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  • US ने कुछ खास दवाओं के कच्चे माल पर 100% टैरिफ से दी छूट… भारत समेत 20 देशों को फायदा

    US ने कुछ खास दवाओं के कच्चे माल पर 100% टैरिफ से दी छूट… भारत समेत 20 देशों को फायदा


    वाशिंगटन।
    अमेरिका (America) ने भारत (India) समेत 20 देशों से आने वाली कुछ खास दवाओं और उनके इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Raw materials) पर 100% टैरिफ लगाने से छूट दी है। यह फैसला भारतीय फार्मा कंपनियों (Indian Pharmaceutical Companies) के लिए राहत देने वाला है। हालांकि, यह छूट भारत से अमेरिका भेजी जाने वाली सभी दवाओं पर लागू नहीं होगी।

    एक खबर के मुताबिक अमेरिका 29 सितंबर यानी आज से कुछ पेटेंट वाली दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है, लेकिन कुछ विशेष श्रेणी की दवाओं को इस शुल्क से बाहर रखा गया है।


    सभी भारतीय दवाओं को छूट नहीं

    अमेरिका का फैसला भारत की सभी दवाओं पर लागू नहीं है। केवल तय की गई विशेष श्रेणी की दवाओं और उनसे जुड़े घटकों को ही 100 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। वहीं, सामान्य जेनेरिक दवाएं और उनके संबंधित घटक पहले से ही इस विशेष टैरिफ के दायरे में नहीं हैं।


    किन दवाओं को मिलेगी छूट?

    अमेरिका की इस व्यवस्था में मुख्य रूप से नीचे दी गई दवाओं में छूट दी गई है।
    – दुर्लभ बीमारियों के इलाज की दवाएं।
    – बांझपन के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं।
    – सेल थेरेपी से जुड़ी दवाएं।
    – जीन थेरेपी से जुड़ी दवाएं।
    – एंटीबॉडी-ड्रग कंजुगेट्स (ADCs)।
    – पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कुछ दवाएं।
    इन दवाओं को बनाने में इस्तेमाल होने वाले संबंधित कच्चे माल और अन्य जरूरी घटकों को भी इस छूट में शामिल किया गया है।


    भारत समेत और कौन-कौन से देशों को होगा फायदा

    अमेरिका की इस लिस्ट में भारत के अलावा अर्जेंटीना, बांग्लादेश, कंबोडिया, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, यूरोपीय यूनियन, ग्वाटेमाला, इंडोनेशिया, जापान, जॉर्डन, मलेशिया, नॉर्थ मैसेडोनिया, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन, ताइवान, थाईलैंड, ब्रिटेन और वियतनाम शामिल हैं।


    क्यों दी गई सुविधा:

    अमेरिकी वाणिज्य विभाग के मुताबिक इन देशों को यह सुविधा इसलिए दी गई है, क्योंकि इनके साथ अमेरिका के मौजूदा या भविष्य में लागू होने वाले व्यापार और सुरक्षा समझौते हैं।


    अमेरिका ने क्यों लगाया 100% टैरिफ?

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने अप्रैल में पेटेंट वाली दवाओं, बायोलॉजिक्स और उनसे जुड़े कुछ घटकों के आयात पर शुल्क लगाने की घोषणा की थी। यह फैसला अमेरिकी कानून के सेक्शन 232 के तहत लिया गया है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिका में दवाओं का उत्पादन बढ़ाना है।


    आज से लागू होना है टैरिफ

    100 प्रतिशत टैरिफ का प्रावधान कुछ कंपनियों के लिए 31 जुलाई से प्रभावी हो चुका है। बाकी कवर की गई कंपनियों पर यह व्यवस्था 29 सितंबर 2026 यानी आज से लागू होनी है।अमेरिका ने इस व्यवस्था में कुछ तकनीकी बदलाव भी किए हैं। इनमें जेनेरिक दवाओं की परिभाषा को स्पष्ट करना शामिल है। इसके अलावा यह भी स्पष्ट किया गया है कि ‘फार्मास्युटिकल आर्टिकल्स’ में तैयार दवाओं के साथ-साथ उनके एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स (API) और इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख शुरुआती कच्चे माल को भी शामिल किया जा सकता है।

  • डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट

    डीजीसीए ने एयर इंडिया को पश्चिम एशिया संकट के बीच लंबी उड़ानों के लिए दी अस्थायी छूट


    नई दिल्ली।
    पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच विमानन सुरक्षा निगरानी संस्था नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों से एयर इंडिया को लंबी दूरी की उड़ानों के लिए अस्थायी छूट दी है।

    आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को दी जानकारी में बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों के कारण एयर इंडिया यूरोप और अमेरिका जाने के लिए लंबा मार्ग अपनाकर उड़ानें संचालित कर रही है। विमानन नियामक डीजीसीए ने पायलटों के उड़ान और कार्य समय-सीमा में अस्थायी ढील दी है, जो 30 अप्रैल तक लागू रहेगी।

    डीजीसीए ने इस छूट के तहत लंबी दूरी की उड़ानों में दो पायलटों के लिए उड़ान समय 11 घंटे 30 मिनट और कार्य अवधि 11 घंटे 45 मिनट तक बढ़ा दी है। इसके साथ ही, पायलटों के समय-सारणी में 30 मिनट की अतिरिक्त सुविधा की जरूरत को भी छूट दी गई है। सूत्रों ने बताया कि एयर इंडिया की जेद्दा उड़ान में कार्य अवधि 11 घंटे 55 मिनट है, जो अनुमत सीमा से 10 मिनट अधिक है।

    डीजीसीए ने स्पष्ट किया है कि उड़ान समय वह अवधि है जब विमान उड़ान भरने के लिए जमीन से उठकर सुरक्षित लैंडिंग तक चलता है। कार्य अवधि तब शुरू होती है जब पायलट अपनी ड्यूटी पर रिपोर्ट करता है और तब खत्म होती है जब वह अंतिम उड़ान के इंजन बंद होने के बाद अपनी ड्यूटी समाप्त करता है। पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कई एयरलाइंस ने अपनी उड़ानों में कटौती की है। डीजीसीए ने कहा कि यह छूट पायलटों की सुरक्षा और थकान को ध्यान में रखकर दी गई है, ताकि लंबा मार्ग अपनाने के बावजूद उड़ान संचालन सुरक्षित रूप से किया जा सके।

  • ईरान युद्ध : ऑस्ट्रेलिया ने महिला फुटबॉल टीम की 5 खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण दी

    ईरान युद्ध : ऑस्ट्रेलिया ने महिला फुटबॉल टीम की 5 खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण दी

    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असरखेल जगत तक पहुँच गया है। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने ईरान की महिला फुटबॉल टीम की पांच खिलाड़ियों को मानवीय आधार पर शरण दे दी है। ये खिलाड़ी एशियाई टूर्नामेंट खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया आई थीं। युद्ध के बीच ईरान लौटने पर उन्हें सत्ता और सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई का डर था।

    ऑस्ट्रेलियाई गृह मामलों के मंत्री Tony Burke ने बताया कि मंगलवार तड़के ऑस्ट्रेलियाई संघीय पुलिस ने खिलाड़ियों को गोल्ड कोस्ट स्थित होटल से सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। वहां उनकी मुलाकात की गई और मानवीय वीजा की प्रक्रिया पूरी की गई। सरकार का कहना है कि यह फैसला मानवीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया, क्योंकि ईरान इस समय युद्ध की स्थिति से गुजर रहा है।

    खिलाड़ियों को शरण क्यों दी गई?
    ईरान की महिला फुटबॉल टीम पिछले महीने महिला एशियन कप खेलने के लिए ऑस्ट्रेलिया पहुंची थी। टूर्नामेंट खत्म होने के बाद टीम को ईरान लौटना था, लेकिन इस दौरान अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध तेज हो गया। लगातार हमलों और असुरक्षा के माहौल ने खिलाड़ियों के भविष्य को संकट में डाल दिया। इसी कारण ऑस्ट्रेलिया ने पांच खिलाड़ियों को सुरक्षित रखने का निर्णय लिया।

    अमेरिकी प्रतिक्रिया
    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को ईरान वापस भेजना मानवीय गलती होगी। ट्रंप ने ऑस्ट्रेलिया से अपील की कि उन्हें शरण दी जाए, और यदि ऐसा नहीं होता तो अमेरिका उन्हें अपने देश में आश्रय देने को तैयार है।

    परिवारों की सुरक्षा भी चिंता का विषय
    कुछ खिलाड़ी अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर वापस ईरान लौटने की इच्छा भी जताना चाहती थीं। ट्रंप ने कहा कि कई खिलाड़ियों को डर था कि अगर वे वापस नहीं लौटतीं तो उनके परिवारों को नुकसान पहुंच सकता है।

    टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों का रवैया
    महिला एशियन कप के दौरान ईरानी खिलाड़ियों की स्थिति भी चर्चा में रही। दक्षिण कोरिया के खिलाफ पहले मैच में राष्ट्रीय गान के दौरान टीम ने शुरुआत में चुप्पी साधी। इसे विरोध या शोक की अभिव्यक्ति के रूप में देखा गया। बाद के मैचों में खिलाड़ियों ने गान गाया और सलामी दी। टीम की फॉरवर्ड Sara Didar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपने देश और परिवार के लिए अपनी चिंता जाहिर की।
    इस कदम से साफ है कि युद्ध का असर खेल जगत पर भी गहरा पड़ रहा है, और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी मानवीय कदम उठाए जा रहे हैं।