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  • अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23 प्रतिशत की छलांग के साथ सरकारी खजाने में आए 2.31 लाख करोड़

    अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन ने बनाया नया रिकॉर्ड, 23 प्रतिशत की छलांग के साथ सरकारी खजाने में आए 2.31 लाख करोड़

    नई दिल्ली ।देश में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के मोर्चे पर अक्टूबर 2026 में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस दौरान सकल जीएसटी कलेक्शन सालाना आधार पर 22.9 प्रतिशत उछलकर 2.31 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। पिछले साल अक्टूबर 2025 में यह आंकड़ा 1.88 लाख करोड़ रुपये था। ताजा आंकड़े देश में आर्थिक गतिविधियों के विस्तार और आयात से मिलने वाले कर राजस्व में बढ़ोतरी को दर्शाते हैं।

    रिफंड की राशि घटाने के बाद अक्टूबर में शुद्ध जीएसटी राजस्व 25.6 प्रतिशत बढ़कर 2.03 लाख करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी महीने में यह 1.61 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। सकल और शुद्ध दोनों तरह के राजस्व में हुई वृद्धि से कर संग्रह में मजबूती का संकेत मिला है।

    अक्टूबर के दौरान घरेलू जीएसटी संग्रह में 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और यह 1.59 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके मुकाबले आयात से प्राप्त जीएसटी राजस्व में कहीं अधिक तेजी देखने को मिली। आयात पर मिलने वाला कर 42.2 प्रतिशत बढ़कर 72,246 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल अक्टूबर में इस मद से 50,796 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था।

    घरेलू जीएसटी संग्रह में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) का योगदान 42,935 करोड़ रुपये रहा। राज्य वस्तु एवं सेवा कर (एसजीएसटी) के रूप में 51,340 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि एकीकृत वस्तु एवं सेवा कर (आईजीएसटी) का घरेलू संग्रह 64,769 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। आयात से प्राप्त आईजीएसटी में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई, जिसने कुल कर संग्रह को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले सात महीनों यानी अप्रैल से अक्टूबर के दौरान भी जीएसटी संग्रह में सकारात्मक रुझान बना रहा। इस अवधि में सकल जीएसटी कलेक्शन 13.2 प्रतिशत बढ़कर 14.77 लाख करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 13.05 लाख करोड़ रुपये था। वहीं, शुद्ध जीएसटी राजस्व 12.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 12.69 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह 11.27 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था।

    अक्टूबर में जीएसटी रिफंड की राशि में भी बढ़ोतरी हुई। कुल रिफंड 6.5 प्रतिशत बढ़कर 27,934 करोड़ रुपये रहा, जबकि अक्टूबर 2025 में यह 26,225 करोड़ रुपये था। घरेलू कारोबार से संबंधित रिफंड 9.8 प्रतिशत बढ़कर 14,007 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, आईसीईजीएटीई के माध्यम से संसाधित निर्यात रिफंड 3.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 13,927 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

    रिफंड को समायोजित करने के बाद घरेलू शुद्ध जीएसटी संग्रह 16.4 प्रतिशत बढ़कर 1.45 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। दूसरी ओर, कस्टम्स से जुड़े शुद्ध जीएसटी राजस्व में 56.2 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई और यह 58,319 करोड़ रुपये रहा। इससे आयात पर मिलने वाले कर राजस्व की मजबूत स्थिति सामने आई।

    अप्रैल से अक्टूबर 2026 के बीच कुल जीएसटी रिफंड 16.9 प्रतिशत बढ़कर 2.08 लाख करोड़ रुपये हो गया। इसमें घरेलू रिफंड 19.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.18 लाख करोड़ रुपये और आयात से जुड़े रिफंड 13.4 प्रतिशत बढ़कर 89,733 करोड़ रुपये रहे। इस तरह चालू वित्त वर्ष के शुरुआती सात महीनों में जीएसटी संग्रह और रिफंड दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

  • 1 नवंबर से लागू हुए 18 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेंशन और दूध-दही तक जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    1 नवंबर से लागू हुए 18 बड़े बदलाव, LPG से लेकर पेंशन और दूध-दही तक जानें आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर

    नई दिल्ली ।नवंबर महीने की शुरुआत आम लोगों के लिए कई नए बदलाव लेकर आई है। 1 नवंबर 2026 से देश के अलग-अलग राज्यों में रोजमर्रा की जरूरतों, परिवहन, बैंकिंग, बिजली, टैक्स और सरकारी सेवाओं से जुड़े 18 महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो गए हैं। इनका असर घरेलू बजट से लेकर कारोबारियों के खर्च और सरकारी पेंशन प्राप्त करने वालों की प्रक्रियाओं तक दिखाई दे सकता है। कहीं दूध-दही और CNG महंगी हुई है, तो कहीं कमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम बढ़े हैं। इसके अलावा क्रेडिट कार्ड, बिजली कनेक्शन और यातायात से जुड़े नियम भी बदले हैं।

    दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए 1 नवंबर से ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी GRAP लागू किया गया है। इसके तहत दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI से कम उत्सर्जन मानक वाले वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है। कुछ श्रेणियों के ट्रकों और बसों पर भी पाबंदियां लागू हैं। नियमों का उल्लंघन करने पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना और वाहन जब्त होने की कार्रवाई हो सकती है। कुछ क्षेत्रों में पार्किंग शुल्क बढ़ाने के साथ डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।

    उत्तर प्रदेश के कई शहरों में CNG की कीमत बढ़ाई गई है। लखनऊ, आगरा, सुल्तानपुर और अयोध्या में एक रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है, जबकि उन्नाव में CNG 2.25 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। इससे गैस से चलने वाले वाहनों का परिचालन खर्च बढ़ेगा। वहीं, कर्नाटक में दूध की कीमत आठ रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गई है। इसमें सात रुपये किसानों और एक रुपया दूध यूनियनों को मिलेगा। राज्य में दही भी 14 रुपये प्रति किलो महंगा हो गया है।

    तमिलनाडु में शराब की बोतलों के दाम में 10 रुपये की वृद्धि की गई है। हालांकि, खाली बोतल सही स्थिति में वापस करने पर ग्राहकों को 10 रुपये लौटाने का प्रावधान है। दूसरी ओर, कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली में 19 किलो वाला सिलेंडर अब 2,820 रुपये का हो गया है, जो पहले 2,810 रुपये था। घरेलू इस्तेमाल वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत 942 रुपये पर स्थिर रखी गई है।

    बैंकिंग सेवाओं में भी नए शुल्क लागू हुए हैं। पंजाब नेशनल बैंक के Visa और RuPay क्रेडिट कार्ड पर रिवॉर्ड पॉइंट रिडीम करने की पात्र रिक्वेस्ट के लिए 99 रुपये शुल्क लगेगा। एक बिलिंग साइकल में 50 हजार रुपये से अधिक के यूटिलिटी बिल भुगतान पर एक प्रतिशत तक शुल्क लग सकता है। SBI ने भी क्रेडिट कार्ड से संबंधित कुछ शुल्कों में बदलाव किया है।

    बिजली उपभोक्ताओं के लिए उत्तराखंड और बिहार में नए प्रावधान लागू किए गए हैं। उत्तराखंड में BPL कार्डधारकों के नए बिजली कनेक्शन का सर्विस लाइन शुल्क 100 रुपये से बढ़ाकर 150 रुपये कर दिया गया है। हालांकि, प्रीपेड मीटर इस्तेमाल करने वालों को कुछ राहत दी गई है। बिहार में 150 किलोवाट तक के सभी नए बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना अनिवार्य होगा। कनेक्शन का शुल्क फेज के अनुसार तय किया जाएगा।

    सरकारी पेंशन पाने वाले 80 वर्ष से कम उम्र के पेंशनर्स 1 नवंबर से अपना वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र जमा कर सकते हैं। इसकी अंतिम तारीख 30 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। निर्धारित समय में प्रमाण पत्र नहीं देने पर पेंशन भुगतान प्रभावित हो सकता है। 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पेंशनर्स के लिए यह प्रक्रिया एक अक्टूबर से शुरू हो चुकी है।

    आयकर से जुड़े बदलाव के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए उन करदाताओं को ITR दाखिल करने की तारीख में राहत मिली है, जिनके खातों का ऑडिट जरूरी है। उनके लिए अंतिम तारीख बढ़ाकर 21 नवंबर 2026 कर दी गई है। यह विस्तार उन सभी करदाताओं पर लागू नहीं होगा, जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य नहीं है। GST के नियमों में भी बिक्री के बाद मिलने वाली छूट, क्रेडिट नोट और टैक्स रिफंड से संबंधित बदलाव किए गए हैं। इनसे कारोबारियों को कुछ परिस्थितियों में राहत मिल सकती है।

    टेलीकॉम क्षेत्र में CNAP सुविधा शुरू की जा रही है। इसके माध्यम से आने वाली कॉल के दौरान फोन की स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाई दे सकता है। हालांकि, इसकी उपलब्धता नेटवर्क और टेलीकॉम ऑपरेटर पर निर्भर करेगी। FASTag के तहत टोल प्लाजा से 20 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले स्थानीय लोगों के लिए सालाना पास की व्यवस्था की गई है। नगर सीमा से बाहर स्थित टोल प्लाजा के लिए इसकी फीस 1,500 रुपये और नगर सीमा के अंदर स्थित टोल प्लाजा के लिए 3,000 रुपये होगी।

    उत्तर प्रदेश के एक्सप्रेसवे पर भी गति सीमा घटाई गई है। कार और जीप जैसे हल्के वाहनों की अधिकतम रफ्तार 100 से घटाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई है। भारी वाहनों के लिए यह सीमा 80 से घटाकर 60 किलोमीटर प्रति घंटा होगी। सर्दियों में कोहरे के कारण दुर्घटनाओं को कम करना इसका उद्देश्य है।

    हवाई और रेल यात्रियों के लिए भी कुछ बदलाव किए गए हैं। आठ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के यात्रियों के लिए Digi Yatra सुविधा का ट्रायल शुरू किया जा रहा है। शुरुआत में एयर इंडिया और इंडिगो की चुनिंदा उड़ानों में इसका लाभ मिलेगा। ताज एक्सप्रेस अब नई दिल्ली स्टेशन के बजाय हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से संचालित होगी।

    अयोध्या के राम मंदिर में भी दर्शन और पूजा का समय बदल गया है। एक नवंबर से मंदिर के पट सुबह चार बजे खुलेंगे और रात 10 बजे बंद होंगे। मंगला आरती सुबह 4:30 से 4:40 बजे तक होगी, जबकि श्रद्धालुओं के लिए दर्शन सुबह सात बजे से शुरू होंगे।

    पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर भी मासिक समीक्षा की प्रक्रिया जारी है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की स्थिति के आधार पर तेल कंपनियां दरों की समीक्षा करती हैं। हालांकि, एक नवंबर को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में किसी बदलाव की पुष्टि के लिए आधिकारिक घोषणा जरूरी होगी। इन सभी बदलावों के बीच लोगों को अपने भुगतान, यात्रा, पेंशन और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े नए प्रावधानों की जानकारी रखना जरूरी है।

  • LPG से लेकर GST तक…. होने वाले हैं बड़े बदलाव….एक नवंबर से लागू होंगे नए नियम

    LPG से लेकर GST तक…. होने वाले हैं बड़े बदलाव….एक नवंबर से लागू होंगे नए नियम


    नई दिल्ली।
    अक्टूबर (October) का महीना खत्म होने वाला है और नवंबर की शुरुआत देश में कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st November) के साथ होने जा रही है. इन चेंज का असर हर घर हर जेब पर देखने को मिलेगा. दरअसल, ऐसा इसलिए क्योंकि नए महीने के पहले दिन से लागू होने जा रहे ये बदलाव घर की रसोई में इस्तेमाल होने वाले एलपीजी सिलेंडर (LPG Cylinder) से लेकर जीएसटी (GST) ही नहीं, बल्कि हाइवे पर सफर से लेकर शराब खरीदने के लिए पेमेंट तक से जुड़े हुए हैं. आइए ऐसे ही पांच बड़े बदलावों के बारे में जानते हैं।


    पहला बदलाव: LPG सिलेंडर के बदलेंगे दाम

    हर महीने की तरह नवंबर महीने के पहले दिन भी देश के लोगों की नजर एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में होने वाले बदलाव पर रहेगी. इससे पहले 1 अक्तूबर 2026 को ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने LPG Cylinder Price Change किए थे और इसके तहत 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 62.50 रुपये तक इजाफा किया था. हालांकि, 14 किलो वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम यथावत हैं. ऐसे में 1 नवंबर को भी दाम में बदलाव देखने को मिल सकता है. न सिर्फ LPG, बल्कि हवाई ईंधन यानी ATF के रेट भी बदल सकते हैं।


    दूसरा बदलाव: GST से जुड़ा नियम

    1 नवंबर से जो दूसरा बड़ा बदलाव देश में लागू होने जा रहा है, वो GST से जुड़ा हुआ है. GST Rule Change की बात करें, तो इससे कारोबारियों और छोटे व्यापारियों को राहत मिल सकती है. जीएसटी प्रोसेस को सरल बनाने के लिए ये रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, टैक्स रिफंड में होने वाली देरी कम करने और कारोबारियों पर डॉक्युमेंटेशन का भार घटाने की तैयारी सरकार ने की है. बदलावों के तहत कुछ मामलों में रिफंड ऑटोमैटिक अप्रूवल की व्यवस्था की जाएगा. इसके अलावा सालाना 5 करोड़ रुपये से कम टर्नओवर वाले कारोबारियों के लिए नई रिटर्न व्यवस्था की जाएगी, जो ग्राहकों को सीधे सामान या सर्विसेस देते हैं।


    तीसरा बदलाव: शराब पेमेंट का बदलेगा नियम

    नवंबर की शुरुआत के साथ लागू होने वाला तीसरा बदलाव शराब के शौकीनों से जुड़ा हुआ है. दरअसल, 1 नवंबर से तमिलनाडु में शराब पेमेंट का नियम बदलने (Liquor Payment Rule Change) जा रहा है. तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (TASMAC) ने बड़ा फैसला लेते हुए अब 1000 रुपये से महंगी शराब की बोतल की रिटेल बिक्री के लिए डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य कर दिया है. यानी आप शराब खरीदने दुकान पर जाते हैं और एक हजार रुपये से ज्यादा की शराब लेते हैं, तो फिर कैश नहीं लिया जाएगा।


    चौथा बदलाव: इस हाइवे पर सफर का नियम

    अगर आप मुंबई से पुणे का सफर करते हैं, तो फिर अगला बदलाव आपने लिए है. दरअसल, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के नए कनेक्टिंग लिंक पर अब सभी वाहन नहीं चल पाएंगे. महाराष्ट्र हाईवे पुलिस ने इस रास्ते पर मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर स्थायी रोक का फैसला किया है और ये New Highway Rule 1 नवंबर से लागू हो रहा है. तमाम पहलुओं को ध्यान में रखकर लिए गए इस फैसले के तहत इस प्रतिबंध के दायरे में छोटे कमर्शियल वाहन, पिकअप वैन और टाटा ऐस जैसे वाहन भी आएंगे. हालांकि, प्राइवेट कार और पैसेंजर बसों को इस रास्ते से चलने की अनुमति होगी।


    पांचवां बदलाव: मोबाइल यूजर्स के लिए रूल चेंज

    पांचवां बदलाव मोबाइल यूजर्स से जुड़ा हुआ है. केंद्र सरकार के आदेश के बाद अब 1 नवंबर से नया नियम लागू होने जा रहा है. दूरसंचार विभाग (DoT) की तरफ से जारी ऑर्डर पर नजर डालें, तो सभी मोबाइल यूजर्स को कॉलर का नाम दिखाना जरूरी होगा. दरअसल, कई बार अनजान नंबर से आने वाले कॉलर का नाम पता करने के लिए बहुत से लोग ट्रू कॉलर जैसे मोबाइल ऐप करते थे. ऐसे में DoT ने टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को दिशा-निर्देश दिए हैं कि कॉलिंग नेम प्रजेंटेशन (CNAP) को 1 नवंबर 2026 से लागू करें।

  • बायोकॉन लिमिटेड को 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस, एफडीए भी शाहरुख खान समेत अभिनेताओं को सुनवाई का देगा मौका

    बायोकॉन लिमिटेड को 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का जीएसटी नोटिस, एफडीए भी शाहरुख खान समेत अभिनेताओं को सुनवाई का देगा मौका

    नई दिल्ली ।बायोटेक्नोलॉजी क्षेत्र की कंपनी बायोकॉन लिमिटेड को वित्त वर्ष 2022-23 के लिए 3.2 करोड़ रुपये से अधिक का वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) नोटिस मिला है। इसमें कर की बकाया राशि के साथ ब्याज और जुर्माना भी शामिल है। कंपनी को यह नोटिस आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम-2 स्थित जीएसटी कार्यालय से जारी किया गया है। कंपनी ने इस संबंध में शेयर बाजार को जानकारी देते हुए बताया कि नोटिस में कुल देनदारी के रूप में 3.2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की गई है। हालांकि, कंपनी का कहना है कि इस आदेश का उसके वित्तीय और परिचालन कामकाज पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है।

    नोटिस में 1.85 करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में, 1.17 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में और 18.52 लाख रुपये जुर्माने के रूप में शामिल हैं। कर विभाग की ओर से कंपनी पर कई तरह की अनियमितताओं से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। इनमें विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड को की गई जीरो-रेटेड आपूर्ति के संबंध में जरूरी एंडोर्समेंट दस्तावेज जमा नहीं करना शामिल है। इसके अलावा इनपुट टैक्स के गलत रिवर्सल और इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूशन क्रेडिट के दावों में अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया है।

    जीरो-रेटेड आपूर्ति के तहत कुछ निर्धारित परिस्थितियों में वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति पर कर का प्रभाव अलग होता है। ऐसे मामलों में संबंधित दस्तावेजों और कर संबंधी नियमों का पालन महत्वपूर्ण होता है। बायोकॉन को मिले नोटिस में इन्हीं प्रक्रियाओं से संबंधित कथित कमियों को आधार बनाया गया है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह इस आदेश के खिलाफ सुधार याचिका दाखिल करने या अपील करने की तैयारी कर रही है। कंपनी की ओर से यह भी कहा गया है कि इस मामले का उसके वित्तीय या परिचालन प्रदर्शन पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

    इसी बीच, महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने प्रतिबंधित उत्पादों के अप्रत्यक्ष विज्ञापन से जुड़े मामले में संबंधित अभिनेताओं से जवाब प्राप्त होने की जानकारी दी है। विभाग ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ सहित कुछ अभिनेताओं से प्रतिबंधित तंबाकू संबंधी उत्पादों के प्रचार को लेकर जवाब मांगा था। इन अभिनेताओं को भेजे गए नोटिस के बाद विभाग को उनके जवाब मिल गए हैं। अब आगे की कार्रवाई से पहले सभी संबंधित लोगों को अपना पक्ष रखने का एक और अवसर दिया जाएगा।

    महाराष्ट्र एफडीए के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा कि विभाग आगे कोई निर्णय लेने से पहले संबंधित लोगों को सुनवाई का एक और मौका देगा। उन्होंने विज्ञापन करने वाले लोगों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि उनके प्रचार अभियान कानून के अनुरूप हों। विभाग का रुख है कि किसी उत्पाद का विज्ञापन करते समय लागू कानूनी प्रावधानों का पालन किया जाना जरूरी है।

    मुंडे ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 24 तथा वर्ष 2018 के विज्ञापन नियमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विज्ञापन संबंधी नियम सभी खाद्य उत्पादों पर लागू होते हैं। यदि कोई व्यक्ति या कारोबारी इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से भी अपील की कि वे खाद्य उत्पाद खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी को ध्यानपूर्वक पढ़ें और समझें।

  • जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगी बैठक; अनुपालन और टैक्स सुधारों पर चर्चा की उम्मीद

    जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक की तारीख बदली, अब 8 अक्टूबर को होगी बैठक; अनुपालन और टैक्स सुधारों पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली ।जीएसटी परिषद की प्रस्तावित 57वीं बैठक की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले यह बैठक 7 अक्टूबर को होने वाली थी, लेकिन अब इसे एक दिन आगे बढ़ाकर 8 अक्टूबर को आयोजित किया जाएगा। जीएसटी परिषद सचिवालय ने एक कार्यालय ज्ञापन जारी कर बैठक की तारीख बदले जाने की जानकारी दी है। ज्ञापन के अनुसार, अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण बैठक को पुनर्निर्धारित किया गया है। बैठक की अध्यक्षता वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी और इसमें केंद्र तथा राज्यों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

    बैठक में कारोबारियों और करदाताओं के लिए जीएसटी अनुपालन को आसान बनाने के उद्देश्य से कई प्रक्रिया संबंधी सुधारों पर चर्चा होने की उम्मीद है। परिषद पंजीकरण, रिटर्न और रिफंड की मौजूदा प्रक्रियाओं में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर विचार कर सकती है। इसके साथ ही जीएसटी विवादों के समाधान को सरल बनाने और इनपुट टैक्स क्रेडिट के प्रवाह को बेहतर करने से संबंधित सुधारों पर भी चर्चा हो सकती है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य कर अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करना है।

    इन सुधारों को जीएसटी परिषद की कानून समिति की व्यापक सिफारिशों से भी जोड़ा गया है। समिति ने जीएसटी कानूनों को सरल बनाने के विभिन्न उपायों की समीक्षा की है। इसके अलावा जानबूझकर कर चोरी करने और अनजाने में कर का भुगतान नहीं कर पाने वाले मामलों के बीच अंतर करने के तरीकों पर भी विचार किया गया है। परिषद की बैठक में इन सिफारिशों से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा होने की संभावना है।

    मौजूदा जीएसटी व्यवस्था के तहत केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 में गिरफ्तारी से संबंधित प्रावधान हैं। इसके तहत आयुक्त किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का आदेश दे सकते हैं, यदि उन्हें यह विश्वास करने का कारण हो कि संबंधित व्यक्ति ने धारा 132 में निर्दिष्ट अपराध किए हैं। इन अपराधों में कर चोरी और फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े कुछ मामले भी शामिल हैं। जीएसटी व्यवस्था में प्रक्रिया संबंधी बदलावों के साथ इन प्रावधानों से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा हो सकती है।

    परिषद कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाने के उपायों पर भी विचार कर सकती है। इसमें ई-कॉमर्स के माध्यम से आपूर्ति करने वाले कारोबारी भी शामिल हैं। पंजीकरण, रिटर्न दाखिल करने, रिफंड प्राप्त करने और इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने का उद्देश्य कारोबारियों के लिए कर संबंधी औपचारिकताओं को आसान करना है।

    इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा था कि जीएसटी सुधारों का अगला चरण अनुपालन को आसान बनाने और रिफंड प्रक्रिया में सुधार करने पर केंद्रित होगा। उनके अनुसार, इन सुधारों से कारोबारियों का निवेश करने और अपने कारोबार का विस्तार करने का भरोसा बढ़ेगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा है कि जीएसटी सुधारों के अगले चरण में पंजीकरण, रिटर्न, रिफंड, विवाद समाधान और इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर ध्यान दिया जाएगा।

    जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक मूल रूप से 12 सितंबर को आयोजित होनी थी। हालांकि, 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के कारण बैठक को 7 अक्टूबर तक टाल दिया गया था। अब तारीख में दूसरी बार बदलाव किया गया है और बैठक 8 अक्टूबर को होगी। बैठक में प्रस्तावित कर सुधारों और अनुपालन से जुड़े उपायों पर आगे की दिशा तय किए जाने की उम्मीद है।

  • GST के अगले चरण से कारोबार और आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया सरल बनेगी; PM मोदी ने निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई

    GST के अगले चरण से कारोबार और आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया सरल बनेगी; PM मोदी ने निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी सुधारों का अगला चरण कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को और आसान बनाएगा। इसके साथ ही रिफंड प्रक्रिया को सरल और तेज करने पर जोर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन सुधारों से उद्योग जगत का विश्वास बढ़ने, निवेश को प्रोत्साहन मिलने और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस लेख का उल्लेख करते हुए कही, जिसमें जीएसटी सुधारों के अगले चरण की रूपरेखा बताई गई है। जीएसटी में प्रक्रिया सुधारों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाना और लागत कम करना है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि नई पीढ़ी के जीएसटी सुधारों में करदाताओं को राहत देने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर ध्यान दिया जा रहा है। आगामी प्रक्रिया सुधारों में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, विवाद निपटान और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर मुख्य जोर रहेगा। जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले रखी गई रूपरेखा में अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कारोबारियों के लिए कागजी कार्रवाई घटाकर प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    सुधारों के संदर्भ में सितंबर 2025 में लागू हुई दर युक्तिकरण प्रक्रिया के बाद जीएसटी संग्रह और कर योग्य आपूर्ति के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। सरकार का मानना है कि जीएसटी ने राजस्व संग्रह को मजबूत करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है। आगामी बदलाव प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी जीएसटी कानून और नियमों से जुड़े कानूनी मामलों की समीक्षा करती है तथा जरूरी संशोधनों और स्पष्टीकरणों की सिफारिश परिषद के समक्ष रखती है।

    आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी विचार होने की संभावना है। प्रस्तावित चर्चा में जीएसटी कानून के उस प्रावधान की समीक्षा शामिल हो सकती है, जिसके तहत जांच के दौरान कुछ गंभीर मामलों में कर अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार मिलता है। यह विषय जीएसटी कानूनों के अपराधमुक्तिकरण से जुड़े व्यापक प्रस्तावों का हिस्सा बताया गया है। जीएसटी परिषद के दस्तावेजों में पहले भी कुछ अपराधों को अपराधमुक्त करने, अभियोजन की सीमा में बदलाव और कंपाउंडिंग प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा दर्ज है।

    वर्तमान व्यवस्था में सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत आयुक्त को कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी की अनुमति देने का अधिकार है, जब उन्हें यह विश्वास हो कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत गंभीर अपराध किया है। प्रस्तावित सोच के तहत फर्जी चालान, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी रिफंड दावों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत किए जाने की व्यवस्था पर भी विचार हो सकता है। इसका उद्देश्य गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रखते हुए अन्य करदाताओं के लिए अनुपालन व्यवस्था को अधिक सहज बनाना है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया और जीएसटी परिषद के विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

  • GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    GST कानून में बड़ा बदलाव संभव, टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी शक्ति हटाने पर 7 अक्टूबर को परिषद में चर्चा

    नई दिल्ली : GST कानून लागू होने के करीब नौ साल बाद सरकार टैक्स व्यवस्था में एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। प्रस्ताव के तहत GST अधिकारियों को मिली सीधे गिरफ्तारी करने की शक्ति हटाई जा सकती है। इस मुद्दे पर 7 अक्टूबर को होने वाली GST काउंसिल की बैठक में चर्चा होने की संभावना है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो GST से जुड़े मामलों में टैक्स अधिकारी मौजूदा व्यवस्था के तहत सीधे गिरफ्तारी नहीं कर सकेंगे। इसके लिए GST कानून में संशोधन करना होगा और सरकार इसे आगामी शीतकालीन सत्र में संसद के सामने ला सकती है।

    GST कानून 2016 में संविधान के 101वें संशोधन के साथ अस्तित्व में आया था और 2017 में इसे लागू किया गया। मौजूदा कानून के तहत गंभीर टैक्स अपराधों में गिरफ्तारी का प्रावधान है। इनमें फर्जी बिल बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल करना और जानबूझकर टैक्स चोरी जैसे मामले शामिल हैं। CGST Act की धारा 69 के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। इसके लिए संबंधित अधिकारी के पास यह मानने का पर्याप्त आधार होना जरूरी है कि व्यक्ति ने गंभीर GST अपराध किया है।

    सरकार ने वर्ष 2022 में गिरफ्तारी और जमानत को लेकर अधिकारियों के लिए दिशानिर्देश भी जारी किए थे। इनमें कहा गया था कि केवल कानून में गिरफ्तारी की अनुमति होने के आधार पर किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। कार्रवाई से पहले मामले की गंभीरता, संबंधित व्यक्ति की भूमिका और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है। अब प्रस्तावित बदलाव को लेकर चर्चा का एक प्रमुख कारण टैक्स अधिकारियों के अधिकारों के गलत इस्तेमाल से जुड़ी शिकायतें बताई जा रही हैं।

    पिछले करीब आठ से नौ महीनों से केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा चलने की बात कही गई है। कारोबारियों और कंपनियों की ओर से GST जांच और गिरफ्तारी को लेकर चिंता जताई जाती रही है। विशेष रूप से कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी को लेकर उद्योग जगत में सवाल उठते रहे हैं। सरकार ऐसा बदलाव चाहती है जिससे गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रहे, लेकिन कारोबारियों के बीच अनावश्यक डर की स्थिति न बने।

    GST कानून के तहत गिरफ्तारी के इस्तेमाल के आंकड़े भी सामने आए हैं। वर्ष 2021-22 से 2024-25 के बीच GST अपराधों के 72,393 मामले दर्ज हुए और केंद्रीय GST अधिकारियों ने 887 लोगों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़ा केवल केंद्रीय GST फॉर्मेशन से संबंधित है। इसमें राज्य GST अधिकारियों की ओर से की गई गिरफ्तारियां शामिल नहीं हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में गंभीर धोखाधड़ी और जानबूझकर किए गए अपराधों पर कार्रवाई जारी रखने की बात है, लेकिन GST अधिकारी स्वयं गिरफ्तारी की शक्ति का इस्तेमाल नहीं करेंगे। ऐसे मामलों में आपराधिक कानून के तहत कार्रवाई का रास्ता अपनाया जा सकता है। गंभीर और जानबूझकर किए गए फ्रॉड के मामलों में भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

    अब 7 अक्टूबर की GST काउंसिल बैठक पर नजर है। बैठक में गिरफ्तारी की शक्ति हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है। यदि प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो GST कानून में संशोधन की आवश्यकता होगी और सरकार इसे संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश कर सकती है। फिलहाल GST अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति समाप्त नहीं हुई है। यह अभी प्रस्ताव के स्तर पर है और अंतिम स्थिति GST काउंसिल की चर्चा, सरकार के फैसले तथा आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

  • जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ी, सस्ती कीमतों से वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ी

    जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की रफ्तार चार गुना बढ़ी, सस्ती कीमतों से वाहन खरीदने वालों की संख्या बढ़ी

    नई दिल्ली ।जीएसटी 2.0 लागू होने के बाद भारतीय ऑटो रिटेल बाजार में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उद्योग के अनुसार, अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच 11 महीनों में देश में तीन करोड़ से अधिक वाहनों का पंजीकरण हुआ। इस अवधि में वाहनों की बिक्री और पंजीकरण की वृद्धि दर करीब 20 प्रतिशत रही, जबकि इससे एक साल पहले समान अवधि में यह पांच प्रतिशत से भी कम थी।

    ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष साई गिरिधर के अनुसार, जीएसटी 2.0 के बाद ऑटो रिटेल की वृद्धि दर करीब चार गुना तक बढ़ी है। उनके मुताबिक, वाहन खरीदने की क्षमता बढ़ना यानी अफोर्डेबिलिटी मौजूदा समय में मांग को आगे बढ़ाने वाला सबसे महत्वपूर्ण कारण बनकर सामने आया है।

    उनका कहना है कि जीएसटी में बदलाव के बाद छोटे कारों, कम्यूटर दोपहिया वाहनों, ट्रैक्टरों और वाणिज्यिक वाहनों की ऑन-रोड लागत में स्थायी कमी आई। इन वाहन श्रेणियों पर बड़ी संख्या में उपभोक्ता निर्भर हैं। कीमतों में कमी का असर सिर्फ पहले से तय खरीद को आगे लाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इससे बाजार में नए ग्राहकों की भागीदारी भी बढ़ी।

    साई गिरिधर के मुताबिक, इस बदलाव के बाद पहली बार वाहन खरीदने की तैयारी कर रहे लोगों के साथ लंबे समय से खरीद टाल रहे ग्राहक भी दोबारा शोरूम पहुंचने लगे। इससे ऑटो बाजार में मांग का दायरा बढ़ा है और कई श्रेणियों में बिक्री के मजबूत आंकड़े सामने आए हैं।

    उन्होंने पिछले त्योहारी सीजन में दिखाई दी मजबूत मांग को भी इसी बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि यह तेजी केवल मौसमी गतिविधि नहीं रही। उनके अनुसार, मांग में आया बदलाव अब उद्योग के लिए नई सामान्य स्थिति का रूप लेता दिखाई दे रहा है।

    ऑटो क्षेत्र में जीएसटी 2.0 के असर को उन्होंने मौसमी के बजाय संरचनात्मक बताया। इसी वजह से बीते एक साल में उद्योग की अलग-अलग वाहन श्रेणियों ने अपने मजबूत बिक्री महीनों का रिकॉर्ड दर्ज किया। इससे बाजार में उपभोक्ता मांग के विस्तार के संकेत मिले हैं।

    दोपहिया वाहनों को व्यापक जन-आधारित मांग का प्रमुख संकेतक माना जाता है। गिरिधर ने बताया कि इस श्रेणी ने 2018 के बाद का अपना सर्वोच्च स्तर फिर हासिल किया है। इससे बड़े उपभोक्ता वर्ग के बीच वाहन खरीदने की क्षमता और रुचि में सुधार का संकेत मिलता है।

    यात्री वाहन बाजार में भी बदलाव देखने को मिला है। उनके अनुसार, पहली बार वैकल्पिक ईंधन आधारित वाहनों ने पेट्रोल वाहनों को पीछे छोड़ दिया। इसके अलावा कई वाहन श्रेणियों में ग्रामीण बाजारों की वृद्धि शहरी क्षेत्रों की तुलना में अधिक तेज रही।

    उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को भी ऑटो क्षेत्र में बढ़ती खपत से जोड़ा और कहा कि किफायती वाहन उपलब्ध कराने पर जोर देने से मांग और विकास का नया चक्र शुरू हुआ है। हालांकि, उद्योग के सामने चुनौतियां अभी बनी हुई हैं।

    वाहन निर्माता कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, कमोडिटी लागत और मुद्रा विनिमय दरों से जुड़े दबाव का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उद्योग के लिए बढ़ी हुई मांग को बनाए रखना कीमतों और लागत के संतुलन पर भी निर्भर करेगा।

    पिछले एक साल के अनुभव को लेकर उद्योग का कहना है कि वाहन बाजार में मांग बढ़ाने के लिए किफायती कीमत सबसे प्रभावी कारकों में से एक साबित हुई है। जीएसटी 2.0 के बाद बढ़ी खरीद क्षमता ने ऑटो रिटेल को नई गति दी है।

  • यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को लेकर बड़ी सफाई, 96 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा शुल्क का असर

    यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को लेकर बड़ी सफाई, 96 प्रतिशत से ज्यादा ट्रांजैक्शन पर नहीं पड़ेगा शुल्क का असर

    नई दिल्ली ।यू पीआई भुगतान को लेकर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर और उस पर लगने वाले जीएसटी को लेकर उठ रही चिंताओं के बीच स्थिति स्पष्ट की गई है। नई व्यवस्था के तहत छोटे व्यापारियों और कम राशि वाले अधिकांश यूपीआई भुगतान पर एमडीआर का बोझ नहीं पड़ेगा।

    जानकारी के अनुसार, 2,000 रुपये तक के सभी व्यक्ति-से-व्यापारी यानी पी2एम यूपीआई ट्रांजैक्शन पर पहले की तरह शून्य एमडीआर लागू रहेगा। ऐसे भुगतान पर एमडीआर नहीं होने के कारण उससे संबंधित जीएसटी का भी कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

    सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2,000 रुपये तक के भुगतान यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का 96 प्रतिशत से अधिक हिस्सा हैं। इसका मतलब है कि यूपीआई के माध्यम से होने वाले अधिकांश व्यापारी भुगतान एमडीआर और उससे जुड़े जीएसटी दायित्व से बाहर रहेंगे।

    छोटे व्यापारियों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी रखा गया है। जिन व्यापारियों की मासिक यूपीआई प्राप्तियां एक लाख रुपये तक हैं, उन्हें एमडीआर का भुगतान नहीं करना होगा। इसलिए इस श्रेणी के व्यापारियों पर एमडीआर के संबंध में जीएसटी लगने का सवाल भी नहीं उठता।

    एमडीआर का उद्देश्य यूपीआई भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच भुगतान प्रक्रिया की लागत को पूरा करना है। इसमें बैंक, भुगतान सेवा प्रदाता और यूपीआई एप प्रदाता जैसे भागीदार शामिल होते हैं। एमडीआर सरकार या यूपीआई व्यवस्था संचालित करने वाली संस्था द्वारा लगाया जाने वाला कोई कर नहीं है।

    नई व्यवस्था में 2,000 रुपये से अधिक के पी2एम यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि, 75,000 रुपये या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन के लिए एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन निर्धारित की गई है।

    कुछ आवश्यक और कम मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था रखी गई है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन पर पांच रुपये प्रति ट्रांजैक्शन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में भुगतान लागत को सीमित और पूर्वानुमेय रखना है।

    एमडीआर पर जीएसटी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। यदि किसी व्यापारी को एमडीआर पर जीएसटी का भुगतान करना पड़ता है, तो वह अन्य इनपुट टैक्स की तरह इस राशि को अपनी जीएसटी देनदारी के विरुद्ध समायोजित कर सकता है। ऐसे में यह राशि सीधे तौर पर व्यापारी की अंतिम लागत नहीं बनती।

    दूसरी ओर, व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी पी2पी यूपीआई भुगतान पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। इसमें भुगतान की राशि कितनी भी हो, पी2पी ट्रांजैक्शन पर एमडीआर लागू नहीं होगा।

    इस व्यवस्था का असर मुख्य रूप से 2,000 रुपये से अधिक के कुछ पी2एम भुगतान पर पड़ेगा। वहीं कम राशि वाले भुगतान और एक लाख रुपये तक की मासिक यूपीआई प्राप्ति वाले छोटे व्यापारी इससे बाहर रहेंगे।

    कुल मिलाकर, यूपीआई मर्चेंट ट्रांजैक्शन के बड़े हिस्से पर शून्य एमडीआर की व्यवस्था जारी रहेगी। 96 प्रतिशत से अधिक मर्चेंट ट्रांजैक्शन 2,000 रुपये तक के होने के कारण अधिकांश डिजिटल भुगतान इस शुल्क व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगे।

  • सोने के गहने खरीदना अब और महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा, 75 रुपए पर 18% GST भी अलग

    सोने के गहने खरीदना अब और महंगा, हॉलमार्किंग शुल्क 67% बढ़ा, 75 रुपए पर 18% GST भी अलग


    नई दिल्ली। सोने की बढ़ती कीमतों के बीच आभूषण खरीदने वालों की लागत में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस 45 रुपए से बढ़ाकर 75 रुपए प्रति आर्टिकल कर दी है। यानी प्रति आभूषण 30 रुपए की बढ़ोतरी हुई है और बेस शुल्क करीब 66.7% बढ़ गया है। नई दर 14 सितंबर से लागू हो चुकी है। हालांकि, चांदी के आभूषणों की हॉलमार्किंग फीस 35 रुपए प्रति आर्टिकल ही रखी गई है।

    खरीदार के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि 75 रुपए हॉलमार्किंग शुल्क ही अंतिम राशि नहीं है। BIS के नियमों के अनुसार इस फीस पर लागू टैक्स अलग से देना होता है। BIS की उपभोक्ता जागरूकता सामग्री में हॉलमार्किंग शुल्क पर 18% GST का उल्लेख है। इस हिसाब से 75 रुपए पर 18% GST जोड़ने के बाद प्रति आभूषण प्रभावी शुल्क 88.50 रुपए हो जाता है।

    वजन नहीं, आभूषण की संख्या से तय होती है फीस

    BIS के अनुसार हॉलमार्किंग शुल्क आभूषण के वजन के आधार पर नहीं, बल्कि प्रति आर्टिकल लिया जाता है। यानी आभूषण एक ग्राम का हो या उससे अधिक वजन का, शुल्क का आधार उसका वजन नहीं बल्कि एक आर्टिकल होना है।

    इसका सीधा असर हल्के आभूषण खरीदने वालों पर पड़ सकता है। कम वजन के आभूषणों में हॉलमार्किंग शुल्क प्रति ग्राम के हिसाब से तुलनात्मक रूप से ज्यादा बैठता है। त्योहारी सीजन में अंगूठी, नोज पिन, चेन या दूसरे हल्के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों के लिए यह अतिरिक्त लागत ज्यादा महसूस हो सकती है।

    ज्वेलर्स बोले- बढ़ा हुआ खर्च आखिरकार ग्राहक तक पहुंचता है

    कूचा महाजनी, चांदनी चौक स्थित ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल का कहना है कि हॉलमार्किंग चार्ज हो या किसी अन्य तरह का शुल्क और टैक्स, उसका भुगतान अंततः ग्राहक से ही लिया जाता है और संबंधित सरकारी विभाग में जमा कराया जाता है।

    उनके मुताबिक, एक तरफ पहले से कई तरह के टैक्स और शुल्क लागू हैं, वहीं अब हॉलमार्किंग की लागत भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि कारोबार की लागत में होने वाली हर बढ़ोतरी किसी न किसी रूप में ग्राहक की जेब तक पहुंचती है।

    2021 में 256 जिलों से शुरू हुई थी अनिवार्य हॉलमार्किंग

    सोने के आभूषणों के लिए अनिवार्य हॉलमार्किंग व्यवस्था जून 2021 में 256 जिलों से शुरू की गई थी। इसके बाद अलग-अलग चरणों में इसका दायरा लगातार बढ़ाया गया।

    मार्च 2026 में छठे चरण के तहत सात और जिले इसमें शामिल किए गए। इसके बाद अनिवार्य हॉलमार्किंग के दायरे वाले जिलों की संख्या बढ़कर 380 हो गई। यानी बीते वर्षों में हॉलमार्किंग व्यवस्था का विस्तार हुआ है और अब प्रति आर्टिकल लगने वाली फीस में भी बड़ी बढ़ोतरी की गई है।

    इस बदलाव के बाद सोने के आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों को आभूषण की कीमत के अलावा हॉलमार्किंग शुल्क और उस पर लागू GST की लागत भी ध्यान में रखनी होगी।