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  • मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम

    मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम


    नई दिल्ली ।
    बारिश का मौसम शुरू होते ही सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और ऐसे में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए वाहन की तकनीकी स्थिति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। अधिकांश चालक इस दौरान वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच तो कराते हैं, लेकिन टायर प्रेशर की अनदेखी कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही टायर प्रेशर वाहन की ग्रिप, ब्रेकिंग क्षमता और सड़क पर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए मानसून के दौरान टायर में हवा का स्तर हमेशा निर्माता कंपनी की सिफारिश के अनुरूप ही होना चाहिए।

    हर वाहन के लिए टायर प्रेशर अलग-अलग निर्धारित किया जाता है। इसकी जानकारी आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे पर लगे स्टिकर या वाहन के ओनर मैनुअल में उपलब्ध रहती है। मौसम बदलने के कारण अपनी ओर से टायर में हवा कम या ज्यादा करना उचित नहीं माना जाता। वाहन निर्माता जिस प्रेशर की सलाह देते हैं, उसी का पालन करने से टायर का सड़क से संपर्क संतुलित बना रहता है और वाहन की पकड़ बेहतर रहती है।

    यदि टायर में आवश्यकता से अधिक हवा भर दी जाए तो उसका सड़क से संपर्क क्षेत्र कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गीली सड़क पर टायर की ग्रिप कमजोर पड़ सकती है। तेज गति में अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन के फिसलने की आशंका बढ़ जाती है। अधिक हवा होने से बारिश के दौरान नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो सकता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    दूसरी ओर, कई लोगों का मानना है कि बारिश में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ बेहतर होती है। हालांकि विशेषज्ञ इस धारणा को सही नहीं मानते। कम हवा होने पर टायर का घिसाव तेजी से बढ़ सकता है, ईंधन की खपत अधिक हो सकती है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टायर का तापमान भी सामान्य से अधिक बढ़ सकता है। इससे टायर की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ उसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    मानसून के दौरान केवल टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि टायर की स्थिति की नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि टायर का ट्रेड काफी घिस चुका हो या उसकी ग्रिप कमजोर हो गई हो, तो समय रहते उसे बदल देना चाहिए। घिसे हुए टायर गीली सड़क पर पानी को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते, जिससे वाहन के फिसलने का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महीने में कम से कम एक बार टायर प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि लंबी यात्रा पर जाना हो तो प्रस्थान से पहले टायर की हवा, ट्रेड की गहराई और किसी भी प्रकार की क्षति की जांच कर लेना बेहतर होता है। साथ ही स्पेयर टायर की स्थिति भी देखनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में परेशानी न हो।

    बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग केवल सावधानी से वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन के रखरखाव पर भी समान रूप से निर्भर करती है। सही टायर प्रेशर, अच्छी ग्रिप वाले टायर और नियमित निरीक्षण न केवल वाहन के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान टायरों की नियमित देखभाल को अपनी ड्राइविंग आदत का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

  • स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    स्लीपर बस या चलता-फिरता खतरा? सैकड़ों मौतों के बाद सरकार ने कसे शिकंजे

    नई दिल्ली। पिछले छह महीनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में स्लीपर कोच बसों से जुड़े भीषण सड़क हादसों और आग की घटनाओं ने परिवहन व्यवस्था की खामियों को उजागर कर दिया। इन दुर्घटनाओं में अब तक करीब 145 यात्रियों की जान जा चुकी है। खासतौर पर रात के समय लंबी दूरी की यात्रा करने वाली स्लीपर बसों में आग लगने और आपात निकास की कमी के चलते जान-माल का भारी नुकसान हुआ। बढ़ते हादसों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार ने स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला किया है।
    मान्यता प्राप्त कंपनियां ही बनाएंगी स्लीपर बस
    केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नए नियमों की घोषणा करते हुए कहा कि अब स्लीपर कोच बसों का निर्माण केवल वही ऑटोमोबाइल कंपनियां या बॉडी बिल्डर्स कर सकेंगे, जिन्हें केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त होगी। स्थानीय और मैनुअल बॉडी बिल्डर्स को स्लीपर बस बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे निर्माण गुणवत्ता में सुधार होगा और सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा।
    मौजूदा बसों में भी अनिवार्य होंगे नए सेफ्टी फीचर्स
    सरकार ने केवल नई बसों ही नहीं, बल्कि सड़कों पर चल रही सभी मौजूदा स्लीपर बसों में भी अतिरिक्त सुरक्षा उपकरण लगाना अनिवार्य कर दिया है। इनमें फायर डिटेक्शन सिस्टम, इमरजेंसी लाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट, सेफ्टी हैमर, ड्राइवर की नींद का अलर्ट देने वाला सिस्टम और एडवांस ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (ADAS) शामिल हैं। इन सुविधाओं से आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचाने में मदद मिलेगी।
    AIS-052 बस बॉडी कोड का पालन जरूरी
    नए नियमों के तहत सभी स्लीपर बसों को AIS-052 बस बॉडी कोड और संशोधित बस बॉडी कोड का पालन करना अनिवार्य होगा। यह संशोधित कोड 1 सितंबर 2025 से प्रभावी हो चुका है। बिना इस मानक को पूरा किए किसी भी स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन या संचालन संभव नहीं होगा। जो बसें इन नियमों का पालन नहीं करेंगी, उन्हें सड़कों से हटाया जा सकता है।
    यात्रियों की सुरक्षा होगी मजबूत
    AIS-052 भारत का आधिकारिक बस बॉडी सेफ्टी और डिजाइन मानक है, जिसमें बस की संरचना, निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा से जुड़े जरूरी प्रावधान तय किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों का मकसद भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों को रोकना और स्लीपर कोच सेवाओं को सुरक्षित, भरोसेमंद और आधुनिक बनाना है। नए नियमों से न सिर्फ यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि देश में सड़क सुरक्षा को भी नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
  • शीतलहर की चपेट में पूरा उत्तर भारत, 600 उड़ानें रद्द…. देरी से चल रहीं 100 से ज्यादा ट्रेनें

    शीतलहर की चपेट में पूरा उत्तर भारत, 600 उड़ानें रद्द…. देरी से चल रहीं 100 से ज्यादा ट्रेनें


    नई दिल्ली।
    पूरे उत्तर भारत (North India) में भीषण शीतलहर (Severe Cold wave) जारी है। घने कोहरे (Fog) का असर यातायात संसाधनों पर भी देखने को मिला है। भीषण कोहरे के चलते 600 उड़ानें प्रभावित हुईं और 100 से अधिक ट्रेनें लेट (100 trains delayed) हुई हैं। इंडिगो ने सोमवार को खराब मौसम और ऑपरेशनल कारणों के चलते 118 उड़ानें रद्द (118 Indigo flights cancelled) कर दीं। इनमें से छह उड़ानें ऑपरेशनल कारणों के चलते रद्द की गईं, जबकि बाकी अलग-अलग हवाईअड्डे पर खराब मौसम की वजह से कैंसिल हुई हैं। मौसम विभाग के अनुसार, कुछ जगहों पर मंगलवार को दिन के तापमान में सामान्य से 4-5 डिग्री की गिरावट हो सकती है।


    दिल्ली हवाईअड्डे पर 128 उड़ानें रद्द

    घने कोहरे के कारण अकेले दिल्ली हवाईअड्डे पर 128 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जिनमें आगमन और प्रस्थान की 64-64 उड़ानें शामिल थीं। आठ उड़ानों को दूसरे शहरों में डायवर्ट करना पड़ा। लगभग 470 उड़ानें विलंबित हुईं। इनमें प्रत्येक उड़ान के प्रस्थान में औसतन 24 मिनट की देरी हुई।

    इंडिगो एयरलाइन ने कहा खराब मौसम के कारण उसे अपने नेटवर्क में 80 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं, इनमें से लगभग आधी दिल्ली हवाईअड्डे से थीं। इंडिगो की वेबसाइट के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू, कोच्चि, हैदराबाद, कोलकाता, अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर, देहरादून, इंदौर, पटना और भोपाल समेत कई जगहों पर उड़ान सेवाएं रद्द की गई हैं। एयरलाइन ने सुबह 11.20 बजे एक यात्रा सलाह में कहा, दिल्ली और उत्तरी भारत के कई हवाई अड्डों पर कोहरे की स्थिति बनी हुई है और दृश्यता में अभी पूरी तरह से सुधार नहीं हुआ है।

    इसे अलावा पंजाब के अमृतसर, आदमपुर, हलवारा, पठानकोट, चंडीगढ़ एयरफोर्स स्टेशन, सहरानपुर और आगरा में एयरफोर्स स्टेशन और मध्य प्रदेश के ग्वालियर में कई क्षेत्रों में दृश्यता शून्य मीटर रही। जिसका असर उड़ानों पर देखने को मिला। इससे पहले 25 दिसंबर को इंडिगो ने मौसम की स्थिति का हवाला देते हुए कई हवाई अड्डों के लिए 67 उड़ानें रद्द कर दी थीं, जबकि शनिवार को उसने खराब मौसम का हवाला देते हुए कई एयरपोर्ट से 57 और उड़ानें रद्द की थीं।


    इंडिगो की 118 उड़ानें रद्द

    इंडिगो ने सोमवार को खराब मौसम और परिचालन कारणों से 118 उड़ानें रद्द कर दी। इंडिगो की वेबसाइट से यह जानकारी मिली। वेबसाइट से मिली जानकारी के मुताबिक, इनमें से छह उड़ान सेवाएं परिचालन कारणों से रद्द की गईं जबकि बाकी विभिन्न हवाई अड्डों पर खराब मौसम की स्थिति के कारण रद्द कर दी गईं। इंडिगो की वेबसाइट के अनुसार, मुंबई, बेंगलुरु, कोचिन, हैदराबाद, कोलकाता, अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर, देहरादून, इंदौर, पटना और भोपाल जैसे अन्य हवाई अड्डों से आने-जाने वाली उड़ानें भी रद्द की गई हैं। इंडिगो की वेबसाइट के मुताबिक, इन 80 फ्लाइट्स में से आधी दिल्ली एयरपोर्ट से कैंसिल की गईं और बाकी में मुंबई, बेंगलुरु, कोचीन, हैदराबाद, कोलकाता, अमृतसर, चंडीगढ़, जयपुर, देहरादून, इंदौर, पटना और भोपाल जैसे एयरपोर्ट से आने-जाने वाली फ्लाइट्स शामिल थीं।


    रेल सेवाएं बुरी तरह प्रभावित

    साल के आखिरी सप्ताह में पड़ रहे घने कोहरे के कारण ट्रेनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। तेजस से राजधानी एक्सप्रेस तक देर से चल रही हैं। यह देरी 16-16 घंटों तक की हो रही है। आनंद विहार सैरंग राजधानी एक्सप्रेस 12.30 घंटे लेट चल रही थी। नई दिल्ली राजेंद्र नगर तेजस राजधानी एक्सप्रेस 15.30 घंटे, नई दिल्ली हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस 16 घंटे और नई दिल्ली सियालदह राजधानी 16 घंटे 30 मिनट की देरी से चल रही थीं। संपूर्ण क्रांति, मगध एक्सप्रेस, पुरुषोत्तम एक्सप्रेस, ब्रह्मपुत्र मेल और अमृत भारत जैसी ट्रेनों का भी यही हाल है। 100 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। ट्रेनें औसतन 8-10 घंटे की देरी से चल रही हैं। आम यात्रियों को सर्दी में परेशानी झेलनी पड़ी।

    10 फरवरी तक के लिए अलर्ट
    विमानन नियामक, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने 10 दिसंबर से 10 फरवरी के बीच की अवधि को इस सर्दी में आधिकारिक कोहरे की अवधि घोषित किया है।दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड (डीआईएएल) ने सोमवार सुबह जारी यात्री परामर्श में कहा, लगातार घने कोहरे के कारण, उड़ान संचालन श्रेणी तीन के अंतर्गत बना हुआ है, जिसके परिणामस्वरूप उड़ानों में देरी हो सकती है। हम आपसे अनुरोध करते हैं कि नवीनतम उड़ान जानकारी के लिए आप अपनी संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें या हमारी वेबसाइट देखें। श्रेणी-तीन एक उन्नत नेविगेशन प्रणाली है जो विमान को कोहरे की स्थिति में उतरने में सक्षम बनाती है।

    भीषण ठंड से कांपा उत्तर भारत, अलर्ट जारी
    दिल्ली में इस बार नए साल पर भी मौसम खराब रह सकता है। हिमालयी क्षेत्रों में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है। इस वजह से दिल्ली में 31 दिसंबर को बादल छाऐंगे और एक जनवरी को हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में अगले तीन दिनों यानी 31 दिसंबर तक घना कोहरा पड़ने के आसार हैं।

    भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, जम्मू मंडल, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ के कुछ हिस्सों में रविवार रात से सोमवार सुबह तक अत्यधिक घना कोहरा छाया रहा। वहीं पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में सोमवार को कई जगह घना से अधिक घना कोहरा रहा और लोग ठंड से कांपते नजर आए। ऐसा ही मौसम मंगलवार को भी रहने के आसार हैं और संभाग में कई जगह शीत दिवस की चेतावनी भी जारी की गई है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को दिन के तापमान में सामान्य से 4-5 डिग्री की गिरावट के आसार हैं। कई जिलों में घने कोहरे के साथ शीत दिवस की चेतावनी भी जारी की गई है।