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  • म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा

    म्यूल हंट 1.0 बना साइबर ठगों का काल, गुजरात पुलिस ने करोड़ों की ठगी का नेटवर्क तोड़ा


    नई दिल्ली । साइबर अपराध के बढ़ते खतरे के बीच गुजरात पुलिस ने एक ऐसा अभियान चलाया है जिसने ऑनलाइन ठगी के बड़े नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में संचालित ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करते हुए हजारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। इस अभियान को राज्य में साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी कार्रवाई माना जा रहा है।

    डिजिटल युग में साइबर ठग नए-नए तरीकों से लोगों की मेहनत की कमाई पर हाथ साफ कर रहे हैं। फर्जी कॉल्स, ऑनलाइन निवेश के झांसे, बैंकिंग फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे हथकंडों के जरिए अपराधी लोगों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में गुजरात पुलिस ने तकनीक और डेटा इंटेलिजेंस का सहारा लेते हुए साइबर अपराधियों के पूरे नेटवर्क को निशाने पर लिया।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 के तहत गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से प्राप्त आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा के आधार पर ऐसे म्यूल अकाउंट्स और उनसे जुड़े लोगों की पहचान की गई जो साइबर अपराध से अर्जित धन को निकालने और आगे पहुंचाने का काम कर रहे थे।

    अभियान के दौरान राज्यभर में 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई तथा कुल 4,052 साइबर अपराधों की पहचान की गई जिनमें 491 मामले गुजरात से जुड़े पाए गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस अभियान में 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।

    गुजरात पुलिस ने इस अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रिस्क स्कोरिंग सिस्टम का भी उपयोग किया। इस तकनीक की मदद से संदिग्ध खातों की पहचान पहले से अधिक सटीक तरीके से की जा रही है ताकि साइबर अपराधियों तक तेजी से पहुंचा जा सके।

    साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि पुलिस ने ऐसे खातों को चिह्नित किया जो सीधे साइबर ठगी की रकम प्राप्त करते थे और बाद में एटीएम या चेक के माध्यम से पैसे निकालते थे। विस्तृत डेटाबेस तैयार कर इन खातों और उनसे जुड़े नेटवर्क पर एक साथ कार्रवाई की गई जिससे साइबर अपराध के बड़े गिरोहों का खुलासा हुआ।

    साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आम लोगों की सतर्कता भी इस लड़ाई में बेहद महत्वपूर्ण है। किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करनी चाहिए। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती और ऐसे नाम पर आने वाले कॉल पूरी तरह फर्जी होते हैं।

    ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0 की सफलता के बाद गुजरात सरकार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करते हुए 2 जून 2026 से ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0 भी शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य साइबर ठगी के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना और डिजिटल दुनिया को आम नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित बनाना है।

  • गुजरात के होटल में युवती की हत्या: प्रेमी पर गला रेतने का आरोप, पुलिस अभिरक्षा में हुई वारदात से उठे सवाल

    गुजरात के होटल में युवती की हत्या: प्रेमी पर गला रेतने का आरोप, पुलिस अभिरक्षा में हुई वारदात से उठे सवाल


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश के Shivpuri जिले से लापता एक युवती की गुजरात में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार युवती की हत्या का आरोप उसके साथ बरामद किए गए युवक पर है। घटना गांधीनगर के एक होटल में उस समय हुई, जब दोनों को पुलिस टीम गुजरात से शिवपुरी वापस लेकर आ रही थी। इस घटना ने पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी रजनी धाकड़ (21) और संतोष जाटव (25) 7 जून की रात अपने घरों से लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों के गुजरात में होने की जानकारी मिली।

    इसके बाद देहात थाना की एक टीम, जिसमें दो पुलिसकर्मी और युवती के परिजन शामिल थे, गुजरात रवाना हुई। पुलिस के अनुसार 11 जून को दोनों को गुजरात के राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र में एक फैक्ट्री के पास स्थित झोपड़ी से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस टीम दोनों को शिवपुरी वापस लेकर रवाना हुई।

    वापसी के दौरान लंबी यात्रा और थकान के कारण टीम ने गांधीनगर क्षेत्र में एक होटल में रुकने का निर्णय लिया। परिजनों के अनुसार सभी लोग एक ही कमरे में ठहरे हुए थे। रात के दौरान अचानक चीखने की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुली। मौके पर देखा गया कि युवती गंभीर रूप से घायल थी, जबकि संतोष जाटव भी खुद को चोट पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।

    पुलिस के अनुसार युवती को तत्काल बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं आरोपी युवक को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

    घटना के बाद Chiloda Police Station ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और होटल में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रेमी युगल को गुजरात से लाने गई टीम में महिला पुलिसकर्मी क्यों शामिल नहीं थी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि होटल में ठहरने के दौरान सुरक्षा संबंधी क्या इंतजाम किए गए थे और आरोपी के पास कथित तौर पर धारदार हथियार कैसे पहुंचा।

    प्रारंभिक जानकारी के आधार पर पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस टीम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल के पालन से जुड़े सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

    फिलहाल युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि आरोपी युवक की चिकित्सकीय निगरानी में पूछताछ की जाएगी। मामले की जांच जारी है। मध्य प्रदेश के Shivpuri जिले से लापता एक युवती की गुजरात में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार युवती की हत्या का आरोप उसके साथ बरामद किए गए युवक पर है। घटना गांधीनगर के एक होटल में उस समय हुई, जब दोनों को पुलिस टीम गुजरात से शिवपुरी वापस लेकर आ रही थी। इस घटना ने पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा व्यवस्था और प्रक्रियाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी रजनी धाकड़ (21) और संतोष जाटव (25) 7 जून की रात अपने घरों से लापता हो गए थे। परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की। मोबाइल लोकेशन के आधार पर दोनों के गुजरात में होने की जानकारी मिली।

    इसके बाद देहात थाना की एक टीम, जिसमें दो पुलिसकर्मी और युवती के परिजन शामिल थे, गुजरात रवाना हुई। पुलिस के अनुसार 11 जून को दोनों को गुजरात के राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र में एक फैक्ट्री के पास स्थित झोपड़ी से बरामद किया गया। इसके बाद पुलिस टीम दोनों को शिवपुरी वापस लेकर रवाना हुई।

    वापसी के दौरान लंबी यात्रा और थकान के कारण टीम ने गांधीनगर क्षेत्र में एक होटल में रुकने का निर्णय लिया। परिजनों के अनुसार सभी लोग एक ही कमरे में ठहरे हुए थे। रात के दौरान अचानक चीखने की आवाज सुनकर लोगों की नींद खुली। मौके पर देखा गया कि युवती गंभीर रूप से घायल थी, जबकि संतोष जाटव भी खुद को चोट पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।

    पुलिस के अनुसार युवती को तत्काल बचाने का प्रयास किया गया, लेकिन उसकी मृत्यु हो चुकी थी। वहीं आरोपी युवक को घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसका उपचार जारी है।

    घटना के बाद Chiloda Police Station ने आरोपी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और होटल में मौजूद लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं।

    मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि प्रेमी युगल को गुजरात से लाने गई टीम में महिला पुलिसकर्मी क्यों शामिल नहीं थी। इसके अलावा यह भी जांच का विषय बना हुआ है कि होटल में ठहरने के दौरान सुरक्षा संबंधी क्या इंतजाम किए गए थे और आरोपी के पास कथित तौर पर धारदार हथियार कैसे पहुंचा।

    प्रारंभिक जानकारी के आधार पर पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि पुलिस टीम की कार्यप्रणाली, सुरक्षा व्यवस्था और प्रोटोकॉल के पालन से जुड़े सभी बिंदुओं की समीक्षा की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।

    फिलहाल युवती के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि आरोपी युवक की चिकित्सकीय निगरानी में पूछताछ की जाएगी। मामले की जांच जारी है।

  • गुजरात के होटल में प्रेमिका की हत्या का आरोप, शिवपुरी ला रही पुलिस टीम के सामने हुई सनसनीखेज वारदात

    गुजरात के होटल में प्रेमिका की हत्या का आरोप, शिवपुरी ला रही पुलिस टीम के सामने हुई सनसनीखेज वारदात


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से जुड़े एक मामले में गुजरात के गांधी नगर जिले में ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पुलिस और आम लोगों को हैरान कर दिया है। पुलिस के अनुसार, शिवपुरी से फरार हुए एक प्रेमी जोड़े को गुजरात से बरामद कर वापस लाया जा रहा था। इसी दौरान होटल में ठहरने के समय युवती की मौत हो गई, जबकि युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार युवक पर युवती की हत्या करने और बाद में खुद को घायल करने का आरोप है। मामले की विस्तृत जांच जारी है।

    जानकारी के मुताबिक, शिवपुरी जिले के देहात थाना क्षेत्र के पिपरसमा गांव निवासी 21 वर्षीय रजनी धाकड़ और 25 वर्षीय संतोष जाटव 7 जून को घर से चले गए थे। परिजनों द्वारा गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन के आधार पर उनकी तलाश शुरू की। पुलिस टीम युवती के भाई को साथ लेकर गुजरात पहुंची और 11 जून को दोनों को राजकोट जिले के सांपर क्षेत्र से बरामद कर लिया।

    इसके बाद पुलिस टीम दोनों को लेकर शिवपुरी लौट रही थी। लंबी यात्रा के चलते टीम ने गांधी नगर से आगे उदयपुर हाईवे पर स्थित एक होटल में रात के समय विश्राम करने का निर्णय लिया। पुलिस के अनुसार, होटल के कमरे में पुलिसकर्मी, दोनों युवक-युवती और युवती का भाई समेत कुल छह लोग मौजूद थे।

    पुलिस सूत्रों के अनुसार, देर रात करीब दो से ढाई बजे के बीच कमरे में अचानक हलचल और चीख-पुकार की आवाज सुनाई दी। मौजूद लोगों के जागने पर युवती गंभीर रूप से घायल अवस्था में मिली, जबकि युवक भी घायल था। पुलिसकर्मियों ने तत्काल हस्तक्षेप किया और दोनों को अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में चिकित्सकों ने युवती को मृत घोषित कर दिया, जबकि युवक को गंभीर हालत में आईसीयू में भर्ती कराया गया है।

    घटना के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि युवक की तलाशी ली गई थी और उसके पास कोई धारदार वस्तु नहीं मिली थी। हालांकि, महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं होने के कारण युवती की तलाशी नहीं ली गई थी। ऐसे में घटना में प्रयुक्त धारदार हथियार कहां से आया, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।

    चूंकि घटना गुजरात के गांधी नगर जिले के अंतर्गत हुई है, इसलिए स्थानीय चिलोड़ा थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिवपुरी पुलिस के अधिकारियों ने भी घटना की पुष्टि की है और बताया है कि अब पूरे मामले की जांच गुजरात पुलिस के अधिकार क्षेत्र में की जा रही है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। होटल स्टाफ, प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस टीम के सदस्यों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। साथ ही होटल के सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, ताकि घटना की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।

    फिलहाल युवक अस्पताल में उपचाराधीन है और मामले की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही घटना के सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी।

  • सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई

    सूरत नवजात केस: तीसरी बार प्रेग्नेंट होने पर महिला ने नवजात को फेंका, CCTV से पहुंची पुलिस तक सच्चाई

    नई दिल्ली । गुजरात के सूरत शहर में एक नवजात शिशु के शव मिलने की घटना ने गंभीर चिंता और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है। यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय क्षेत्र में कचरे के ढेर से एक नवजात का शव बरामद हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में मामला संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को खंगाला गया और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान की कोशिश की गई।

    जांच के दौरान पुलिस को एक महिला की गतिविधि संदिग्ध लगी, जो काले रंग की प्लास्टिक थैली लेकर इलाके में जाती दिखाई दी थी। इसी सुराग के आधार पर पुलिस ने अपनी जांच को आगे बढ़ाया और तकनीकी विश्लेषण तथा स्थानीय पूछताछ के जरिए महिला की पहचान की। कई दिनों की जांच के बाद पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की।

    पूछताछ में जो तथ्य सामने आए, उन्होंने सभी को चौंका दिया। महिला पहले से दो बच्चों की मां है और उसके दोनों बच्चे वयस्क हो चुके हैं। उसने स्वीकार किया कि वह तीसरी बार गर्भवती हो गई थी और इस स्थिति को लेकर वह मानसिक तनाव में थी। उसे डर था कि समाज में उसकी बदनामी होगी और लोग इस बात को स्वीकार नहीं करेंगे। इसी डर और सामाजिक दबाव के कारण उसने नवजात को जन्म देने के बाद उसे काले प्लास्टिक बैग में डालकर कचरे में फेंक दिया।

    इस घटना के बाद पूरे इलाके में दुख और गुस्से का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाएं समाज में बढ़ते मानसिक दबाव और जागरूकता की कमी को भी दर्शाती हैं। कई सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में महिलाओं को उचित परामर्श और सहायता मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के चरम कदम उठाने से बच सकें।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और नवजात की मृत्यु के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि घटना के समय परिस्थितियां क्या थीं और इसमें अन्य कोई पहलू तो शामिल नहीं है।

    यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक दबाव और मानसिक तनाव की गंभीर स्थिति को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और सहायता तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।

    इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या समाज में ऐसे हालातों से जूझ रहे लोगों के लिए पर्याप्त समर्थन मौजूद है या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ इस घटना से जुड़े अन्य तथ्य भी सामने आ सकते हैं।

  • टेक्नोलॉजी से बदली तस्वीर-गुजरात में हजारों चोरी हुए मोबाइल लौटे, पुलिस ने बनाया रिकॉर्ड

    टेक्नोलॉजी से बदली तस्वीर-गुजरात में हजारों चोरी हुए मोबाइल लौटे, पुलिस ने बनाया रिकॉर्ड

    नई दिल्ली । गुजरात में कानून-व्यवस्था और तकनीकी पुलिसिंग के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है, जहां राज्य पुलिस ने चोरी और गुम हुए मोबाइल फोन को उनके असली मालिकों तक पहुंचाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। इस प्रदर्शन के चलते गुजरात पुलिस ने देशभर में मोबाइल रिकवरी के मामले में तीसरा स्थान प्राप्त किया है, जो डिजिटल पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    इस अभियान के तहत पुलिस ने हजारों मोबाइल फोन को ट्रैक कर उनके मालिकों को वापस लौटाया है। कुल मिलाकर रिकवरी दर लगभग 46 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है। यह सफलता इस बात का संकेत है कि तकनीक आधारित सिस्टम से अपराध नियंत्रण और नागरिक सहायता को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

    मोबाइल रिकवरी प्रक्रिया में आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म और ट्रैकिंग तकनीक की अहम भूमिका रही है। गुम या चोरी हुए मोबाइल को सिस्टम में ब्लॉक करने के बाद उनकी लोकेशन ट्रेस की गई और फिर उन्हें रिकवर किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में पुलिस टीमों ने लगातार निगरानी और तेजी से कार्रवाई करते हुए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    राज्य के कई जिलों ने इस अभियान में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कुछ क्षेत्रों में रिकवरी रेट बेहद प्रभावशाली रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर पुलिस अधिकारियों की सक्रियता और समन्वय ने इस उपलब्धि को संभव बनाया।

    इस सफलता ने यह भी साबित किया है कि डिजिटल टूल्स और डेटा आधारित पुलिसिंग भविष्य की जरूरत बनते जा रहे हैं। इससे न केवल अपराधियों पर नियंत्रण आसान हुआ है, बल्कि आम नागरिकों को भी अपने खोए हुए मोबाइल वापस पाने की नई उम्मीद मिली है।

  • गुजरात में सुरक्षा को नई ताकत वडोदरा में हाईटेक पुलिस कंट्रोल सेंटर शुरू

    गुजरात में सुरक्षा को नई ताकत वडोदरा में हाईटेक पुलिस कंट्रोल सेंटर शुरू


    नई दिल्ली: गुजरात में स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गुजरात के वडोदरा में नया कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया गया है इस आधुनिक केंद्र का उद्घाटन राज्य के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने पुलिस भवन में किया

    यह सेंटर नेटवर्क फॉर टेक्नोलॉजी इनेबल्ड रैपिड एश्योरेंस एंड मॉनिटरिंग यानी नेट्रा एम परियोजना के तहत विकसित किया गया है इसका मुख्य उद्देश्य शहर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और पुलिस की कार्यक्षमता को तकनीक के माध्यम से और अधिक प्रभावी बनाना है

    उद्घाटन के दौरान पुलिस महानिदेशक केएलएन राव और नगर पुलिस आयुक्त नरसिम्हा कुमार ने उपमुख्यमंत्री का स्वागत किया समारोह में पुलिस टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया और केंद्र के उद्घाटन की स्मृति में एक पट्टिका का अनावरण किया गया

    यह अत्याधुनिक सेंटर रियल टाइम में अपराध की निगरानी करने प्रमुख आयोजनों और त्योहारों के दौरान बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा पुलिस संसाधनों का प्रभावी प्रबंधन करने में सक्षम है इसके जरिए शहर की सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा सकती है जिससे किसी भी घटना पर तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सकेगी

    उपमुख्यमंत्री ने सेंटर का दौरा कर यहां स्थापित सीसीटीवी नेटवर्क और अन्य तकनीकी सुविधाओं का निरीक्षण किया उन्हें बताया गया कि यह प्रणाली किस प्रकार शहर की सुरक्षा और यातायात नियंत्रण में मदद कर रही है उन्होंने पुलिस व्यवस्था में आधुनिक तकनीक के अधिकतम उपयोग पर जोर दिया और इसे और मजबूत बनाने के सुझाव दिए

    यह नया कमांड एंड कंट्रोल सेंटर वडोदरा में पुलिस व्यवस्था के आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है इसका उद्देश्य अपराध की रोकथाम को बेहतर बनाना यातायात प्रबंधन को सुव्यवस्थित करना और एक केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली प्रदान करना है

    यह पहल स्मार्ट पुलिसिंग और तकनीक के माध्यम से शहरी सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में गुजरात पुलिस की प्रतिबद्धता को दर्शाती है जिससे शहर के नागरिकों को अधिक सुरक्षित और बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी