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  • भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल

    भारत-अमेरिका व्यापार समझौता तब लागू होगा जब भारत को तुलनात्मक लाभ मिलेगा: गोयल


    नई दिल्ली।
    केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते का पहला चरण तभी लागू होगा, जब अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि भारत को अपने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में लाभ मिले।

    पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। वाणिज्य और उद्योग मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का पहला चरण तब लागू हो जाएगा, जब अमेरिका भारतीय निर्यात को पड़ोसी देशों और आसियान देशों के मुकाबले टैरिफ के मामले में बेहतर स्थिति देगा।

    संवाददाताओं से बात करते हुए गोयल ने कहा कि भारत ने बीटीए के शुरुआती चरण पर बातचीत पूरी कर ली है और अब अमेरिका की तरफ से ज़रूरी कदमों का इंतज़ार कर रहा है। उन्होंने कहा कि यही इस समझौते के पहले चरण का मूल आधार है और जैसे ही यह आधार फिर से स्थापित होगा, भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता लागू करने के लिए तैयार होगा। अमेरिका ने उस जांच के तहत भारत पर 10 फीसदी का टैरिफ लगाया है।

    केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की कानूनी समीक्षा अंतिम चरण में है। गोयल ने कहा, ‘‘जब तक भारत को प्रतिस्पर्धी बढ़त या कम से कम प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर शुल्क दरें मिलती रहेंगी, तबतक भारत, अमेरिका को अपना निर्यात बढ़ाता रहेगा और वहां उपलब्ध विशाल बाजार के अवसरों का लाभ भी उठाता रहेगा।’

    उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान में इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते की घोषणा की थी।

  • भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय, सह-नवाचार और तकनीकी सहयोग से वैश्विक समाधान विकसित करने पर जोर

    भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय, सह-नवाचार और तकनीकी सहयोग से वैश्विक समाधान विकसित करने पर जोर

    नई दिल्ली । भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक संबंध लगातार नए आयाम प्राप्त कर रहे हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग अब पारंपरिक क्षेत्रों से आगे बढ़कर नवाचार, अनुसंधान, उभरती तकनीकों और औद्योगिक विकास जैसे भविष्य-केंद्रित क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। इसी क्रम में भारत ने स्पष्ट किया है कि विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में फ्रांस के साथ साझेदारी नई संभावनाओं और अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रही है।

    वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने फ्रांस के नीस शहर में आयोजित विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों के बाद कहा कि भारत और फ्रांस के बीच सहयोग केवल आर्थिक या व्यापारिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सह-नवाचार और तकनीकी विकास के नए मॉडल तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका कहना था कि दोनों देशों की साझेदारी ऐसी तकनीकों और समाधानों को जन्म दे सकती है, जिनका लाभ वैश्विक स्तर पर विभिन्न समाजों और अर्थव्यवस्थाओं को मिल सके।

    नीस में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान सरकार, उद्योग, निवेश और नवाचार क्षेत्र से जुड़े प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस अवसर पर व्यापार, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और उभरते औद्योगिक क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने माना कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में नवाचार आधारित साझेदारियां आर्थिक विकास और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूत करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही हैं।

    भारत का ‘विकसित भारत 2047’ विजन और फ्रांस का ‘फ्रांस 2030’ मिशन दोनों देशों को साझा लक्ष्यों की दिशा में एक मजबूत आधार प्रदान कर रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नई तकनीकों, अनुसंधान और औद्योगिक क्षमताओं का विकास करना है। यही कारण है कि दोनों देश तकनीकी सहयोग को रणनीतिक प्राथमिकता के रूप में देख रहे हैं।

    इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए भारत और फ्रांस ने इंडिया-फ्रांस इनोवेशन रोडमैप 2030 को अपनाने का निर्णय लिया है। यह रोडमैप महत्वपूर्ण और उभरती तकनीकों के सह-विकास, अनुसंधान सहयोग, शिक्षा क्षेत्र में गतिशीलता और भरोसेमंद तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए दिशा-निर्देशक दस्तावेज के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से दोनों देश साझा विकास, पर्यावरणीय स्थिरता और सामाजिक प्रगति से जुड़े लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाना चाहते हैं।

    दोनों देशों का मानना है कि नवाचार आर्थिक मजबूती, सतत विकास, रणनीतिक स्वायत्तता और तकनीकी संप्रभुता का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे समय में जब दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उन्नत विनिर्माण, हरित प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है, भारत और फ्रांस इन क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फ्रांस यात्रा के दौरान भी दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। दोनों पक्षों ने रक्षा, अंतरिक्ष, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, प्रौद्योगिकी और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करने पर सहमति व्यक्त की। वार्ताओं में भविष्य की चुनौतियों और अवसरों को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक सहयोग के नए ढांचे पर भी विचार किया गया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और फ्रांस के बीच बढ़ती तकनीकी एवं नवाचार साझेदारी न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर नई तकनीकों के विकास और साझा चुनौतियों के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में यह सहयोग आने वाले वर्षों में और अधिक प्रभावशाली रूप में सामने आने की संभावना रखता है।