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  • आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: नौ अस्पताल सस्पेंड, 28 पर कार्रवाई की तैयारी

    आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: नौ अस्पताल सस्पेंड, 28 पर कार्रवाई की तैयारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की जीरो टॉलरेंस नीति अब सिर्फ कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर भी दिखाई दे रही है। श्योपुर जिले में कलेक्टर अर्पित वर्मा के नेतृत्व में अवैध कॉलोनियों के खिलाफ एक जबरदस्त अभियान चलाया गया है जिससे कॉलोनी माफिया की कमर टूट गई है। प्रशासन ने श्योपुर जैदा और जाटखेड़ा क्षेत्रों में पांच अवैध कॉलोनियों पर एक साथ बुलडोजर कार्रवाई की और यह स्पष्ट कर दिया कि अब अवैध कॉलोनी विकास और सरकारी भूमि के गलत इस्तेमाल को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।शनिवार को प्रशासन ने अवैध कॉलोनियों में बनी सड़कें सीसी रोड और आंतरिक मार्ग ध्वस्त किए और जमीन की बुनियाद पर सीधा वार किया। इस कार्रवाई के दौरान एसडीएम श्योपुर गगन सिंह मीणा तहसीलदार मनीषा मिश्रा और पूरा राजस्व अमला मौके पर मौजूद था।

    शांतिपूर्ण लेकिन सख्त कार्रवाई

    काफी पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई शांतिपूर्ण लेकिन सख्त रही। तहसीलदार मनीषा मिश्रा ने बताया कि जैदा के सर्वे क्रमांक 75/8 पर अवैध कॉलोनी में बने मार्ग तोड़े गए जबकि जाटखेड़ा में अवैध सीसी सड़कें और रास्ते ध्वस्त किए गए। इसके अलावा श्योपुर कस्बे में पंजाब नेशनल बैंक के पीछे और अस्पताल के पास बने अवैध कॉलोनी के निर्माणों को भी तोड़ा गया।

    कलेक्टर ने 23 कॉलोनियों को रडार पर लिया

    कलेक्टर अर्पित वर्मा ने जिले की 23 कॉलोनियों को संदेह के घेरे में लिया है। उन्होंने एसडीएम श्योपुर को इन कॉलोनियों की जांच के निर्देश दिए हैं जो जमीन पर जाकर हर पहलू की पड़ताल करेंगे। यह जांच कागजी नहीं होगी और इसमें भूमि के मूल स्वरूप कॉलोनी विकास अनुमति ड्रेनेज मार्गों पर अतिक्रमण वृक्षों की अवैध कटाई और प्लॉट विक्रय जैसे सभी बिंदुओं की गहन जांच होगी।

    दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई

    कलेक्टर ने चेतावनी दी है कि यदि किसी कॉलोनी में अवैध गतिविधियाँ पाई जाती हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए एक जिला कॉलोनी सेल का गठन किया गया है जो अवैध कॉलोनियों की जांच करेगी और आम जनता को यह जानकारी देगी कि कौन सी कॉलोनी वैध है और कौन सी अवैध।

    रजिस्ट्री-नामांतरण पर प्रतिबंध

    कलेक्टर ने यह भी निर्देश दिए हैं कि बिना कॉलोनी विकास अनुमति या नियमितीकरण प्रमाणपत्र के किसी भी भूखंड की रजिस्ट्री और नामांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध होगा। संबंधित सर्वे नंबरों पर अवैध कॉलोनियों की प्रविष्टि की जाएगी ताकि किसी भी प्रकार का क्रय-विक्रय संभव न हो सके। इस निर्णय से कॉलोनी माफिया को बड़ा झटका लगा है क्योंकि यह उनके व्यापार को सीधा नुकसान पहुंचाएगा।

  • सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई

    सस्ते धान को छत्तीसगढ़ में खपाने की साजिश नाकाम, बिचौलियों पर सरकार की बड़ी कार्रवाई


    अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पड़ोसी राज्यों से सस्ते धान को अपने यहां खपाने की बिचौलियों की सुनियोजित साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया है। उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्यप्रदेश की सीमाओं से लगे बलरामपुर जिले में प्रशासन की सख्ती के चलते अब तक 11,300 क्विंटल धान और 48 वाहन जब्त किए जा चुके हैं। जब्त किए गए धान की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ 50 लाख रुपये बताई जा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, यदि यह धान जब्त नहीं किया जाता तो इसे छत्तीसगढ़ के सरकारी उपार्जन केंद्रों में बेच दिया जाता। इससे बिचौलियों को भारी मुनाफा होता और राज्य सरकार को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता।

    समर्थन मूल्य का अंतर बना वजह
    इस पूरे मामले की जड़ राज्यों के बीच न्यूनतम समर्थन मूल्य MSP का अंतर है। झारखंड में धान की खरीद 2,450 रुपये प्रति क्विंटल उत्तर प्रदेश में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल जबकि छत्तीसगढ़ में सरकार 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद रही है यानी छत्तीसगढ़ में प्रति क्विंटल लगभग 700 रुपये अधिक का लाभ मिल रहा है। इसी अंतर का फायदा उठाने के लिए बिचौलिये यूपी और झारखंड से धान खरीदकर छत्तीसगढ़ में बेचने की तैयारी कर रहे थे।

    सीमावर्ती इलाकों में कड़ी निगरानी

    बलरामपुर जिला तीन राज्यों की सीमा से लगा होने के कारण बिचौलियों के लिए आसान रास्ता बनता रहा है। लेकिन इस बार प्रशासन ने पहले से ही सतर्कता बरतते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी शुरू कर दी थी। धान की अवैध ढुलाई में लगे ट्रकों, पिकअप वाहनों और ट्रैक्टरों की जांच की गई। इसी दौरान बड़ी मात्रा में धान जब्त किया गया और 48 वाहनों को कब्जे में लिया गया।

    किसानों के हक की रक्षा
    प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई केवल सरकारी नुकसान रोकने के लिए नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए भी बेहद जरूरी थी। यदि बाहरी राज्यों का धान उपार्जन केंद्रों तक पहुंच जाता, तो असली किसानों को अपनी उपज बेचने में दिक्कत होती। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की नीति है कि समर्थन मूल्य का लाभ केवल राज्य के वास्तविक किसानों को ही मिले। बिचौलियों या बाहरी धान की किसी भी सूरत में अनुमति नहीं दी जाएगी।

    आगे भी जारी रहेगी कार्रवाई
    प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। सीमावर्ती जिलों में पुलिस, राजस्व और खाद्य विभाग की संयुक्त टीमें लगातार गश्त और जांच करेंगी। उपार्जन केंद्रों पर भी सख्त सत्यापन व्यवस्था लागू की गई है, ताकि बाहरी धान की पहचान की जा सके।सरकार का मानना है कि ऐसी सख्ती से न केवल बिचौलियों पर लगाम लगेगी, बल्कि किसानों में भी भरोसा बढ़ेगा कि उनकी फसल सही दाम पर सुरक्षित रूप से खरीदी जाएगी।इस पूरे अभियान के जरिए छत्तीसगढ़ सरकार ने साफ संदेश दिया है कि धान खरीदी व्यवस्था से किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी। MSP का फायदा गलत तरीके से उठाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।