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  • US Open में रिबाकिना का तूफान सबालेंका को हराकर जीता खिताब अब करियर में 3 ग्रैंड स्लैम

    US Open में रिबाकिना का तूफान सबालेंका को हराकर जीता खिताब अब करियर में 3 ग्रैंड स्लैम


    नई दिल्ली। कजाकिस्तान की स्टार टेनिस खिलाड़ी एलेना रिबाकिना ने यूएस ओपन 2026 के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए आर्यना सबालेंका को शिकस्त देकर पहली बार इस प्रतिष्ठित खिताब पर कब्जा कर लिया है। न्यूयॉर्क के आर्थर ऐश स्टेडियम में शनिवार को खेले गए रोमांचक फाइनल में रिबाकिना ने वर्ल्ड नंबर दो सबालेंका को 6-4 5-7 6-2 से हराया। दोनों खिलाड़ियों के बीच मुकाबला करीब 2 घंटे 21 मिनट तक चला और निर्णायक सेट में रिबाकिना ने अपने आक्रामक खेल से मैच पूरी तरह अपने नाम कर लिया।

    फाइनल का सबसे खास पल तब आया जब रिबाकिना ने चैंपियनशिप प्वाइंट पर शानदार ऐस लगाकर मुकाबला खत्म किया। उनके करियर का यह तीसरा ग्रैंड स्लैम खिताब है। इससे पहले वह 2022 में विम्बलडन चैंपियन बनी थीं। इसके बाद 2026 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब भी अपने नाम किया था। अब उसी साल यूएस ओपन जीतकर रिबाकिना ने अपने करियर के सबसे शानदार दौर में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है।

    इस जीत के साथ रिबाकिना ने आर्यना सबालेंका का लगातार तीसरी बार यूएस ओपन चैंपियन बनने का सपना भी तोड़ दिया। सबालेंका के पास ओपन एरा में लगातार तीन बार यूएस ओपन खिताब जीतने वाली चुनिंदा महिला खिलाड़ियों की सूची में शामिल होने का बड़ा मौका था लेकिन रिबाकिना ने उनके अभियान पर रोक लगा दी। दोनों खिलाड़ियों के बीच हाल के मुकाबलों में भी रिबाकिना ने लगातार अपनी मजबूत चुनौती पेश की है। उन्होंने इससे पहले डब्ल्यूटीए फाइनल्स और इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन में भी सबालेंका को हराया था।

    फाइनल के पहले सेट में दोनों खिलाड़ियों ने शुरुआत में अपनी सर्विस बचाई लेकिन रिबाकिना लगातार दबाव बनाने में सफल रहीं। 2-2 के स्कोर के बाद उन्हें ब्रेक प्वाइंट मिला और उन्होंने इसका फायदा उठाते हुए 3-2 की बढ़त हासिल कर ली। इसके बाद उन्होंने अपनी सर्विस को मजबूती से संभाला और सबालेंका को वापसी का मौका नहीं दिया। रिबाकिना ने पहला सेट 6-4 से जीतकर मुकाबले में शुरुआती बढ़त बना ली।

    दूसरे सेट में सबालेंका ने जोरदार वापसी की। उन्होंने अहम मौकों पर ब्रेक प्वाइंट बचाए और रिबाकिना की आक्रामकता का सामना करते हुए स्कोर को बराबरी के करीब पहुंचा दिया। 4-4 के बाद मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया। रिबाकिना ने 4-5 पर दो ब्रेक प्वाइंट बचाए लेकिन इसके बाद सबालेंका ने दबाव बनाए रखा। रिबाकिना की कुछ गलतियों का फायदा उठाकर उन्होंने दूसरा सेट 7-5 से जीत लिया और मुकाबले को निर्णायक सेट में पहुंचा दिया।

    तीसरे सेट में रिबाकिना ने शुरुआत से ही आक्रामक रुख अपनाया। 2-1 के बाद उन्होंने सबालेंका की सर्विस तोड़ दी और अपनी बढ़त मजबूत कर ली। सबालेंका ने वापसी की कोशिश की लेकिन रिबाकिना की तेज सर्विस और सटीक ग्राउंडस्ट्रोक के सामने वह ज्यादा देर टिक नहीं सकीं। 4-2 के बाद रिबाकिना ने एक और ब्रेक हासिल किया और मैच पूरी तरह अपनी मुट्ठी में कर लिया। आखिरकार 5-2 पर खिताब के लिए सर्व करते हुए उन्होंने मुकाबला खत्म किया और पहली बार यूएस ओपन चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

    जीत के बाद रिबाकिना ने रैकेट गिराकर दोनों हाथ ऊपर उठाए और भावुक अंदाज में जश्न मनाया। दूसरी ओर सबालेंका इस हार से बेहद निराश नजर आईं और उन्होंने गुस्से में अपना रैकेट तोड़ दिया। रिबाकिना की यह जीत न सिर्फ उनके लिए बल्कि महिला टेनिस के लिहाज से भी बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि उन्होंने दुनिया की नंबर दो खिलाड़ी को हराकर यूएस ओपन की नई चैंपियन के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली है।

  • सेमीफाइनल हार के बाद भी नहीं टूटा जोकोविच का हौसला, 25वें ग्रैंड स्लैम के लिए जारी रहेगी जंग

    सेमीफाइनल हार के बाद भी नहीं टूटा जोकोविच का हौसला, 25वें ग्रैंड स्लैम के लिए जारी रहेगी जंग


    नई दिल्ली। विंबलडन 2026 के पुरुष एकल सेमीफाइनल में दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी जैनिक सिनर से सीधे सेटों में हार झेलने के बावजूद टेनिस महान खिलाड़ी नोवाक जोकोविच ने साफ कर दिया कि उनका सफर अभी खत्म नहीं हुआ है। सात बार के विंबलडन चैंपियन ने संन्यास की अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि वह कम से कम एक बार और इस प्रतिष्ठित ग्रैंड स्लैम में वापसी करना चाहते हैं। साथ ही उन्होंने 25वें ग्रैंड स्लैम खिताब का सपना भी बरकरार रहने की बात कही।

    39 वर्षीय सर्बियाई स्टार को सेमीफाइनल में जैनिक सिनर ने 6-4, 6-4, 6-4 से हराकर फाइनल में प्रवेश किया। पूरे मुकाबले में सिनर ने आक्रामक और संतुलित खेल दिखाया तथा जोकोविच को वापसी का कोई मौका नहीं दिया। हार के बाद जब जोकोविच सेंटर कोर्ट से बाहर निकले तो दर्शकों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका सम्मान किया। इसके बाद उनके संन्यास को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं, लेकिन जोकोविच ने इन सभी अटकलों को तुरंत खारिज कर दिया।

    जोकोविच ने कहा कि वह कम से कम एक बार और विंबलडन में खेलना चाहते हैं। उन्होंने माना कि इस हार से उन्हें निराशा हुई है क्योंकि उनका लक्ष्य एक और विंबलडन खिताब जीतना था। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से वह लगातार मेहनत करते हैं और खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं।

    उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में अपने प्रदर्शन को सकारात्मक बताया। खास तौर पर क्वार्टर फाइनल में फेलिक्स ऑगर-अलियासिमे के खिलाफ मिली जीत का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस मुकाबले ने साबित किया कि वह आज भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं। उनके अनुसार, यह प्रदर्शन उनके आत्मविश्वास को मजबूत करता है और बताता है कि वह अब भी शीर्ष स्तर का टेनिस खेल सकते हैं।

    जोकोविच ने स्वीकार किया कि सेमीफाइनल में वह अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने जैनिक सिनर की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने शानदार टेनिस खेली और जीत के पूरी तरह हकदार रहे। हालांकि इस हार का दुख रहेगा, लेकिन वह इसे पीछे छोड़कर आगे की चुनौतियों पर ध्यान देना चाहते हैं।

    24 ग्रैंड स्लैम खिताब जीत चुके जोकोविच की अब नजर यूएस ओपन 2026 पर होगी। यदि वह वहां खिताब जीतने में सफल रहते हैं तो यह उनके करियर का 25वां ग्रैंड स्लैम होगा और वह इस मामले में मार्गरेट कोर्ट का रिकॉर्ड पीछे छोड़ देंगे। यही लक्ष्य उन्हें लगातार प्रेरित कर रहा है।

    जोकोविच ने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी रिकॉर्ड या बाहरी दबाव के कारण नहीं खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें आज भी टेनिस से उतना ही प्यार है और उन्हें पूरा विश्वास है कि वह दुनिया के शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ जीत हासिल करने में सक्षम हैं। यही विश्वास उन्हें आगे भी कोर्ट पर उतरने और नई उपलब्धियां हासिल करने की प्रेरणा देता रहेगा।

  • विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें

    विंबलडन का दिल है सेंटर कोर्ट: 104 साल का गौरवशाली इतिहास, यहीं लिखी गई टेनिस की सबसे बड़ी दास्तानें


    नई दिल्ली । टेनिस की दुनिया में विंबलडन सिर्फ एक ग्रैंड स्लैम टूर्नामेंट नहीं बल्कि परंपरा प्रतिष्ठा और इतिहास का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है। वर्ष 1877 में शुरू हुए इस टूर्नामेंट ने दुनिया को अनगिनत यादगार मुकाबले और महान खिलाड़ी दिए हैं लेकिन इसकी सबसे बड़ी पहचान सेंटर कोर्ट है जिसे विंबलडन का दिल कहा जाता है। यही वह मंच है जहां हर टेनिस खिलाड़ी खेलने और जीत दर्ज करने का सपना देखता है।

    सेंटर कोर्ट का इतिहास भी उतना ही दिलचस्प है जितना यहां खेले गए मुकाबलों का। शुरुआती दौर में विंबलडन के कोर्ट अलग-अलग बनाए गए थे लेकिन वर्ष 1881 में दो कोर्ट को मिलाकर एक मुख्य कोर्ट तैयार किया गया जो परिसर के बिल्कुल मध्य में स्थित था। इसी वजह से इसका नाम सेंटर कोर्ट रखा गया। बाद में वर्ष 1922 में जब ऑल इंग्लैंड लॉन टेनिस एंड क्रोके क्लब नए परिसर में स्थानांतरित हुआ तब आधुनिक सेंटर कोर्ट का निर्माण हुआ और तभी से यह विंबलडन की सबसे बड़ी पहचान बन गया।

    दिलचस्प बात यह है कि इस कोर्ट का उपयोग पूरे वर्ष में केवल दो सप्ताह के लिए किया जाता है। बाकी समय इसकी घास और सतह की विशेष देखभाल की जाती है ताकि टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों को सर्वोत्तम गुणवत्ता का कोर्ट मिल सके। यहां केवल बारहमासी राई घास का इस्तेमाल किया जाता है और उसकी लंबाई करीब 8 मिलीमीटर रखी जाती है जिससे खेल की गति और गुणवत्ता बनी रहती है।

    सेंटर कोर्ट की एक और खास पहचान इसका रॉयल बॉक्स है जहां ब्रिटिश शाही परिवार और विशेष अतिथि बैठकर मुकाबलों का आनंद लेते हैं। वर्ष 2009 में यहां आधुनिक रिट्रैक्टेबल रूफ लगाया गया जिससे बारिश के दौरान भी मुकाबले बिना ज्यादा बाधा के जारी रखे जा सकते हैं। महज कुछ मिनटों में छत बंद कर खेल दोबारा शुरू कर दिया जाता है।

    इस कोर्ट पर खेलने के लिए खिलाड़ियों को पूरी तरह सफेद पोशाक पहनना अनिवार्य होता है। इसके अलावा कोर्ट के आसपास किसी भी प्रकार के व्यावसायिक विज्ञापन बोर्ड लगाने की अनुमति नहीं दी जाती ताकि विंबलडन की पारंपरिक गरिमा और ऐतिहासिक स्वरूप बरकरार रहे।

    सेंटर कोर्ट ने टेनिस इतिहास के कई स्वर्णिम पल देखे हैं। रोजर फेडरर ने अपने आठ विंबलडन खिताब इसी कोर्ट पर जीते। वर्ष 2008 में फेडरर और राफेल नडाल के बीच खेला गया ऐतिहासिक फाइनल आज भी टेनिस इतिहास के सबसे महान मुकाबलों में गिना जाता है। वहीं वर्ष 2019 में नोवाक जोकोविच और फेडरर के बीच खेला गया विंबलडन इतिहास का सबसे लंबा पुरुष एकल फाइनल भी इसी कोर्ट का हिस्सा बना।

    आज सेंटर कोर्ट केवल एक खेल मैदान नहीं बल्कि उत्कृष्टता परंपरा और गौरव का प्रतीक बन चुका है। यहां जीत हासिल करना किसी भी खिलाड़ी के करियर की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल माना जाता है। यही वजह है कि जब भी विंबलडन का नाम लिया जाता है तो सबसे पहले सेंटर कोर्ट की भव्यता और उससे जुड़ी ऐतिहासिक यादें लोगों के सामने उभर आती हैं।