिखाई देता है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और आम जनता को राहत देने के लिए क्या कदम सामने आते हैं।

  • गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार की सफाई, मंदिरों के सोने पर कोई योजना नहीं

    गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम को लेकर फैली अफवाहों पर सरकार की सफाई, मंदिरों के सोने पर कोई योजना नहीं

    नई दिल्ली । मंदिरों और धार्मिक संस्थाओं के पास मौजूद सोने को लेकर हाल ही में सोशल मीडिया पर फैली एक चर्चा को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। कुछ दावों में यह कहा जा रहा था कि सरकार गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के तहत मंदिरों और धार्मिक स्थलों के सोने को उपयोग में लाने या बेचने की योजना बना रही है, लेकिन वित्त मंत्रालय ने इन सभी दावों को पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया है।

    सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि ऐसी कोई योजना न तो प्रस्तावित है और न ही इस दिशा में कोई कदम उठाया जा रहा है, जिसमें मंदिरों या धार्मिक ट्रस्टों के स्वामित्व वाले सोने को मोनेटाइज करने की बात शामिल हो। मंत्रालय ने यह भी कहा कि इस तरह की अफवाहें गलत जानकारी पर आधारित हैं और इनसे जनता के बीच अनावश्यक भ्रम पैदा हो सकता है।

    वित्त मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी कहा है कि गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम का उद्देश्य व्यक्तिगत या संस्थागत सोने को बैंकिंग प्रणाली में लाना होता है, लेकिन इसे किसी भी धार्मिक संस्था के संपत्ति अधिकारों से जोड़कर देखना पूरी तरह गलत है। सरकार ने यह साफ किया है कि धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति और उनके अधिकारों का सम्मान किया जाता है और इसमें किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

    मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट और भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें और न ही उन्हें आगे साझा करें। सरकार का कहना है कि गलत जानकारी के प्रसार से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक स्तर पर भी गलत संदेश जाता है। इसलिए केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास किया जाना चाहिए।

    इस पूरे मामले में यह भी सामने आया कि हाल के दिनों में आर्थिक परिस्थितियों और वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई तरह की अफवाहें फैल रही हैं, जिनमें सोने और अन्य कीमती धातुओं से जुड़ी नीतियों को लेकर गलत दावे शामिल हैं। ऐसे में सरकार ने समय रहते स्पष्टिकरण जारी कर स्थिति को साफ करने का प्रयास किया है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी न फैले।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में सूचना तेजी से फैलती है, लेकिन कई बार बिना पुष्टि के दावे भी बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच जाते हैं। ऐसे में सरकार और संबंधित संस्थाओं के लिए जरूरी हो जाता है कि वे समय पर सही जानकारी साझा करें ताकि अफवाहों पर रोक लगाई जा सके।

    फिलहाल वित्त मंत्रालय के इस स्पष्टीकरण के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि मंदिरों के सोने को लेकर किसी भी प्रकार की मोनेटाइजेशन योजना सरकार की ओर से नहीं लाई जा रही है और यह पूरा दावा निराधार है।

  • चीनी बाजार में स्थिरता की उम्मीद: निर्यात प्रतिबंध से कीमतों पर नियंत्रण, व्यापारियों ने बताया उपभोक्ता हित में कदम

    चीनी बाजार में स्थिरता की उम्मीद: निर्यात प्रतिबंध से कीमतों पर नियंत्रण, व्यापारियों ने बताया उपभोक्ता हित में कदम


    नई दिल्ली । केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को सुनिश्चित करने और कीमतों में अस्थिरता को नियंत्रित करने के उद्देश्य से चीनी के निर्यात पर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 30 सितंबर 2026 तक चीनी के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इस निर्णय को लेकर राजस्थान के श्रीगंगानगर और सीकर के चीनी व्यापारियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और इसे उपभोक्ताओं के हित में उठाया गया कदम बताया है।

    सरकार के इस फैसले का मुख्य उद्देश्य देश में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और घरेलू बाजार में कीमतों को स्थिर रखना बताया जा रहा है। हाल के समय में अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए यह आशंका जताई जा रही थी कि निर्यात बढ़ने से घरेलू आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप करते हुए यह प्रतिबंध लागू किया है, ताकि स्थानीय उपभोक्ताओं को किसी भी प्रकार की कमी या महंगाई का सामना न करना पड़े।

    श्रीगंगानगर के व्यापारिक संगठनों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे बाजार में संतुलन बना रहेगा और कीमतों में अचानक होने वाली वृद्धि पर रोक लगेगी। व्यापारियों का मानना है कि जब उत्पादन देश के भीतर ही उपलब्ध रहेगा तो उपभोक्ताओं को इसका सीधा लाभ मिलेगा। कई व्यापारिक प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यह कदम बाजार में स्थिरता लाने में सहायक साबित होगा और आम लोगों के लिए चीनी की उपलब्धता आसान होगी।

    व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ समय से वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में अस्थिरता की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे में सरकार का यह निर्णय घरेलू हितों को प्राथमिकता देने वाला माना जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भविष्य में कीमतों में अचानक होने वाली बढ़ोतरी पर नियंत्रण रहेगा और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत होगी।

    सीकर के स्थानीय व्यापारियों ने भी केंद्र सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया है। उनका कहना है कि यह फैसला पूरी तरह से उपभोक्ता हित में है और इससे घरेलू बाजार को मजबूती मिलेगी। व्यापारियों के अनुसार, पहले जो चीनी निर्यात के लिए निर्धारित की गई थी, उसका अधिकांश हिस्सा पहले ही भेजा जा चुका है, जबकि शेष मात्रा अब देश के भीतर उपलब्ध रहेगी। इससे स्थानीय बाजार में चीनी की आपूर्ति बढ़ेगी और मांग-आपूर्ति के बीच संतुलन बेहतर होगा।

    कुछ व्यापारियों ने यह भी बताया कि सरकार ने पहले चीनी निर्यात की अनुमति दी थी, जिसके तहत बड़ी मात्रा में चीनी विदेशों में भेजी गई थी। लेकिन अब बदलते हालात और घरेलू जरूरतों को देखते हुए निर्यात पर रोक लगाना आवश्यक हो गया था। उनका कहना है कि इस निर्णय से न केवल कीमतें स्थिर रहेंगी, बल्कि आम उपभोक्ताओं को भी राहत मिलेगी।

    कुल मिलाकर, व्यापारिक समुदाय ने सरकार के इस फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए उम्मीद जताई है कि इससे आने वाले समय में बाजार स्थिर रहेगा और आम लोगों पर महंगाई का दबाव कम होगा। सरकार की यह नीति घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने और आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है।

  • नया ग्रामीण रोजगार कानून 2026: गांवों में रोजगार की कानूनी गारंटी और नई व्यवस्था की पूरी डिटेल

    नया ग्रामीण रोजगार कानून 2026: गांवों में रोजगार की कानूनी गारंटी और नई व्यवस्था की पूरी डिटेल

    नई दिल्ली । ग्रामीण रोजगार और विकास व्यवस्था को नए ढांचे में लाने के लिए सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम की जानकारी साझा की है। विकसित भारत–जी राम जी अधिनियम 2025 के नाम से तैयार यह नया कानून 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार को अधिक सुरक्षित, संगठित और पारदर्शी बनाना बताया जा रहा है।

    इस व्यवस्था के तहत ग्रामीण परिवारों को हर वर्ष 125 दिनों तक अकुशल कार्य का कानूनी अधिकार दिया जाएगा। यह बदलाव ग्रामीण मजदूरों को स्थिर आय और नियमित रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही गांवों में सार्वजनिक संपत्तियों के निर्माण को भी इस योजना का अहम हिस्सा बनाया गया है।

    नई व्यवस्था पूरे देश में एक साथ लागू की जाएगी और सभी राज्यों को इसके अनुसार अपनी कार्ययोजना तैयार करनी होगी। पहले से चल रहे विकास कार्यों को भी इसी ढांचे के तहत जारी रखा जाएगा ताकि किसी भी स्तर पर काम बाधित न हो।

    रोजगार मांगने की प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है। ग्रामीण परिवार ग्राम पंचायत के माध्यम से रोजगार की मांग कर सकेंगे और इसके बाद 15 दिनों के भीतर उन्हें काम उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि तय समय में रोजगार नहीं मिलता है तो बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान भी शामिल किया गया है, जिससे श्रमिकों को आर्थिक सहारा मिल सके।

    मजदूरी भुगतान को सीधे बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे। भुगतान में देरी होने पर अतिरिक्त मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है, ताकि श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें। काम की उपस्थिति दर्ज करने के लिए आधुनिक डिजिटल प्रणाली का उपयोग किया जाएगा।

    कार्यस्थलों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे पीने का पानी, छाया और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है, ताकि श्रमिकों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। कृषि कार्यों के व्यस्त समय में राज्यों को अस्थायी रूप से काम रोकने की अनुमति भी दी गई है।

    इस पूरे सिस्टम में ग्राम पंचायत से लेकर जिला स्तर तक जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन किया गया है, जिससे योजना का क्रियान्वयन सुचारू रूप से हो सके। वित्तीय व्यवस्था में भी केंद्र और राज्यों के बीच तय अनुपात के अनुसार फंडिंग की जाएगी।

    कुल मिलाकर यह नया कानून ग्रामीण रोजगार प्रणाली को अधिक मजबूत, आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ने और जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

  • देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस

    देहरादून कैबिनेट बैठक: विकास कार्यों और भर्तियों में बड़ा सुधार, कुंभ 2027 पर विशेष फोकस


    नई दिल्ली ।
    देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। इस बैठक में कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर विशेष रूप से तेज़ी लाने पर जोर दिया गया, साथ ही विभिन्न विभागों की नीतियों और भर्ती प्रक्रियाओं में अहम बदलावों को मंजूरी दी गई।

    बैठक का सबसे प्रमुख फोकस आने वाले कुंभ मेले की तैयारियों पर रहा। सरकार ने निर्माण कार्यों और विकास परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने का निर्णय लिया है, जिससे काम तेजी से आगे बढ़ सके। छोटे और बड़े कार्यों की स्वीकृति के लिए अलग-अलग स्तर तय किए गए हैं, ताकि समय की बचत हो और परियोजनाएं समय पर पूरी हो सकें।

    वन विभाग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। वन दरोगा पद के लिए अब शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाकर स्नातक कर दिया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया और अधिक योग्य उम्मीदवारों पर केंद्रित होगी। इसके साथ ही आयु सीमा में भी संशोधन किया गया है। वन आरक्षी पदों के लिए भी नई आयु सीमा लागू की गई है, जिससे भर्ती मानकों को अपडेट किया जा सके।

    परिवहन विभाग में भी कई अहम निर्णय लिए गए हैं। राज्य में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई बसों की खरीद को मंजूरी दी गई है। पहले निर्धारित संख्या में बढ़ोतरी करते हुए अब अधिक बसें खरीदने का फैसला लिया गया है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल सकेगी।

    शिक्षा क्षेत्र में विशेष शिक्षा शिक्षक भर्ती नियमों में संशोधन किया गया है, जिससे भर्ती प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके। इसके अलावा संस्कृत शिक्षा सेवा नियमावली को भी औपचारिक रूप दिया गया है, जिससे शिक्षकों की सेवा संरचना और पदोन्नति प्रक्रिया को स्पष्ट किया जा सके।

    खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में भी संशोधन करते हुए रॉयल्टी दरों में बदलाव किया गया है। इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। वहीं अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों की मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाते हुए कक्षा स्तर के आधार पर अलग-अलग व्यवस्था लागू की गई है।

    इसके साथ ही मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाने के लिए मधुमक्खी पालन आधारित नई नीति को भी मंजूरी दी गई है। यह नीति वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए नई आजीविका के अवसर पैदा करेगी।

  • बड़े पैमाने पर नए पीएनजी कनेक्शनों से गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार और ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा

    बड़े पैमाने पर नए पीएनजी कनेक्शनों से गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार और ऊर्जा बदलाव को बढ़ावा

    नई दिल्ली: वैश्विक तनावों और आपूर्ति संबंधी आशंकाओं के बीच देश में घरेलू एलपीजी आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बनी हुई है और वितरण प्रणाली बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से काम कर रही है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार देशभर में गैस की उपलब्धता स्थिर है और उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जा रही है। किसी भी क्षेत्र में गैस की कमी या एजेंसियों पर आपूर्ति रुकने जैसी स्थिति सामने नहीं आई है, जिससे उपभोक्ताओं में भरोसा बना हुआ है।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार एलपीजी की ऑनलाइन बुकिंग के मुकाबले डिलीवरी दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और यह अब लगभग पूर्ण स्तर के करीब पहुंच चुकी है। डिजिटल सत्यापन प्रणाली के उपयोग से डिलीवरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित हुई है, जिससे गैस के गलत इस्तेमाल और कालाबाजारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव हुआ है। इससे उपभोक्ताओं को सीधे और समय पर सेवा मिल रही है और आपूर्ति श्रृंखला अधिक मजबूत हुई है।

    सरकार ने पाइप्ड नेचुरल गैस कनेक्शन के विस्तार पर भी तेजी से काम किया है और लाखों नए कनेक्शनों को सक्रिय किया गया है। इसके साथ ही बड़ी संख्या में उपभोक्ता पारंपरिक एलपीजी से पाइप्ड गैस की ओर स्थानांतरित हो रहे हैं, जिससे शहरी गैस वितरण नेटवर्क का विस्तार और मजबूत हो रहा है। यह बदलाव ऊर्जा क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    घरेलू और व्यावसायिक गैस आपूर्ति में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को विशेष रूप से सुरक्षित रखा गया है। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी मांग के अनुसार आपूर्ति बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है ताकि उत्पादन और सेवाओं पर कोई असर न पड़े।

    सरकार ने छोटे उपभोक्ताओं और प्रवासी श्रमिकों के लिए भी विशेष व्यवस्था की है जिसके तहत छोटे सिलेंडरों की उपलब्धता बढ़ाई गई है। इससे उन वर्गों को राहत मिली है जो सीमित संसाधनों में दैनिक उपयोग के लिए एलपीजी पर निर्भर हैं। साथ ही डिजिटल बुकिंग प्रणाली को बढ़ावा देकर वितरण को अधिक सहज और संपर्क रहित बनाया गया है।

    इस अवधि में एलपीजी की खपत और बिक्री के आंकड़ों में भी वृद्धि दर्ज की गई है जो यह दर्शाता है कि मांग के बावजूद आपूर्ति व्यवस्था मजबूत बनी हुई है। सरकार का दावा है कि बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन और वितरण क्षमता दोनों को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कमी न हो।

    इसके साथ ही बाजार में जमाखोरी और अवैध वितरण पर सख्त निगरानी रखी जा रही है और कई स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। निरीक्षण और छापेमारी की गतिविधियों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उपभोक्ताओं तक उचित दर पर गैस पहुंचे और किसी प्रकार की अनियमितता न हो।

    ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को भी बढ़ावा दिया है जिससे एलपीजी पर दबाव कम किया जा सके। साथ ही कोयला और अन्य पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की आपूर्ति बढ़ाकर समग्र ऊर्जा संतुलन बनाए रखने का प्रयास किया जा रहा है।

    विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा कदमों से देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली अधिक स्थिर और लचीली हुई है जिससे किसी भी वैश्विक संकट का असर घरेलू उपभोक्ताओं पर सीमित रह जाता है।

  • लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल

    लिथियम से लेकर टाइटेनियम तक भारत की नई खनिज नीति से आत्मनिर्भरता को मिलेगा बल


    नई दिल्ली:
    देश की आर्थिक उन्नति और भविष्य की ऊर्जा परियोजनाओं को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है सोमवार से खनिज ब्लॉकों की नीलामी के सातवें चरण की शुरुआत होगी इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया का शुभारंभ केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी और राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे द्वारा किया जाएगा। भारत के खान मंत्रालय के अनुसार यह नीलामी देश की खनिज सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम मानी जा रही है
    आज के समय में जब दुनिया स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों की ओर तेजी से बढ़ रही है तब लिथियम ग्रेफाइट दुर्लभ पृथ्वी तत्व टंगस्टन वैनेडियम और धातुओं जैसे खनिजों की मांग लगातार बढ़ रही है हालांकि इन खनिजों की उपलब्धता सीमित है और कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित होने के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बना रहता है।
    46 खनिज ब्लॉकों की नीलामी कर चुकी है जिसे उद्योग जगत से पॉजिटिव रिएक्शन मिला है इससे यह संकेत मिलता है कि भारत के खनिज क्षेत्र में निवेश और भागीदारी बढ़ रही है सातवें चरण में इस रेट को जारी रखते हुए कई राज्यों में 19 नए ब्लॉक नीलामी के लिए पेश किए जाएंगे जिनमें स्वच्छ ऊर्जा उर्वरक और खनिज उद्योगों के लिए जरूरी खनिज शामिल हैं

    नीलामी प्रक्रिया को ज्यादा उचित और असरदार बनाने के लिए सरकार ने नियमों में भी कई सुधार किए हैं 2025 और 2026 के संशोधनों के तहत प्रदर्शन सुरक्षा अग्रिम भुगतान और अन्य गतिविधियों को सरल बनाया गया है साथ ही बैंक गारंटी के विकल्प के रूप में बीमा गारंटी बॉन्ड की सुविधा भी दी गई है जिससे भारतीयों को आसानी होगी

    यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दो चरणों वाली उचित नीलामी प्रणाली के तहत आयोजित की जाएगी जिसमें उच्चतम बोली लगाने वाले को खनन का अधिकार मिलेगा इस पहल से न केवल देश की खनिज आपूर्ति मजबूत होगी बल्कि भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता भी वहीं

    आने वाले समय में यह कदम भारत को स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत तकनीकों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है