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  • मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। सरकार ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। इसके अलावा भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।

    केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इन 62 जहाजों में 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल थे। बदलते समुद्री हालात को देखते हुए सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय की ओर से समय-समय पर सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने बताया कि व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पोत और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली यात्राओं में भारतीय नाविकों की तैनाती को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही काला सागर क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों वाले जहाजों के लिए भी सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं। जहाज संचालकों और चालक दल को यात्रा से पहले सुरक्षा आकलन करने, जारी सलाह का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति की तुरंत जानकारी देने के लिए कहा गया है।

    सरकार ने बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट, दक्षिणी लाल सागर और यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों के लिए भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जहाज मालिकों और कप्तानों को सुरक्षा घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने और जोखिम कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को कहा गया है।

    होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत चौबीसों घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। इसके अलावा जहाजों और चालक दल का लाइव डेटाबेस तैयार रखा जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सरकार ने समुद्री घटनाओं की निगरानी के लिए हर 24 घंटे में स्थिति रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था भी की है। इसमें जहाजों की आवाजाही, भारतीय नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित नुकसान से जुड़ी जानकारी शामिल की जाती है।

    त्वरित सूचना और प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया गया है। इसमें समुद्री दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन और नाविकों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित नाविकों के परिवारों के साथ सरकार लगातार संपर्क बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसी नाविक की मृत्यु की स्थिति में मुआवजा और तत्काल आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते समुद्री सुरक्षा जोखिमों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों, समुद्री संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी सक्रिय कर रखी है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन शिपिंग मंत्रालय, स्थानीय समुद्री प्राधिकरणों और अन्य संबंधित विभागों के साथ नियमित संपर्क में हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री मार्गों पर किसी भी चुनौती की स्थिति में भारतीय नागरिकों और जहाजों को समय पर सहायता मिल सके।

    सरकार की ओर से शुरू की गई 24 घंटे हेल्पलाइन व्यवस्था केवल नाविकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भारतीय नागरिक भी जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इससे संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों को सीधे सहायता प्राप्त करने का माध्यम उपलब्ध हो रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। सरकार का कहना है कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने समुद्री निगरानी और आपात प्रबंधन को मजबूत किया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा 3 अगस्त तक भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इनमें 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।

    समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय लगातार अपनी सलाह और दिशानिर्देशों को अपडेट कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय नाविकों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा उपायों की जानकारी देना और किसी भी संभावित खतरे से बचाव करना है।

    सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। इनमें 24 घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष, जहाजों और चालक दल की जानकारी वाला लाइव डेटाबेस और नियमित स्थिति रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। इसके माध्यम से जहाजों की आवाजाही, नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    भारत का कहना है कि समुद्री सुरक्षा केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों भारतीय परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसी कारण सरकार ने नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके।

  • ईरानी हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, अरब लीग ने रविवार को बुलाई विदेश मंत्रियों की आपात बैठक

    ईरानी हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, अरब लीग ने रविवार को बुलाई विदेश मंत्रियों की आपात बैठक


    काहिरा। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कई अरब देशों पर हुए कथित ईरानी हमलों के बाद स्थिति पर चर्चा के लिए अरब लीग ने विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की जाएगी।

    अरब लीग के सहायक महासचिव होसाम जकी ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस विशेष बैठक का प्रस्ताव कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र जैसे सदस्य देशों ने संयुक्त रूप से रखा है। बैठक में खाड़ी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली हालिया घटनाओं की समीक्षा की जाएगी और इस मुद्दे पर साझा अरब रुख तय करने की कोशिश की जाएगी।

    पड़ोसी देशों को निशाना बनाने का इरादा नहीं: ईरान

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की बात कही गई थी। राज्य टीवी पर प्रसारित अपने रिकॉर्डेड संदेश में उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद करना केवल एक सपना है, जो कभी पूरा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

    क्षेत्रीय हमलों पर जताया खेद

    हालांकि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी के कुछ देशों पर हुए हालिया हमलों पर खेद भी जताया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं गलतफहमी के कारण हुईं और ईरान भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पड़ोसी देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला नहीं किया जाता, तब तक तेहरान की ओर से किसी को निशाना बनाने का इरादा नहीं है।

    ईरानी मीडिया के अनुसार, इस संबंध में ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब शनिवार सुबह बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की खबरों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

    पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहा तनाव

    पश्चिम एशिया में हालात पिछले कुछ दिनों में तेजी से बदले हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए टकराव के बाद से ईरान, इस्राइल समेत पश्चिम एशिया के 13 देशों को निशाना बना चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।