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  • वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, आईएमएफ ने 2026 और 2027 के लिए विकास दर अनुमान 7% किया

    वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत, आईएमएफ ने 2026 और 2027 के लिए विकास दर अनुमान 7% किया

    नई दिल्ली । दुनिया की अर्थव्यवस्था में सुस्ती की आशंकाओं, भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक वृद्धि मजबूत बनी हुई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के सख्त होने के बावजूद भारत प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बना हुआ है। घरेलू मांग, सार्वजनिक निवेश, डिजिटल बदलाव और नीतिगत प्रबंधन को इस मजबूती के प्रमुख आधारों में गिना गया है।

    रिपोर्ट में बताया गया है कि प्रमुख वैश्विक संस्थानों की ओर से भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के अनुमानों में संशोधन किया जाना देश की आर्थिक संभावनाओं को दर्शाता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने 2026 और 2027, दोनों वर्षों के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर सात प्रतिशत कर दिया है। इस अनुमान के आधार पर भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति बनाए रख सकता है।

    भारत की आर्थिक मजबूती का एक बड़ा कारण उसका विशाल और विविध घरेलू बाजार है। घरेलू उपभोग, निजी निवेश और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च मिलकर आर्थिक गतिविधियों को गति देते हैं। वैश्विक बाजारों में मांग कमजोर होने या अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में अस्थिरता बढ़ने पर घरेलू मांग अर्थव्यवस्था को सहारा प्रदान करती है। इससे बाहरी झटकों का प्रभाव सीमित करने में मदद मिलती है।

    निजी उपभोग का प्रभाव कई प्रमुख क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। ऑटोमोबाइल, आवास, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवाओं और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों को घरेलू मांग से समर्थन मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, बढ़ती आय, शहरीकरण, डिजिटल सेवाओं तक पहुंच और बेहतर कनेक्टिविटी लोगों की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन बदलावों से निवेश और नवाचार के लिए भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

    डिजिटल परिवर्तन भी भारत की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी सेवाओं ने लेन-देन को आसान बनाया है तथा लागत कम करने में मदद की है। डिजिटल माध्यमों के विस्तार से छोटे व्यवसायों को भी अपने स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर व्यापक ग्राहक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिला है। इससे व्यापारिक गतिविधियों में तकनीक की भूमिका मजबूत हुई है।

    बुनियादी ढांचे में निवेश को भी आर्थिक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण कारक बताया गया है। परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं से वस्तुओं तथा सेवाओं की आवाजाही बेहतर हो रही है। बेहतर संपर्क व्यवस्था से बाजारों तक पहुंच का विस्तार होता है और कारोबार की लागत घटाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही निर्यात में विविधता लाने, राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

    रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत का निर्यात एक ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकता है। वर्ष 2030 तक निर्यात को दो ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। विनिर्माण क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है। ये आंकड़े उत्पादन और बाहरी व्यापार के क्षेत्र में विस्तार की संभावनाओं की ओर संकेत करते हैं।

    कुल मिलाकर, भारत की आर्थिक स्थिति को घरेलू मांग, बुनियादी ढांचे के विकास, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नीतिगत प्रबंधन से समर्थन मिल रहा है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक सुस्ती, ऊर्जा बाजारों की अस्थिरता और व्यापारिक तनाव जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे माहौल में भारत की घरेलू आर्थिक बुनियाद और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने की क्षमता आने वाले वर्षों में उसकी विकास गति बनाए रखने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    भारत की आर्थिक प्रगति जश्न के काबिल, अगले वर्षों में भी सात प्रतिशत से अधिक विकास की उम्मीद

    नई दिल्ली । भारत की आर्थिक प्रगति को पिछले एक दशक की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए शीर्ष अर्थशास्त्री क्युंघून किम ने कहा है कि देश की लगातार मजबूत आर्थिक वृद्धि और बेहतर होती आर्थिक स्थिति भविष्य के लिए आशावाद का आधार प्रदान करती है। उनके अनुसार, भारत के सामने अभी कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके बावजूद देश ने आर्थिक विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि मध्यम अवधि में भी भारत के मजबूत विकास की संभावनाएं बनी हुई हैं और यह उपलब्धि सराहना के साथ जश्न मनाने योग्य है।

    क्युंघून किम ने सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विचारों में कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति को उसके आकार और आबादी के संदर्भ में समझना जरूरी है। करीब 1.4 अरब लोगों वाले देश के लिए लगातार मजबूत विकास दर हासिल करना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की क्षमता और आने वाले वर्षों में विकास की संभावनाएं सकारात्मक बनी हुई हैं।

    उनकी यह टिप्पणी भारत की आर्थिक वृद्धि को लेकर वैश्विक संस्थानों के बदले आकलन के बीच आई है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, एशियाई विकास बैंक और विश्व बैंक जैसे प्रमुख वैश्विक संस्थानों ने चालू वर्ष और अगले वर्ष के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के अनुमानों को बढ़ाकर सात प्रतिशत से अधिक कर दिया है। उनके अनुसार, विभिन्न संस्थानों के अनुमानों में हुआ यह बदलाव भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की संभावनाओं को दर्शाता है।

    किम ने कोविड-19 महामारी के बाद भारत की आर्थिक स्थिति में आए सुधार का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, महामारी के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था में 5.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि, इसके बाद अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की और वर्ष 2021 में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। इसके बाद अगले चार वर्षों तक विकास दर सात प्रतिशत से ऊपर बनी रही। इस प्रदर्शन को उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।

    अर्थशास्त्री ने कहा कि लगातार बेहतर होते आर्थिक आंकड़ों के कारण उन्हें और कई अन्य अर्थशास्त्रियों को अपनी विकास दर संबंधी भविष्यवाणियों में बार-बार संशोधन करना पड़ा। हर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़े उम्मीदों से बेहतर रहे। इसके परिणामस्वरूप भारत ने लगातार पांच वर्षों तक सात प्रतिशत से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर्ज की। उनके मुताबिक, यह प्रदर्शन वर्ष 2003 से 2007 के उस दौर की याद दिलाता है, जब भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ था।

    किम ने वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत की औसत वार्षिक विकास दर 7.83 प्रतिशत रहने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 के बाद किसी भी पांच वर्षीय अवधि में यह दूसरी सबसे ऊंची औसत वृद्धि दर है। इससे अधिक औसत वृद्धि केवल वर्ष 2003 से 2007 के दौरान दर्ज की गई थी, जब यह आंकड़ा 7.89 प्रतिशत रहा था। इस तुलना के जरिए उन्होंने भारत की हालिया आर्थिक वृद्धि के महत्व को रेखांकित किया।

    भारत की अर्थव्यवस्था के आकार में आए बदलाव को भी किम ने अहम बताया। उनके अनुसार, वर्ष 2007 में भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार एक ट्रिलियन डॉलर से थोड़ा अधिक था, जबकि अब यह चार ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही है। इसका अर्थ है कि आज समान विकास दर से होने वाला आर्थिक विस्तार दो दशक पहले की तुलना में कहीं बड़े पैमाने पर मूल्य सृजन करता है। किम ने कहा कि भारत की पिछले दशक की प्रगति और मध्यम अवधि में मजबूत विकास की संभावनाएं महत्वपूर्ण उपलब्धियां हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि देश के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं।

  • आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर अनुमान से भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा मजबूत, विशेषज्ञों ने खपत, निवेश और युवा आबादी को बताया बड़ी ताकत

    आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर अनुमान से भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा मजबूत, विशेषज्ञों ने खपत, निवेश और युवा आबादी को बताया बड़ी ताकत

    नई दिल्ली ।अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत रहने के अनुमान को अर्थशास्त्रियों और बाजार विशेषज्ञों ने देश की आर्थिक क्षमता पर वैश्विक भरोसे का संकेत बताया है। इस अनुमान के अनुसार, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश की विशाल आबादी, मजबूत घरेलू खपत, निवेश की संभावनाएं और सरकारी नीतियां आर्थिक विस्तार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

    अर्थशास्त्री विजय सरदाना के मुताबिक, 1.5 अरब से अधिक आबादी वाले भारत में विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उनका कहना है कि देश के मौजूदा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़े इसकी आर्थिक क्षमता को दर्शाते हैं। भारत का बाजार निवेश और कारोबार के लिए बड़े अवसर उपलब्ध कराता है। वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बदलाव के दौर में भी देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

    सरदाना ने घरेलू खपत को भारतीय अर्थव्यवस्था की प्रमुख ताकत बताया। उनके अनुसार, बड़ी आबादी की रोजमर्रा की जरूरतों पर होने वाला खर्च कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और तकनीक सहित विभिन्न क्षेत्रों की गतिविधियों को समर्थन देता है। उन्होंने कहा कि आईएमएफ का अनुमान आर्थिक विश्वास बढ़ाने में मदद कर सकता है, लेकिन केवल जीडीपी की वृद्धि से आम लोगों के जीवन में बदलाव सुनिश्चित नहीं होता। इसके लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना, निवेश आकर्षित करना और लोगों की आय में सुधार जरूरी है।

    अर्थशास्त्री और कर विशेषज्ञ सीए योगेंद्र कपूर का मानना है कि भारत में 7 प्रतिशत या इससे अधिक की विकास दर बनाए रखने की क्षमता है। उनके अनुसार, डिजिटलीकरण, बुनियादी ढांचे के विकास और आर्थिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का जोर निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर रहा है। आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगातार बढ़ोतरी को उन्होंने अर्थव्यवस्था के औपचारिक ढांचे की ओर बढ़ने का संकेत बताया। इससे विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत होने में भी मदद मिली है।

    हालांकि, कपूर ने महंगाई को अर्थव्यवस्था के सामने प्रमुख चुनौती बताया। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में विकास की गति बनाए रखने के लिए मुद्रास्फीति को नियंत्रित करना जरूरी होगा।

    बाजार विशेषज्ञ एपी शुक्ला ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं जैसी चुनौतियों के बावजूद अपनी विकास गति बनाए रखी है। उन्होंने सरकार की नीतियों, बेहतर कारोबारी माहौल और बढ़ते निजी निवेश को अर्थव्यवस्था के लिए सहायक बताया। शुक्ला के अनुसार, भारत की युवा आबादी भी वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने वाली प्रमुख ताकत है।

    अर्थव्यवस्था विशेषज्ञ विनोद रावल ने आईएमएफ के 7 प्रतिशत विकास दर के अनुमान को भारत के लिए सकारात्मक बताया। उन्होंने कहा कि 12 लाख रुपये तक की आय पर आयकर में राहत देने के फैसले से लोगों की खर्च करने की क्षमता बढ़ सकती है। उनके मुताबिक, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में हो रहा विकास भी भविष्य में अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचा सकता है। रावल ने पेट्रोल की कीमतों के पहले के स्तर पर लौटने की संभावना भी जताई, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। उन्होंने घरेलू मांग, सरकारी नीतियों और नई तकनीकों में विकास को आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण आधार बताया।

  • भारत की आर्थिक रफ्तार पर वैश्विक भरोसा बढ़ा, WEF ने 6.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताकर दिया बड़ा संकेत

    भारत की आर्थिक रफ्तार पर वैश्विक भरोसा बढ़ा, WEF ने 6.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान जताकर दिया बड़ा संकेत


    नई दिल्ली ।भारत वित्त वर्ष 2026-27 में 6.7 प्रतिशत की अनुमानित GDP वृद्धि के साथ दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे मजबूत विकास संभावनाओं वाले देशों में बना हुआ है। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की सितंबर 2026 की चीफ इकोनॉमिस्ट्स आउटलुक रिपोर्ट में भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे घरेलू मांग को प्रमुख आधार बताया गया है।

    रिपोर्ट में अमेरिका, यूरोप, चीन, जापान, भारत समेत दुनिया के 10 प्रमुख क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति का आकलन किया गया है। इसके लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र से जुड़े 92 मुख्य अर्थशास्त्रियों की राय ली गई।

    भारत को लेकर विशेषज्ञों का भरोसा मई की तुलना में बढ़ा है। सितंबर की रिपोर्ट में 74 प्रतिशत मुख्य अर्थशास्त्रियों ने भारत में मजबूत या बहुत मजबूत आर्थिक वृद्धि की उम्मीद जताई है। मई में यह आंकड़ा 52 प्रतिशत था। वहीं 98 प्रतिशत विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 12 महीनों में भारत की आर्थिक वृद्धि कम से कम मध्यम स्तर या उससे बेहतर रह सकती है।

    रिपोर्ट में रोजगार की स्थिति को लेकर अपेक्षाकृत स्थिर तस्वीर सामने आई है। करीब 70 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों को अगले एक वर्ष में बेरोजगारी दर में कोई बड़ा बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। हालांकि 17 प्रतिशत विशेषज्ञ बेरोजगारी बढ़ने और 13 प्रतिशत इसमें कमी आने का अनुमान लगा रहे हैं।

    आंकड़ों के मुताबिक, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग की बेरोजगारी दर जुलाई में 5.1 प्रतिशत थी, जो अगस्त में घटकर 5 प्रतिशत रह गई। इसी दौरान श्रम बल भागीदारी दर 55.4 प्रतिशत से बढ़कर 55.6 प्रतिशत हो गई।

    रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े मजबूत आर्थिक गतिविधियों के बीच श्रम बाजार के अपेक्षाकृत स्थिर रहने का संकेत देते हैं। हालांकि रोजगार के नए अवसर पैदा करने की गति बनाए रखना अभी भी महत्वपूर्ण माना गया है।

    महंगाई के मोर्चे पर भी विशेषज्ञों की चिंता मई के मुकाबले कम हुई है। अगले 12 महीनों को लेकर 55 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने मध्यम महंगाई की संभावना जताई है, जबकि 45 प्रतिशत ने उच्च महंगाई की आशंका व्यक्त की है। मई में 61 प्रतिशत विशेषज्ञ उच्च या बहुत उच्च महंगाई को लेकर चिंतित थे।

    अगस्त में CPI आधारित खुदरा महंगाई 4.8 प्रतिशत रही। यह भारतीय रिजर्व बैंक के 4 प्रतिशत के मध्यम अवधि लक्ष्य से ऊपर है, लेकिन 2 से 6 प्रतिशत के निर्धारित दायरे में बनी हुई है।

    मौद्रिक नीति को लेकर 67 प्रतिशत विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 12 महीनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। वहीं 24 प्रतिशत विशेषज्ञों ने नीति के और सख्त होने की संभावना जताई है। अगस्त में RBI ने नीतिगत दर 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखते हुए तटस्थ रुख कायम रखा था।

    राजकोषीय नीति को लेकर भी 72 प्रतिशत विशेषज्ञों ने बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई। करीब 22 प्रतिशत ने कुछ नरम रुख अपनाए जाने की संभावना व्यक्त की।

    रिपोर्ट का सर्वेक्षण 20 अगस्त को पूरा हुआ था। इसके बाद 31 अगस्त को जारी पहली तिमाही के GDP आंकड़ों में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई। इस प्रदर्शन के बाद कई वैश्विक संस्थानों ने भारत के विकास अनुमान में बदलाव किया है।

    मूडीज ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP वृद्धि का अनुमान 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। एजेंसी के मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष जैसी वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है।

  • बालों को लंबा और घना बनाने के लिए कौन सा तेल लगाएं? एक्सपर्ट ने बताए तीन खास हेयर ऑयल और उनके फायदे

    बालों को लंबा और घना बनाने के लिए कौन सा तेल लगाएं? एक्सपर्ट ने बताए तीन खास हेयर ऑयल और उनके फायदे

    नई दिल्ली । लंबे, घने और चमकदार बालों की चाहत में लोग कई तरह के हेयर केयर प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खे आजमाते हैं। बालों की देखभाल में तेल लगाना भी एक पुराना और आसान तरीका माना जाता है। हालांकि, बालों की समस्या के हिसाब से सही तेल का चुनाव करना जरूरी है, क्योंकि अलग-अलग तेल अलग जरूरतों के लिए उपयोगी हो सकते हैं।

    डर्मेटोलॉजिस्ट निरुपमा परवंदा ने बालों की देखभाल के लिए तीन तेलों के बारे में जानकारी दी है। इनमें नारियल तेल, रोजमेरी ऑयल और बादाम का तेल शामिल हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, इनका इस्तेमाल बालों की स्थिति और जरूरत को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।

    सबसे पहले नारियल तेल की बात करें तो यह खासतौर पर रूखे और फ्रिजी बालों के लिए उपयोगी माना जाता है। अगर बाल आसानी से उलझते हैं, उनमें नमी की कमी रहती है या वे काफी ड्राई दिखाई देते हैं, तो नारियल तेल मददगार हो सकता है। यह बालों में प्रोटीन लॉस को कम करने में सहायता करता है।

    नारियल तेल के इस्तेमाल से बालों में नमी बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इससे बालों का रूखापन और फ्रिजीनेस कुछ कम नजर आ सकती है। इसके साथ ही बाल अधिक मुलायम और चमकदार दिखाई दे सकते हैं। इसलिए ड्राई हेयर की समस्या वाले लोगों के लिए यह एक उपयोगी विकल्प हो सकता है।

    दूसरा विकल्प रोजमेरी ऑयल है। इसे बालों की ग्रोथ से जोड़कर देखा जाता है। विशेषज्ञ के अनुसार, रोजमेरी ऑयल कुछ हद तक बालों की ग्रोथ को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल सीधे बालों या स्कैल्प पर नहीं करना चाहिए।

    रोजमेरी ऑयल को किसी कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए नारियल तेल या जोजोबा ऑयल जैसे तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी रोजमेरी ऑयल को सीधे लगाने के बजाय उसे किसी उपयुक्त कैरियर ऑयल के साथ मिलाकर हेयर केयर रूटीन में शामिल करना बेहतर तरीका है।

    तीसरा विकल्प बादाम का तेल है। यह खासतौर पर सूखे और बेजान बालों के लिए उपयोगी हो सकता है। बादाम के तेल में विटामिन ई और फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो बालों को मुलायम बनाने में मदद कर सकते हैं।

    अगर बालों में चमक कम हो गई है या वे रूखे और बेजान नजर आते हैं, तो बादाम तेल का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे बालों की फ्रिजीनेस कम करने और उन्हें अधिक मुलायम व चमकदार दिखाने में मदद मिल सकती है।

    इस तरह बालों की जरूरत के अनुसार इन तीनों तेलों में से विकल्प चुना जा सकता है। रूखे और फ्रिजी बालों के लिए नारियल तेल, ग्रोथ पर ध्यान देने वालों के लिए उचित तरीके से इस्तेमाल किया गया रोजमेरी ऑयल और सूखे-बेजान बालों के लिए बादाम तेल उपयोगी हो सकता है। किसी भी तेल से परेशानी या जलन होने पर उसका इस्तेमाल रोक देना चाहिए।

  • अमेज़न इंडिया के विक्रेताओं का कुनबा 20 लाख पार, तीन साल में सबसे तेज बढ़ोतरी

    अमेज़न इंडिया के विक्रेताओं का कुनबा 20 लाख पार, तीन साल में सबसे तेज बढ़ोतरी


    भोपाल।
    त्योहारी खरीदारी का मौसम शुरू होने से पहले अमेज़न इंडिया ने अपने विक्रेता नेटवर्क को लेकर बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। कंपनी ने बताया कि Amazon.in पर उसके विक्रेताओं की संख्या 20 लाख का आंकड़ा पार कर गई है। पिछले तीन वर्षों में यह विक्रेता आधार में साल दर साल हुई सबसे तेज वृद्धि है। इस दौरान तीन लाख से अधिक नए विक्रेता अमेज़न के मंच से जुड़े हैं।

    अमेज़न के बढ़ते विक्रेता समुदाय में देश के अलग-अलग हिस्सों और विभिन्न स्तरों के कारोबारी शामिल हैं। इनमें टियर-3 कस्बों से कारोबार शुरू करने वाले पहली पीढ़ी के उद्यमियों से लेकर हजारों स्टॉक कीपिंग यूनिट संभालने वाले स्थापित ब्रांड तक शामिल हैं। आगामी त्योहारी मौसम को देखते हुए कंपनी विक्रेताओं के लिए बिक्री, विज्ञापन, कारोबार प्रबंधन और ग्राहकों तक बेहतर सेवा पहुंचाने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर जोर दे रही है।

    इसके लिए कंपनी तकनीक, विभिन्न डिजिटल टूल्स और अपने बुनियादी ढांचे में लगातार निवेश कर रही है। अमेज़न इंडिया में सेलिंग पार्टनर सर्विसेज की निदेशक अरुणा दरयानानी ने कहा कि कंपनी की कोशिश Amazon.in को हर आकार के विक्रेता के लिए बिक्री का बेहतर मंच बनाने की है। उन्होंने कहा कि फीस में कमी, रोजमर्रा के काम को आसान बनाने वाले एआई टूल्स और आंकड़ों के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में मदद करने वाली सुविधाओं पर लगातार काम किया जा रहा है।

    उन्होंने कहा कि 20 लाख विक्रेताओं तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि देशभर के उद्यमी Amazon.in पर भरोसा कर रहे हैं। आगामी त्योहारी मौसम को ध्यान में रखते हुए कंपनी ऐसे टूल्स, तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखेगी, जिससे विक्रेता अपने कारोबार को तैयार कर सकें और ग्राहकों को बेहतर सेवा दे सकें।

    फीस में कटौती से बिक्री की लागत हुई कम

    अमेज़न के विक्रेता आधार में विस्तार के पीछे कम सेलिंग फीस, एआई आधारित सुविधाएं, रचनात्मक विज्ञापन विकल्प और फुलफिलमेंट तथा डिलीवरी नेटवर्क में लगातार किया जा रहा निवेश प्रमुख वजहें हैं।

    कंपनी के अनुसार इस साल की शुरुआत में फीस में बदलाव के बाद 12.5 करोड़ से अधिक उत्पादों पर रेफरल फीस शून्य कर दी गई। इससे देशभर के उद्यमियों के लिए अमेज़न पर उत्पाद बेचने की लागत कम हुई है। इसके साथ ही कंपनी विक्रेताओं को एआई आधारित सुविधाएं और विभिन्न डिजिटल टूल्स उपलब्ध करा रही है।

    ये सुविधाएं उत्पादों की लिस्टिंग तैयार करने और उसे बेहतर बनाने, नए उत्पादों की संभावनाएं तलाशने, विज्ञापन के लिए क्रिएटिव तैयार करने, इन्वेंट्री की योजना बनाने और आंकड़ों के आधार पर कारोबारी निर्णय लेने में मदद करती हैं।

    सेलर असिस्टेंट का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा

    Amazon.in पर सेलर असिस्टेंट का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं की संख्या हर छह महीने में दोगुनी हो रही है। कंपनी के अनुसार इस एआई आधारित टूल के साथ विक्रेताओं की बातचीत साल दर साल 7.5 गुना बढ़ी है।

    एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल करने वाले अमेज़न विज्ञापनदाताओं की हिस्सेदारी में भी साल दर साल 77 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं 2026 की पहली तिमाही में छोटे और मध्यम कारोबारियों ने पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में इन टूल्स की मदद से 62 प्रतिशत अधिक विज्ञापन क्रिएटिव तैयार किए।

    देशभर में हो रहे सेलर कनेक्ट और ऐड्स हाइव वर्कशॉप

    त्योहारी सीजन की तैयारियों के तहत अमेज़न अपने डिजिटल टूल्स और सुविधाओं को विक्रेताओं तक सीधे पहुंचाने के लिए कई शहरों में 20 से अधिक सेलर कनेक्ट और ऐड्स हाइव वर्कशॉप आयोजित कर रहा है। इनमें कैटलॉग ऑप्टिमाइजेशन, इन्वेंट्री प्लानिंग, फुलफिलमेंट और विज्ञापन से जुड़े टूल्स तथा रणनीतियों की जानकारी दी जा रही है।

    मध्य प्रदेश में भी अमेज़न 77 हजार से अधिक विक्रेताओं और 24 हजार से ज्यादा स्थानीय दुकानों के लिए Amazon.in पर बिक्री को आसान बनाने पर काम कर रहा है।

    24 घंटे उपलब्ध एआई साथी

    त्योहारी तैयारी में सेलर असिस्टेंट को कंपनी प्रमुख सुविधाओं में शामिल कर रही है। यह 24 घंटे उपलब्ध बातचीत वाला एआई आधारित साथी है, जो अंग्रेजी और हिंग्लिश दोनों में काम करता है। इसके माध्यम से विक्रेता एक ही जगह से लिस्टिंग तैयार करने, इन्वेंट्री की योजना बनाने, फीस का अनुमान लगाने, कारोबार से संबंधित जानकारी हासिल करने और आगे बढ़ने के सुझाव लेने जैसे काम कर सकते हैं।

    प्रोडक्ट अपॉर्च्युनिटी एक्सप्लोरर भी विक्रेताओं के लिए उपयोगी साबित हो रहा है। यह अमेज़न के ग्राहक मांग से जुड़े आंकड़ों के आधार पर ऐसे उत्पादों की संभावनाएं पहचानने में मदद करता है, जिनकी मांग मौजूद है और जहां प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम हो सकती है। देश में 28 हजार से अधिक विक्रेता इस टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।

    दो लाख से ज्यादा विक्रेता एआई लिस्टिंग टूल्स से जुड़े

    अमेज़न के एआई आधारित लिस्टिंग टूल्स का इस्तेमाल दो लाख से अधिक विक्रेता कर रहे हैं। इन सुविधाओं के जरिए उत्पादों का कैटलॉग तैयार करना आसान होता है और ग्राहकों के लिए उत्पादों को खोज पाना भी सरल होता है।

    इन्वेंट्री और कीमत की योजना के लिए इस साल 69 हजार से अधिक विक्रेताओं ने सेल इवेंट प्लानर का इस्तेमाल किया। कंपनी के अनुसार जिन विक्रेताओं ने इसके एआई आधारित इन्वेंट्री सुझावों को अपनाया, उनके यहां स्टॉक खत्म होने की घटनाओं में 35 प्रतिशत की कमी आई। वहीं टूल द्वारा सुझाई गई डील कीमतें लागू करने वाले विक्रेताओं की बिक्री में 2.5 गुना तक बढ़ोतरी हुई।

    समृद्धि से बिक्री लक्ष्य पार करने की संभावना 2.8 गुना

    अमेज़न का निजी सुझाव देने वाला ग्रोथ रेकमेंडेशन इंजन ‘समृद्धि’ भी विक्रेताओं को कारोबार बढ़ाने के लिए जरूरी कदम पहचानने में मदद कर रहा है। कंपनी के अनुसार समृद्धि का इस्तेमाल करने वाले विक्रेताओं के बिक्री आयोजनों के दौरान अपने बिक्री लक्ष्य को लगातार पार करने की संभावना 2.8 गुना अधिक होती है। वहीं इसके सुझावों को अपनाने वाले विक्रेताओं की सालाना बिक्री में 174 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

    एआई से विज्ञापन क्रिएटिव तैयार करना आसान

    अमेज़न ऐड्स भी सेल्फ-सर्विस समाधान और एआई आधारित टूल्स के जरिये विक्रेताओं के लिए विज्ञापन को आसान बना रहा है। क्रिएटिव एजेंट और क्रिएटिव स्टूडियो जैसे टूल्स की मदद से विक्रेता कम मेहनत और बिना अतिरिक्त खर्च के पेशेवर स्तर के क्रिएटिव तैयार कर सकते हैं। इनमें वीडियो विज्ञापन भी शामिल हैं।

    अमेज़न ऐड्स क्रिएटर प्रोग्राम ब्रांड्स को पांच लाख से अधिक क्रिएटर्स के नेटवर्क से जोड़ता है। इससे विक्रेताओं को अपने विज्ञापन अभियानों में क्रिएटर के माध्यम से प्रचार का विकल्प भी मिलता है।

    त्योहारी मौसम के लिए 1.6 लाख से ज्यादा मौसमी रोजगार

    अमेज़न इंडिया अपने देशव्यापी ऑपरेशंस नेटवर्क और मौसमी कर्मचारियों पर भी निवेश कर रहा है। आगामी त्योहारी मौसम से पहले कंपनी ने अपने देशभर के ऑपरेशंस नेटवर्क में 1.6 लाख से अधिक मौसमी काम के अवसर तैयार किए हैं। ये अवसर अमेज़न के ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स दोनों कारोबार को सहयोग देंगे।

    ये प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर 400 शहरों में उपलब्ध होंगे। इनमें बड़े महानगरों के साथ वाराणसी, कोच्चि, जालंधर, गाजियाबाद, रांची, सेलम और गोरखपुर जैसे टियर-2 और टियर-3 शहर भी शामिल हैं।

    त्योहारी मौसम के दौरान ये नए एसोसिएट ग्राहकों के ऑर्डर को सुरक्षित और भरोसेमंद तरीके से उठाने, पैक करने, भेजने और पहुंचाने में मदद करेंगे। कंपनी के अनुसार इनमें से ज्यादातर लोग अमेज़न के साथ जुड़ चुके हैं और त्योहारी सीजन की तैयारियों के लिए आवश्यक प्रशिक्षण भी शुरू कर चुके हैं।

    अमेज़न अपने देशव्यापी डिलीवरी नेटवर्क के माध्यम से भारत के हर पिन कोड तक सामान पहुंचाने का काम कर रहा है।

  • वित्त वर्ष 2031 तक 63 लाख यूनिट पहुंच सकता है भारतीय कार बाजार: आरसी भार्गव

    वित्त वर्ष 2031 तक 63 लाख यूनिट पहुंच सकता है भारतीय कार बाजार: आरसी भार्गव

    नई दिल्ली ।भारतीय कार उद्योग आने वाले वर्षों में विस्तार की मजबूत संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आरसी भार्गव ने रविवार, 9 अगस्त 2026 को कहा कि वित्त वर्ष 2030-31 तक देश का कार बाजार बढ़कर 61 से 63 लाख यूनिट तक पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में छोटी कारों की बाजार हिस्सेदारी में भी सुधार देखने को मिल सकता है।

    आरसी भार्गव के अनुसार, भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार की भविष्य की वृद्धि का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालिया जीएसटी सुधारों से केवल वाहन उद्योग को ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था के कई अन्य क्षेत्रों को भी गति मिली है। कंपनी अगले पांच वर्षों के दौरान कार बाजार की संभावित वृद्धि का अधिक सटीक अनुमान तैयार करने की प्रक्रिया में है।

    मारुति सुजुकी इंडिया की वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक एकीकृत रिपोर्ट में कंपनी के कारोबार और भविष्य की रणनीति से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, छोटी कारों के बाजार में सुधार, एसयूवी पोर्टफोलियो की मजबूती, अलग-अलग पावरट्रेन विकल्प, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और निर्यात में बेहतर प्रदर्शन ने कंपनी की वृद्धि को समर्थन दिया है।

    वित्त वर्ष 2025-26 में मारुति सुजुकी ने 24.22 लाख वाहनों की रिकॉर्ड वार्षिक बिक्री दर्ज की। यह कंपनी की अब तक की सबसे अधिक सालाना बिक्री है। इसी अवधि में कंपनी ने 4.47 लाख वाहनों का निर्यात किया, जो उसके निर्यात कारोबार का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है।

    कंपनी लगातार तीसरे वर्ष 20 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री करने में सफल रही है। आरसी भार्गव ने बिक्री के अगले दस लाख यूनिट के माइलस्टोन को लेकर भी सकारात्मक रुख जताया। उन्होंने कहा कि कंपनी इस उपलब्धि को पहले की अपेक्षा जल्दी हासिल करने को लेकर आशावादी है।

    मारुति सुजुकी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ हिसाशी ताकेउची ने बताया कि कंपनी ने उत्पादन क्षमता बढ़ाने की योजनाओं को तेज किया है। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान कंपनी ने 5 लाख यूनिट की अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग क्षमता जोड़ी है। इसका उद्देश्य बदलती मांग और ग्राहकों की जरूरतों के अनुरूप उत्पादन को मजबूत करना है।

    ताकेउची ने कहा कि भारतीय ग्राहकों की पसंद और अपेक्षाएं तेजी से बदल रही हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी अपने एसयूवी पोर्टफोलियो को और मजबूत करने की तैयारी कर रही है। मारुति सुजुकी अगले पांच से छह वर्षों में सात नई एसयूवी लॉन्च करने की योजना पर काम कर रही है।

    भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में घरेलू मांग के साथ निर्यात, तकनीकी विकास और उत्पादन क्षमता का महत्व भी लगातार बढ़ रहा है। मारुति सुजुकी ने विनिर्माण, निर्यात, तकनीकी विकास, रोजगार सृजन, कौशल विकास और टिकाऊ मोबिलिटी के माध्यम से देश की आर्थिक विकास यात्रा में योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई है।

    कंपनी के अनुसार, भारत के 2047 तक विकसित देश बनने के लक्ष्य में ऑटोमोबाइल उद्योग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। ऐसे में कार बाजार का संभावित विस्तार केवल बिक्री के आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्पादन, रोजगार, निर्यात और तकनीकी क्षमताओं को भी प्रभावित कर सकता है।

  • बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    बुधवार को भगवान श्री गणेश और बुध ग्रह के मंत्रों का जाप जीवन के कष्टों से दिलाएगा मुक्ति..

    नई दिल्ली । सनातन धर्म में सप्ताह का प्रत्येक दिन किसी न किसी देवी-देवता और नवग्रहों की साधना के लिए विशेष रूप से निर्धारित किया गया है। इसी क्रम में बुधवार का दिन प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश की आराधना और सौरमंडल के महत्वपूर्ण ग्रह बुध देव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन गणेश जी के साथ बुध ग्रह के मंत्रों का जाप करने से जीवन की अनेक कठिनाइयों का निवारण होता है।

    ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क शक्ति और व्यापार का कारक माना गया है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में बुध ग्रह की स्थिति कमजोर होती है, तो उसे व्यापार में हानि, संवाद क्षमता में कमी और मानसिक तनाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में बुधवार के दिन विशेष मंत्र साधना के माध्यम से बुध ग्रह को मजबूत किया जा सकता है, जिससे व्यापारिक सफलता और निर्णय क्षमता में सुधार होता है।

    शास्त्रों में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा गया है, जिनकी कृपा से किसी भी कार्य में आने वाली रुकावटें स्वतः समाप्त हो जाती हैं। बुधवार की सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर गणेश जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करनी चाहिए। पूजा के दौरान गणेश जी को दूर्वा और मोदक अर्पित करने के साथ उनके प्रभावशाली मंत्रों का जाप करने से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है और कार्यक्षेत्र में निरंतर प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

    भगवान गणेश की आराधना के पश्चात बुध ग्रह के वैदिक, पौराणिक और तांत्रिक मंत्रों का जाप करना विशेष फलदायी माना गया है। नियमित और श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले इस जाप से व्यक्ति की वाणी में मधुरता और आकर्षण का समावेश होता है। इसके साथ ही बौद्धिक क्षमताओं का विकास होता है, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और व्यावसायिक जीवन में सकारात्मक परिणाम दिखाई देने लगते हैं।

    धार्मिक विद्वानों का मानना है कि इस दिन गणेश गायत्री मंत्र और बुध ग्रह के नाम मंत्रों का मानसिक या स्पष्ट उच्चारण करते हुए स्मरण करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है। यह साधना न केवल आर्थिक स्थिरता लाती है, बल्कि साधक को हर प्रकार के मानसिक और व्यावहारिक संकटों से बचाकर जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग सुलभ करती है।

  • HDFC बैंक की पहली तिमाही शानदार, डिपॉजिट और लोन में दोहरे अंक की बढ़ोतरी, कारोबार ने पकड़ी मजबूत रफ्तार

    HDFC बैंक की पहली तिमाही शानदार, डिपॉजिट और लोन में दोहरे अंक की बढ़ोतरी, कारोबार ने पकड़ी मजबूत रफ्तार

    नई दिल्ली । देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंकों में शामिल एचडीएफसी बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत कारोबारी प्रदर्शन दर्ज किया है। अप्रैल से जून 2026 की अवधि के दौरान बैंक ने जमा राशि और कर्ज वितरण दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि हासिल की। बैंक की ओर से जारी तिमाही कारोबारी अपडेट के अनुसार विभिन्न प्रमुख वित्तीय संकेतकों में लगातार मजबूती देखने को मिली है, जो बैंक के विस्तार और ग्राहक आधार में बढ़ोतरी का संकेत देती है।

    बैंक के आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2026 तक कुल जमा राशि बढ़कर 31.70 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 14.7 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान टर्म डिपॉजिट में सबसे अधिक मजबूती देखने को मिली और यह 17 प्रतिशत से अधिक की वार्षिक वृद्धि के साथ 21.45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। वहीं करंट अकाउंट और सेविंग अकाउंट (CASA) जमा भी लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर 10.25 लाख करोड़ रुपये हो गया।

    कर्ज वितरण के मोर्चे पर भी बैंक का प्रदर्शन मजबूत रहा। पहली तिमाही के अंत तक कुल ग्रॉस एडवांस 30.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो एक वर्ष पहले की तुलना में 15.4 प्रतिशत अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि खुदरा और कॉरपोरेट दोनों वर्गों में ऋण की मांग बनी हुई है तथा बैंक ने अपने ऋण पोर्टफोलियो का लगातार विस्तार किया है।

    बैंक के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। जून तिमाही के अंत तक यह आंकड़ा 31.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 12.4 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि जमा और ऋण दोनों में संतुलित वृद्धि बैंक की वित्तीय स्थिति को और मजबूत बनाती है तथा भविष्य की विकास संभावनाओं को भी बेहतर करती है।

    हालांकि मजबूत कारोबारी प्रदर्शन के बीच बैंक हाल के महीनों में कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में रहा है। इस वर्ष बैंक के तत्कालीन पार्ट-टाइम चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दिया था। इसके बाद अंतरिम व्यवस्था के तहत नेतृत्व में बदलाव किया गया और बाद में केंद्र सरकार के पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए बैंक का नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया।

    इसी अवधि में बैंक के शीर्ष प्रबंधन और गवर्नेंस प्रक्रियाओं को लेकर भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा हुई, लेकिन बैंक ने अपने नियमित कारोबारी संचालन को प्रभावित नहीं होने दिया। पहली तिमाही के आंकड़े बताते हैं कि बैंक की मुख्य बैंकिंग गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और ग्राहकों का भरोसा कायम है।

    शेयर बाजार में भी बैंक के शेयर ने सकारात्मक प्रदर्शन दर्ज किया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में एचडीएफसी बैंक का शेयर बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि पिछले छह महीनों में इसमें सीमित गिरावट देखने को मिली, लेकिन बीते एक वर्ष के दौरान शेयर ने उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत कारोबारी वृद्धि और स्थिर वित्तीय प्रदर्शन आने वाले समय में बैंक की संभावनाओं को और मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

  • फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी

    फार्मा सेक्टर में दिख रही तेज रफ्तार, एक्सपर्ट्स ने बताए 4 ऐसे शेयर जो लंबी अवधि में बन सकते हैं कमाई के बड़े खिलाड़ी


    नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार में फार्मा सेक्टर एक बार फिर मजबूत चर्चा का विषय बन गया है। लंबे समय तक इस सेक्टर को केवल सुरक्षित और स्थिर निवेश का विकल्प माना जाता रहा, जहां निवेशक बाजार की अनिश्चित परिस्थितियों में अपने निवेश को सुरक्षित रखने के लिए रुख करते थे। लेकिन अब परिस्थितियां तेजी से बदलती दिखाई दे रही हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फार्मा सेक्टर की पारंपरिक छवि बदल रही है और यह क्षेत्र अब केवल डिफेंसिव नहीं बल्कि एक मजबूत ग्रोथ इंजन के रूप में उभरता नजर आ रहा है।

    बीते कुछ वर्षों में भारतीय फार्मा उद्योग ने घरेलू और वैश्विक दोनों स्तरों पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। देश में स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती जरूरत, दवाओं की लगातार बढ़ती मांग और चिकित्सा क्षेत्र में बढ़ते निवेश ने इस उद्योग को नई दिशा दी है। इसके साथ ही भारतीय दवा कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा इस सेक्टर पर लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    बाजार जानकारों का मानना है कि फार्मा कंपनियां अब केवल पारंपरिक दवा कारोबार तक सीमित नहीं हैं। नई तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और अनुसंधान आधारित उत्पादों पर लगातार काम हो रहा है। कई कंपनियां रिसर्च और डेवलपमेंट पर पहले से अधिक निवेश कर रही हैं, जिससे आने वाले वर्षों में इनके कारोबार के विस्तार की संभावनाएं मजबूत होती दिखाई दे रही हैं। यही कारण है कि अब इस सेक्टर को लंबे समय की ग्रोथ कहानी के रूप में देखा जाने लगा है।

    विशेषज्ञों द्वारा कुछ चुनिंदा फार्मा कंपनियों पर खास भरोसा जताया गया है। माना जा रहा है कि इन कंपनियों की कारोबारी रणनीति, उत्पाद पोर्टफोलियो और भविष्य की योजनाएं इन्हें अन्य कंपनियों से अलग बना सकती हैं। निवेशकों के बीच ऐसे शेयरों को लेकर उत्साह इसलिए भी देखा जा रहा है क्योंकि स्वास्थ्य क्षेत्र की मांग लगातार बनी रहती है और यह उद्योग आर्थिक परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होता है।

    दूसरी ओर वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और चिकित्सा जरूरतों में बढ़ोतरी ने भी भारतीय फार्मा उद्योग के लिए नए अवसर तैयार किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय कंपनियां लागत, गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता के मामले में वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बेहतर स्थिति में हैं। इसका लाभ आने वाले वर्षों में कारोबार और निवेश दोनों स्तरों पर देखने को मिल सकता है।

    हालांकि विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि शेयर बाजार में निवेश करते समय केवल किसी सेक्टर की लोकप्रियता के आधार पर निर्णय लेना उचित नहीं माना जा सकता। निवेशकों को कंपनी की वित्तीय स्थिति, बाजार में उसकी स्थिति और भविष्य की विकास योजनाओं का मूल्यांकन करना चाहिए। किसी भी निवेश से पहले जोखिम और अवसर दोनों पक्षों को समझना आवश्यक माना जाता है।

    फिलहाल संकेत यही हैं कि फार्मा सेक्टर अब बदलाव के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिस क्षेत्र को कभी केवल सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता था, वही अब तेज विकास, तकनीकी विस्तार और भविष्य की संभावनाओं के कारण निवेशकों के लिए नए अवसरों का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में यह सेक्टर बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल हो सकता है।