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  • 3 साल से अधूरी घोषणाओं पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षक दिवस पर भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन

    3 साल से अधूरी घोषणाओं पर फूटा अतिथि शिक्षकों का गुस्सा, शिक्षक दिवस पर भोपाल में होगा बड़ा प्रदर्शन


    भोपाल । शिक्षक दिवस के मौके पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर बड़ा प्रदर्शन करने जा रहे हैं। प्रदेशभर के हजारों अतिथि शिक्षक शनिवार 5 सितंबर को शाहजहानी पार्क में जुटेंगे और सरकार से लंबे समय से की जा रही घोषणाओं को लागू करने की मांग करेंगे। आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा अतिथि शिक्षकों को स्थायी रोजगार देने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने का है। संगठन का कहना है कि कई सालों से स्कूलों में सेवाएं देने के बावजूद अतिथि शिक्षकों के सामने हर साल रोजगार का संकट बना रहता है और सरकार की ओर से किए गए वादे अब तक जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।

    अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार के मुताबिक 2 सितंबर 2023 को भोपाल के लाल परेड मैदान में अतिथि शिक्षक पंचायत आयोजित हुई थी। इस दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि शिक्षकों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। इनमें वार्षिक अनुबंध लागू करने बीच सत्र में अतिथि शिक्षकों को बेरोजगार नहीं करने गुरुजियों की तर्ज पर नीति बनाकर नियमित करने और सीधी भर्ती में बोनस अंक देकर स्थायी रोजगार देने जैसी बातें शामिल थीं। संगठन का दावा है कि इन घोषणाओं को तीन साल पूरे होने के बावजूद अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।

    अतिथि शिक्षक संगठन का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूलों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में अब केवल आश्वासन के बजाय सरकार से ठोस नीति की उम्मीद है। संगठन के मुताबिक प्रदेश में करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को सरकार की घोषणाओं पर अमल होने का सीधा फायदा मिल सकता है। उनका सवाल है कि अगर सरकार ने शिक्षकों के हित में घोषणाएं की थीं तो उन्हें लागू करने में इतनी देरी क्यों हो रही है। अतिथि शिक्षक इसे अपने रोजगार और भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बता रहे हैं।

    संगठन की ओर से यह भी कहा गया है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री मोहन यादव भी अलग-अलग मौकों पर अतिथि शिक्षकों को स्थायी करने के समर्थन में अपनी बात रख चुके हैं। ऐसे में संगठन सरकार से मांग कर रहा है कि वर्षों से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के लिए ऐसी नीति बनाई जाए जिससे उनका रोजगार सुरक्षित हो सके और उन्हें हर सत्र में अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।

    इसी बीच स्कूल शिक्षा विभाग में सात हजार से ज्यादा पदों पर होने वाली नई नियुक्तियों को लेकर भी अतिथि शिक्षकों के बीच चिंता है। हालांकि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष का दावा है कि विभाग ने नई नियुक्तियों और वर्तमान व्यवस्था के बीच ऐसा तालमेल बैठाया है जिससे जिलों में पहले से काम कर रहे अतिथि शिक्षकों के रोजगार पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसके बावजूद संगठन चाहता है कि सरकार स्थिति को स्पष्ट करे और लंबे समय से सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।

    आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। पुनर्गठन के तहत स्वाति श्रीवास्तव को अतिथि शिक्षक समन्वय समिति के महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। संगठन का कहना है कि महिला अतिथि शिक्षकों की आवाज को भी आंदोलन में मजबूती से उठाया जाएगा।

    अब शिक्षक दिवस के दिन होने वाला यह प्रदर्शन सरकार के लिए भी अहम माना जा रहा है। अतिथि शिक्षक लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाते रहे हैं और इस बार तीन साल पुरानी घोषणाओं को केंद्र में रखकर आंदोलन किया जा रहा है। ऐसे में शाहजहानी पार्क में जुटने वाले अतिथि शिक्षकों की संख्या और सरकार की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सभी की नजर रहेगी। सबसे बड़ा सवाल यही है कि शिक्षक दिवस पर आंदोलन के बाद क्या अतिथि शिक्षकों को उनके भविष्य को लेकर कोई ठोस आश्वासन मिलता है या फिर एक बार फिर उन्हें इंतजार करना पड़ेगा।

  • भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    भोपाल में अतिथि शिक्षकों का बड़ा प्रदर्शन, वादों पर अमल न होने से नाराजगी, आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    भोपाल। अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेश के विभिन्न जिलों से पहुंचे हजारों अतिथि शिक्षकों ने बुधवार को राजधानी भोपाल में जोरदार प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने सरकार पर चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा न करने का आरोप लगाया और लंबित मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की। उन्होंने साफ कहा कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के जरिए भविष्य सुरक्षित करने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक इन पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे शिक्षकों में गहरा असंतोष है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अतिथि शिक्षकों को न्याय दिलाने की बात कही थी, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई निर्णय सामने नहीं आया है।

    सरकार पर वादों से मुकरने का आरोप

    संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने कहा कि सरकार वार्षिक अनुबंध लागू करने के अपने वादे से पीछे हटती नजर आ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि 30 अप्रैल के बाद कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के सामने बेरोजगारी का संकट खड़ा हो सकता है। उन्होंने यह भी मांग रखी कि सीधी भर्ती, प्रमोशन और ट्रांसफर से प्रभावित अनुभवी अतिथि शिक्षकों को रिक्त पदों पर प्राथमिकता के आधार पर समायोजित किया जाए।

    ई-अटेंडेंस और भुगतान में समस्याएं उठाईं

    प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी खामियों पर चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बार तकनीकी कारणों से उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती, जिससे मानदेय कट जाता है। साथ ही कुछ मामलों में सितंबर महीने का भुगतान भी अभी तक लंबित है।

    भर्ती प्रक्रिया में अनुभव को लेकर उठे सवाल
    बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया में मौजूद विसंगतियों को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। वर्तमान में स्कोर कार्ड में केवल 5 साल का अनुभव जोड़ा जा रहा है, जबकि इसे बढ़ाकर हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100 अंक) किया जाना चाहिए। इसके अलावा 2008 और 2011 की पात्रता परीक्षाओं के अंक भी शामिल करने की मांग की गई। प्रांत अध्यक्ष तूफान शर्मा ने कहा कि अतिथि शिक्षक सभी आवश्यक योग्यताओं को पूरा करते हैं, इसलिए उनके अनुभव के आधार पर उन्हें न्याय मिलना चाहिए।

    मुख्य मांगें इस प्रकार हैं
    नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।
    शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% की छूट दी जाए।
    स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिले, साथ ही 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।
    12 महीने का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन सुनिश्चित किया जाए।
    बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश प्रदान किए जाएं।
    ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का शीघ्र भुगतान किया जाए।
    तकनीकी समस्या होने पर ऑफलाइन उपस्थिति को मान्यता दी जाए।
    पुराने आश्वासनों को लागू करने की मांग तेज
    प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि अतिथि शिक्षकों को लेकर पहले कई घोषणाएं की गई थीं और इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिला था। लेकिन अब उन वादों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे शिक्षकों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।