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  • मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    मई में जीएसटी कलेक्शन में 3.2% की बढ़ोतरी, आयात और सेवा क्षेत्र की मजबूती से राजस्व को मिला सहारा

    नई दिल्ली । मई माह में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में स्थिर वृद्धि दर्ज की गई है, जो अर्थव्यवस्था में मांग और कर अनुपालन की मजबूती को दर्शाती है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के बावजूद भारत का सकल जीएसटी संग्रह लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के स्तर के करीब पहुंच गया है। यह वृद्धि ऐसे समय में सामने आई है जब कई वैश्विक अर्थव्यवस्थाएं धीमी विकास दर और अनिश्चितता का सामना कर रही हैं।
    आंकड़ों के अनुसार मई 2026 में सकल जीएसटी संग्रह 1,94,184 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 1,88,172 करोड़ रुपये की तुलना में 3.2 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है। वहीं शुद्ध जीएसटी राजस्व 1,66,904 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जिसमें 3.3 प्रतिशत की सालाना वृद्धि हुई है। रिफंड को समायोजित करने के बाद राजस्व वृद्धि लगभग 9 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो कर संग्रह प्रणाली की मजबूती का संकेत है।

    महीने के दौरान रिफंड की राशि भी बढ़कर 27,281 करोड़ रुपये रही, हालांकि इसके बावजूद कुल राजस्व में सकारात्मक रुझान देखने को मिला। घरेलू कर संग्रह में हल्की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन आयात से प्राप्त कर राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि ने कुल आंकड़ों को संतुलित बनाए रखा। आयात आधारित जीएसटी संग्रह 19.1 प्रतिशत बढ़कर 59,654 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो वैश्विक व्यापार गतिविधियों में मजबूती और आयात मांग में सुधार का संकेत देता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रवृत्ति घरेलू खपत और औद्योगिक गतिविधियों में निरंतरता को दर्शाती है।

    वहीं दूसरी ओर घरेलू जीएसटी संग्रह 1,34,530 करोड़ रुपये रहा, जिसमें 2.6 प्रतिशत की कमी देखी गई, लेकिन सेवा क्षेत्र और वस्तु श्रेणियों में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। सेवा क्षेत्र में 22.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि और वस्तु श्रेणियों में सकारात्मक रुझान यह दर्शाते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था में खपत आधारित विकास मॉडल मजबूत स्थिति में है। सभी प्रमुख सेवा क्षेत्रों में वृद्धि दर्ज की गई, जो आर्थिक गतिविधियों की व्यापकता को दर्शाता है।

    राज्यों के स्तर पर भी जीएसटी संग्रह में विविध प्रदर्शन देखने को मिला। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, गुजरात, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्यों में कर संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से केरल और हरियाणा जैसे राज्यों ने दोहरे अंकों में वृद्धि के साथ बेहतर प्रदर्शन किया है। यह संकेत देता है कि राज्यों की अर्थव्यवस्थाओं में भी गतिविधियां तेज हो रही हैं और कर आधार का विस्तार हो रहा है।

    वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में कुल सकल जीएसटी संग्रह 4.37 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6.2 प्रतिशत अधिक है। इसी अवधि में शुद्ध राजस्व में भी 5.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। अप्रैल माह में भी रिकॉर्ड संग्रह देखने को मिला था, जो यह दर्शाता है कि लगातार दो महीनों से राजस्व वृद्धि का रुझान मजबूत बना हुआ है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रदर्शन वित्त वर्ष के निर्धारित कर लक्ष्यों को हासिल करने में मददगार साबित होगा और देश की आर्थिक स्थिरता को और मजबूत करेगा।

  • पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    पेट्रोल-डीजल पर समान कर और आर्थिक राहत के लिए सांसद पात्रा ने जीएसटी परिषद में चरणबद्ध योजना की मांग की

    नई दिल्ली।पेट्रोल और डीजल को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की मांग राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर तेज हो रही है। राज्यसभा सांसद डॉ. सस्मित पात्रा ने इस संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री से मुलाकात कर विस्तृत प्रस्ताव सौंपा और इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर संरचित और व्यापक चर्चा शुरू करने की अपील की। उनके अनुसार, पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल करना केवल कर सुधार का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता, उद्योग और परिवहन क्षेत्र में आर्थिक संतुलन स्थापित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

    डॉ. पात्रा ने अपने प्रस्ताव में संविधान के अनुच्छेद 279ए(5) का हवाला देते हुए कहा कि पेट्रोलियम उत्पादों को भविष्य में जीएसटी के दायरे में लाने का प्रावधान पहले से मौजूद है। हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया कि पहले भी इस विषय पर जीएसटी परिषद में चर्चा हुई थी, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और महंगाई की चुनौतियों को देखते हुए अब इस पर नए सिरे से व्यावहारिक और संतुलित विचार करना आवश्यक है।

    सांसद ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों का सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत, लॉजिस्टिक्स खर्च, कृषि उत्पादन लागत, एमएसएमई सेक्टर के संचालन और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। वर्तमान में अलग-अलग राज्यों में वैट की अलग-अलग दरें होने के कारण जीएसटी का उद्देश्य—एक समान कर और एकीकृत बाजार—पूरी तरह पूरा नहीं हो पा रहा है। उनके अनुसार, यदि पेट्रोल-डीजल को चरणबद्ध तरीके से जीएसटी में शामिल किया जाता है तो माल ढुलाई और सप्लाई चेन की लागत में कमी आएगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी और आम लोगों, किसानों तथा ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को राहत मिलेगी।

    ओडिशा को उदाहरण के रूप में लेते हुए सांसद पात्रा ने बताया कि यह राज्य खनन, उद्योग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों का बड़ा केंद्र है। यदि यहां के उद्योग और व्यवसाय जीएसटी के तहत समान कर व्यवस्था का लाभ उठाएं, तो न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी स्थिरता और पारदर्शिता मिलेगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि राज्यों को मिलने वाले राजस्व पर ध्यान रखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को तुरंत जीएसटी में शामिल करने की बजाय चरणबद्ध और संतुलित मॉडल अपनाया जाए।

    डॉ. पात्रा ने जीएसटी परिषद को सुझाव दिया कि इसके लिए अलग जीएसटी स्लैब, राज्यों के लिए ट्रांजिशनल मुआवजा, सीमित अवधि का उपकर (सेस) और वित्तीय स्थिरता के लिए तय फॉर्मूला तैयार करने पर विचार किया जाए। उन्होंने वित्त मंत्री से आग्रह किया कि इस मुद्दे पर सभी राज्यों के साथ व्यापक चर्चा कराई जाए और एक तकनीकी व वित्तीय विशेषज्ञ समूह का गठन किया जाए, जो चरणबद्ध तरीके से पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल करने का मॉडल तैयार कर सके और राष्ट्रीय सहमति बनाने में मदद करे।

    डॉ. सस्मित पात्रा ने कहा कि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाना केवल कर सुधार नहीं होगा, बल्कि यह देश में आर्थिक संतुलन, उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और आम लोगों को महंगाई से राहत देने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगा। उनका मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, आपूर्ति श्रृंखला की लागत कम होगी और भारत का एकीकृत बाजार अधिक प्रभावी तरीके से काम करेगा।

  • फरवरी में जीएसटी राजस्व संग्रह 8.1 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये

    फरवरी में जीएसटी राजस्व संग्रह 8.1 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये


    नई दिल्ली।
    देश का सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) राजस्व संग्रह फरवरी में सालाना आधार पर 8.1 फीसदी बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है। इससे पिछले महीने जनवरी में जीएसटी राजस्व संग्रह 1.71 लाख करोड़ रुपये रहा था। बीते वर्ष की समान अवधि में यह 1.69 लाख करोड़ रुपये था।

    जीएसटी महानिदेशालय ने रविवार को जारी आंकड़ों में बताया कि फरवरी महीने में सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जीएसटी राजस्व संग्रह में आयात से प्राप्त राजस्व में हुई उच्च वृद्धि का मुख्य योगदान रहा है। आंकड़ों के अनुसार फरवरी के कुल जीएसटी राजस्व संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 37,473 करोड़ रुपये रहा है, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 45,900 करोड़ रुपये रहा है। इस दौरान एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 1,00,236 करोड़ रुपये रहा।

    आंकड़ों के मुताबिक फरवरी महीने में शुद्ध जीएसटी राजस्व संग्रह 1.61 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा है जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 7.9 फीसदी अधिक है। शुद्ध उपकर राजस्व 5,063 करोड़ रुपये रहा है, जो पिछले साल फरवरी में 13,481 करोड़ रुपये रहा था। फरवरी में 22,595 करोड़ रुपये का रिफंड जारी किया गया, जो सलाना आधार पर 10.2 फीसदी की वृद्धि है।

    वित्त वर्ष 2025-26 की शुरुआत से लेकर अब तक (1 अप्रैल, 2025 से 1 फरवरी, 2026 तक) जीएसटी राजस्व संग्रह 20,27,033 करोड़ रुपये रहा है। इसमें सालाना आधार पर 8.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में जीएसटी राजस्व संग्रह 18,71,670 करोड़ रुपये था। फरवरी में महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और कर्नाटक में सबसे अधिक जीएसटी राजस्व संग्रह दर्ज किया गया है। लद्दाख, मिजोरम, नागालैंड और मणिपुर उन राज्यों में शामिल थे जहां सबसे कम जीएसटी राजस्व संग्रह हुआ है।

  • राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र

    राहुल-सीतारमण के बीच संसद में तीखी बहस: भारत बेचने के आरोप पर गरमा गया बजट सत्र


    नई दिल्ली। लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान विपक्ष और केंद्र सरकार के बीच जोरदार टकराव देखने को मिला। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अमेरिका-भारत ट्रेड डील को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने भारत माता को बेच दिया और अब अमेरिका तय करेगा कि हम किससे तेल खरीदेंगे।

    सीतारमण का पलटवार: कांग्रेस ने भारत को बेचा
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने राहुल के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि भारत को बेचने का असली जिम्मेदार कांग्रेस है। उन्होंने याद दिलाया कि बाली में जाकर कांग्रेस ने सौदा किया था और किसानों के हक से समझौता किया। मोदी सरकार ने 2014 में विश्व व्यापार संगठन में जाकर इसे सुधारा।

    सीतारमण ने बजट पर सवाल उठाने वाले टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी के GST आरोपों को भी खारिज किया और कहा कि बंगाल में पेट्रोल दिल्ली से 10रुपए ज्यादा महंगा है, जिसे कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि कम्युनिस्ट शासित राज्यों में आर्थिक विकास सबसे नीचे है और वहां उद्योग नहीं टिकते।

    राहुल के अडाणी और अमेरिका केस वाले आरोप
    राहुल गांधी ने अडाणी पर अमेरिका में चल रहे केस का जिक्र किया और कहा कि यह मोदी पर दबाव बनाने का तरीका है। केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल से सबूत पेश करने को कहा और संसद में विशेषाधिकार नोटिस देने की बात कही।

    सीतारमण ने संसद में मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
    निर्मला सीतारमण ने कहा कि बजट का मुख्य फोकस इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और MSME के लिए सहायक नीतियों पर है। उन्होंने कहा कि हेल्थकेयर, शिक्षा और लाइफ इंश्योरेंस पर जीएसटी हटाया गया है।

    ओवैसी ने तेल और विदेश नीति पर सवाल उठाया
    एआईएमआईएमके असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि किसी “गोरी चमड़ी वाले” को यह तय करने का अधिकार नहीं कि भारत किससे तेल खरीदे। उन्होंने ऑपरेशन इंसाफ, हाफिज सईद, मसूद अजहर और लखवी को भारत लाने की मांग भी की।

  • Year Ender 2025: मिडिल क्लास के लिए राहत, इनकम टैक्स और GST सुधार से बढ़ी बचत

    Year Ender 2025: मिडिल क्लास के लिए राहत, इनकम टैक्स और GST सुधार से बढ़ी बचत

    नई दिल्ली। वर्ष 2025 मिडिल क्लास के लिए कई मामलों में शानदार साबित हुआ। इस साल सरकार ने टैक्स और जीएसटी में बड़े सुधार किए, जिससे आम आदमी की जेब पर असर पड़ा और वित्तीय बोझ काफी हद तक कम हुआ। सबसे ज्यादा राहत इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव और जीएसटी 2.0 रिफॉर्म से मिली।

    इनकम टैक्स में बड़ी राहत
    केंद्र सरकार ने आम आदमी पर टैक्स का बोझ कम करने के लिए इस साल कई फैसले लिए। बजट 2025 में सरकार ने इनकम टैक्स छूट की लिमिट 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी। इसके साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन के तहत मिलने वाली 75,000 रुपये की छूट को मिला दिया जाए तो यह बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो जाती है। इसका मतलब है कि कोई भी सैलरीड क्लास 12.75 लाख रुपये तक की आमदनी पर इनकम टैक्स छूट का दावा कर सकता है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की छूट केवल सैलरीड क्लास को ही मिलेगी।

    जीएसटी 2.0 से मिडिल क्लास को बड़ा फायदा
    सरकार ने 2025 में जीएसटी स्लैब्स में भी बड़ा बदलाव किया। पुराने चार स्लैब 5%, 12%, 18% और 28% को घटाकर अब केवल दो स्लैब 5% और 18% रह गए हैं। वहीं, लग्जरी और सिन गुड्स पर जीएसटी की दर 40% कर दी गई।

    453 चीजों पर GST रेट में बदलाव
    नए जीएसटी रेट लागू होने के बाद 453 चीजों की दरों में बदलाव हुआ, जिनमें से 413 चीजों की दर में कमी हुई। करीब 295 जरूरी चीजों पर जीएसटी रेट 12% से घटाकर 5% या जीरो कर दिया गया। 1,200 सीसी या उससे कम की पेट्रोल कारों और 1,500 सीसी या कम की डीजल कारों पर जीएसटी 28% से घटाकर 18% की गई। इसी तरह, 350 सीसी या उससे कम की बाइक पर भी जीएसटी 28% से घटाकर 18% कर दी गई।

    लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर 40% GST
    लग्जरी गाड़ियों और बाइक पर जीएसटी 40% तय की गई। इसके साथ ही कारों पर सेस को भी खत्म कर दिया गया। इन सुधारों का उद्देश्य देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को बढ़ाना था। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 की दूसरी तिमाही में देश की ग्रोथ रेट 8.2% दर्ज की गई, जो पिछली कई तिमाहियों में सबसे तेज है।

    टोल प्लाजा पर भी मिली राहत
    साल 2025 में आम लोगों के लिए टोल टैक्स का बोझ भी कम किया गया। सरकार ने एनुअल पास का ऐलान किया, जिसे 15 अगस्त से लागू कर दिया गया। फास्टैग एनुअल पास की कीमत 3,000 रुपये है। इसके तहत कोई भी वाहन चालक सालभर में 200 टोल प्लाजा पार कर सकता है। इस योजना से एक टोल प्लाजा पार करने की कीमत घटकर केवल 15 रुपये रह जाती है, जिससे हाइवे पर सफर पहले की तुलना में काफी सस्ता हो गया है।
    साल 2025 मिडिल क्लास के लिए राहत और फायदे लेकर आया। इनकम टैक्स में छूट, GST स्लैब्स में कमी और टोल पास सुविधा ने आम आदमी की जेब पर सकारात्मक असर डाला। सरकार के ये कदम आर्थिक दृष्टि से आम जनता को सहारा देने और खर्च में कटौती करने में मददगार साबित हुए हैं।