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  • भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता खानचंद सिंह का कैंसर से निधन

    भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह पर टूटा दुखों का पहाड़, पिता खानचंद सिंह का कैंसर से निधन


    नई दिल्ली। आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 के दौरान भारतीय क्रिकेट जगत से एक भावुक खबर सामने आई है। भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का शुक्रवार 27 फरवरी 2026 तड़के निधन हो गया। वह लंबे समय से स्टेज-4 लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। परिवार के सूत्रों ने उनके निधन की पुष्टि की है।

    58 वर्षीय खानचंद सिंह पिछले काफी समय से गंभीर रूप से बीमार थे। अस्पताल के प्रवक्ता डॉ. सुनील कुमार के अनुसार उनकी तबीयत हाल के दिनों में काफी बिगड़ गई थी और 21 फरवरी से उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था। शुक्रवार तड़के उन्होंने अंतिम सांस ली।

    पिता की गंभीर हालत की सूचना मिलने पर रिंकू सिंह को टी20 विश्व कप बीच में छोड़कर लौटना पड़ा था। हालांकि 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले से पहले वह चेन्नई में टीम से दोबारा जुड़ गए थे लेकिन उन्हें प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं मिली। रिंकू सिंह के पूर्व कोच मसूद अमिनी ने अलीगढ़ से मीडिया को बताया कि खानचंद सिंह पिछले कुछ समय से लिवर कैंसर से संघर्ष कर रहे थे और अंतिम दिनों में उनकी हालत नाजुक बनी हुई थी।

    गौरतलब है कि अलीगढ़ उत्तर प्रदेश के रहने वाले रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता की अहम भूमिका रही। खानचंद सिंह गैस सिलेंडर आपूर्ति का काम करते थे और सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने परिवार का पालन-पोषण किया। शुरुआत में वह बेटे के क्रिकेट खेलने के पक्ष में नहीं थे लेकिन जब रिंकू को शानदार प्रदर्शन पर मोटरसाइकिल इनाम में मिली तो उन्होंने बेटे का पूरा समर्थन करना शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने तमाम अभावों के बावजूद रिंकू के क्रिकेट करियर को आगे बढ़ाने में हरसंभव सहयोग दिया।

    परिवार के अनुसार खानचंद सिंह का अंतिम संस्कार अलीगढ़ में किया जाएगा। रिंकू सिंह भी अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए चेन्नई से लौट रहे हैं। आईसीसी टी20 विश्व कप 2026 में 1 मार्च को कोलकाता में भारत का मुकाबला वेस्टइंडीज से होना है जो टीम इंडिया के लिए करो या मरो जैसा अहम मैच माना जा रहा है। वेस्टइंडीज को हराने पर भारत सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। हालांकि पिता के निधन के चलते इस मुकाबले में भी रिंकू सिंह की उपलब्धता को लेकर संशय बना हुआ है।

  • प्रयागराज संगम में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन, बेटे जय पवार ने दी भावुक विदाई

    प्रयागराज संगम में पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का विसर्जन, बेटे जय पवार ने दी भावुक विदाई


    मुंबई/प्रयागराज। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का रविवार को प्रयागराज के पवित्र संगम तट पर विधि-विधान के साथ विसर्जन किया गया। इस दौरान उनके बेटे जय पवार ने पूरे धार्मिक अनुष्ठान के साथ अस्थि कलश को मां गंगा में प्रवाहित किया। अंतिम विदाई के इस भावुक क्षण में परिवार के सदस्य, पार्टी कार्यकर्ता और मौजूद लोग गमगीन नजर आए और नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी।

    अस्थि विसर्जन के लिए अजित पवार का परिवार चार्टर्ड फ्लाइट से बारामती से प्रयागराज पहुंचा। रविवार सुबह करीब 11 बजे उनका परिवार प्रयागराज एयरपोर्ट पर उतरा, जहां से वे सीधे संगम की ओर रवाना हुए। एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय एक भावुक दृश्य देखने को मिला, जब उनके बेटे जय पवार नंगे पैर अस्थि कलश लेकर बाहर आए। वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और माहौल शोक में डूबा नजर आया।

    परिवार एयरपोर्ट से संगम तक लंबे काफिले के साथ पहुंचा। संगम के वीआईपी घाट पर पुरोहितों की उपस्थिति में पूरे विधि-विधान से पूजा-अनुष्ठान कराया गया। इस दौरान शोक संतप्त लोगों ने अजित पवार को श्रद्धापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की और मां गंगा से उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। अस्थि विसर्जन के समय परिवार के सदस्य और समर्थक भावुक नजर आए।

    अजित पवार की याद में एनसीपी की युवा इकाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा के नेतृत्व में कश्मीर से कन्याकुमारी तक अस्थि कलश यात्रा भी निकाली गई थी। यह यात्रा 12 राज्यों से होकर गुजरी और रविवार, 8 फरवरी 2026 को प्रयागराज संगम में आकर इसका समापन हुआ। इस दौरान भी बड़ी संख्या में लोग श्रद्धांजलि देने पहुंचे और अंतिम संस्कार की परंपराओं का पालन किया गया। बेटे जय पवार और परिवार के अन्य सदस्य इस मौके पर मौजूद रहे।

    गौरतलब है कि अजित पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती में एक विमान हादसे में निधन हो गया था। इस हादसे में उनके साथ चार अन्य लोगों की भी जान चली गई थी। अगले दिन 29 जनवरी को उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बारामती के विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में किया गया था, जहां बड़ी संख्या में राजनीतिक नेताओं, समर्थकों और आम लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी थी।

    संगम में अस्थि विसर्जन के साथ ही उनकी अंतिम धार्मिक रस्म पूरी हुई। इस मौके पर उपस्थित लोगों ने उन्हें याद करते हुए कहा कि अजित पवार ने अपने राजनीतिक जीवन में जनता की सेवा को सर्वोपरि रखा और प्रदेश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रयागराज के पवित्र संगम पर की गई यह अंतिम विदाई उनके जीवन की यात्रा का एक भावुक और श्रद्धापूर्ण समापन बन गई।