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  • सरकारी खजाने में पहुंचा आपका पैसा कहां होता है इस्तेमाल जानिए टैक्स से जुड़े खर्च का पूरा हिसाब

    सरकारी खजाने में पहुंचा आपका पैसा कहां होता है इस्तेमाल जानिए टैक्स से जुड़े खर्च का पूरा हिसाब


    नई दिल्ली। नौकरी करने वाला हो या अपना कारोबार चलाने वाला हर व्यक्ति अपनी कमाई के हिसाब से सरकार को टैक्स देता है। हर साल करोड़ों लोगों और कंपनियों से मिलने वाला यह टैक्स सरकार की आय का एक अहम हिस्सा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब से निकलकर सरकारी खजाने तक पहुंचने वाला पैसा आखिर जाता कहां है। दरअसल सरकार टैक्स से मिलने वाली रकम को किसी एक काम में खर्च नहीं करती बल्कि देश की अलग अलग जरूरतों के लिए इसका इस्तेमाल किया जाता है।

    इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स जैसे डायरेक्ट टैक्स से सरकार को मिलने वाला पैसा Consolidated Fund of India में जाता है। इसके बाद सरकार बजट के जरिए अलग अलग क्षेत्रों के लिए खर्च का प्रावधान करती है। इसका मतलब यह है कि किसी व्यक्ति द्वारा दिया गया टैक्स सीधे उसी व्यक्ति के लिए किसी एक सुविधा पर खर्च नहीं होता बल्कि सरकारी आय का हिस्सा बनकर देश के व्यापक खर्च में इस्तेमाल होता है।

    सरकारी बजट में कुल खर्च को अलग अलग हिस्सों में बांटा जाता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा राज्यों को टैक्स में उनकी हिस्सेदारी देने पर जाता है। कुल सरकारी खर्च में इसका हिस्सा करीब 22 प्रतिशत बताया गया है। इसका उद्देश्य राज्यों को उनके हिस्से की राशि उपलब्ध कराना है ताकि वे अपने स्तर पर विकास और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े खर्च कर सकें।

    सरकार के खर्च में एक बड़ा हिस्सा कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज की अदायगी में भी जाता है। आंकड़ों के मुताबिक कुल खर्च का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा ब्याज भुगतान और कर्ज चुकाने में इस्तेमाल होता है। यह सरकारी वित्त व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है क्योंकि सरकार द्वारा लिए गए कर्ज की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए नियमित भुगतान करना पड़ता है।

    इसके अलावा करीब 17 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं के लिए खर्च किया जाता है। इन योजनाओं के जरिए केंद्र सरकार अलग अलग क्षेत्रों में योजनाएं और कार्यक्रम संचालित करती है। करीब 11 प्रतिशत हिस्सा रक्षा क्षेत्र पर खर्च होता है जिसमें सीमा सुरक्षा और रक्षा से जुड़े दूसरे खर्च शामिल होते हैं।

    केंद्र प्रायोजित योजनाओं पर भी सरकारी खर्च का हिस्सा जाता है। इसका करीब 8 प्रतिशत हिस्सा ऐसे कार्यक्रमों के लिए रखा जाता है। इनमें ग्रामीण रोजगार और आवास जैसी योजनाएं शामिल हो सकती हैं। इसके बाद करीब 7 प्रतिशत हिस्सा वित्त आयोग के अनुदान और दूसरे ट्रांसफर पर खर्च होता है।

    सरकारी खर्च में प्रशासनिक जरूरतों का भी हिस्सा होता है। आंकड़ों के मुताबिक करीब 7 प्रतिशत हिस्सा अन्य प्रशासनिक खर्च के लिए जाता है। इसके अलावा लगभग 6 प्रतिशत सब्सिडी और करीब 2 प्रतिशत पेंशन पर खर्च होने का उल्लेख किया गया है। इन सभी हिस्सों को मिलाकर सरकारी खर्च का पूरा ढांचा तैयार होता है।

    वहीं डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन के आंकड़ों पर नजर डालें तो 17 सितंबर तक सरकार को डायरेक्ट टैक्स से 12.12 लाख करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। यह रकम पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 13 प्रतिशत अधिक बताई गई है। इसमें इनकम टैक्स और कॉरपोरेट टैक्स से मिलने वाली रकम शामिल होती है।

    इस तरह आपकी कमाई से सरकार तक पहुंचने वाला टैक्स किसी एक जगह जमा होकर पड़ा नहीं रहता। यह सरकारी आय का हिस्सा बनता है और बजट के जरिए राज्यों की हिस्सेदारी कर्ज भुगतान रक्षा योजनाओं प्रशासन सब्सिडी और पेंशन समेत कई जरूरी क्षेत्रों में इस्तेमाल होता है। यही वजह है कि टैक्स की रकम को देश की पूरी वित्तीय व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

  • आरबीआई से सरकार को मिल सकता है अब तक का सबसे बड़ा लाभांश, आर्थिक दबाव के बीच मजबूत होगी वित्तीय स्थिति

    आरबीआई से सरकार को मिल सकता है अब तक का सबसे बड़ा लाभांश, आर्थिक दबाव के बीच मजबूत होगी वित्तीय स्थिति


    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) इस वित्त वर्ष में केंद्र सरकार को अब तक का सबसे बड़ा लाभांश देने की तैयारी में है, जिससे सरकार को वित्तीय मोर्चे पर बड़ी राहत मिल सकती है।

    यह लाभांश सरकार के लिए ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब वैश्विक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उतार-चढ़ाव के कारण आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। इस संभावित आय से सरकार को बजट प्रबंधन और विकास योजनाओं को संतुलित रखने में मदद मिलने की उम्मीद है।

    पिछले वित्त वर्ष में भी RBI ने सरकार को रिकॉर्ड स्तर का लाभांश दिया था, जिसने सरकारी खजाने को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई थी। इस बार भी अनुमान लगाया जा रहा है कि राशि पिछले आंकड़ों को पार कर सकती है, जिससे गैर-कर राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी संभव है।

    आरबीआई की ओर से लाभांश का निर्धारण उसके केंद्रीय निदेशक मंडल द्वारा तय आर्थिक पूंजी ढांचे के आधार पर किया जाता है, जिसमें जोखिम प्रावधानों और वित्तीय स्थिरता को ध्यान में रखा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत हर साल सरकार को अधिशेष राशि हस्तांतरित की जाती है।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन में सुधार भी इस संभावित वृद्धि का एक बड़ा कारण माना जा रहा है। बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, बढ़ता ऋण विस्तार और मजबूत आय के चलते बैंकिंग क्षेत्र के मुनाफे में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका सकारात्मक असर समग्र वित्तीय प्रणाली पर पड़ा है।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आने वाले वित्त वर्ष में गैर-कर राजस्व में भी स्थिरता या हल्की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, जबकि कर संग्रह में भी वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। इससे सरकार को अपने राजकोषीय लक्ष्यों को पूरा करने में मदद मिल सकती है।