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  • घुड़चढ़ी की रस्म का क्या है महत्व? शौर्य, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    घुड़चढ़ी की रस्म का क्या है महत्व? शौर्य, जिम्मेदारी और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी अनोखी मान्यताएं

    नई दिल्ली । भारतीय विवाह समारोहों में दूल्हे का घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर पहुंचना सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। घुड़चढ़ी की यह रस्म आज भी अधिकांश क्षेत्रों में पूरे उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जाती है। समय के साथ विवाह के तौर-तरीकों में कई बदलाव आए हैं, लेकिन दूल्हे की घोड़ी पर सवारी आज भी भारतीय शादियों की सबसे प्रमुख रस्मों में शामिल है। इस परंपरा के पीछे सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक मान्यताओं का विशेष महत्व माना जाता है।

    भारतीय समाज में घोड़ा और विशेष रूप से घुड़सवारी लंबे समय तक शौर्य, सम्मान और नेतृत्व का प्रतीक रहे हैं। प्राचीन काल में राजा, योद्धा और सेनापति घोड़े पर यात्रा करते थे। इसी कारण विवाह के अवसर पर दूल्हे का घोड़ी पर बैठकर आना इस बात का प्रतीक माना गया कि वह अब परिवार की नई जिम्मेदारियां संभालने के लिए तैयार है। विवाह केवल दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का सामाजिक और सांस्कृतिक मिलन माना जाता है, इसलिए इस रस्म को सम्मानजनक स्थान मिला।

    घुड़चढ़ी को लेकर कई पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे दूल्हे के आत्मविश्वास, संयम और सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रतीक मानते हैं। वहीं, कई सांस्कृतिक व्याख्याओं के अनुसार यह रस्म विवाह से पहले दूल्हे के धैर्य और जिम्मेदारी का प्रतीकात्मक प्रदर्शन मानी जाती रही है। हालांकि इन मान्यताओं को ऐतिहासिक परंपराओं के रूप में देखा जाता है और इनके समर्थन में ठोस वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।

    घोड़ी के चयन को लेकर भी अलग-अलग मान्यताएं मिलती हैं। लोक परंपराओं में माना जाता है कि घोड़ी अपेक्षाकृत शांत और नियंत्रित स्वभाव की होती है, इसलिए विवाह जैसे सार्वजनिक आयोजन में उसका उपयोग अधिक उपयुक्त माना गया। कुछ सांस्कृतिक व्याख्याएं इसे संवेदनशीलता और संतुलित व्यवहार का प्रतीक भी बताती हैं। हालांकि यह कहना कि घोड़ी का चयन किसी निश्चित वैज्ञानिक कारण से किया गया था, उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों से स्पष्ट रूप से सिद्ध नहीं होता।

    इतिहासकारों का मानना है कि पुराने समय में बारातें लंबी दूरी तय करके दूसरे गांव या नगर पहुंचती थीं। उस दौर में यात्रा अपेक्षाकृत कठिन और जोखिमपूर्ण होती थी। ऐसे में घोड़े या घोड़ी पर सवारी व्यावहारिक आवश्यकता भी थी। समय बीतने के साथ यह आवश्यकता धीरे-धीरे एक सांस्कृतिक परंपरा और विवाह की पहचान बन गई। आज परिवहन के आधुनिक साधन उपलब्ध होने के बावजूद घुड़चढ़ी की रस्म अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए हुए है।

    आधुनिक समय में इस परंपरा का स्वरूप पहले की तुलना में काफी बदल चुका है। कई स्थानों पर दूल्हा घोड़ी के बजाय बग्घी, विंटेज कार या अन्य वाहनों से भी विवाह स्थल तक पहुंचता है। फिर भी पारंपरिक परिवारों में घुड़चढ़ी को शुभ माना जाता है और इसे विवाह संस्कार का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाता है। यह रस्म भारतीय समाज की उन सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है, जो पीढ़ियों से चली आ रही हैं और आज भी उत्सव, सम्मान तथा सामाजिक एकता का संदेश देती हैं। इसलिए घुड़चढ़ी को केवल एक औपचारिक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय विवाह संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत और प्रतीकात्मक परंपरा के रूप में देखा जाता है।

  • MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया

    MP: उज्जैन के इस गांव में दुल्हे ने पेश की मिसाल…. 50 लाख का दहेज लौटाया


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन जिले (Ujjain district) में बड़नगर तहसील (Badnagar tehsil) के ग्राम बंगरेड (Bangred village) में आयोजित एक तिलक समारोह ने दहेज प्रथा के खिलाफ एक संदेश दिया है. कई बार देखने को मिलता है कि दहेज के लालच में शादी टूट जाती है. लेकिन बंगरेड में एक परिवार ने दहेज न लेकर समाज के सामने मिसाल पेश की है. परिवार ने करीब 50 लाख रुपए का दहेज लौटा दिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।


    दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से किया इनकार

    क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष जितेंद्र सिंह राजावत के पुत्र आदर्श दीप राजावत का विवाह इंदौर जिले के देपालपुर तहसील अंतर्गत तामलपुर निवासी किसान महेन्द्र सिंह पंवार की पुत्री बिंदिया कुमारी से आगामी नवंबर 2026 में तय हुआ है. जिसकी सगाई (तिलक) के दौरान दूल्हे पक्ष ने दहेज लेने से मना कर दिया।


    50 लाख का दहेज वधु पक्ष को किया वापस

    रविवार को बड़नगर तहसील के बंगरेड स्थित रिसोर्ट में तिलक समारोह कार्यक्रम हुआ. कार्यक्रम के दौरान जब वधु पक्ष द्वारा पारंपरिक रूप से 25 लाख रुपए नकद और 15 तोला सोना (कुल करीब 50 लाख रुपए) देने की प्रक्रिया शुरू की गई, तभी दूल्हे आदर्श दीप राजावत और उनके पिता जितेंद्र सिंह राजावत ने दहेज लेने से साफ इनकार कर दिया.


    लोगों ने बताया दहेज प्रथा के खिलाफ प्रेरणादायक पहल

    दूल्हे पक्ष ने बताया कि वे किसी भी प्रकार का दहेज स्वीकार नहीं करेंगे और केवल प्रतीकात्मक रूप में एक सोने की अंगूठी ही लेंगे. इसके बाद पूरे सम्मान के साथ नकद राशि और सोने के आभूषण वधु पक्ष को लौटा दिए गए. लोगों ने इसे दहेज प्रथा के खिलाफ एक बड़ी और प्रेरणादायक पहल बताया।

    जितेंद्र सिंह राजावत ने कहा, “समाज में दहेज जैसी कुरीतियां अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं, लेकिन यदि लोग आगे आकर पहल करें, तो बदलाव संभव है. कई गरीब परिवार बेटियों की शादी में दहेज के कारण परेशान होते हैं. इसलिए इस पहल से समाज में सकारात्मक सुधार की उम्मीद है।

    दूल्हे को चाहिए सुंदर दुल्हन और ससुर को बहु बिटिया
    उज्जैन में आधा करोड़ का दहेज लेने से मना करने वाले ससुर जीतेंद्र राजावत ने कहा कि “उन्हे एक बहु और उसके साथ आने वाले धन दौलत की जरुरत नहीं है. ईश्वर ने उन्हे बहुत कुछ दिया है. उन्हे तो घर में एक बिटिया चाहिए तो पुत्रवधु के रुप में मिल रही है.” तिलक समारोह के बाद रिंग सेरेमनी में वर पक्ष ने बहु पक्ष की ओर से सिर्फ एक गोल्ड रिंग स्वीकारा. यह शादी नवंबर महीने में होनी है और इससे पहले ससुर की ओर से सिर्फ मजबूत रिश्ते की डिमांड की गई है जिससे दो परिवार एक साथ जुड़ जाएं।

  • MP: रतलाम पहुंची थी बारात तभी उज्जैन पुलिस का फोन आया… दूल्हे पर दुष्कर्म का केस… मौका पाकर हुआ फरार

    MP: रतलाम पहुंची थी बारात तभी उज्जैन पुलिस का फोन आया… दूल्हे पर दुष्कर्म का केस… मौका पाकर हुआ फरार


    उज्जैन।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के रतलाम जिले (Ratlam district) में उस दौरान हड़कंप मच गया जब उज्जैन जिले (Ujjain district) की बड़नगर पुलिस ने दुल्हन पक्ष से संपर्क कर बताया कि दूल्हे के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। जानकारी लगते ही दुल्हन पक्ष के परिवार में माहौल खराब हो गया। वधू पक्ष को पुलिस ने समझा बूझाकर शादी की रस्म को रोकने के लिए तैयार किया, इस दौरान मौका पाकर दूल्हा फरार हो गया, मिली जानकारी के अनुसार बुधवार रतलाम में बड़नगर के एक युवक की शादी हो रही थी, बड़नगर से बारात पहुंच चुकी थी।

    दूल्हा मंडप में आने ही वाला था कि तभी दुल्हन पक्ष के परिवार को इसका पता चल गया। परिवार को पता चला कि जिस लड़के से लड़की की शादी होने वाली है, उस पर तो नाबालिग ने रेप का केस दर्ज कराया है। बताया जा रहा है कि इस मामले का पटाक्षेप करने में एक स्थानीय पार्षद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।


    जब वह घर पर अकेली थी

    पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पूरा मामला इस प्रकार है कि उज्जैन से करीब 60 किमी दूर बड़नगर थाना क्षेत्र के शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले युवक अभिषेक सेन के द्वारा 15 वर्षीय नाबालिग से जनवरी के माह में उस वक्त दुष्कर्म किया गया जब वह घर पर अकेली थी। इस दौरान उसे डरा धमका कर इस घटना को किसी को भी बताने के लिए धमकाया गया था। जब पिछले दिनों अभिषेक की शादी की खबर नाबालिग तक पहुंची तो उसने इस शादी का विरोध किया। लेकिन अभिषेक ने उसे डराते हुए अपनी शादी को नहीं रोका और बारात लेकर रतलाम पहुंच गया।

    इसी बीच 6 अप्रैल को नाबालिग के द्वारा इस घटनाक्रम से दुखी होकर आत्महत्या करने की नीयत से एसिड पीकर जान देने का प्रयास किया गया तो यह मामला सामने आया। बालिका को उपचार हेतु अस्पताल में भर्ती कराया गया और उसका मेडिकल कराने पर स्पष्ट हुआ कि पीड़िता गर्भवती भी है।


    पुलिस ने फोन पर दुल्हन पक्ष को समझाया

    उज्जैन से करीब 60 किमी दूर बड़नगर की शिक्षक कॉलोनी में रहने वाले अभिषेक सेन की शादी रतलाम जिले की युवती से तय थी, पिछले दो दिन से शादी के कार्यक्रम चल रहे थे और बुधवार रात करीब 8 बजे दूल्हा घोड़ी पर सवार होकर बारात लेकर निकल चुका था। बारात लगने से पहले पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर फोन पर दुल्हन पक्ष को समझाया। वधु पक्ष को सूचना मिलते ही शादी वाले घर में हड़कंप मच गया। दोनों पक्षों की बातचीत के बाद शादी रोक दी गई। नाबालिग पीड़िता ने पुलिस को दी शिकायत में बताया है कि आरोपी ने डरा-धमकाकर रेप किया। जिस दिन अभिषेक की शादी थी, उसी दिन पता चला कि पीड़िता प्रेग्नेंट है। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि 5 जनवरी को आरोपी उसके घर आया, जब वह अकेली थी। उसने धमकाकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने से मना किया। आरोपी की शादी तय होने के बाद उसने आत्महत्या का प्रयास किया।


    POCSO एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला दर्ज

    थाना प्रभारी अशोक पाटीदार के अनुसार, 15 वर्षीय नाबालिग की शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ POCSO एक्ट सहित दुष्कर्म का मामला दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि पीड़िता और आरोपी एक ही कॉलोनी में रहते हैं। दूल्हे की शादी के तीन दिन पहले पीड़िता ने 6 अप्रैल को एसिड पीकर आत्महत्या की कोशिश की थी।

    इलाज के दौरान 8 अप्रैल को उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। इसके बाद उसने परिजन को पूरी बात बताई।बालिका की शिकायत पर पुलिस ने पास्को एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है फिलहाल आरोपी फरार है उसे जल्द ही हिरासत में लिया जाएगा।