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  • हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…

    हरी सब्जियों को खाएं सही तरीके से, बुजुर्ग और बच्चों के लिए विशेष सलाह…


    नई दिल्ली: हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती हैं। आयुर्वेद में भी हरी पत्तेदार सब्जियों को खाने का सही तरीका बताया गया है, ताकि पाचन ठीक रहे और शरीर को पूरा पोषण मिल सके।

    हालांकि आजकल सैंडविच, सलाद और नूडल्स में कच्ची सब्जियों का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कई हरी सब्जियां कच्ची खाने से पाचन में समस्या हो सकती है और वात दोष बढ़ा सकती हैं।

    कैसे खाएं हरी सब्जियां:

    पालक, शिमला मिर्च और गोभी जैसी हरी सब्जियों को कच्चा खाने से बचें। इनमें परजीवी टेपवर्म होने का खतरा रहता है।

    सब्जियों को पहले उबालें, फिर अतिरिक्त पानी निचोड़कर घी या तेल में हल्का भूनकर पकाएं।

    बुजुर्ग और बच्चों को हरी सब्जियों का सेवन कम मात्रा में दें।

    आयुर्वेद में बुजुर्गों और बच्चों के पाचन को ध्यान में रखते हुए कुछ सब्जियों को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है। इनमें तोरई, टिंडा, लौकी, परवल और कुंदरू शामिल हैं। ये हरी सब्जियों जितनी ही पौष्टिक होती हैं और पचाने में हल्की होती हैं। यदि बच्चे इन सब्जियों को कम पसंद करें, तो इन्हें आटे में मिलाकर पराठा या मीठे के रूप में दिया जा सकता है।

    सही मात्रा और सही तरीके से हरी सब्जियों का सेवन करने से पाचन बेहतर रहता है, प्रतिरक्षा मजबूत होती है और हृदय स्वास्थ्य भी अच्छा बना रहता है।

  • जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'

    जयपुर के खेतों में फैक्ट्री का जहर, मिट्टी हो रही काली, सब्जियां बन गईं 'स्लो पॉइजन'


    जयपुर । जयपुर(Jaipur) में फैक्ट्रियों से निकल रहा केमिकल (Chemical)और ब्लीच मिला पानी लोगों की सेहत के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है. सवाल यह है कि जो हरी सब्जियां(green vegetables) और फल लोग सेहत के लिए खाते हैं, क्या वे सच में उन्हें स्वस्थ बना रहे हैं या धीरे-धीरे बीमार कर रहे हैं.

    अगर इन सब्जियों और फलों की खेती ऐसे पानी से हो रही हो, जिसमें फैक्ट्रियों का जहरीला कचरा और रसायन मिले हों, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ता है. ऐसा पानी किडनी फेल होने, दिल की बीमारियों और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है.

    स्लो पॉइजन का काम कर रही सब्जियां
    जयपुर के सांगानेर इलाके में सांगानेर से चांदलई तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में दो दर्जन से ज्यादा गांव आते हैं. यहां कपड़ों की रंगाई, छपाई और ब्लीच का काम करने वाली फैक्ट्रियां आसपास के जल स्रोतों में केमिकल और ब्लीच वाला पानी छोड़ रही हैं. इससे पूरे इलाके में भारी प्रदूषण फैल गया है. जानकारी के मुताबिक, इस दूषित पानी से उगाई गई फसलें धीमे जहर की तरह काम कर रही हैं, जो समय के साथ गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती हैं.

    काली हो चुकी है खेतों की मिट्टी
    मीडिया की टीम जब जयपुर की सांगानेर तहसील के शिकारपुरा और मुहाना समेत कई इलाकों में पहुंची, तो वहां काले रंग का पानी खेतों में पंप किया जा रहा था. इन खेतों में पत्तागोभी, बैंगन, पालक और लगभग हर तरह की मौसमी सब्जियों की खेती हो रही थी. कई जगहों पर इस गंदे पानी की वजह से मिट्टी का रंग भी ग्रे और काला हो चुका है. किसान सीताराम का कहना है कि इससे खाने वाली सभी फसलों को नुकसान हो रहा है, लेकिन जांच के लिए अब तक कोई अधिकारी नहीं आया है.

    ‘कई साल से छोड़ा जा रहा पानी, कोई कार्रवाई नहीं’
    जानकारी यह भी है कि कुछ फैक्ट्रियों में गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था जरूर है, लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियां बिना किसी सफाई के केमिकल और रंग मिला पानी सीधे नालों और जल स्रोतों में छोड़ रही हैं. इसका असर सीधे खेतों और फसलों पर पड़ रहा है.

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सालों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी इन खेतों में छोड़ा जा रहा है, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. एक फैक्ट्री कर्मचारी सिकंदर का दावा है कि उनके यहां गंदे पानी को साफ करने की व्यवस्था है और फिल्टर के बाद ही पानी बाहर छोड़ा जाता है. हालांकि, जमीनी हालात कुछ और ही कहानी बयान कर रहे हैं.