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  • सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला

    सरकारी भवनों पर कब्जे का शिकंजा 38 लाख की लैब में बस गया परिवार आंगनबाड़ी पर 6 साल से दबंग का ताला


    मध्यप्रदेश । सरकारी जमीनों और भवनों को अतिक्रमण मुक्त कराने के दावे करने वाला प्रशासन शिवपुरी जिले में अपनी ही संपत्तियों को कब्जे से मुक्त नहीं करा पा रहा है। हालात यह हैं कि बदरवास में लाखों रुपए की लागत से बनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला पिछले सात वर्षों से एक परिवार के कब्जे में है जबकि कोलारस क्षेत्र के एक गांव में आंगनबाड़ी केंद्र पर छह साल से ताला लटका हुआ है। इन दोनों मामलों ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    बदरवास तहसील कार्यालय के पीछे वर्ष 2018 में मंडी बोर्ड द्वारा कृषि विभाग के लिए आधुनिक मृदा परीक्षण प्रयोगशाला का निर्माण कराया गया था। करीब 38 लाख रुपए की लागत से तैयार इस भवन का उद्देश्य किसानों को मिट्टी की जांच की सुविधा उपलब्ध कराना था ताकि वे अपनी फसलों के लिए वैज्ञानिक सलाह प्राप्त कर सकें। लेकिन प्रयोगशाला शुरू होने से पहले ही भवन पर एक परिवार ने कब्जा जमा लिया और धीरे-धीरे उसे अपने आवास में तब्दील कर दिया। आज स्थिति यह है कि जिस भवन में किसानों के हित से जुड़ी अत्याधुनिक सुविधाएं शुरू होनी थीं वहां घरेलू गतिविधियां संचालित हो रही हैं।

    कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भवन खाली कराने के कई प्रयास किए गए लेकिन सफलता नहीं मिली। विभाग का आरोप है कि कब्जाधारी के खिलाफ कार्रवाई करने में कई तरह की बाधाएं सामने आती रही हैं। इस संबंध में राजस्व विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। परिणामस्वरूप लाखों रुपए की सरकारी संपत्ति वर्षों से बेकार पड़ी हुई है और किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा।

    दूसरी ओर कोलारस विकासखंड के ग्राम सेसईखुर्द में स्थित शासकीय आंगनबाड़ी केंद्र भी वर्षों से अपने मूल उद्देश्य से भटका हुआ है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में आए एक तेज तूफान के बाद एक स्थानीय व्यक्ति ने आंगनबाड़ी भवन का ताला तोड़कर उसमें अपना सामान रख लिया और धीरे-धीरे पूरे भवन पर कब्जा कर लिया। बताया जाता है कि बाद में भवन की संरचना में भी बदलाव कर दिया गया। इसके चलते आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन प्रभावित हो गया और बच्चों तथा गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली कई महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ बाधित हो गया।

    स्थानीय स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्र का संचालन वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है लेकिन सरकारी भवन पर कब्जा होने से व्यवस्थाएं पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।

    इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी भवनों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो करोड़ों रुपए की सार्वजनिक संपत्तियां इसी तरह अतिक्रमण और लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेंगी। प्रशासनिक अधिकारियों ने कार्रवाई का भरोसा जरूर दिया है लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जमीन पर परिणाम कब दिखाई देते हैं।

  • ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा

    ढाई करोड़ की कार से 45 रुपये का गमला चोरी! सीएम योगी ने सुनाया लखनऊ का दिलचस्प किस्सा



    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने मंगलवार को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने एक मजेदार लेकिन गंभीर उदाहरण देते हुए बताया कि लोग महंगी कारों में घूमते हैं, लेकिन नगर निगम द्वारा लगाए गए 45 रुपये के गमले तक चोरी कर ले जाते हैं। सीएम योगी की यह टिप्पणी सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे।

    दरअसल, मुख्यमंत्री लखनऊ नगर निगम के “स्वच्छ-सुंदर-समर्थ लखनऊ” अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने 413 करोड़ रुपये की विभिन्न जनकल्याणकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने साफ-सफाई और शहर की सुंदरता बनाए रखने में नागरिकों की जिम्मेदारी पर विशेष जोर दिया।

    सीएम योगी ने कहा कि शहर को साफ और सुंदर बनाए रखना सिर्फ नगर निगम, महापौर, पार्षद या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर का कूड़ा कूड़ेदान में डालें, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें, नालियों में कचरा न फेंकें और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं।

    इसी दौरान मुख्यमंत्री ने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि नगर निगम द्वारा लगाए गए गमलों को लोग चोरी कर ले जाते हैं। उन्होंने बताया, “हमने देखा कि एक बहुत महंगी कार आई और उसमें बैठे लोग 45 रुपये का गमला उठाकर ले गए। सीसीटीवी कैमरों में सब रिकॉर्ड हो गया। जितना पैसा उस कार में तेल भराने में लग रहा होगा, उतने में कई नए गमले आ जाते।”

    मुख्यमंत्री ने हंसते हुए कहा कि एक समय उनके मन में आया कि गमला चोरी करने वालों की तस्वीर चौराहे पर लगवा दी जाए, ताकि लोगों को समझ में आए कि छोटी लालच की वजह से शहर की सुंदरता को नुकसान पहुंचाना ठीक नहीं है।

    उन्होंने यह भी कहा कि सरकार जो पैसा विकास कार्यों पर खर्च करती है, वह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं बल्कि जनता का पैसा होता है। इसलिए उसकी रक्षा करना और सही उपयोग सुनिश्चित करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री Narendra Modi के विजन के अनुसार जनता का पैसा जनता के हित में खर्च किया जा रहा है और इसी वजह से प्रदेश में विकास साफ दिखाई दे रहा है।

    सीएम योगी का यह बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आ गया, जहां लोग इसे मजेदार अंदाज में साझा कर रहे हैं, लेकिन साथ ही सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और नागरिक जिम्मेदारी पर गंभीर संदेश भी बता रहे हैं।