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  • 27 साल तक कोशिश 26 बार फेल फिर भी जारी रखा संघर्ष 59 साल की उम्र में विजय बने सरकारी शिक्षक

    27 साल तक कोशिश 26 बार फेल फिर भी जारी रखा संघर्ष 59 साल की उम्र में विजय बने सरकारी शिक्षक


    नई दिल्ली । बागपत के रहने वाले विजय कुमार शर्मा ने यह साबित कर दिया है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उम्र से ज्यादा जरूरी लगातार कोशिश और मजबूत इरादा होता है। 59 साल सात महीने की उम्र में विजय कुमार का वह सपना पूरा हुआ जिसके लिए उन्होंने करीब 27 वर्षों तक लगातार प्रयास किया। प्राइवेट स्कूल में लगभग चार दशक तक पढ़ाने के बाद अब वह सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में सहायक शिक्षक के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभालेंगे। इस उपलब्धि की खास बात यह है कि सरकारी शिक्षक बनने की कोशिश में वह 26 बार असफल हुए लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

    विजय कुमार शर्मा ने इस साल उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से आयोजित टीजीटी परीक्षा में सफलता हासिल की है। उनका चयन संस्कृत शिक्षक के पद पर हुआ है। अब वह शामली जिले के इंटर कॉलेज आइलम में छात्रों को संस्कृत पढ़ाएंगे। यह स्कूल उनके बागपत जिले के बरावद गांव स्थित घर से करीब 15 किलोमीटर दूर है। विजय के लिए यह नौकरी सिर्फ एक नियुक्ति नहीं बल्कि वर्षों से देखे जा रहे सपने के पूरा होने का मौका है।

    विजय बताते हैं कि सरकारी शिक्षक बनना उनका पुराना सपना था। उन्होंने 1987 में ग्रेजुएशन पूरा किया और इसके बाद हिंदी तथा संस्कृत में पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। वर्ष 2003 में उन्होंने बीएड की डिग्री भी हासिल की। इसके बाद उन्होंने सरकारी शिक्षक की भर्ती परीक्षाओं में लगातार हिस्सा लिया। कई बार लिखित परीक्षा पास करने के बावजूद इंटरव्यू में उनका चयन नहीं हो सका। उनके मुताबिक कई मौकों पर उन्हें लगा कि चयन प्रक्रिया में कुछ बाधाएं हैं लेकिन उन्होंने इसे अपने प्रयासों के रास्ते में नहीं आने दिया।

    इस बार संस्कृत शिक्षकों के 292 पदों पर भर्ती निकली थी। विजय ने परीक्षा पास की और इस प्रक्रिया में इंटरव्यू राउंड नहीं था। उनका मानना है कि इस बदलाव से उनके जैसे अभ्यर्थियों को अपनी योग्यता साबित करने का समान अवसर मिला। चयन के बाद उन्होंने सरकारी शिक्षक बनने के अपने सपने के पूरा होने पर खुशी जताई और नियुक्ति प्रक्रिया के लिए सरकार का आभार व्यक्त किया।

    विजय की उम्र अब 59 साल से अधिक है और रिटायरमेंट की उम्र 62 वर्ष होने के कारण उन्हें सरकारी स्कूल में करीब दो साल से कुछ अधिक समय तक पढ़ाने का अवसर मिलेगा। कम समय के बावजूद उनके लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। उन्होंने बताया कि उन्हें लखनऊ में नियुक्ति पत्र भी सौंपा गया था।

    विजय के परिवार ने भी उनके संघर्ष को करीब से देखा है। उनके पांच बच्चों में से दो बेटे उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं जबकि उनकी पत्नी गृहिणी हैं। उनकी बेटी ममता शर्मा बताती हैं कि उनके पिता 26 बार असफल हुए लेकिन किसी भी असफलता ने उनका आत्मविश्वास नहीं तोड़ा। परिवार ने जब उनसे परीक्षाएं देना बंद करने को कहा तब भी उन्होंने अपनी कोशिश जारी रखी।

    परिवार के शुरुआती दिनों में आर्थिक परेशानियां भी थीं। विजय निजी स्कूल में पढ़ाकर घर चलाते रहे। आज भी वह साइकिल से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय करके स्कूल जाते हैं और हिंदी तथा संस्कृत पढ़ाते हैं। हर साल सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करना और परीक्षा देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बना रहा। आखिरकार 59 साल की उम्र में उन्हें वह सफलता मिली जिसका इंतजार उन्होंने करीब 27 वर्षों तक किया था। विजय की कहानी बताती है कि लगातार प्रयास के सामने उम्र और असफलता जैसी बाधाएं भी रास्ते का अंत नहीं होतीं।

  • सरकारी शिक्षक चला रहे निजी कोचिंग? छात्रों पर दबाव के आरोप, जांच के आदेश के साथ विभाग ने दी कार्रवाई की चेतावनी

    सरकारी शिक्षक चला रहे निजी कोचिंग? छात्रों पर दबाव के आरोप, जांच के आदेश के साथ विभाग ने दी कार्रवाई की चेतावनी


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों पर निजी कोचिंग संचालित करने और छात्रों को कोचिंग लेने के लिए कथित रूप से दबाव बनाने के आरोपों ने शिक्षा विभाग में हलचल मचा दी है। क्षत्रिय फ्रीडम फाइटर ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन के नीरज वर्मा ने कलेक्टर को शिकायत सौंपते हुए 11 सरकारी शिक्षकों पर मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन करने और विद्यार्थियों के आर्थिक एवं मानसिक शोषण के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने पूरे जिले में सख्त निर्देश जारी कर दिए हैं।

    शिकायत में कहा गया है कि शहर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों और सीएम राइज स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षक नियमित शिक्षण कार्य के साथ निजी कोचिंग सेंटर भी संचालित कर रहे हैं। शिकायत में एल.डी. शर्मा, प्रदीप झा, कल्पना धाकड़, केशव शर्मा, देवेंद्र धाकड़, मनीष शर्मा, कृष्णकांत राठौर, विपिन पचौरी, गोविंद धाकड़, दीप ओझा और ददीवाल सर के नाम शामिल किए गए हैं।

    शिकायतकर्ता नीरज वर्मा का आरोप है कि संबंधित शिक्षक विद्यालय में पूरा पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाते, जिससे छात्र निजी कोचिंग लेने के लिए मजबूर हो जाते हैं। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि जो छात्र कोचिंग में प्रवेश नहीं लेते या फीस जमा नहीं करते, उन्हें प्रैक्टिकल परीक्षा में कम अंक देने और वार्षिक परीक्षा में असफल करने की धमकी दी जाती है। वर्मा का कहना है कि उनके पास इन आरोपों से जुड़े वीडियो और अन्य साक्ष्य भी मौजूद हैं, जिन्हें जांच के दौरान प्रस्तुत किया जाएगा।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी आकाश सिंह यादव ने जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ), बीआरसीसी और संकुल प्राचार्यों को निर्देश जारी किए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के तहत कोई भी शासकीय शिक्षक नियमों के विरुद्ध निजी ट्यूशन या अन्य व्यावसायिक गतिविधि में शामिल नहीं हो सकता।

    डीईओ ने निर्देश दिए हैं कि यदि कोई शिक्षक निजी कोचिंग संचालित करते हुए या किसी प्रतिबंधित व्यावसायिक गतिविधि में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सेवा नियमों के अनुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

    हालांकि फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। शिक्षा विभाग का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित शिक्षकों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।