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  • एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में

    एमपी में मिड डे मील योजना पर घोटाले की आशंका 74 हजार रसोइयों के रिकॉर्ड जांच के दायरे में


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में स्कूली बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील की व्यवस्था एक बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत रसोइयों और सहायकों के मानदेय भुगतान में गंभीर अनियमितताओं की आशंका सामने आने के बाद राज्य सरकार ने व्यापक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। शुरुआती समीक्षा में पता चला है कि हजारों मामलों में रसोइयों के नाम और पते तो सही दर्ज हैं लेकिन उनके बैंक खातों की जगह किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में मानदेय भेजा जा रहा है। इस खुलासे ने करोड़ों रुपये के संभावित फर्जीवाड़े की आशंका को जन्म दे दिया है।

    प्रदेशभर में संचालित इस योजना के तहत हर महीने लगभग 20 करोड़ रुपये रसोइयों और सहायकों के मानदेय के रूप में वितरित किए जाते हैं। योजना के पोर्टल की समीक्षा के दौरान 74 हजार से अधिक रसोइयों और सहायकों के पंजीयन तथा भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में गंभीर विसंगतियां सामने आईं। इसके बाद सरकार ने सभी जिलों के कलेक्टरों और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को तत्काल जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

    सरकार ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को 20 जुलाई 2026 तक रसोइयों और सहायकों का अनिवार्य सत्यापन पूरा करने के निर्देश दिए हैं। इस प्रक्रिया के तहत प्रत्येक कर्मचारी का ई केवाईसी समग्र आईडी और बैंक खाते का मिलान किया जाएगा। सत्यापन पूरा होने के बाद ही संबंधित जानकारी पोर्टल पर अपडेट होगी और उसके बाद ही मानदेय का भुगतान किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी खातों में जाने वाले भुगतान पर पूरी तरह रोक लगाई जा सकेगी।

    जांच प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विकासखंड स्तर पर ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर को भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे सभी रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करेंगे और यदि किसी भी स्तर पर डुप्लीकेट या फर्जी पंजीयन मिलता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। पूरी प्रक्रिया की लगातार मॉनिटरिंग और समीक्षा भी की जाएगी ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां दोबारा सामने न आएं।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी स्कूल में निर्धारित संख्या से अधिक रसोइयों का पंजीयन पाया जाता है तो अतिरिक्त कर्मचारियों के मानदेय का भुगतान शासन नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में पूरी जिम्मेदारी संबंधित क्रियान्वयन एजेंसी की होगी। इससे अनावश्यक और फर्जी भुगतान पर रोक लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

    अस्थायी एवं आउटसोर्स कर्मचारी संघ के प्रांताध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि पिछले करीब 20 वर्षों से यह योजना संचालित हो रही है लेकिन आज तक सरकार के पास रसोइयों और सहायकों का पूरी तरह प्रमाणित और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना चिंता का विषय है। उनके अनुसार यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि संभावित भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करता है जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

    पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से सरकार ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के पोर्टल को एजुकेशन पोर्टल 3.0 से भी जोड़ दिया है। अब सभी प्रधानाध्यापक केवल आधिकारिक लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से ही पोर्टल का उपयोग कर सकेंगे। इसी तरह ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर के लिए भी अधिकृत लॉगिन अनिवार्य कर दिया गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनधिकृत एंट्री या बदलाव की संभावना समाप्त हो सके।

    सरकार का मानना है कि सत्यापन अभियान पूरा होने के बाद योजना का पूरा भुगतान तंत्र अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनेगा। यदि जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा साबित होता है तो संबंधित दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है। इस अभियान के नतीजों पर अब पूरे प्रदेश की नजर बनी हुई है।

  • 101 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को मिला रुस्तमजी अवार्ड, सीएम ने आवास सुविधा बढ़ाने का दिया भरोसा

    101 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को मिला रुस्तमजी अवार्ड, सीएम ने आवास सुविधा बढ़ाने का दिया भरोसा


    नई दिल्ली। राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और अपनी ड्यूटी में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 101 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को इस वर्ष प्रतिष्ठित रुस्तमजी अवार्ड से सम्मानित किया गया। इस सम्मान समारोह में पुलिस बल के उन कर्मियों को सराहा गया जिन्होंने कर्तव्यनिष्ठा, साहस और सेवा भावना के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान माहौल उत्साह और गर्व से भरा रहा, जहां सम्मानित कर्मियों के परिवारों ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताई।

    पुलिसकर्मियों के लिए आवास सुविधा पर बड़ा ऐला
    इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों की समस्याओं और सुविधाओं पर भी गंभीरता से चर्चा की। उन्होंने घोषणा की कि जिले में तैनात पुलिसकर्मी अब आसानी से आवास सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस विषय पर हाउसिंग बोर्ड और विभिन्न प्राधिकरणों से बातचीत करेंगे ताकि पुलिसकर्मियों को बेहतर और किफायती आवास उपलब्ध कराया जा सके। इससे न केवल उनका जीवन स्तर सुधरेगा, बल्कि ड्यूटी के प्रति उनकी दक्षता भी बढ़ेगी।

    आवास सुविधा से बढ़ेगा मनोब
    सरकार का मानना है कि पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए बेहतर रहने की व्यवस्था बेहद जरूरी है। आवास सुविधा मिलने से पुलिसकर्मी मानसिक रूप से अधिक स्थिर होंगे और अपने कर्तव्यों का बेहतर निर्वहन कर सकेंगे।

     सेवा, समर्पण और सम्मान का प्रती
    रुस्तमजी अवार्ड को पुलिस सेवा में उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक माना जाता है। यह सम्मान उन अधिकारियों को दिया जाता है जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपनी जिम्मेदारी निभाई और समाज की सुरक्षा सुनिश्चित की।

    इस सम्मान समारोह ने एक बार फिर साबित किया कि पुलिस बल समाज की सुरक्षा की मजबूत कड़ी है। साथ ही सरकार की आवास सुविधा को लेकर पहल से पुलिसकर्मियों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आने की उम्मीद है।

  • ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा, नई 125 दिन की गारंटी वाली योजना की चर्चा तेज

    ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव का दावा, नई 125 दिन की गारंटी वाली योजना की चर्चा तेज


    नई दिल्ली ।ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को लेकर हाल ही में सामने आए एक दावे ने देशभर में चर्चा को तेज कर दिया है। बताया जा रहा है कि मौजूदा रोजगार गारंटी प्रणाली की जगह एक नए ढांचे को लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिसके तहत ग्रामीण परिवारों को पहले से अधिक दिनों तक रोजगार की गारंटी देने का प्रस्ताव सामने आया है। इस कथित बदलाव में रोजगार की अवधि को बढ़ाकर 125 दिन करने की बात कही जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका को और मजबूत बनाने का दावा किया जा रहा है।

    इस कथित योजना के अनुसार, नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल अस्थायी मजदूरी उपलब्ध कराना नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक स्थायी आधार देना बताया जा रहा है। इसमें गांवों में बुनियादी ढांचे के विकास, जल संरक्षण, कृषि कार्यों को बढ़ावा देने और सामुदायिक संपत्तियों के निर्माण जैसे कार्यों पर अधिक ध्यान देने की बात कही जा रही है। इसके साथ ही यह भी दावा किया जा रहा है कि इस बदलाव के लिए एक बड़ा बजट निर्धारित किया गया है, ताकि रोजगार के अवसरों को बढ़ाया जा सके और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को गति दी जा सके।

    हालांकि इन दावों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में इस तरह का कोई नया कानून या अधिनियम लागू किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ग्रामीण रोजगार की मौजूदा व्यवस्था एक स्थापित कानून के तहत संचालित होती है, जो लंबे समय से देश के ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान कर रही है। इस प्रणाली में किसी बड़े बदलाव के लिए संसद की प्रक्रिया, कानूनी मंजूरी और औपचारिक अधिसूचना आवश्यक होती है। लेकिन इस कथित नए ढांचे को लेकर ऐसी किसी भी आधिकारिक प्रक्रिया की स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है।

    इसी कारण विशेषज्ञ इस तरह की खबरों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं। उनका कहना है कि रोजगार से जुड़ी योजनाएं सीधे तौर पर करोड़ों लोगों के जीवन से जुड़ी होती हैं, इसलिए किसी भी बदलाव की जानकारी केवल प्रमाणिक और आधिकारिक घोषणा के आधार पर ही मानी जानी चाहिए। बिना पुष्टि के फैलने वाली जानकारी अक्सर भ्रम पैदा करती है और लोगों के बीच गलतफहमी को जन्म देती है।

    ग्रामीण विकास नीतियों का उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ें और लोगों को अपने ही क्षेत्र में काम मिल सके, ताकि शहरों की ओर पलायन कम हो। ऐसे में किसी भी नई योजना या सुधार का असली प्रभाव तभी समझा जा सकता है जब वह पूरी तरह लागू हो और उसके परिणाम सामने आएं।

    फिलहाल यह मामला दावों और चर्चाओं के बीच बना हुआ है, और जब तक किसी आधिकारिक घोषणा या ठोस दस्तावेज के माध्यम से इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे केवल एक अपुष्ट जानकारी के रूप में ही देखा जा सकता है।

  • LPG कनेक्शन धारकों के लिए चेतावनी, सरकार ने शुरू की सख्त जांच, सब्सिडी बंद होने का खतरा

    LPG कनेक्शन धारकों के लिए चेतावनी, सरकार ने शुरू की सख्त जांच, सब्सिडी बंद होने का खतरा

    नई दिल्ली ।
    देश में रसोई गैस यानी LPG सब्सिडी को लेकर सरकार ने एक बड़ा और अहम कदम उठाया है, जिसका सीधा असर लाखों उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए अब सब्सिडी पाने की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त और निगरानी आधारित हो गई है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को ही इस योजना का लाभ मिलेगा, जबकि आय सीमा से अधिक कमाई करने वाले लोगों की सब्सिडी बंद की जा सकती है।

    नए सिस्टम के तहत उपभोक्ताओं की आय की जांच इनकम टैक्स रिकॉर्ड और परिवार के वित्तीय डेटा के आधार पर की जा रही है। इसके लिए डिजिटल वेरिफिकेशन प्रक्रिया को मजबूत किया गया है, जिसमें आधार, पैन और गैस कनेक्शन से जुड़े रिकॉर्ड को आपस में जोड़ा जा रहा है। इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी का लाभ गलत या अपात्र लोगों तक न पहुंचे और सरकारी खर्च को अधिक प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा सके।

    जानकारी के अनुसार, जिन उपभोक्ताओं या उनके परिवार की सालाना टैक्सेबल आय एक निश्चित सीमा से अधिक है, उन्हें अलर्ट संदेश भेजे जा रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं को अपनी जानकारी समय पर अपडेट करने और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि करने के लिए कहा गया है। यदि तय समय सीमा के भीतर जवाब या अपडेट नहीं दिया जाता है, तो उनकी सब्सिडी अस्थायी या स्थायी रूप से बंद की जा सकती है।

    सरकार की LPG सब्सिडी योजना मूल रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत देने के लिए शुरू की गई थी, ताकि उन्हें रसोई गैस की बढ़ती कीमतों से राहत मिल सके। पिछले कुछ वर्षों में सरकार ने लोगों से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील भी की थी, जिसमें कई सक्षम परिवारों ने इसका लाभ लेना बंद कर दिया था। अब सरकार इस प्रक्रिया को और अधिक तकनीकी और सख्त तरीके से लागू कर रही है।

    नए सिस्टम में परिवार के अन्य सदस्यों की आय को भी जांच के दायरे में शामिल किया जा रहा है, जिससे यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में परिवार आर्थिक रूप से पात्र है या नहीं। इसके लिए विभिन्न डेटाबेस को एकीकृत किया जा रहा है ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत लाभ उठाने की संभावना को खत्म किया जा सके।

    जिन उपभोक्ताओं को इस तरह के अलर्ट मिले हैं, उन्हें अपने KYC दस्तावेज और आय से जुड़ी जानकारी को अपडेट करने की सलाह दी जा रही है। यह प्रक्रिया अधिकतर डिजिटल माध्यम से पूरी की जा सकती है, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि सब्सिडी बंद होने के बाद भी उपभोक्ता बाजार मूल्य पर सिलेंडर खरीद सकते हैं।

    कुल मिलाकर यह कदम सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने और सब्सिडी को सही हाथों तक पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है। आने वाले समय में इस तरह की डिजिटल जांच प्रणाली और अधिक व्यापक हो सकती है, जिससे सरकारी सहायता योजनाएं अधिक प्रभावी और लक्षित बन सकें।

  • गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए सुनहरा मौका, बिना फीस SSC, JEE और यूपी पुलिस की मुफ्त कोचिंग से बदलेगा भविष्य

    गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों के लिए सुनहरा मौका, बिना फीस SSC, JEE और यूपी पुलिस की मुफ्त कोचिंग से बदलेगा भविष्य


    नई दिल्ली । एक छोटे शहर का एक छात्र लंबे समय से अपने सपनों को साकार करने की कोशिश कर रहा था। वह SSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना चाहता था, लेकिन आर्थिक स्थिति उसके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही थी। कोचिंग की ऊंची फीस उसके परिवार के लिए संभव नहीं थी, जिससे उसका आत्मविश्वास धीरे-धीरे कम होने लगा था।

    इसी दौरान उसे एक ऐसी पहल के बारे में जानकारी मिली जिसने उसकी सोच बदल दी। उसे पता चला कि अब उसे अपने सपनों को छोड़ने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक ऐसी व्यवस्था शुरू की गई है जहां पढ़ाई पूरी तरह मुफ्त है। इस योजना के तहत SSC, NDA, NEET, JEE और यूपी पुलिस जैसी परीक्षाओं की तैयारी विशेषज्ञ शिक्षकों के मार्गदर्शन में कराई जा रही है।

    यह सुविधा उन सभी युवाओं के लिए है जो मेहनत तो करना चाहते हैं लेकिन संसाधनों की कमी के कारण पीछे रह जाते हैं। यहां किसी भी तरह की आय या वर्ग की सीमा नहीं रखी गई है, जिससे हर प्रतिभाशाली छात्र को समान अवसर मिल सके। इस पहल का उद्देश्य केवल पढ़ाई कराना नहीं, बल्कि युवाओं को सही दिशा देना और उनके सपनों को वास्तविकता में बदलना है।

    इस व्यवस्था में शिक्षकों का चयन भी एक पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाता है। विषय विशेषज्ञों को एक चयन प्रक्रिया से गुजरना होता है, जिसके बाद ही उन्हें छात्रों को पढ़ाने की जिम्मेदारी दी जाती है। इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

    समय के साथ इस योजना के परिणाम भी सामने आने लगे हैं। यहां से पढ़ाई करने वाले कई छात्र पहले ही विभिन्न सरकारी पदों पर चयनित हो चुके हैं। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और उचित अवसर मिलने पर कोई भी छात्र अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है।

    कक्षाओं का संचालन निर्धारित समय पर किया जाता है और इसके लिए अलग-अलग शिक्षण केंद्र बनाए गए हैं, जहां छात्र नियमित रूप से पढ़ाई कर सकते हैं। साथ ही, आवेदन प्रक्रिया को भी सरल रखा गया है ताकि अधिक से अधिक युवा इसका लाभ उठा सकें। छात्र अपने आवश्यक दस्तावेजों के साथ आसानी से आवेदन कर सकते हैं और इस सुविधा का हिस्सा बन सकते हैं।

    इस पहल ने उन युवाओं के लिए नई उम्मीद जगाई है जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों से समझौता करने को मजबूर थे। अब उनके पास एक ऐसा मंच है जहां वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी तैयारी कर सकते हैं और अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। यह केवल एक कोचिंग व्यवस्था नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए अवसर है जो मेहनत करने के लिए तैयार हैं, बस उन्हें सही दिशा की जरूरत है।

  • पानी और विकास की डबल डोज इंदौर दौरे पर सीएम मोहन यादव देंगे हजारों करोड़ की योजनाओं की सौगात

    पानी और विकास की डबल डोज इंदौर दौरे पर सीएम मोहन यादव देंगे हजारों करोड़ की योजनाओं की सौगात


    इंदौर । मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम मोहन आज इंदौर दौरे पर रहेंगे जहां वे शहर को विकास की कई बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। संकल्प से समाधान अभियान के तहत दशहरा मैदान में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होकर वे विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को लाभ वितरित करेंगे और साथ ही शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण परियोजनाओं का भूमिपूजन भी करेंगे।

    इस दौरे का सबसे अहम हिस्सा नर्मदा पेयजल परियोजना के चौथे चरण का भूमिपूजन है जिसे शहर के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। तेजी से बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए यह परियोजना इंदौर के लिए राहत का बड़ा माध्यम बनेगी। वर्तमान में शहर की जलापूर्ति नर्मदा नदी पर आधारित है जहां से लगभग 70 किलोमीटर दूर से पानी पंप कर शहर तक पहुंचाया जाता है।

    अब अमृत 2.0 योजना के तहत जल आपूर्ति को और अधिक सुदृढ़ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। इस योजना के तहत शहर की जल क्षमता को वर्तमान स्तर से बढ़ाकर आने वाले वर्षों की जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाएगा। अनुमान है कि 2040 तक इंदौर की आबादी करीब 58 लाख से अधिक हो जाएगी जिसके लिए 1200 एमएलडी से ज्यादा पानी की आवश्यकता होगी। ऐसे में यह परियोजना भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।

    भूमिपूजन के तहत कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य शुरू किए जाएंगे जिनमें लंबी पाइपलाइन बिछाना, आधुनिक टनल निर्माण और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए क्लोरिनेशन सिस्टम की स्थापना शामिल है। इसके अलावा शहर में नए ओवरहेड टैंक बनाए जाएंगे और पुराने टैंकों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा जिससे पानी का वितरण अधिक प्रभावी और सुचारू हो सके।

    इस परियोजना के जरिए लाखों घरों तक नए जल कनेक्शन दिए जाएंगे और स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे जिससे 24 घंटे दबावयुक्त जलापूर्ति सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। खास बात यह है कि शहर में शामिल नए गांवों तक भी पहली बार नियमित जलापूर्ति पहुंचाई जाएगी जिससे वहां के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

    इसके साथ ही मुख्यमंत्री सिरपुर तालाब के संरक्षण से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का लोकार्पण भी करेंगे। इस पहल के तहत सीवेज को सीधे तालाब में जाने से रोका जाएगा और आधुनिक तकनीक से उसका शोधन किया जाएगा। इससे न सिर्फ तालाब का पानी साफ होगा बल्कि उपचारित जल का उपयोग शहर के बगीचों और अन्य कार्यों में भी किया जा सकेगा।

    संकल्प से समाधान अभियान के तहत भी इंदौर जिले में बड़ी सफलता मिली है जहां लाखों आवेदनों का निराकरण कर हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। इस अभियान के जरिए सरकार ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ समय पर पहुंचे।

    कुल मिलाकर यह दौरा इंदौर के लिए विकास की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है जिसमें बुनियादी सुविधाओं से लेकर जल प्रबंधन तक कई अहम क्षेत्रों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।

  • अब तक 1.57 लाख ग्रामीण कृषकों को मात्र 5 रुपये में मिला नया विद्युत कनेक्शन

    अब तक 1.57 लाख ग्रामीण कृषकों को मात्र 5 रुपये में मिला नया विद्युत कनेक्शन


    भोपाल ।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी अपने कार्यक्षेत्र में ग्रामीण एवं कृषि उपभोक्ताओं को अब मात्र 5 रुपये में स्थायी घरेलू एवं कृषि पंप कनेक्शन उपलब्ध करा रही है। दिसंबर 2024 से यह योजना शुरू हुई है तब से अब तक इस योजना का लाभ 01 लाख 57 हजार 359 ग्रामीण कृषकों को मिल चुका है। इनमें से 58 हजार 711 घरेलू तथा 98 हजार 648 कृषि पंप कनेक्शन शामिल हैं। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि घरेलू तथा कृषि पम्पों के कनेक्शनों की संख्या बढ़ाए जाने के लिये ऐसे कृषक जो विद्युत की उपलब्ध लाइन के समीप स्थित हैं उनको सुविधानुसार आसानी से स्थाई कृषि पंप कनेक्शन दिया जा रहा है।

    नवीन घरेलू एवं कृषि पंप के लिये स्थायी विद्युत कनेक्शन का आवेदन सरल संयोजन पोर्टल के माध्यम से किया जा सकता है। इसके लिए portal.mpcz.in पर मांगी गई आवश्यक जानकारी देनी होती है। अधिक जानकारी के लिए कंपनी के टोल फ्री नंबर 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

  • पीएम सूर्य घर योजना के तहत 29,275 उपभोक्ताओं को मिली 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी

    पीएम सूर्य घर योजना के तहत 29,275 उपभोक्ताओं को मिली 228 करोड़ से अधिक की सब्सिडी


    भोपाल ।मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा अपने क्षेत्रान्तर्गत आने वाले भोपाल, नर्मदापुरम्, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों में पीएम सूर्यघर योजना के तहत अब तक कुल 29 हजार 273 उपभोक्ता पंजीकृत हुए हैं। इन्हें 228 करोड़ से अधिक की राशि सब्सिडी के रूप में उनके खातों में जमा कराई जा चुकी है। कंपनी ने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना से संबंधित कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान रजिस्टर्ड उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन उपरांत विद्युत वितरण कंपनी में रजिस्टर्ड अधिकृत वेंडर से ही सौर ऊर्जा संयंत्र लगवाएं। देश के करोड़ों घरों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम सूर्य घर योजना प्रारंभ की गई है। लोगों को इस योजना का लाभ मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत एक किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 30 हजार रूपये, दो किलोवॉट सोलर संयन्त्र लगाने पर 60 हजार रुपए तथा तीन किलोवॉट या उससे अधिक के सोलर संयन्त्र स्थापना पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी केन्द्र सरकार द्वारा दी जा रही है।

    गौरतलब है कि पीएम सूर्यघर योजना का शुभारंभ 13 फरवरी 2024 को हुआ था। तब से लेकर आज दिनांक तक हजारों बिजली उपभोक्ताओं को योजना से जोड़ा गया है। योजना में शामिल होने के लिए आनलाइन आवेदन करना होगा। जिसके लिए पीएम सूर्य घर योजना की वेबसाइट https://www.pmsuryaghar.gov.in पर जाकर आवेदन किया जा सकता है। इसके अलावा अधिक जानकारी के लिए कंपनी की वेबसाइट www.portal.mpcz.in अथवा उपाय एप, वॉट्सएप चेटबॉट व टोल फ्री नं, 1912 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

    कंपनी ने कहा कि उपभोक्ताओं को समय पर सब्सिडी मिले इसके लिए वेंडर और उपभोक्ता दोनों को ध्यान रखना होगा कि उनके बैंक खाते में नाम, आधार कार्ड में नाम तथा बिजली बिल में नाम एक समान होना चाहिए। गौरतलब है कि 1 दिसंबर 2024 से स्थापित होने वाले प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के अंतर्गत सौर संयंत्रों में केवल स्मार्ट मीटर ही लगाए जा रहे हैं, जो कि मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा एस.ओ.आर. रेट पर उपभोक्ताओं को प्रदान किए जा रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं द्वारा सोलर वेंडर को किए जाने वाले भुगतान में लगभग 6 से 8 हजार रूपये तक की कमी परिलक्षित हो रही है।