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  • धर्मांतरण और सरकारी लाभ पर HC की सख्ती, पूछा– कितने लोग ले रहे दोहरा फायदा?

    धर्मांतरण और सरकारी लाभ पर HC की सख्ती, पूछा– कितने लोग ले रहे दोहरा फायदा?


    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    Uttarakhand High Court में धर्मांतरण के बाद सरकारी योजनाओं और आरक्षण के कथित “दोहरी सुविधा” को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। यह याचिका पिथौरागढ़ निवासी दर्शन लाल द्वारा दाखिल की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग धर्म परिवर्तन के बाद भी पहले से मिल रहे सरकारी लाभों का फायदा उठा रहे हैं।

    सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा कि ऐसे कितने लोग हैं जिन्होंने धर्म परिवर्तन के बाद भी सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ लिया है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह ऐसे सभी मामलों को चिन्हित कर तीन सप्ताह के भीतर उन्हें पक्षकार बनाए और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

    याचिका में दावा किया गया है कि इस कथित स्थिति के कारण वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पा रहा है। याचिकाकर्ता ने इस पर रोक लगाने की मांग भी अदालत से की है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद तय की गई है।

    इसी बीच प्रशासनिक स्तर पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। रुद्रपुर में जिला प्रशासन ने धर्मांतरण, अवैध नशा, अतिक्रमण और अन्य अवैध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के निर्देश जारी किए हैं।

  • राजनीतिक बदलाव का असर: केंद्र की योजनाएं अब तेजी से लागू होने की संभावना, विकास कार्यों में आएगी रफ्तार

    राजनीतिक बदलाव का असर: केंद्र की योजनाएं अब तेजी से लागू होने की संभावना, विकास कार्यों में आएगी रफ्तार

    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में हाल ही में हुए राजनीतिक परिवर्तन के बाद राज्य के विकास मॉडल में बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। लंबे समय से जिन केंद्र प्रायोजित योजनाओं के क्रियान्वयन में रुकावट देखी जा रही थी, अब उनके तेजी से लागू होने की संभावना बन रही है। इस बदलाव को राज्य में विकास की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है, जहां प्रशासनिक सहयोग बढ़ने से योजनाओं का लाभ सीधे जनता तक पहुंचने की उम्मीद है।

    पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी योजनाएं राज्य में पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थीं या फिर उनकी गति काफी धीमी रही थी। इनमें स्वास्थ्य, आवास, जल आपूर्ति, रोजगार और शिक्षा से जुड़ी योजनाएं प्रमुख थीं। अब राजनीतिक स्थिति बदलने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि इन योजनाओं को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जाएगा और लाभार्थियों तक उनका सीधा फायदा पहुंचेगा।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में लागू होने वाली योजनाओं से गरीब और मध्यम वर्ग को बड़ा लाभ मिल सकता है। बीमा और इलाज से जुड़ी सुविधाएं अगर सही तरीके से लागू होती हैं तो लाखों लोगों को आर्थिक राहत मिल सकती है। इसी तरह आवास योजनाओं के विस्तार से उन परिवारों को घर मिलने की संभावना बढ़ेगी, जो अब तक इस सुविधा से वंचित रहे हैं।

    जल आपूर्ति से जुड़ी योजनाएं भी अब तेजी से आगे बढ़ सकती हैं। हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने का लक्ष्य लंबे समय से चुनौती बना हुआ था, लेकिन अब इसके क्रियान्वयन में सुधार की उम्मीद है। ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या को देखते हुए यह योजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    रोजगार और आर्थिक सहायता से जुड़ी योजनाओं पर भी अब अधिक ध्यान दिए जाने की संभावना है। युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और स्वरोजगार को बढ़ावा देने वाली योजनाएं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में मदद कर सकती हैं। इसी तरह महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता योजनाएं उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है। छात्र-छात्राओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के साथ यदि नई योजनाएं जुड़ती हैं तो शिक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो सकती है। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में शिक्षा की पहुंच बेहतर होने की संभावना है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक परिवर्तन के बाद जब प्रशासनिक सहयोग बढ़ता है, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आना स्वाभाविक है। इससे न केवल विकास कार्यों में गति आती है, बल्कि जनता को भी सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिलने लगता है।

    कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल में हुए इस बदलाव ने विकास योजनाओं के लिए नई उम्मीदें पैदा की हैं। यदि सभी योजनाएं प्रभावी रूप से लागू होती हैं तो राज्य में सामाजिक और आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

  • किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी

    किसान कल्याण वर्ष 2026: उपार्जन केंद्रों पर सुविधाओं और कंट्रोल रूम से होगी निगरानी


    भोपाल । भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में 9 अप्रैल से शुरू होने वाली गेहूँ खरीदी को लेकर सभी उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए सहज और सुगम व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उपार्जन केंद्रों पर किसानों के लिए पेयजल और छायादार स्थान की विशेष व्यवस्था की जाएगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने किसान और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों से वर्चुअल संवाद भी किया और उन्हें प्रदेश की गेहूँ खरीदी प्रक्रिया में सहयोग करने के लिए आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आय बढ़ाने और उनकी फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि गेहूँ की प्रति क्विंटल कीमत को वर्तमान स्तर तक लाना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन इसे 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक ले जाने का प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य किसानों को उनकी मेहनत का पूरा लाभ दिलाना और कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहित करना है।

    उपार्जन केंद्रों पर हेल्प डेस्क स्थापित किए जा रहे हैं ताकि किसानों को तुरंत सहायता मिल सके। इसके साथ ही जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं, और मुख्यमंत्री कार्यालय में स्थापित कंट्रोल रूम से संपूर्ण प्रक्रिया पर निरंतर निगरानी रखी जाएगी। केंद्रों पर पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से किसानों को खरीदी प्रक्रिया, दस्तावेज़ और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

    मुख्यमंत्री ने सामाजिक और सेवाभावी संस्थाओं से भी सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि ऐसे संगठन उपार्जन केंद्रों पर आकर व्यवस्था में मदद कर सकते हैं, किसानों को मार्गदर्शन दे सकते हैं और प्रशासन के साथ मिलकर कार्य कर सकते हैं। इस वर्ष 2026 को प्रदेश में किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, और इस दौरान किसानों को उनकी फसल, आय और कल्याण से जुड़े सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी भी दी जाएगी।

    डॉ. यादव ने बारदाने की पर्याप्त उपलब्धता और खरीदी केंद्रों में व्यवस्थाओं को लेकर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और हर संभव प्रयास कर रही है कि उपार्जन प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो। किसानों के कल्याण के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि उन्हें सही मूल्य, उचित सुविधाएं और सरल प्रक्रिया के माध्यम से गेहूँ बेचने का अवसर मिले।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान कल्याण और कृषि क्षेत्र के सशक्तिकरण के लिए इस प्रक्रिया में प्रशासन और सामाजिक संस्थाओं का सहयोग अनिवार्य है। कंट्रोल रूम से निरंतर निगरानी, हेल्प डेस्क पर सहायता, पंपलेट और होर्डिंग के माध्यम से जानकारी उपलब्ध कराना तथा किसानों की सुविधाओं को प्राथमिकता देना इस प्रक्रिया की सफलता की कुंजी होगी।

    इस प्रकार प्रदेश में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया किसानों के हित और सुविधा के अनुरूप पूरी तरह व्यवस्थित की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पहल से किसान कल्याण वर्ष 2026 में उपार्जन केंद्रों पर किसानों की संतुष्टि और कृषि क्षेत्र की उत्पादकता को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही सामाजिक संस्थाओं और प्रशासन के सहयोग से यह प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी और सहज होगी।

  • लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर

    लोकसभा में किसानों की आय पर बड़ा खुलासा सरकार ने बताए आंकड़े और योजनाओं से बदली तस्वीर


    नई दिल्ली :भारत की संसद के निचले सदन लोकसभा में किसानों की आय को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया गया जिसमें यह पूछा गया कि क्या सरकार अपने उस लक्ष्य में सफल रही है जिसमें किसानों की आय को दोगुना करने की बात कही गई थी इस पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विस्तार से जवाब दिया और सरकार की नीतियों और योजनाओं के प्रभाव को सामने रखा

    सरकार की ओर से बताया गया कि कृषि क्षेत्र के विकास और किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं जिनका उद्देश्य उत्पादन बढ़ाना लागत कम करना और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है सरकार ने यह भी बताया कि कृषि बजट में पिछले वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है वर्ष 2013 14 में यह बजट 21 हजार करोड़ रुपये के आसपास था जो अब बढ़कर वर्ष 2025 26 में एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है

    सरकार ने यह भी दावा किया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने हजारों किसानों की सफल कहानियों का संकलन तैयार किया है जिसमें लगभग 75 हजार किसानों की आय विभिन्न योजनाओं के माध्यम से दोगुनी या उससे अधिक होने का उल्लेख किया गया है ये कहानियां कृषि तकनीक और सरकारी योजनाओं के संयुक्त प्रभाव को दर्शाती हैं

    राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के सर्वेक्षण के अनुसार किसान परिवारों की औसत मासिक आय में भी वृद्धि दर्ज की गई है वर्ष 2012 13 में यह आय लगभग 6426 रुपये थी जो वर्ष 2018 19 में बढ़कर 10218 रुपये हो गई इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि किसानों की आय में लगातार सुधार हुआ है हालांकि यह वृद्धि सभी किसानों के लिए समान नहीं है

    इसके अलावा उपभोग व्यय के आंकड़े भी इस बात को दर्शाते हैं कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है ग्रामीण क्षेत्रों में मासिक उपभोग व्यय 1430 रुपये से बढ़कर 4122 रुपये हो गया है जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 2630 रुपये से बढ़कर 6996 रुपये तक पहुंच गया है यह वृद्धि आर्थिक विकास और जीवन स्तर में सुधार को दर्शाती है

    सरकार ने किसानों की सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई योजनाएं भी लागू की हैं जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना जैसी प्रमुख योजनाएं शामिल हैं इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता बीमा सुरक्षा और पेंशन सुविधा दी जा रही है

    कृषि मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार किसानों की आत्महत्या से संबंधित आंकड़ों को राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के माध्यम से संकलित करती है और इन आंकड़ों को नियमित रूप से प्रकाशित किया जाता है राज्यों द्वारा प्रभावित परिवारों को राहत राशि भी प्रदान की जाती है

    सरकार का कहना है कि फसल विविधीकरण ड्रोन तकनीक प्राकृतिक खेती और कृषि स्टार्टअप जैसे कार्यक्रमों से कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं बन रही हैं और किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जा रहा है जिससे उनकी आय बढ़ाने में मदद मिल रही है

     सरकार का दावा है कि विभिन्न योजनाओं बजट वृद्धि और तकनीकी सुधार के माध्यम से किसानों की आय में सुधार हुआ है हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी इस दिशा में और प्रयासों की आवश्यकता है ताकि सभी किसानों को समान रूप से लाभ मिल सके

  • विकसित भारत’ के लिए नई वित्तीय रूपरेखा: बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने को बनेगी हाई-लेवल कमिटी

    विकसित भारत’ के लिए नई वित्तीय रूपरेखा: बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने को बनेगी हाई-लेवल कमिटी

    नई दिल्ली । भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य की दिशा में केंद्र सरकार अब बैंकिंग क्षेत्र को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की है कि सरकार जल्द ही बैंकिंग सेक्टर के लिए एक हाई-लेवल कमिटी का गठन करेगी। इस कमिटी का उद्देश्य आने वाले वर्षों में देश की बढ़ती वित्तीय जरूरतों के अनुरूप बैंकिंग व्यवस्था को तैयार करना और उसे अधिक सक्षम, व्यापक और मजबूत बनाना होगा।

    दरअसल, जैसे-जैसे भारत तेजी से आर्थिक विकास की ओर बढ़ रहा है, बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, उद्योग, स्टार्टअप और सामाजिक योजनाओं के लिए भारी वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम को भी उसी गति से विकसित करना जरूरी है, ताकि वह देश की विकास यात्रा का मजबूत आधार बन सके। इसी उद्देश्य से यह कमिटी बैंकिंग सेक्टर की पूरी समीक्षा करेगी और यह तय करेगी कि आने वाले समय में उसे किस दिशा में आगे बढ़ाना है।

    वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विकसित भारतका सपना केवल योजनाओं से नहीं, बल्कि मजबूत वित्तीय ढांचे से पूरा होगा। इसके लिए पर्याप्त फंडिंग, क्रेडिट की उपलब्धता और बैंकिंग सुविधाओं का आम लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है। कमिटी इसी बात का ब्लूप्रिंट तैयार करेगी कि बैंकिंग क्षेत्र कैसे देश की अगली विकास छलांग का साथ दे सकता है।

    इस प्रस्ताव का जिक्र 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में भी किया गया था। बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा था कि विकसित भारत के लिए बैंकिंग पर हाई-लेवल कमिटीबनाई जाएगी, जो पूरे सेक्टर की समीक्षा करेगी और इसे भारत के अगले विकास चरण से जोड़ेगी। साथ ही यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण से कोई समझौता न हो।

    सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों को फंडिंग देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि बैंकिंग सेवाएं देश के हर व्यक्ति तक पहुंचें। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कारोबारियों, महिलाओं और युवाओं को सस्ती और आसान वित्तीय सेवाएं मिलें, इसके लिए भी कमिटी सुझाव देगी। वित्त मंत्री ने कहा कि बैंकिंग को इतना बड़ा और सक्षम बनाना है कि वह देश की बढ़ती आर्थिक जरूरतों को पूरा कर सके और आम आदमी की पहुंच में भी बनी रहे।

    उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत तक पहुंचने के लिए बड़े पैमाने पर पूंजी की आवश्यकता होगी। इसके लिए बैंकिंग सिस्टम को मजबूत, लचीला और भविष्य के लिए तैयार बनाना जरूरी है। यही कारण है कि सरकार इस कमिटी का गठन जल्द से जल्द करने की दिशा में काम कर रही है।

    बजट में बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कुछ शुरुआती कदम भी उठाए गए हैं। इसी कड़ी में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेश PFC और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉर्पोरेशनस REC जैसे बड़े पब्लिक सेक्टर एनबीएफसी को पुनर्गठित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद इन संस्थानों का आकार बढ़ाना और उनकी कार्यक्षमता को और बेहतर बनाना है, ताकि वे बड़े स्तर पर परियोजनाओं को फंडिंग दे सकें।

    हाल ही में PFC के बोर्ड ने REC के साथ मर्जर को सैद्धांतिक मंजूरी भी दे दी है। REC पहले से ही PFC की सब्सिडियरी है और दोनों ही नवरत्नश्रेणी की केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं, जो बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देती हैं। गौरतलब है कि वर्ष 2019 में PFC ने सरकार से REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी लगभग 14,500 करोड़ रुपये में खरीदी थी, जिससे उसे प्रबंधन का नियंत्रण मिला था। अब यह कदम वित्तीय संस्थानों के समेकन की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

    जब वित्त मंत्री से पूछा गया कि क्या यह कमिटी भविष्य में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मर्जर की भी सिफारिश कर सकती है, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पहल को केवल मर्जर के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनका कहना था कि इसका मुख्य उद्देश्य बैंकिंग सेक्टर को इतना बड़ा और मजबूत बनाना है कि वह विकसित भारत की वित्तीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर सके।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया कि मंत्रालय के भीतर इस दिशा में काफी काम पहले से चल रहा है और कई विचार सामने आ चुके हैं। अब यह कमिटी उन सभी पहलुओं का गहराई से अध्ययन कर आगे की रणनीति तय करेगी। माना जा रहा है कि बैंकिंग सेक्टर पहले से ही अपेक्षाकृत अच्छी स्थिति में है, ऐसे में यह सही समय है जब इसे अगले स्तर पर ले जाने की योजना बनाई जाए।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था जिस तेजी से बढ़ रही है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश की जरूरत होगी। इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा, डिजिटल इकोनॉमी, मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप सेक्टर में पूंजी की मांग लगातार बढ़ेगी। ऐसे में बैंकिंग सिस्टम की क्षमता बढ़ाना समय की जरूरत है।

    हाई-लेवल कमिटी का गठन इसी सोच के साथ किया जा रहा है, ताकि बैंकिंग सेक्टर केवल पारंपरिक सेवाओं तक सीमित न रहे, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन बन सके। यह कमिटी इस बात पर भी ध्यान देगी कि वित्तीय स्थिरता बनी रहे और बैंकिंग सेवाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

  • आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड

    आधार PVC कार्ड की फीस में बढ़ोतरी: 1 जनवरी 2026 से ₹75 में मिलेगा नया कार्ड


    नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत के साथ आधार कार्ड से जुड़ा एक अहम बदलाव लागू हो गया है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरणUIDAI ने आधार PVC कार्ड बनवाने की फीस में वृद्धि कर दी है। अब नागरिकों को आधार PVC कार्ड के लिए पहले की तरह ₹50 नहीं, बल्कि ₹75 शुल्क देना होगा। यह नई दरें 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुकी हैं। UIDAI ने साफ किया है कि यह फैसला मैटेरियल कॉस्ट, प्रिंटिंग खर्च और सुरक्षित डिलीवरी लागत में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

    UIDAI के अनुसार, आधार PVC कार्ड एक आधुनिक, टिकाऊ और सुविधाजनक विकल्प के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यह कार्ड सामान्य प्लास्टिक कार्ड की तरह मजबूत होता है, जिसे आसानी से वॉलेट में रखा जा सकता है। कागज़ी आधार लेटर की तुलना में यह पानी, नमी और टूट-फूट से अधिक सुरक्षित रहता है। इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में लोगों के बीच PVC आधार कार्ड की मांग लगातार बढ़ी है। बढ़ती मांग के साथ उत्पादन, प्रिंटिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत भी बढ़ी, जिसके चलते शुल्क में संशोधन करना जरूरी हो गया।

    UIDAI ने यह भी बताया कि आधार PVC कार्ड में कई अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स शामिल किए गए हैं, जो इसे ज्यादा भरोसेमंद बनाते हैं। इसमें सिक्योर QR कोड, होलोग्राम, माइक्रोटेक्स्ट और घोस्ट इमेज जैसे फीचर्स दिए जाते हैं, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है। प्राधिकरण ने नागरिकों को यह चेतावनी भी दी है कि बाजार में निजी एजेंसियों द्वारा छपवाए गए PVC आधार कार्ड मान्य नहीं होते। केवल UIDAI द्वारा जारी किया गया आधार PVC कार्ड ही आधिकारिक और वैध माना जाएगा।

    आधार PVC कार्ड बनवाने की प्रक्रिया बेहद सरल और सुविधाजनक है। इच्छुक नागरिक UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए आधार नंबर और कैप्चा दर्ज करना होता है, जिसके बाद रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP से लॉगिन किया जाता है। लॉगिन के बाद विकल्प पर क्लिक कर विवरण की पुष्टि करनी होती है। अंतिम चरण में ऑनलाइन भुगतान करना होता है, जिसमें क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, नेट बैंकिंग और UPI जैसे कई विकल्प उपलब्ध हैं। भुगतान सफल होते ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो जाती है।

    UIDAI के मुताबिक, भुगतान के बाद लगभग पांच कार्यदिवस के भीतर आधार PVC कार्ड प्रिंट कर भारतीय डाक को सौंप दिया जाता है। इसके बाद स्पीड पोस्ट के जरिए कार्ड सीधे आवेदक के पते पर भेज दिया जाता है। जो लोग ऑनलाइन प्रक्रिया से सहज नहीं हैं, उनके लिए ऑफलाइन विकल्प भी मौजूद है। ऐसे नागरिक नजदीकी आधार सेवा केंद्र पर जाकर PVC कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं।

    फिलहाल आधार तीन स्वरूपों में उपलब्ध है—आधार लेटर, ई-आधार और आधार PVC कार्ड। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही फीस में ₹25 की बढ़ोतरी हुई हो, लेकिन इसकी मजबूती, लंबी उम्र और सुविधाजनक उपयोग को देखते हुए आधार PVC कार्ड की लोकप्रियता आने वाले समय में और बढ़ सकती है।

  • 1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक

    1 जनवरी से ब्लैक लिस्ट हो जाएंगे ये राशन कार्ड फ्री अनाज और 7 बड़ी योजनाओं का लाभ मिलेगा रुक


    नई दिल्ली । राशन कार्ड धारकों के लिए एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई हैजिससे हजारों लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप राशन कार्ड का लाभ उठाते हैंतो 31 दिसंबर से पहले एक जरूरी काम पूरा करना होगा। इस समय सीमा के बाद अगर आप यह काम नहीं करतेतो 1 जनवरी से राशन मिलना बंद हो सकता है और सात प्रमुख सरकारी योजनाओं का लाभ भी रुक सकता है।

    ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य

    दरअसलसरकार ने राशन कार्ड धारकों के लिए ई-केवाईसी इलेक्ट्रॉनिक-नो योर कस्टमरको अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब है कि सभी राशन कार्ड धारकों को अपनी पहचान और अन्य जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी। यदि यह प्रक्रिया 31 दिसंबर तक पूरी नहीं होतीतो 1 जनवरी से आपके राशन कार्ड का लाभ रुक सकता हैऔर आप फ्री राशन और अन्य योजनाओं से वंचित हो सकते हैं।

    किसे-किसे पर पड़ेगा असर

    राशन कार्ड से जुड़ी यह प्रक्रिया हर परिवार के लिए लागू हैजिनके पास सरकारी राशन कार्ड है। इसका सीधा असर उन लाभार्थियों पर होगा जो अब तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवा पाए हैं। इन लाभार्थियों को 1 जनवरी से राशन मिलने में समस्या हो सकती है। इसके अलावासात बड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ भी इन कार्ड धारकों को नहीं मिल पाएगाजिनमें प्रमुख रूप से फ्री राशन योजनापेंशन योजनाएंबीमा योजनाएं अन्य सरकारी मदद शामिल हैं।

    ई-केवाईसी कैसे करें

    खुशखबरी यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको किसी सरकारी दफ्तर या केंद्र पर जाने की जरूरत नहीं है। ई-केवाईसी मोबाइल फोन से भी किया जा सकता है। इसके लिए आपको निम्नलिखित कदम उठाने होंगे

    स्मार्टफोन या कंप्यूटर का इस्तेमाल करें।

    राज्य सरकार के आधिकारिक राशन कार्ड पोर्टल या एप्लिकेशन पर जाएं। अपना राशन कार्ड नंबर और अन्य जरूरी जानकारी डालें। आधार कार्ड और फोटो अपलोड करें।
     एक बार जब यह प्रक्रिया पूरी हो जाएतो आपको एक कन्फर्मेशन मैसेज मिलेगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के बाद आपको कोई परेशानी नहीं होगी और आप बिना किसी रुकावट के सभी सरकारी योजनाओं का लाभ उठाते रहेंगे।

    क्यों जरूरी है ई-केवाईसी

    ई-केवाईसी से राशन कार्ड की जानकारी को सही तरीके से अपडेट किया जा सकेगा और यह सुनिश्चित होगा कि केवल असली और पात्र लाभार्थी ही सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं। इस प्रक्रिया से राशन वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर भी रोक लगेगी।

    समय रहते सुधार लें
    अगर आपने अभी तक अपनी ई-केवाईसी नहीं करवाई हैतो यह समय है कि आप इसे जल्दी से जल्दी पूरा कर लें। ऐसा करने से आप 1 जनवरी से होने वाली किसी भी परेशानी से बच सकते हैं और आपके राशन कार्ड से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के मिलता रहेगा।

  • यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क

    यूपी के भोजपुर में ‘रोहिंग्या’ संदिग्धों को मिला सरकारी आवास और राशन जांच एजेंसियां सतर्क


    मेरठ । भोजपुर उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश के भोजपुर क्षेत्र के रानी नागल गांव में सरकारी योजनाओं का गड़बड़ तरीके से वितरण किए जाने का मामला सामने आया है। गांव में रह रहे घूमंतू परिवारों को बिना उचित प्रक्रिया के मुफ्त राशन प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ और वोटर बनाने की कोशिश की गई है। इन परिवारों में से कुछ को रोहिंग्या माना जा रहा है जिनके खिलाफ खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब तेज़ हो गई है।

    सरकारी योजनाओं का बंदरबांट

    रानी नागल में कुछ परिवारों को सरकारी योजनाओं का फायदा गलत तरीके से दिया गया है। यह परिवार मूलतः घूमंतू समुदाय से हैं और इनका नाम असल में रजिस्टर्ड वोटर सूची में नहीं था। शिकायतों के बाद यह सामने आया कि इन परिवारों को राशन कार्ड प्रधानमंत्री आवास योजना का घर और आधार कार्ड भी जारी कर दिया गया था। इसके अलावा वोटर लिस्ट में इनका नाम जोड़ने के लिए फर्जी तरीके से प्रक्रिया की जा रही थी जिसमें केवल महिलाओं ने ही अपनी गणना प्रपत्र भरे थे।

    गांव छोड़ने पर मजबूर हुए लोग

    गांव में हो रही इस गड़बड़ी के उजागर होते ही कई परिवारों ने गांव छोड़ दिया और भागने को मजबूर हो गए। इस संदिग्ध गतिविधि की जानकारी के बाद खुफिया विभाग की टीम गांव में पहुंची और मामले की गहन जांच शुरू की। रानी नागल के पूर्व प्रधान सईदुल ने डीएम अनुज सिंह और एसएसपी सतपाल अंतिल से इस मामले की शिकायत की थी। इसके बाद एसडीएम सदर डॉ. राम तोहन मीणा द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया कि 2018 में कुल 92 घूमंतू लोग गांव में पहुंचे थे और इनकी फर्जी वोटर बनने की प्रक्रिया चल रही थी।

    किसी और के नाम पर आवास देना

    इन घूमंतू परिवारों में से दस परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने घरों में रह रहे हैं। इस योजना के तहत ये आवास ग्राम समाज की भूमि पर बने थे लेकिन सवाल उठता है कि क्या इन आवासों का नाम इन परिवारों के नाम पर दर्ज किया गया या फिर किसी और के नाम पर इन्हें आवास दिया गया। यह मामला अब जांच का विषय बन चुका है। जांच में यह भी सामने आया कि इन परिवारों के पास राशन कार्ड भी हैं और उनके आधार कार्ड भी बनवाए गए हैं। इस संदिग्ध गतिविधि का पता चलते ही खुफिया विभाग ने तुरंत अपनी टीम भेजी और मामले की गहरी जांच शुरू कर दी।

    पुलिस और खुफिया विभाग की जांच

    भोजपुर पुलिस ने भी इस मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि इस गड़बड़ी में किसकी भूमिका है। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने के बाद ही इस पर कोई बयान दिया जा सकेगा। फिलहाल खुफिया विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी पूरी स्थिति की जांच कर रहे हैं और मामले के सभी पहलुओं को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं।

    फर्जी वोटर बनाने की कोशिश

    गांव में फर्जी वोटर बनाने की प्रक्रिया का खुलासा होने के बाद जांच टीम ने यह पुष्टि की कि 92 लोगों में से केवल 10 परिवारों ने ही वोटर बनने के लिए अपना गणना प्रपत्र भरा था और इन सभी ने इसे केवल महिलाओं के नाम से भरा था। इस प्रक्रिया में भी कई असंगतियां पाई गईं और यही कारण है कि जांच की दिशा और तेज़ कर दी गई है। रानी नागल गांव में हो रही इस सरकारी योजनाओं की गड़बड़ी से सवाल उठ रहे हैं कि क्या अधिकारियों ने इन गतिविधियों पर सही समय पर नजर नहीं रखी। यह मामला न केवल भ्रष्टाचार और सरकारी प्रणाली की नाकामी को उजागर करता है बल्कि यह भी दर्शाता है कि गलत तरीके से योजनाओं का लाभ उठाने की कोशिश की जा रही थी। खुफिया विभाग और पुलिस की जांच अब यह निर्धारित करेगी कि इन गतिविधियों में कितनी साजिश शामिल थी और इसके पीछे कौन लोग थे।