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  • काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन

    काशी की पावन धरा पर सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का हुआ भव्य समापन


    भोपाल।
    धर्म, संस्कृति और ज्ञान की अविनाशी नगरी काशी के बीएलडब्ल्यू मैदान में पिछले तीन दिनों से चल रहे सांस्कृतिक महाकुंभ (सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य) का रविवार की शाम गौरवमयी समापन हुआ। महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य के मंचन के अंतिम दिन बाबा विश्वनाथ के हजारों भक्तों, कला रसिकों, कला प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने भरपूर आनंद लिया।

    मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग द्वारा उत्तर प्रदेश सरकार के विशेष सहयोग से आयोजित महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के अंतिम दिन वाराणसी की जनता का उत्साह अपने चरम पर रहा। समापन समारोह में उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए।


    विक्रमादित्य नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य

    उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार ने कहा कि भारत की माटी में भगवान श्रीराम और युगावतार श्रीकृष्ण के बाद यदि कोई नायक जन-जन के हृदय में लोकमान्य हुआ है, तो वे उज्जैन के अधिपति सम्राट विक्रमादित्य ही थे। उन्होंने कहा कि “इतिहास के पन्नों में सम्राट विक्रमादित्य ने दुर्दांत विदेशी आक्रांताओं को भारत की सीमाओं से खदेड़कर निर्णायक विजय प्राप्त की थी, जिसके उपलक्ष्य में गौरवशाली ‘विक्रम सम्वत्’ का प्रवर्तन हुआ।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारें मिलकर अपनी गौरवशाली विरासत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में स्थापित उज्जैन की ‘विक्रमादित्य वैदिक घड़ी’ इसी सांस्कृतिक सेतु का जीवंत प्रमाण है।


    महानाट्य का सजीव मंचन: आँखों के सामने जीवंत हुआ इतिहास

    समापन की संध्या पर ‘विशाला’ संस्था उज्जैन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। भव्य त्रि-आयामी मंच पर जब सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ सम्राट के पराक्रम और उनके सुशासन को जीवंत किया, तो पूरा मैदान ‘जय श्री महाकाल’ के जयघोष से गूँज उठा।

    नाटक के निर्देशक संजीव मालवीय के कुशल निर्देशन में सम्राट की न्यायप्रियता, ‘सिंहासन बत्तीसी’ के प्रसंग और विदेशी शत्रुओं के दमन के दृश्यों को जिस भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया, उसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पार्श्व संगीत, युद्ध के सजीव दृश्य और प्रभावशाली संवादों ने यह सिद्ध कर दिया कि हमारी गौरवशाली संस्कृति आज भी जन-मानस के हृदय में धड़कती है।


    अभूतपूर्व प्रदर्शनी: सम्राट विक्रमादित्य और अयोध्या का अटूट संबंध

    मंचन के साथ-साथ आयोजन स्थल पर मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा ‘भारतीय ज्ञान परंपरा’ पर केंद्रित एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी ने वाराणसी के विद्वानों और आमजन को एक चौंकाने वाले ऐतिहासिक तथ्य से परिचित कराया कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर का प्राचीन निर्माण सम्राट विक्रमादित्य द्वारा ही संपन्न कराया गया था। प्रदर्शनी में भारतीय ऋषि और विज्ञान, शिव पुराण और मध्य प्रदेश के पवित्र स्थलों की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रदर्शनी देखने आए विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने इसे ‘ज्ञान का खजाना’ बताया। कक्षा दसवीं की छात्रा रोहिणी यादव ने साझा किया कि उसे पहली बार अपनी समृद्ध वैज्ञानिक परंपरा और विक्रमादित्य के अयोध्या दर्शन के बारे में इतनी गहराई से पता चला।


    ‘माँ गंगा से नर्मदा तक’: पर्यटन और संस्कृति का ऐतिहासिक एमओयू

    इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच हुआ एमओयू रहा, जिसकी थीम माँ गंगा से नर्मदा तक” रखी गई। इसके माध्यम से काशी विश्वनाथ (वाराणसी) और महाकालेश्वर (उज्जैन) के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। मध्य प्रदेश पर्यटन बोर्ड के स्टॉल्स पर काशीवासियों को ‘लघु मध्य प्रदेश’ का अनुभव हुआ। व्हीआर बॉक्स के माध्यम से लोगों ने काशी में बैठे-बैठे ही ओरछा, सांची और खजुराहो की गलियों की यात्रा की। वहीं ‘माँ की रसोई’ में परोसे गए मालवा की प्रसिद्ध थाली, इंदौरी पोहा-जलेबी और कुल्हड़ चाय का स्वाद चखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा।


    लोक कलाओं का मनोहारी संगम

    महानाट्य के मुख्य मंचन से पूर्व मध्य प्रदेश के लोक कलाकारों ने अपनी अद्भुत कला से काशी को सराबोर कर दिया। मालवा का मटकी नृत्य, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदम्बबाजा और उज्जैन के डमरू दल की गूँज ने दोनों राज्यों के साझा सांस्कृतिक डीएनए को प्रदर्शित किया।

    कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का सम्मान विक्रम पंचांग और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया। इस अवसर पर पंडित नरेश शर्मा, डॉ. राजेश कुशवाहा और राजा भोज शोध प्रभाग के निदेशक संजय यादव ने इस आयोजन को भारतीय गौरव को विश्व पटल पर लाने का एक ‘सांस्कृतिक अनुष्ठान’ बताया। जय महाकाल और जय बाबा विश्वनाथ के नारों के साथ इस ऐतिहासिक त्रिवार्षिक उत्सव का समापन हुआ, जिसने काशी और उज्जैन के बीच के सदियों पुराने आध्यात्मिक संबंधों को और भी प्रगाढ़ कर दिया।

  • 'विनर' के नाम से पर्दा उठा? गौरव खन्ना नहीं, इस शख्स को जिताने के लिए फैंस कर रहे हैं ट्रेंड, देखें कौन है वह!

    'विनर' के नाम से पर्दा उठा? गौरव खन्ना नहीं, इस शख्स को जिताने के लिए फैंस कर रहे हैं ट्रेंड, देखें कौन है वह!


    नई दिल्ली। बिग बॉस 19 अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और ग्रैंड फिनाले वीक ने सोशल मीडिया पर उत्सुकता को और बढ़ा दिया है। दर्शकों के बीच इस बात को लेकर लगातार चर्चाएँ जारी हैं कि इस बार शो की ट्रॉफी किसके नाम होगी। टॉप 5 कंटेस्टेंट्स गौरव खन्ना, फरहाना भट्ट, प्रणित मोरे अमाल मलिक और तान्या मित्तल-में मुकाबला बेहद कड़ा माना जा रहा है।

    वोटिंग ट्रेंड्स में अब तक मुख्य रूप से गौरव खन्ना, फरहाना भट्ट और प्रणित मोरे के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है। हालांकि दर्शकों में अभी भी स्पष्टता नहीं है कि आखिर कौन फाइनल में बाजी मार सकता है। ट्विटर X पर कई फैन पेजेज और ट्रेंडिंग हैंडल्स अपने-अपने प्रिडिक्शन साझा कर रहे हैं।

    सोशल मीडिया पर क्या है चर्चा?

    Bigg Boss Scope नामक पेज के अनुसार, फरहाना भट्ट इस सीजन की संभावित विजेता बताई जा रही हैं, जबकि गौरव खन्ना को रनर-अप की स्थिति में दर्शाया गया है। इसी प्रिडिक्शन में तान्या मित्तल को तीसरा, अमाल मलिक को चौथा और प्रणित मोरे को पांचवां स्थान दिया गया है।

    कुछ अन्य ट्विटर हैंडल्स ने भी फरहाना को विजेता बताया है, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह सिर्फ अनुमान हैं और मेकर्स की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। एक अन्य वायरल प्रिडिक्शन में भी फरहाना को विनर और गौरव को रनर-अप बताया गया है, जबकि तान्या और अमाल को क्रमशः तीसरा और पांचवां स्थान दिया गया है। इसी बीच  लाइव हिंदुस्तान के पोल में गौरव खन्ना फिलहाल सबसे आगे दिखाई दे रहे हैं, जिससे उनकी जीत की संभावनाएँ और प्रबल मानी जा रही हैं।

    अफवाहों का बाज़ार भी गर्म

    फिनाले के करीब आते ही अफवाहों का दौर भी तेज हो गया है। कुछ गॉसिप पेजेज यह दावा कर रहे हैं कि प्रणित मोरे को राजनीतिक दबाव के चलते विजेता बनाया जा सकता है, ठीक वैसे ही जैसे पिछले सीजन में एमसी स्टैन की जीत ने सभी को चौंका दिया था।
     दूसरी ओर, कुछ पेजेज ने यह भी लिखा है कि फरहाना भट्ट फिक्स्ड विनर हैं क्योंकि उनका संबंध प्रोडक्शन टीम से जुड़े किसी व्यक्ति से बताया जा रहा है। हालांकि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया है।

    फिनाले से पहले बढ़ा रोमांच

    टॉप 5 में जगह बनाने वाले सभी कंटेस्टेंट्स की अपनी मजबूत फैन फॉलोइंग है। यही वजह है कि फिनाले से पहले सोशल मीडिया पर जबरदस्त बहस छिड़ी हुई है और प्रिडिक्शन लगातार बदल रहे हैं। कौन बनेगा बिग बॉस 19 का विजेता-यह बात फिलहाल पूरी तरह दर्शकों के अंतिम वोट पर निर्भर करेगी। असली नतीजा फिनाले नाइट पर ही सामने आएगा।