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  • एमपी के रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने में ट्रांसफर भत्ते और HRA की नीति बनाएगी सरकार

    एमपी के रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर, 6 महीने में ट्रांसफर भत्ते और HRA की नीति बनाएगी सरकार


    जबलपुर । मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में काम करने वाले करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायकों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जबलपुर हाईकोर्ट ने उनके तबादले से जुड़े आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार यदि किसी ग्राम रोजगार सहायक का तबादला करती है तो उसे नियमानुसार अनिवार्य यात्रा भत्ता सहित यात्रा भत्ता और घरेलू भत्ता देना होगा। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को रोजगार सहायकों के लिए छह महीने के भीतर भत्तों से संबंधित नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले से प्रदेशभर के रोजगार सहायकों को भविष्य में आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

    पांच रोजगार सहायकों ने दायर की थी याचिका

    इस मामले में सिंगरौली के अमित कुमार मिश्रा और शहडोल के शिवाकांत मिश्रा व राजेश कुमार सहित सागर के रानू राजपूत तथा टीकमगढ़ के अभिषेक पटेरिया ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पांचों याचिकाकर्ताओं ने 18 जुलाई 2025 को याचिका दायर कर तबादले से जुड़ी समस्याओं और आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठाया था। मामले की सुनवाई जस्टिस विशाल धगट की एकलपीठ में हुई। अदालत ने 14 अक्टूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब इस पर आदेश जारी कर दिया गया है।

    याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता गोपेश यश तिवारी ने पक्ष रखा। मामले में रोजगार सहायकों के वेतन और तबादले के बाद होने वाले अतिरिक्त खर्च का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया। ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले रोजगार सहायकों को सीमित वेतन में अपने परिवार और दूसरी जरूरतों का खर्च उठाना पड़ता है। ऐसे में यदि किसी कर्मचारी को मौजूदा कार्यस्थल से काफी दूर भेज दिया जाता है तो उसके सामने आवागमन और रहने की व्यवस्था से जुड़ी आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।

    18 हजार रुपये वेतन में दूर तबादला बन सकता है परेशानी

    याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता के अनुसार ग्राम रोजगार सहायकों को लगभग 18 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। ऐसी स्थिति में यदि किसी कर्मचारी का तबादला 100 किलोमीटर दूर कर दिया जाता है तो उसे आने जाने और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सीमित आय के कारण यह खर्च कर्मचारी के लिए परेशानी का कारण बन सकता है।

    इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने सरकार को यात्रा भत्ते और हाउस रेंट अलाउंस यानी एचआरए से संबंधित नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। आदेश के अनुसार राज्य रोजगार गारंटी परिषद के आयुक्त को छह महीने के भीतर इस संबंध में नीति तैयार करनी होगी। नीति तैयार होने से यह तय करने में मदद मिलेगी कि तबादले की स्थिति में रोजगार सहायकों को किस प्रकार के भत्ते और आर्थिक सुविधाएं दी जाएंगी।

    तबादले पर रोक नहीं लेकिन भत्तों पर बनानी होगी नीति

    हाईकोर्ट के आदेश में यह भी महत्वपूर्ण है कि रोजगार सहायकों की तबादले नहीं किए जाने की मांग को स्वीकार नहीं किया गया है। इसका मतलब है कि राज्य सरकार प्रशासनिक जरूरतों के अनुसार रोजगार सहायकों का तबादला कर सकेगी। हालांकि तबादले के कारण कर्मचारियों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को देखते हुए भत्तों के संबंध में नीति तैयार करनी होगी।

    प्रदेश में करीब 23 हजार ग्राम रोजगार सहायक ग्राम पंचायतों में विभिन्न कार्यों से जुड़े हैं। ऐसे में इस फैसले का असर बड़ी संख्या में कर्मचारियों पर पड़ सकता है। अब सभी की नजर राज्य सरकार और राज्य रोजगार गारंटी परिषद की ओर से तैयार की जाने वाली नीति पर रहेगी। छह महीने की समयसीमा में बनने वाली यह नीति तय करेगी कि तबादले की स्थिति में कर्मचारियों को किन शर्तों पर आर्थिक लाभ मिलेगा।

  • ग्राम रोजगार सहायकों के अनुबंध में बड़ा बदलाव: अब खुद ही सचिव बनकर खुद से नहीं कर सकेंगे एग्रीमेंट, APO संभालेगा जिम्मेदारी

    ग्राम रोजगार सहायकों के अनुबंध में बड़ा बदलाव: अब खुद ही सचिव बनकर खुद से नहीं कर सकेंगे एग्रीमेंट, APO संभालेगा जिम्मेदारी


    भोपाल । मध्य प्रदेश की ग्राम पंचायतों में कार्यरत हजारों ग्राम रोजगार सहायकों के संविदा अनुबंध को लेकर व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। प्रदेश की 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में काम कर रहे ग्राम रोजगार सहायकों के एग्रीमेंट की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रशासनिक रूप से व्यवस्थित बनाने के लिए मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने नए निर्देश जारी किए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब ऐसी ग्राम पंचायतों में जहां पंचायत सचिव का पद रिक्त है या सचिव पदस्थ नहीं है अथवा ग्राम रोजगार सहायक को ही सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है वहां ग्राम रोजगार सहायक अपना संविदा अनुबंध स्वयं के साथ नहीं कर सकेगा। ऐसी स्थिति में एग्रीमेंट की जिम्मेदारी जनपद पंचायत स्तर पर पदस्थ अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी APO मनरेगा को सौंपी जाएगी।

    दरअसल सामान्य परिस्थितियों में ग्राम रोजगार सहायक का संविदा अनुबंध पंचायत सचिव और ग्राम रोजगार सहायक के बीच किया जाता है। लेकिन प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव के पद रिक्त हैं। कुछ स्थानों पर सचिव उपलब्ध नहीं हैं जबकि कई पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायक को ही पंचायत सचिव का प्रभार सौंप दिया गया है। ऐसी स्थिति में एक प्रशासनिक और कानूनी विसंगति सामने आ रही थी क्योंकि जिस कर्मचारी को सचिव का प्रभार मिला हुआ था उसी को ग्राम रोजगार सहायक के रूप में अपना संविदा अनुबंध भी करना पड़ रहा था। यानी एक तरह से कर्मचारी खुद ही एक पद की जिम्मेदारी निभाते हुए स्वयं के साथ अनुबंध की प्रक्रिया पूरी कर रहा था।

    इस तरह की शिकायतें और प्रशासनिक विसंगतियां परिषद के संज्ञान में आने के बाद अब व्यवस्था को बदलने का निर्णय लिया गया है। मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने स्पष्ट किया है कि किसी कर्मचारी द्वारा स्वयं के साथ संविदा अनुबंध करना प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। इसी कारण अब ऐसी परिस्थितियों के लिए अलग व्यवस्था तय की गई है ताकि अनुबंध की प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे और भविष्य में किसी प्रकार का विवाद उत्पन्न न हो।

    परिषद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा 1 सितंबर को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सभी जिलों के कलेक्टरों जिला कार्यक्रम समन्वयकों और संबंधित मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नए प्रावधान का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए कहा गया है। सचिव उपलब्ध होने की स्थिति में ग्राम रोजगार सहायक का अनुबंध पहले की तरह पंचायत सचिव के साथ ही किया जाएगा। लेकिन जहां सचिव का पद रिक्त है या पंचायत में सचिव पदस्थ नहीं है अथवा ग्राम रोजगार सहायक ही सचिव का प्रभार संभाल रहा है वहां संविदा अनुबंध जनपद पंचायत के अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी APO मनरेगा द्वारा किया जाएगा।

    यदि किसी जनपद पंचायत में APO का पद भी रिक्त है तो वहां प्रभारी अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी को एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी दी जाएगी। नई व्यवस्था से सचिव विहीन पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायकों के नए संविदा अनुबंध और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और सुचारु होने की उम्मीद है। साथ ही सबसे बड़ी बात यह है कि खुद के साथ एग्रीमेंट करने जैसी विवादित स्थिति पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। परिषद के इस फैसले को पंचायत स्तर की प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और संविदा प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।