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  • US बेस में सुरक्षित नहीं खाड़ी देश… खामेनेई- 'ढाल' की तरह नहीं कर पाएंगे काम

    US बेस में सुरक्षित नहीं खाड़ी देश… खामेनेई- 'ढाल' की तरह नहीं कर पाएंगे काम


    वाशिंगटन।
    पश्चिम एशिया (West Asia.) में जारी संकट बुरी तरह से उलझता नजर आ रहा है। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) हैं, जो किसी भी हाल में इस युद्ध को अमेरिका (America) के लिए जीत साबित करने में लगे हुए हैं, तो दूसरी तरफ ईरान (Iran) है, जो अपने दशकों पुराने अमेरिकी डर का सामना करके और भी ज्यादा खतरनाक हो गया है। इसी निडरता का परिचय देते हुए शांति समझौते के बीच ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Iranian Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने साफ कर दिया है कि अब से खाड़ी देश अमेरिकी ठिकानों के लिए ‘ढाल’ की तरह काम नहीं कर पाएंगे।

    अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, ईद-अल-अजहा के मौके पर खामेनेई ने ईरानी लोगों के लिए एक लिखित बयान जारी किया। इस बयान में खामेनेई ने अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को लेकर भी बात की। इतना ही नहीं युद्ध की स्थिति को लेकर उन्होंने साफ किया कि अब ईरान अमेरिकी ठिकानों पर हमला करने से नहीं चूकेगा। उन्होंने कहा, “यह निश्चित है कि समय के हाथ अब पीछे की तरफ नहीं मुड़ेंगे और क्षेत्र की जनता और जमीन अब अमेरिकी ठिकानों के लिए ढाल का काम नहीं करेगी। अमेरिका को अब इस क्षेत्र में बुराई फैलाने या सैन्य अड्डा स्थापित करने का सुरक्षित आश्रय नहीं मिलेगा।” बता दें, खामेनेई का इशारा यहां पर युद्ध के समय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने को लेकर था। हालांकि, ईरान ने पिछले संघर्ष के समय भी इन देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन उस वक्त सभी देशों ने इसको लेकर नाराजगी जाहिर की थी।

    इस बयान के साथ ही, खामेनेई ने संदेश दे दिया है कि ईरान अब खाड़ी देशों में अमेरिकी बेसों की मौजूदगी को बर्दाश्त नहीं करेगा। वैसे भी खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा समझौता करने के बदले में वहां बेस बनाकर बैठे अमेरिका की पोल ईरान युद्ध के दौरान खुल गई थी। ईरान के हल्के ड्रोन्स ने सुरक्षित माने जाने वाले इन देशों में काफी उत्पात मचाया था, जिसकी वजह से यह देश पहले ही अमेरिका के अलावा दूसरे विकल्पों की तरफ देख रहे हैं।


    अमेरिका के साथ 14 सूत्रीय प्रस्ताव पर चर्चा कर रहा ईरान

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को इस बात की जानकारी दी कि ईरान और अमेरिका के बीच में इस वक्त 14 सूत्रीय समझौते पर बातचीत जारी है। इसमें से ज्यादातर मुद्दों को हल कर लिया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अभी समझौता बहुत दूर है।

    वरिष्ठ ईरानी राजनयिक होसैन नूशाबादी के अनुसार ईरान और अमेरिका के बीच में ज्यादातर मामलों में समझौता हो सकता है, लेकिन केवल परमाणु का मुद्दा फंसा हुआ है। अमेरिका इस बात को बार-बार कहता आ रहा है कि ईरान को संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका का सौंपना होगा, इसके साथ ही उसे इस बात की भी पुष्टि करनी होगी कि वह भविष्य में कभी भी परमाणु कार्यक्रम शुरू नहीं करेगा। इसके अलावा तेहरान केवल एक परमाणु रिएक्टर बना सकता है। इसके साथ ही उसे अपने मिसाइल कार्यक्रम को भी बंद करना होगा। दरअसल, ट्रंप की मजबूरी यह है कि उन्हें ओबामा से बेहतर ईरानी डील करनी ही होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके और उनकी पार्टी के लिए एक बड़ी हार साबित होगी। इसलिए ट्रंप भी इस पर झुकने को तैयार नहीं है। उन्होंने सोमवार को ट्रुथ सोशल पर लिखे पोस्ट में साफ किया कि ईरान के साथ अगर डील होगी, तो वह बेहतर होगी। अगर ऐसा नहीं होता है, तो फिर कोई भी डील नहीं होगी।

    अमेरिका भले ही इन शर्तों के साथ आगे बढ़ रहा हो, लेकिन ईरान के लिए यह शर्तें स्वीकार करने योग्य नहीं है। दूसरी बात, दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना करने वाले ईरान के नेता अब निर्भीकता के साथ अमेरिका का सामना कर रहे हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा है कि डोनाल्ड ट्रंप भी अब युद्ध नहीं चाहते, ऐसे में अब तेहरान भी बातचीत की टेबल पर सख्ती के साथ अपनी शर्तें रख रहा है।

  • ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ निकली फतह-3! खाड़ी देशों को चीनी मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान

    ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ निकली फतह-3! खाड़ी देशों को चीनी मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान




    नई दिल्ली। पाकिस्तान अब चीन में बनी फतह-3 मिसाइल को खाड़ी देशों में बेचने की तैयारी में जुट गया है। पाकिस्तान इसे भारत की सुपरसोनिक ब्रह्मोस मिसाइल का जवाब बताकर सऊदी अरब, कतर और दूसरे अरब देशों को लुभाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फतह मिसाइल भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने पूरी तरह विफल साबित हुई थी। इसके बावजूद पाकिस्तान इसे अपनी बड़ी सैन्य ताकत के तौर पर पेश कर रहा है।

    ईरान-अमेरिका तनाव के बाद पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों का सुरक्षा साझेदार दिखाने में लगा है। इसी रणनीति के तहत वह चीनी हथियारों को अरब बाजार में उतारना चाहता है। इससे पहले पाकिस्तान JF-17 फाइटर जेट को लेकर भी बड़े दावे कर चुका है और अब फतह-3 मिसाइल को ब्रह्मोस की टक्कर की मिसाइल बताकर प्रचार किया जा रहा है।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक फतह-3 असल में चीन की HD-1 सुपरसोनिक मिसाइल का मॉडिफाइड वर्जन मानी जा रही है, जिसे चीन की कंपनी Guangdong Hongda ने विकसित किया है। पाकिस्तान का दावा है कि यह मिसाइल 2.5 से 4 मैक की स्पीड से उड़ सकती है और 450 किलो तक वारहेड ले जाने में सक्षम है। इसकी रेंज करीब 290 से 450 किलोमीटर बताई जा रही है।

    पाकिस्तानी मीडिया इसे जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने वाली आधुनिक मिसाइल बता रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी क्षमता ब्रह्मोस के मुकाबले काफी सीमित है। ब्रह्मोस जहां लंबी दूरी, सटीक निशाने और भारी विनाशक क्षमता के लिए जानी जाती है, वहीं फतह-3 अभी तक खुद को युद्धक्षेत्र में साबित नहीं कर पाई है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत की ब्रह्मोस मिसाइलों ने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों और एयरबेस को निशाना बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार नूर खान एयरबेस के आसपास हुए हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल ताकत को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना शुरू किया।

    विशेषज्ञों का कहना है कि चीन पाकिस्तान के जरिए खाड़ी देशों के हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहां अब तक अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। माना जा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में फतह-3 मिसाइल या JF-17 लड़ाकू विमान खरीदने पर विचार कर सकता है, क्योंकि वह ईरान के खतरे को देखते हुए अपनी सैन्य क्षमता लगातार बढ़ा रहा है

  • ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ रही फतह-3! चीन की मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान, खाड़ी देशों को साधने की कोशिश

    ब्रह्मोस की बराबरी का दावा, लेकिन ‘फेल’ रही फतह-3! चीन की मिसाइल बेचने में जुटा पाकिस्तान, खाड़ी देशों को साधने की कोशिश




    नई दिल्ली। भारत के खिलाफ सैन्य संतुलन बनाने की कोशिश में पाकिस्तान अब चीन निर्मित हथियारों को खाड़ी देशों तक पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहा है। पाकिस्तानी सेना अपनी ‘फतह-3’ मिसाइल को भारत की ब्रह्मोस मिसाइल का जवाब बताकर सऊदी अरब और कतर जैसे देशों को आकर्षित करने में जुटी है। हालांकि रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह मिसाइल भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम के सामने प्रभावी साबित नहीं हो सकी थी।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान खुद को खाड़ी देशों का सुरक्षा साझेदार दिखाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका-ईरान तनाव के बाद इस्लामाबाद ने रक्षा सहयोग को बढ़ाने के लिए चीन के हथियारों को आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है। पहले जेएफ-17 फाइटर जेट और अब फतह-3 मिसाइल को लेकर पाकिस्तान बड़े दावे कर रहा है।

    पाकिस्तानी मीडिया फतह-3 को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बताते हुए इसे ब्रह्मोस की टक्कर का हथियार बता रहा है। दावा किया जा रहा है कि यह जमीन और समुद्री दोनों लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है और कम ऊंचाई पर तेज रफ्तार से उड़ान भरने के कारण इसे रोकना मुश्किल है। लेकिन रक्षा जानकारों का कहना है कि इसकी तकनीक काफी हद तक चीन की HD-1 मिसाइल पर आधारित है, जिसे Guangdong Hongda कंपनी ने विकसित किया था।

    बताया जा रहा है कि फतह-3 की रेंज करीब 290 से 450 किलोमीटर तक है और यह 240 से 450 किलोग्राम तक का वारहेड ले जा सकती है। इसकी गति 2.5 से 4 मैक तक बताई जाती है। वहीं दूसरी ओर भारत की ब्रह्मोस मिसाइल लंबी रेंज, अधिक सटीकता और भारी मारक क्षमता के लिए जानी जाती है।

    ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने ब्रह्मोस मिसाइलों के जरिए पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। रिपोर्ट्स के अनुसार नूर खान एयरबेस के पास हुए हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को झटका दिया था। इसके बाद पाकिस्तान ने अपनी मिसाइल क्षमता को बढ़ाने और नए खरीदार तलाशने की कोशिशें तेज कर दी हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि चीन पाकिस्तान के जरिए खाड़ी देशों के हथियार बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है, जहां अब तक अमेरिका और पश्चिमी देशों का दबदबा रहा है। इसी रणनीति के तहत पाकिस्तान खुद को रक्षा साझेदार के रूप में पेश कर रहा है और चीनी तकनीक वाले हथियारों को “कम लागत वाला विकल्प” बताकर प्रचारित कर रहा है।

    रिपोर्ट्स में यह भी कहा जा रहा है कि सऊदी अरब भविष्य में फतह-3 मिसाइल या जेएफ-17 फाइटर जेट में रुचि दिखा सकता है, क्योंकि वह क्षेत्रीय खतरों को देखते हुए अपनी सैन्य ताकत को तेजी से बढ़ा रहा है। हालांकि रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ब्रह्मोस जैसी उन्नत मिसाइल प्रणाली की बराबरी करना पाकिस्तान और चीन दोनों के लिए अभी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

  • मिडिल ईस्ट में जंग की आहट तेज: अमेरिका ने 82 हजार करोड़ के हथियार उतारे, ईरान पर बड़ा घेराव तैयार

    मिडिल ईस्ट में जंग की आहट तेज: अमेरिका ने 82 हजार करोड़ के हथियार उतारे, ईरान पर बड़ा घेराव तैयार


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच हालात एक बार फिर बड़े टकराव की ओर बढ़ते दिख रहे हैं। अमेरिका ने अपने सहयोगी देशों को अरबों डॉलर के हथियार देकर साफ संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं। ईरान के साथ टकराव के बीच यह सैन्य तैयारी सिर्फ रक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि संभावित बड़े संघर्ष की आहट भी मानी जा रही है।

    अमेरिका ने इजरायल, कुवैत, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों को करीब 8.6 अरब डॉलर (करीब 82 हजार करोड़ रुपये) के हथियार और सैन्य सिस्टम देने की मंजूरी दी है। इस फैसले को अमेरिकी विदेश विभाग ने ‘आपात राष्ट्रीय सुरक्षा’ का मामला बताते हुए तेजी से आगे बढ़ाया। इसमें एडवांस्ड प्रिसिजन किल वेपन सिस्टम (APKWS), पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और बैटल कमांड सिस्टम जैसे आधुनिक हथियार शामिल हैं, जो मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में बेहद अहम माने जाते हैं।

    दरअसल, हाल के महीनों में ईरान की ओर से इजरायल और खाड़ी देशों पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद इन देशों के डिफेंस सिस्टम पर भारी दबाव पड़ा है। ऐसे में अमेरिका अपने सहयोगियों के हथियारों के स्टॉक को फिर से मजबूत कर रहा है, ताकि किसी बड़े हमले की स्थिति में वे तैयार रहें।

    इस बीच डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन का रुख भी सख्त बना हुआ है। अमेरिका और इजरायल दोनों ही ईरान की परमाणु और मिसाइल क्षमता को खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। दूसरी ओर ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है और वह अपने प्रॉक्सी समूहों तथा मिसाइल कार्यक्रम के जरिए जवाबी रणनीति मजबूत कर रहा है।

    स्थिति को और संवेदनशील बनाता है हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां अमेरिका की नौसेना की मौजूदगी और नाकेबंदी के चलते वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। यह इलाका दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है और यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    अभी भले ही सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों पक्ष लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहे हैं। इजरायल हाई अलर्ट पर है, अमेरिका लगातार हथियारों की सप्लाई बढ़ा रहा है और ईरान भी अपने नेटवर्क के जरिए दबाव बनाए हुए है।

    कुल मिलाकर, शांति की कोशिशों के बीच हथियारों का यह बड़ा खेल साफ संकेत दे रहा है कि मिडिल ईस्ट में हालात बेहद नाजुक हैं। अगर बातचीत में प्रगति नहीं हुई, तो यह टकराव किसी भी वक्त बड़े युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका असर सिर्फ क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को झटका दे सकता है।

  • पांच साल में विदशी धरती पर 37,740 भारतीय मजदूरों की मौत… सबसे ज्यादा खाड़ी देशों में

    पांच साल में विदशी धरती पर 37,740 भारतीय मजदूरों की मौत… सबसे ज्यादा खाड़ी देशों में


    नई दिल्ली।
    सरकार (Government) ने विदेश में भारतीय कामगारों (Indian workers) की स्थिति को लेकर जो आंकड़े सामने रखे हैं, वे परेशान करने वाले हैं। पिछले पांच वर्षों में विदेशी धरती (Foreign land) पर हर दिन औसतन 20 से अधिक भारतीय श्रमिकों की मौत हुई है। इनमें 86 फीसदी से अधिक मौतें खाड़ी देशों में हुईं हैं। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह (Kirti Vardhan Singh) की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, विदेश में 2021 से 2025 के बीच कुल 37,740 भारतीय कामगारों की जान गई। हालांकि इन मौतों की वजहों का ब्योरा नहीं दिया गया। हालांकि तुलनात्मक रूप से देखें तो खाड़ी देशों में मौतों का औसत 2012-2018 के मुकाबले लगभग दोगुना होकर रोजाना 18 तक पहुंच गया है।


    सबसे ज्यादा खाड़ी देशों में भारतीय की मौतें

    खाड़ी देशों में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में सबसे ज्यादा 12,380 मौतें हुईं। इसके बाद सऊदी अरब, कुवैत, ओमान और कतर का नंबर आता है।

    पांच साल में मौतों के आंकड़े
    वर्ष – मौतें

    2021- 8,234
    2022- 6,614
    2023- 7,291
    2024- 7,747
    2025- 7,854
    कुल – 37,740
    खाड़ी देशों में स्थिति
    यूएई – 12,380
    सऊदी अरब – 11,757
    कुवैत – 3,890
    ओमान – 2,821
    मलयेशिया – 1,915
    कतर – 1,760


    अन्य देशों में

    देश – मौतें
    अमेरिका – 454
    सिंगापुर – 451
    नाइजीरिया – 210
    यूके – 188


    उत्पीड़न की भी 80,985 शिकायतें

    पांच साल में विदेश में भारतीय मिशनों को भारतीय नागरिकों से गलत व्यवहार, शोषण और काम की जगह से जुड़ी 80,985 शिकायतें मिलीं। इनमें वेतन न मिलना, पासपोर्ट जब्त करना, ज्यादा काम, छुट्टी न मिलना और नौकरी छूटना जैसी शिकायतें रहीं। यूएई में सबसे अधिक 16,965 शिकायतें दर्ज की गईं। कुवैत (15,234), ओमान (13,295), और सऊदी अरब (12,988) का स्थान रहा।


    बढ़ा मौतों का आंकड़ा

    सिर्फ खाड़ी देशों की बात करें तो रोजाना करीब 18 मौतें हो रही हैं। आरटीआई जवाबों और संसदीय रिकॉर्डों के विश्लेषण पर आधारित 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक 2012 और 2018 के मध्य के बीच खाड़ी क्षेत्र में लगभग 10 भारतीय मजदूरों की हर दिन मौत हुई। वही, दक्षिण-पूर्व एशिया में मौतें कम, लेकिन शिकायतें ज्यादा हैं। म्यांमार में शून्य मौत हुई, लेकिन 2,548 शिकायतें दर्ज हुईं। कुल शिकायतें 2021 के 11,632 से बढ़कर 2025 में 22,479 हो गईं। सरकार ने कहा कि भारतीय मिशन तुरंत मदद करते हैं और कई देशों के साथ श्रमिक सुरक्षा के लिए समझौते किए गए हैं।

  • देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

    देशवासियों को पीएम मोदी का संदेश, संकट में संयम, सतर्कता और एकजुटता बनाए रखें

    नई दिल्ली:प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से बार-बार अपील की है कि वह जागरूक रहें और अफवाहों के बहकावे में ना आएं। नई दिल्ली में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के सामने उत्पन्न चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संदेश दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी संयम और सतर्कता बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम सब मिलकर इन संकटों से अच्छी तरह बाहर निकलेंगे।

    प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” के 132वें एपिसोड के जरिए राष्ट्र से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि देशवासियों को चाहिए कि वह सरकारी स्रोतों से मिलने वाली जानकारी पर भरोसा करें और उसी के आधार पर किसी भी कदम को आगे बढ़ाएं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अफवाहों और झूठी खबरों के कारण समाज में अस्थिरता पैदा हो सकती है।

    उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जैसा कि देश ने पहले भी कठिन परिस्थितियों में अपनी 140 करोड़ जनता की सामर्थ्य से संकटों का सामना किया है, वैसे ही इस बार भी हम सब मिलकर इस कठिनाई से बाहर निकलेंगे। प्रधानमंत्री ने मार्च महीने की वैश्विक घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पूरी दुनिया कोविड के कारण लंबी समस्याओं से गुजर रही थी और सभी को उम्मीद थी कि महामारी के बाद दुनिया नई प्रगति की ओर बढ़ेगी। लेकिन दुर्भाग्य से अलग-अलग क्षेत्रों में युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियां लगातार बनी रहीं, जिससे वैश्विक स्थिरता प्रभावित हुई।

    प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया, जहां भारतीय नागरिक बड़ी संख्या में कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी देशों में वर्तमान में भीषण युद्ध चल रहा है, और हमारे लाखों परिवारों के सदस्य वहां रहकर रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। खाड़ी देशों ने भारतीय नागरिकों को हर प्रकार की मदद मुहैया कराई है और उनके प्रयासों के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें धन्यवाद दिया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमें इस समय संयम और धैर्य के साथ काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने देशवासियों से यह अपील की कि वे किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया की झूठी खबर पर विश्वास न करें और हमेशा सत्यापित जानकारी ही स्वीकार करें। उनका संदेश स्पष्ट था कि संकट चाहे जितना बड़ा क्यों न हो, जब देशवासियों का सामूहिक सामर्थ्य और एकता सामने आती है तो हर मुश्किल परिस्थिति का सामना किया जा सकता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में आशा और विश्वास के भाव व्यक्त किए और कहा कि भारत की जनता हर चुनौती का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने नागरिकों से यह भी आग्रह किया कि वे अपने पड़ोसियों, परिवार और समाज के लोगों को भी सतर्क रहने और अफवाहों से बचने की सीख दें। उनका यह संदेश न केवल सतर्कता का था बल्कि यह लोगों में एकजुटता और देशभक्ति की भावना को भी प्रोत्साहित करता है।

  • भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम

    भारत-खाड़ी देशों के बीच FTA बातचीत फिर शुरू, पाक-सऊदी डील के बीच उठाया बड़ा कूटनीतिक कदम


    नई दिल्ली । GCC छह खाड़ी देशों का संगठन है जिसमें सऊदी अरब UAE कतर कुवैत ओमान और बहरीन शामिल हैं। पीयूष गोयल ने बताया कि भारत और इन देशों के बीच व्यापारिक संबंध लगभग 5000 साल पुराने हैं। वर्तमान में लगभग 1 करोड़ भारतीय इन देशों में रहते हैं और उनकी अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। यह FTA वस्तुओं और सेवाओं के मुक्त प्रवाह को बढ़ाने निवेश को बढ़ावा देने और नीतिगत स्थिरता लाने का लक्ष्य रखता है।

    पाक-सऊदी रक्षा समझौते का प्रभाव
    भारत और GCC के बीच बातचीत उस समय शुरू हो रही है जब क्षेत्रीय भू-राजनीति जटिल है। सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने ‘सामरिक पारस्परिक रक्षा समझौता’SMDA पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य गतिरोधऑपरेशन सिंदूर के कुछ महीनों बाद हुआ। अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।

    UAE और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव
    जहां पाकिस्तान-सऊदी नजदीकियां बढ़ रही हैं वहीं UAE और पाकिस्तान के संबंधों में खटास देखी जा रही है। UAE ने पाकिस्तान के साथ एक विमानतल प्रबंधन सौदा रद्द कर दिया। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के अनुसार यह सौदा स्थगित किया गया क्योंकि पाकिस्तान ने स्थानीय साझेदार का नाम नहीं भेजा।

    विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान-सऊदी रक्षा समझौते के बाद UAE-पाकिस्तान दूरी बढ़ी है।

    भारत-UAE के बढ़ते संबंध
    UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की दिल्ली यात्रा ने भारत-UAE संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। यात्रा के कुछ घंटों बाद दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार $200 बिलियन तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा। खाड़ी देशों में UAE और सऊदी अरब भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदार हैं।विश्लेषकों का मानना है कि सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी और UAE के साथ भारत के बढ़ते संबंध खाड़ी देशों की प्राथमिकताओं में बदलाव को दिखाते हैं।