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  • ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे

    ट्रंप की ईरान पर फिर हमले की धमकी, तेहरान की चेतावनी- समुद्र के नीचे इंटरनेट केबल काट देंगे


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई के संकेत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान पर फिर हमला कर सकता है। इसके जवाब में ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल ने दोबारा हमला किया, तो ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी और वैश्विक कारोबार प्रभावित होने का खतरा है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दो वरिष्ठ ईरानी सुरक्षा अधिकारियों ने समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल को निशाना बनाने की योजना की जानकारी दी है। एक अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हमला होने की स्थिति में समुद्र के नीचे की केबल और सैन्य ठिकानों समेत कोई भी जगह सुरक्षित नहीं रहेगी। अधिकारी ने दावा किया कि ईरान की इन केबल तक पहुंच है और वह उन्हें नष्ट कर सकता है।

    ट्रंप बोले- एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकते हैं

    ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा में एक रैली के दौरान कहा कि अमेरिका एक और ‘लिटिल एपिक फ्यूरी’ कर सकता है। यह नाम 28 फरवरी को शुरू हुए ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के लिए इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि नई कार्रवाई कब और किस तरह की हो सकती है।

    इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर सकता है। हालांकि, उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या युद्ध को तत्काल समाप्त किया जाना चाहिए या फिर इसे धीरे-धीरे कमजोर पड़ने देना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिका के पास संघर्ष खत्म करने की क्षमता है, लेकिन यह फैसला करना बाकी है कि ऐसा कब किया जाए।

    उन्होंने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही जारी है और अमेरिका को वह सब मिल रहा है, जिसकी उसे जरूरत है।

    ट्रंप पहले भी युद्ध के उद्देश्यों और उसकी समयसीमा को लेकर अलग-अलग बयान दे चुके हैं। इसी महीने उन्होंने कहा था कि अगले महीने होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले अमेरिका ईरान पर हमला नहीं करेगा। इन चुनावों में अमेरिकी संसद पर नियंत्रण को लेकर फैसला होना है।

    तुर्की और फ्रांस ने नई सैन्य कार्रवाई से किया आगाह

    ईरान पर दोबारा हमले की आशंका के बीच कई देशों ने तनाव कम करने की अपील की है। शुक्रवार को इस्तांबुल में ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, तुर्की, मिस्र, पाकिस्तान, सऊदी अरब और इटली के प्रतिनिधियों की बैठक हुई।

    तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि ईरान पर नया हमला तनाव बढ़ा सकता है और युद्ध पूरे क्षेत्र में फैलने का खतरा है। उन्होंने संघर्ष खत्म करने के लिए बातचीत और कूटनीति को जरूरी बताया।

    फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो ने भी नई सैन्य कार्रवाई से बचने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से किसी को फायदा नहीं होगा और इसका तेल की कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

    वहीं, जर्मनी के विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ईरान के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न करे।

    होर्मुज के नीचे मौजूद 7 इंटरनेट केबल निशाने पर

    ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के राजनीतिक मामलों के उप प्रमुख यदोल्लाह जावानी ने भी चेतावनी दी है कि अगर ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला हुआ, तो ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के नीचे मौजूद सात प्रमुख इंटरनेट केबल को निशाना बना सकता है।

    समुद्र के नीचे बिछी केबल वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था की रीढ़ हैं। इनके जरिए दुनिया के करीब 99 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक का संचार होता है। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा गुजरता है। इसके बावजूद इस क्षेत्र में कई केबल कटने से इंटरनेट सेवाओं और संचार व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

    केबल क्षतिग्रस्त होने पर इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो सकती है। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन, ऑनलाइन कारोबार और क्लाउड सेवाओं में भी बाधा आने की आशंका है। असर कितना व्यापक होगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इंटरनेट ट्रैफिक को वैकल्पिक नेटवर्क पर कितनी जल्दी भेजा जा सकता है और उन नेटवर्क में कितनी अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध है।

    युद्ध की स्थिति में केबल की मरम्मत भी मुश्किल हो सकती है। समुद्री क्षेत्र में सुरक्षा जोखिम, बीमा लागत में बढ़ोतरी और मरम्मत के लिए अनुमति मिलने में देरी से बहाली का काम प्रभावित हो सकता है।

    खाड़ी देशों के टेक्नोलॉजी निवेश पर भी खतरा

    खाड़ी के देश तेल पर अपनी निर्भरता कम करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बड़े केंद्र बनने के लिए तकनीकी बुनियादी ढांचे में भारी निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ उनकी साझेदारी भी बढ़ी है।

    रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च में ईरान के हमलों के दौरान संयुक्त अरब अमीरात में अमेजन वेब सर्विसेज की दो सुविधाओं को नुकसान पहुंचने की बात कही गई थी। बहरीन में भी उसकी एक सुविधा के पास बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ था।

    हालांकि, इंटरनेट ट्रैफिक के लिए जमीन के रास्ते वैकल्पिक नेटवर्क मौजूद हैं। खाड़ी देशों की सरकारें और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियां कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए नए बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट ने 2030 तक मध्य पूर्व में समुद्र के नीचे और जमीन के रास्ते कनेक्टिविटी पर 40 करोड़ डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बनाई है।

    फिलहाल, अमेरिका की ओर से संभावित नई सैन्य कार्रवाई और ईरान की चेतावनी ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक इंटरनेट और कारोबारी नेटवर्क पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

  • ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे

    ईरान-हूती तनाव के बीच जर्मनी में गुप्त सैन्य बैठक, अमेरिका-इजरायल के साथ 7 अरब देशों के चीफ जुटे


    नई दिल्ली। ईरान के साथ जारी संघर्ष और यमन के हूतियों के बढ़ते हमलों के बीच अमेरिका, इजरायल और सात अरब देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की जर्मनी में बंद कमरे में बैठक हुई। पिछले सप्ताह हुई इस बैठक में ईरान युद्ध, मध्य-पूर्व की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में समुद्री आवाजाही और हूती खतरे से निपटने को लेकर सैन्य सहयोग पर चर्चा हुई। बैठक में इजरायल के साथ सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और मिस्र के सैन्य प्रमुख शामिल हुए।

    ब्रैड कूपर ने बुलाई बैठक, सार्वजनिक नहीं की गई जानकारी

    बैठक का आयोजन अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने किया था। यह मुलाकात पहले से सार्वजनिक नहीं की गई थी। बाद में CENTCOM ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि जर्मनी में एक तय कॉन्फ्रेंस के दौरान आठ देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की मेजबानी की गई और मध्य-पूर्व में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा हुई।

    रिपोर्ट के मुताबिक, यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि इसमें इजरायल और ऐसे अरब देशों के सैन्य अधिकारी एक साथ शामिल हुए, जिनमें से कुछ के इजरायल के साथ औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। इजरायल और अमेरिका के ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद इस स्तर की यह पहली बैठक बताई गई है।

    अमेरिका ने कहा- मध्य-पूर्व से सेना हटाने की योजना नहीं

    बैठक में एडमिरल कूपर ने कथित तौर पर सहयोगी देशों को बताया कि ईरानी हमलों के बावजूद अमेरिका की मध्य-पूर्व से अपनी सैन्य मौजूदगी हटाने की योजना नहीं है। उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सुरक्षित समुद्री आवाजाही और जहाजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ी अमेरिकी योजना की भी जानकारी दी।

    वहीं, इजरायली सेना के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने विभिन्न मोर्चों पर चल रहे इजरायली सैन्य अभियानों के बारे में बैठक में जानकारी दी। इससे बैठक में ईरान के साथ संघर्ष के साथ-साथ क्षेत्रीय सैन्य तैयारियों पर भी चर्चा का संकेत मिलता है।

    अब सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमले भी मुद्दा

    बैठक ऐसे समय हुई है जब हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ हमले तेज किए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब और अमेरिका के बीच हूती खतरे को लेकर सैन्य सहयोग भी बढ़ा है। 14 सितंबर को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और CENTCOM प्रमुख ब्रैड कूपर की जेद्दा में मुलाकात भी हुई, जिसमें क्षेत्रीय हालात और हूती हमलों पर चर्चा हुई।

    Axios की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल, सऊदी अरब और CENTCOM के बीच इस बात पर चर्चा चल रही है कि हूतियों के खिलाफ सऊदी अभियानों में इजरायल किस तरह सहायता कर सकता है। इसमें इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) सहयोग का विकल्प भी शामिल बताया गया है। हालांकि, इसे अभी किसी नए सैन्य गठबंधन या संयुक्त अभियान की घोषणा के तौर पर पेश नहीं किया गया है।

    अब्राहम अकॉर्ड के बाद बढ़ा सैन्य तालमेल

    अमेरिका-इजरायल और अरब देशों के बीच सैन्य समन्वय की पृष्ठभूमि 2020 के अब्राहम अकॉर्ड से भी जुड़ी है। इजरायल और यूएई-बहरीन के बीच समझौते के बाद क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में सहयोग के नए रास्ते खुले। इसके बाद इजरायल को अमेरिकी सेंट्रल कमांड के क्षेत्र में शामिल किया गया, जिससे अरब देशों के साथ एयर और मिसाइल डिफेंस सहित अन्य सुरक्षा मुद्दों पर सैन्य समन्वय बढ़ा।

    इजरायली अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा संघर्ष के दौरान यूएई को आयरन डोम प्रणाली और उसके संचालन के लिए इजरायली कर्मियों की मदद भी दी गई। इसके अलावा इजरायल ने यूएई को रियल टाइम इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस सहायता देने तथा क्षेत्रीय साझेदारों के साथ खुफिया जानकारी साझा करने की बात भी कही है।

    होर्मुज से लेकर लाल सागर तक बढ़ी चुनौती

    मध्य-पूर्व में इस समय सुरक्षा चिंता केवल ईरान तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर होने वाला तेल और व्यापारिक परिवहन, लाल सागर-बाब अल-मंदेब क्षेत्र में हूती गतिविधियां और सऊदी अरब की सुरक्षा—तीनों मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जुलाई में भी CENTCOM ने बहरीन में 12 देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा संवाद किया था, जिसमें हॉर्मुज से वाणिज्यिक आवाजाही की स्वतंत्रता और रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई थी।

    जर्मनी की बैठक ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय सैन्य सहयोग के साथ-साथ ईरान और खाड़ी देशों के बीच तनाव कम करने की कूटनीतिक कोशिशें भी चल रही हैं। इसलिए इस बैठक को मध्य-पूर्व में बढ़ते सैन्य समन्वय के एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इससे अपने आप किसी नई व्यापक जंग की शुरुआत तय नहीं होती।

  • मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    मध्य पूर्व तनाव में समुद्री सुरक्षा बढ़ी, सरकार ने भारतीय नाविकों के लिए किए कई इंतजाम

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और समुद्री सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी दी है। सरकार ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया गया है। इसके अलावा भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं।

    केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री ने संसद में जानकारी देते हुए बताया कि इन 62 जहाजों में 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल थे। बदलते समुद्री हालात को देखते हुए सरकार लगातार स्थिति की निगरानी कर रही है और सुरक्षा उपायों को मजबूत किया जा रहा है।

    मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और समुद्री मार्गों पर बढ़ते जोखिम को देखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय की ओर से समय-समय पर सुरक्षा संबंधी दिशानिर्देश जारी किए जा रहे हैं। इन निर्देशों का उद्देश्य भारतीय नाविकों और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है।

    सरकार ने बताया कि व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय पोत और बंदरगाह सुविधा सुरक्षा नियमों के तहत जरूरी सुरक्षा उपाय लागू किए गए हैं। इसके अलावा खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाली यात्राओं में भारतीय नाविकों की तैनाती को लेकर भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    इसके साथ ही काला सागर क्षेत्र में काम करने वाले भारतीय नाविकों वाले जहाजों के लिए भी सुरक्षा निर्देश जारी किए गए हैं। जहाज संचालकों और चालक दल को यात्रा से पहले सुरक्षा आकलन करने, जारी सलाह का पालन करने और किसी भी आपात स्थिति की तुरंत जानकारी देने के लिए कहा गया है।

    सरकार ने बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट, दक्षिणी लाल सागर और यमन के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में संचालित जहाजों के लिए भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। जहाज मालिकों और कप्तानों को सुरक्षा घटनाक्रमों पर लगातार नजर रखने और जोखिम कम करने के लिए अतिरिक्त कदम उठाने को कहा गया है।

    होर्मुज स्ट्रेट क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इसके तहत चौबीसों घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष बनाया गया है। इसके अलावा जहाजों और चालक दल का लाइव डेटाबेस तैयार रखा जा रहा है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    सरकार ने समुद्री घटनाओं की निगरानी के लिए हर 24 घंटे में स्थिति रिपोर्ट तैयार करने की व्यवस्था भी की है। इसमें जहाजों की आवाजाही, भारतीय नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित नुकसान से जुड़ी जानकारी शामिल की जाती है।

    त्वरित सूचना और प्रतिक्रिया व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया गया है। इसमें समुद्री दुर्घटनाओं की रिपोर्टिंग, संकट प्रबंधन और नाविकों की शिकायतों के समाधान के लिए अलग-अलग सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

    केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रभावित नाविकों के परिवारों के साथ सरकार लगातार संपर्क बनाए हुए है और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। किसी नाविक की मृत्यु की स्थिति में मुआवजा और तत्काल आर्थिक सहायता की व्यवस्था भी की गई है।

    पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा भारत के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा और व्यापार आपूर्ति के लिहाज से बेहद अहम समुद्री मार्ग है। ऐसे में भारत सरकार की प्राथमिकता अपने नागरिकों और समुद्री हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

  • समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच भारत की तैयारी तेज, नाविकों और जहाजों की सुरक्षा बनी पहली प्राथमिकता

    नई दिल्ली । खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते समुद्री सुरक्षा जोखिमों के बीच भारत सरकार ने भारतीय नाविकों और भारतीय ध्वज वाले जहाजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय मिशन लगातार स्थानीय अधिकारियों, समुद्री संस्थानों और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रहे हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में भारतीय नाविकों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके। इसके लिए कई देशों में स्थित भारतीय मिशनों ने 24 घंटे चलने वाली हेल्पलाइन भी सक्रिय कर रखी है।

    विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मौजूद भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर सरकार लगातार निगरानी बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि भारतीय मिशन शिपिंग मंत्रालय, स्थानीय समुद्री प्राधिकरणों और अन्य संबंधित विभागों के साथ नियमित संपर्क में हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि समुद्री मार्गों पर किसी भी चुनौती की स्थिति में भारतीय नागरिकों और जहाजों को समय पर सहायता मिल सके।

    सरकार की ओर से शुरू की गई 24 घंटे हेल्पलाइन व्यवस्था केवल नाविकों तक सीमित नहीं है, बल्कि अन्य भारतीय नागरिक भी जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह व्यवस्था पिछले कई महीनों से लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी जारी रहेगी। इससे संकट की स्थिति में भारतीय नागरिकों को सीधे सहायता प्राप्त करने का माध्यम उपलब्ध हो रहा है।

    विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित और निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है। सरकार का कहना है कि समुद्री व्यापार वैश्विक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए सभी पक्षों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि आम नागरिकों, वाणिज्यिक जहाजों और उनमें काम करने वाले नाविकों को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचे।

    खाड़ी क्षेत्र और होर्मुज स्ट्रेट में बदलती सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए भारत ने समुद्री निगरानी और आपात प्रबंधन को मजबूत किया है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र से अब तक 4,052 भारतीय नाविकों को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। इसके अलावा 3 अगस्त तक भारत आने वाले 62 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से सफलतापूर्वक गुजर चुके हैं। इनमें 23 भारतीय ध्वज वाले और 39 विदेशी ध्वज वाले जहाज शामिल हैं।

    समुद्री सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समुद्री प्रशासन महानिदेशालय लगातार अपनी सलाह और दिशानिर्देशों को अपडेट कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय नाविकों को बदलती परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा उपायों की जानकारी देना और किसी भी संभावित खतरे से बचाव करना है।

    सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई विशेष कदम उठाए हैं। इनमें 24 घंटे संचालित होने वाला नियंत्रण कक्ष, जहाजों और चालक दल की जानकारी वाला लाइव डेटाबेस और नियमित स्थिति रिपोर्ट तैयार करना शामिल है। इसके माध्यम से जहाजों की आवाजाही, नाविकों की स्थिति, किसी भी घटना और संभावित जोखिमों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

    भारत का कहना है कि समुद्री सुरक्षा केवल व्यापार से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि हजारों भारतीय परिवारों की सुरक्षा से भी जुड़ा विषय है। इसी कारण सरकार ने नाविकों और जहाजों की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई की जा सके।

  • ईरानी हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, अरब लीग ने रविवार को बुलाई विदेश मंत्रियों की आपात बैठक

    ईरानी हमलों से खाड़ी में बढ़ा तनाव, अरब लीग ने रविवार को बुलाई विदेश मंत्रियों की आपात बैठक


    काहिरा। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और कई अरब देशों पर हुए कथित ईरानी हमलों के बाद स्थिति पर चर्चा के लिए अरब लीग ने विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आयोजित की जाएगी।

    अरब लीग के सहायक महासचिव होसाम जकी ने शनिवार को इसकी घोषणा करते हुए बताया कि इस विशेष बैठक का प्रस्ताव कुवैत, सऊदी अरब, कतर, ओमान, जॉर्डन और मिस्र जैसे सदस्य देशों ने संयुक्त रूप से रखा है। बैठक में खाड़ी देशों की संप्रभुता और सुरक्षा को प्रभावित करने वाली हालिया घटनाओं की समीक्षा की जाएगी और इस मुद्दे पर साझा अरब रुख तय करने की कोशिश की जाएगी।

    पड़ोसी देशों को निशाना बनाने का इरादा नहीं: ईरान

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की बात कही गई थी। राज्य टीवी पर प्रसारित अपने रिकॉर्डेड संदेश में उन्होंने कहा कि ऐसी उम्मीद करना केवल एक सपना है, जो कभी पूरा नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

    क्षेत्रीय हमलों पर जताया खेद

    हालांकि राष्ट्रपति पेजेशकियन ने खाड़ी के कुछ देशों पर हुए हालिया हमलों पर खेद भी जताया। उन्होंने कहा कि ये घटनाएं गलतफहमी के कारण हुईं और ईरान भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने का प्रयास करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक पड़ोसी देशों की जमीन से ईरान पर कोई हमला नहीं किया जाता, तब तक तेहरान की ओर से किसी को निशाना बनाने का इरादा नहीं है।

    ईरानी मीडिया के अनुसार, इस संबंध में ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने भी अपनी मंजूरी दे दी है। यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब शनिवार सुबह बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात पर हमलों की खबरों के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

    पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहा तनाव

    पश्चिम एशिया में हालात पिछले कुछ दिनों में तेजी से बदले हैं। 28 फरवरी को शुरू हुए टकराव के बाद से ईरान, इस्राइल समेत पश्चिम एशिया के 13 देशों को निशाना बना चुका है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य गतिविधियों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर बनी हुई है।