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  • ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका

    ऊर्जा विभाग का बड़ा फैसला 6500 संविदा अधिकारी और कर्मचारी बन सकेंगे नियमित एक बार मिलेगा सुनहरा मौका


    मध्यप्रदेश मध्य प्रदेश सरकार ने बिजली कंपनियों में कार्यरत 6500 से अधिक संविदा अधिकारी और कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए नियमित नियुक्ति का रास्ता खोल दिया है। ऊर्जा विभाग ने संविदा कर्मचारियों के लिए नई नियुक्ति योजना लागू कर दी है जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को नियमित रिक्त पदों पर भर्ती का अवसर मिलेगा। इसके लिए अक्टूबर से पहले ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों की मेरिट परीक्षा के अंकों और संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर दिए जाने वाले बोनस अंकों को जोड़कर तैयार की जाएगी।

    ऊर्जा विभाग ने इस योजना को संविदा आधार पर कार्यरत कार्मिकों की समकक्ष नियमित पदों पर नवीन नियुक्ति योजना 2026 नाम दिया है। योजना का उद्देश्य लंबे समय से संविदा पर कार्य कर रहे कर्मचारियों को नियमित सेवा में आने का अवसर देना है। हाल ही में नियमितीकरण की मांग को लेकर संविदाकर्मियों ने प्रदर्शन भी किया था जिसके बाद सरकार ने यह अहम फैसला लिया है।

    योजना का लाभ एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी तथा मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी में कार्यरत संविदा कर्मचारियों को मिलेगा। हालांकि मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी को इस योजना के दायरे से बाहर रखा गया है।

    इस योजना के तहत लाइन अटेंडेंट टेस्टिंग अटेंडेंट जूनियर इंजीनियर असिस्टेंट इंजीनियर सहित अन्य समकक्ष पदों पर कार्यरत संविदा अधिकारी और कर्मचारी आवेदन कर सकेंगे। संबंधित बिजली कंपनियों के प्रबंध संचालकों को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    योजना में आवेदन के लिए वही कर्मचारी पात्र होंगे जिन्होंने योजना की स्वीकृति तिथि तक संबंधित कंपनी में कम से कम दो वर्ष की संविदा सेवा पूरी कर ली हो। यदि किसी कर्मचारी की दो संविदा नियुक्तियों के बीच अंतराल रहा है तो उसे सेवा में व्यवधान नहीं माना जाएगा लेकिन उस अवधि को अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा। पुनः नियुक्ति की स्थिति में भी वास्तविक सेवा अवधि के आधार पर अनुभव की गणना होगी। अनुभव प्रमाण पत्र कार्यपालन अभियंता या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी किया जाएगा।

    नियमित पदों पर चयन पूरी तरह ऑनलाइन परीक्षा के माध्यम से होगा। केवल उन्हीं पदों पर भर्ती की जाएगी जिनके समकक्ष नियमित रिक्तियां उपलब्ध होंगी। परीक्षा में प्राप्त अंकों के साथ संविदा सेवा के अनुभव के आधार पर बोनस अंक जोड़े जाएंगे और इसी आधार पर अंतिम मेरिट सूची तैयार होगी। इससे लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को प्रतिस्पर्धा में अतिरिक्त लाभ मिलेगा।

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नियुक्तियां मध्य प्रदेश शासन के आरक्षण नियमों के अनुसार की जाएंगी। संविदा कर्मचारियों को आवेदन के लिए अधिकतम आयु सीमा में भी छूट दी जाएगी ताकि अधिक से अधिक पात्र कर्मचारी इस अवसर का लाभ उठा सकें।

    यदि कोई संविदा कर्मचारी नियमित पद पर चयनित होता है तो उसे पहले अपने संविदा पद से त्यागपत्र देना होगा। इस प्रक्रिया में एक महीने की नोटिस अवधि की अनिवार्यता को शिथिल किया गया है। त्यागपत्र स्वीकार होने के बाद संविदा सेवा समाप्त मानी जाएगी और भविष्य में उसी सेवा के आधार पर वरिष्ठता पदोन्नति या अन्य किसी लाभ का दावा मान्य नहीं होगा।

    सरकार के इस फैसले को बिजली कंपनियों में वर्षों से संविदा पर कार्यरत हजारों कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब उनकी नजर अक्टूबर से पहले होने वाली परीक्षा पर रहेगी जो नियमित सरकारी सेवा का रास्ता तय करेगी।

  • सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर परमाणु ऊर्जा परियोजना में 255 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती आवेदन 15 जुलाई से

    सरकारी नौकरी का बड़ा अवसर परमाणु ऊर्जा परियोजना में 255 टेक्नीशियन पदों पर भर्ती आवेदन 15 जुलाई से


    नई दिल्ली । सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक शानदार अवसर सामने आया है। न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्रोजेक्ट ने स्टाइपेंडरी ट्रेनी और टेक्नीशियन के कुल 255 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह भर्ती तमिलनाडु के तिरुनेलवेली जिले स्थित देश के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा केंद्र के लिए की जाएगी। इच्छुक और पात्र उम्मीदवार 15 जुलाई से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया 4 अगस्त की शाम चार बजे तक जारी रहेगी।

    भर्ती के तहत विभिन्न आरक्षित और अनारक्षित वर्गों के लिए अलग अलग पद निर्धारित किए गए हैं। कुल 255 रिक्तियों में अनुसूचित जाति के लिए 54 पद अनुसूचित जनजाति के लिए 19 पद अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 77 पद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 20 पद तथा सामान्य वर्ग के लिए 85 पद शामिल हैं। इसके अलावा दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए भी 11 पद आरक्षित रखे गए हैं जिससे अधिक से अधिक योग्य उम्मीदवारों को अवसर मिल सके।

    ऑनलाइन आवेदन केवल एनपीसीआईएल की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण और आवेदन प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अंतिम तिथि के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा इसलिए अभ्यर्थियों को समय रहते आवेदन करने की सलाह दी गई है।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो प्लांट ऑपरेटर पद के लिए अभ्यर्थी के पास विज्ञान संकाय से बारहवीं पास होना जरूरी है। फिजिक्स केमिस्ट्री और गणित विषयों के साथ कम से कम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स मैकेनिक इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक इलेक्ट्रीशियन फिटर टर्नर मशीनिस्ट और वेल्डर जैसे ट्रेड के लिए उम्मीदवार के पास दसवीं में विज्ञान और गणित में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक तथा संबंधित ट्रेड में दो वर्षीय आईटीआई प्रमाणपत्र होना चाहिए। जिन ट्रेड में आईटीआई की अवधि दो वर्ष से कम है वहां एक वर्ष का संबंधित कार्य अनुभव भी आवश्यक होगा। सभी उम्मीदवारों के लिए दसवीं स्तर तक अंग्रेजी विषय पढ़ा होना भी अनिवार्य रखा गया है।

    आयु सीमा के अनुसार आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 24 वर्ष निर्धारित की गई है। आरक्षित वर्गों के अभ्यर्थियों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयनित उम्मीदवारों को दो वर्ष के प्रशिक्षण कार्यक्रम से गुजरना होगा। प्रशिक्षण के पहले वर्ष में प्रति माह 20 हजार रुपये और दूसरे वर्ष में 22 हजार रुपये का स्टाइपेंड दिया जाएगा। इसके अलावा एक बार तीन हजार रुपये का बुक अलाउंस भी मिलेगा। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद अभ्यर्थियों को टेक्नीशियन बी के पद पर नियुक्त किया जाएगा। इस पद पर सातवें वेतन आयोग के अनुसार लेवल तीन में 21 हजार 700 रुपये का मूल वेतन मिलेगा। इसके साथ महंगाई भत्ता और अन्य सरकारी भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा।

    एनपीसीआईएल की यह भर्ती तकनीकी क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए बेहतरीन अवसर मानी जा रही है। आकर्षक वेतन प्रशिक्षण के दौरान आर्थिक सहायता और भविष्य में स्थायी सरकारी नौकरी की संभावना इस भर्ती को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। इच्छुक उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि आवेदन करने से पहले आधिकारिक अधिसूचना को ध्यानपूर्वक पढ़ लें और सभी आवश्यक दस्तावेज पहले से तैयार रखें ताकि आवेदन प्रक्रिया में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

  • कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू

    कार्यवाहक प्रमोशन पर चला सरकार का बड़ा फैसला हजारों पुलिसकर्मियों की बढ़ी मुश्किलें मूल पद पर लौटाने की तैयारी शुरू


    मध्य प्रदेश मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में नए पदोन्नति नियम लागू होने के बाद बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है। पिछले कई वर्षों से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर जिम्मेदारी संभाल रहे करीब पंद्रह हजार पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों पर अब मूल पद पर लौटने का खतरा मंडरा रहा है। सरकार द्वारा मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम दो हजार पच्चीस लागू किए जाने के बाद पुलिस मुख्यालय ने नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके साथ ही कार्यवाहक पदोन्नति के सभी मामलों की चरणबद्ध समीक्षा शुरू कर दी गई है जिससे पूरे विभाग में चिंता और असमंजस का माहौल बन गया है।

    दरअसल वर्ष दो हजार सोलह के बाद लंबे समय तक नियमित पदोन्नतियां नहीं हो सकीं। विभाग में रिक्त पदों और प्रशासनिक जरूरतों को देखते हुए वर्ष दो हजार इक्कीस से बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी और कर्मचारियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब नए नियम लागू होने के बाद इन सभी मामलों का दोबारा परीक्षण किया जा रहा है ताकि नियमित पदोन्नति केवल पात्र और योग्य कर्मचारियों को ही मिल सके।

    इस प्रक्रिया की पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में देखने को मिली है जहां कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में काम कर रहे बत्तीस पुलिसकर्मियों से प्रभार वापस लेकर उन्हें फिर से आरक्षक पद पर पदस्थ कर दिया गया। पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी आदेश के बाद सभी कर्मचारियों ने अपने मूल पद पर कार्यभार संभाल लिया। विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नए पदोन्नति नियमों और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है।

    सूत्रों के अनुसार नियमित विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक से पहले प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी के पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की गहन जांच की जा रही है। इसमें वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन अनुशासनात्मक कार्रवाई निलंबन विभागीय दंड और न्यायालयों में लंबित मामलों का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों का रिकॉर्ड निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होगा उन्हें नियमित पदोन्नति नहीं मिलेगी और उनका कार्यवाहक प्रभार भी समाप्त कर दिया जाएगा।

    पुलिस मुख्यालय के प्रारंभिक आकलन के अनुसार फिलहाल करीब एक हजार अधिकारी और कर्मचारी ऐसे हैं जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले कुछ दिनों में प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरह की कार्रवाई शुरू होने की संभावना है। विभागीय अधिकारियों का अनुमान है कि आगे चलकर प्रभावित होने वालों की संख्या पंद्रह हजार तक पहुंच सकती है।

    वर्षों से उच्च पदों पर कार्य कर रहे कई पुलिसकर्मियों का मानना है कि यदि उन्हें फिर से मूल पद पर भेजा गया तो इससे उनका मनोबल प्रभावित होगा और कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और नियम आधारित होगी ताकि योग्य कर्मचारियों को ही स्थायी पदोन्नति का लाभ मिल सके।

    बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा सभी विभागों से पदोन्नति प्रक्रिया की जानकारी मांगे जाने के बाद पुलिस विभाग सहित कई विभागों में लंबित पदोन्नति मामलों पर तेजी से काम शुरू हुआ है। ऐसे में आने वाले दिनों में पुलिस महकमे में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

  • सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया

    सरकारी नौकरी अलर्ट: DRDO-RAC ने निकाली साइंटिस्ट भर्ती, 19 जून तक करें आवेदन, जानें पूरी प्रक्रिया


    नई दिल्ली ।
    देश की रक्षा अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी प्रमुख संस्था डीआरडीओ-आरएसी ने वैज्ञानिक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जो इंजीनियरिंग और विज्ञान क्षेत्र में करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर माना जा रहा है। इस भर्ती अभियान के तहत कुल 33 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी, जिनमें वैज्ञानिक-ई, वैज्ञानिक-डी और वैज्ञानिक-सी स्तर के पद शामिल हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    इस भर्ती में विभिन्न तकनीकी और वैज्ञानिक क्षेत्रों के लिए पदों का वितरण किया गया है। वैज्ञानिक-ई के दो पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार इंजीनियरिंग तथा मैकेनिकल, प्रोडक्शन और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। इसके अलावा वैज्ञानिक-डी के 11 पद कंप्यूटर विज्ञान, एयरोस्पेस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग, भौतिकी, रासायनिक इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं वैज्ञानिक-सी के 20 पदों में इलेक्ट्रॉनिक्स, कंप्यूटर साइंस, गणित, समुद्र विज्ञान, रिमोट सेंसिंग, फार्माकोलॉजी, फिजियोलॉजी और अन्य वैज्ञानिक विषयों से जुड़े उम्मीदवारों को मौका दिया गया है।

    इन पदों के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास संबंधित विषय में इंजीनियरिंग या विज्ञान में प्रथम श्रेणी स्नातक या मास्टर डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही उम्मीदवारों के पास निर्धारित क्षेत्र में अनुभव और अन्य आवश्यक योग्यताएं भी होनी चाहिए, जो पद के अनुसार अलग-अलग तय की गई हैं। आयु सीमा की बात करें तो अधिकतम आयु 35 से 45 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।

    चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्टिंग के बाद व्यक्तिगत साक्षात्कार, दस्तावेज़ सत्यापन और अन्य मूल्यांकन चरणों से गुजरना होगा। अंतिम चयन पूरी तरह से उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और इंटरव्यू प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। चयनित उम्मीदवारों को पद के अनुसार आकर्षक वेतनमान प्रदान किया जाएगा, जो लगभग 67,700 रुपये से लेकर 1,23,100 रुपये प्रति माह तक होगा। यह वेतन सरकारी वैज्ञानिक पदों के स्तर के अनुसार तय किया गया है और इसके साथ अन्य भत्ते भी लागू हो सकते हैं।

    आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से की जा रही है। उम्मीदवारों को निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर जाकर रजिस्ट्रेशन करना होगा और सभी आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। सामान्य, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के पुरुष उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क 100 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला उम्मीदवारों को शुल्क में छूट दी गई है।

    इस भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 19 जून तय की गई है और उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम समय का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। यह अवसर उन युवाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो देश की रक्षा अनुसंधान परियोजनाओं में वैज्ञानिक के रूप में योगदान देना चाहते हैं और एक प्रतिष्ठित सरकारी संस्थान में करियर बनाना चाहते हैं।

  • MP Police Bharti 2026: प्रधान आरक्षक और ASI भर्ती की फिजिकल परीक्षा 7 से 9 जून तक, आधार e-KYC अनिवार्य

    MP Police Bharti 2026: प्रधान आरक्षक और ASI भर्ती की फिजिकल परीक्षा 7 से 9 जून तक, आधार e-KYC अनिवार्य

    भोपाल । भोपाल में मध्यप्रदेश पुलिस भर्ती 2026 के तहत प्रधान आरक्षक कंप्यूटर और सहायक उप निरीक्षक कंप्यूटर के कुल 89 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के अगले चरण की घोषणा कर दी गई है। चयनित उम्मीदवारों की शारीरिक दक्षता परीक्षा 7 से 9 जून तक आयोजित की जाएगी।

    यह फिजिकल टेस्ट भोपाल के लाल परेड ग्राउंड और जबलपुर के परेड ग्राउंड तथा 6वीं वाहिनी विसबल रांझी में संपन्न होगा। इस चरण में अभ्यर्थियों की 800 मीटर दौड़ सहित शारीरिक दक्षता से जुड़े अन्य परीक्षण किए जाएंगे। इसके साथ ही दस्तावेजों की भी जांच की जाएगी।

    सहायक पुलिस महानिरीक्षक चयन एवं भर्ती गोपाल सिंह धाकड़ ने जानकारी दी कि ऑनलाइन परीक्षा के बाद अगले चरण के लिए सूचना पत्र जारी कर दिए गए हैं। उम्मीदवार मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की आधिकारिक वेबसाइट से अपना सूचना पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी अभ्यर्थियों को तय तारीख और स्थान पर ही उपस्थित होना अनिवार्य होगा और इसमें किसी प्रकार का बदलाव संभव नहीं है।

    भर्ती प्रक्रिया के दौरान आधार e-KYC का सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सभी उम्मीदवारों को अपना आधार कार्ड साथ लाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि उनका आधार नंबर लॉक न हो। इसके बिना सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकेगी। इसके अलावा दस्तावेज परीक्षण के लिए अभ्यर्थियों को अपने सभी मूल प्रमाण पत्र और उनकी स्वयं प्रमाणित छायाप्रति साथ लाना जरूरी होगा।

    गौरतलब है कि इस भर्ती के लिए परीक्षा 24 और 25 मार्च 2026 को आयोजित की गई थी, जिसका परिणाम 8 मई 2026 को मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट www.esb.mp.gov.in पर जारी किया जा चुका है। अब चयनित उम्मीदवार शारीरिक दक्षता परीक्षा के अगले चरण में शामिल होंगे, जो अंतिम चयन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

  • कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी

    कोर्ट आदेश के बाद भी राहत नहीं कर्मचारियों का गुस्सा फूटा प्रदेशभर में आंदोलन की तैयारी


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर कर्मचारियों का असंतोष खुलकर सामने आ गया है। लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर कर्मचारी संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का संकेत दे दिया है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की हाल ही में हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई और इसके बाद प्रदेश स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली गई है।

    संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि कर्मचारियों की समस्याएं वर्षों से लंबित हैं लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत के आदेश के बावजूद सरकार नव नियुक्त कर्मचारियों के लिए 70 80 और 90 प्रतिशत वेतन के बंधन को समाप्त नहीं कर रही है। इससे कर्मचारियों में भारी असंतोष है और वे खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

    बैठक में अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठाए गए। कर्मचारियों ने मांग की कि अनुकंपा नियुक्ति में सीपीसीटी का बंधन समाप्त किया जाए ताकि प्रभावित परिवारों को जल्द राहत मिल सके। इसके अलावा यह भी कहा गया कि वर्ष 2019 से कोर्ट के आदेश के अनुसार कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का लाभ दिया जाना चाहिए लेकिन अभी तक इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर भी कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि कर्मचारियों को केंद्र सरकार के समान बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलनी चाहिए और इसके लिए व्यापक बीमा योजना लागू की जानी चाहिए। साथ ही यह मांग भी उठी कि कर्मचारियों को बैंक खातों के माध्यम से बड़े स्तर पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए।

    संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के मुद्दे भी बैठक में छाए रहे। संघ का कहना है कि इन कर्मचारियों को भी नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं और लाभ मिलना चाहिए ताकि उनके साथ भेदभाव खत्म हो सके। इसके अलावा शिक्षकों की पात्रता परीक्षा को लेकर भी चर्चा हुई और इसे निरस्त करने की मांग उठाई गई।

    बैठक में महंगाई राहत को लेकर भी आवाज बुलंद हुई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के समान महंगाई राहत देने की मांग की गई ताकि उन्हें आर्थिक रूप से राहत मिल सके। इसके साथ ही केंद्रीय दर और तिथि के अनुसार लाभ देने की भी मांग रखी गई।

    इन सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने के बाद कर्मचारी संघ ने आगामी दिनों में प्रदेश स्तर पर आंदोलन करने का निर्णय लिया है। बैठक में विभिन्न संस्थानों के पदाधिकारी भी शामिल हुए और सभी ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करने की सहमति जताई।

    कर्मचारियों का कहना है कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यह स्थिति सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है क्योंकि बड़ी संख्या में कर्मचारी इससे जुड़े हुए हैं। कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में कर्मचारियों का यह बढ़ता असंतोष आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है जो सरकार और प्रशासन दोनों के लिए अहम परीक्षा साबित होगा।