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  • गुना पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 1 किलो अफीम के साथ राजस्थान के दो तस्कर गिरफ्तार

    गुना पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 1 किलो अफीम के साथ राजस्थान के दो तस्कर गिरफ्तार


    मध्य प्रदेश । गुना जिले के मृगवास थाना क्षेत्र में पुलिस ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 1 किलो से अधिक अफीम के साथ दो अंतरराज्यीय तस्करों को गिरफ्तार किया है। यह दोनों आरोपी राजस्थान से अवैध मादक पदार्थ की सप्लाई देने गुना पहुंचे थे।

    पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई SP हितिका वासल के निर्देशन में चल रहे अवैध मादक पदार्थ विरोधी अभियान के तहत की गई। ASP मानसिंह ठाकुर के मार्गदर्शन और चांचौड़ा SDOP मनोज कुमार झा के नेतृत्व में मृगवास थाना पुलिस और सानई चौकी टीम ने संयुक्त रूप से यह कार्रवाई की।

    सूचना के अनुसार पुलिस को मुखबिर से जानकारी मिली थी कि राजस्थान की ओर से एक हीरो स्प्लेंडर बाइक (RJ28 ST 3530) पर दो व्यक्ति अफीम लेकर सानई क्षेत्र की ओर आने वाले हैं। इस सूचना पर पुलिस टीम ने ग्राम बंजारीकला के कच्चे रास्ते पर घेराबंदी कर इंतजार किया।

    कुछ ही समय बाद संदिग्ध बाइक को आते देख पुलिस ने बिना देरी किए घेराबंदी कर दोनों को मौके पर ही दबोच लिया। तलाशी लेने पर उनके पास से थैले में रखा 1.010 किलोग्राम अफीम बरामद हुआ।

    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान राधेश्याम (45) और जगदीश उर्फ भूरा (35), निवासी ग्राम मानपुरा, थाना हरनावदा शाहजी, जिला बारां (राजस्थान) के रूप में हुई है।

    पुलिस ने बरामद अफीम की कीमत लगभग 10 लाख रुपए और इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल की कीमत करीब 1 लाख रुपए बताते हुए कुल 11 लाख रुपए का माल जब्त किया है।

    आरोपियों के खिलाफ मृगवास थाने में एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/18 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि यह अफीम कहां से लाई गई थी और जिले में इसका नेटवर्क किन-किन लोगों तक फैला हुआ है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिले में नशा तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा और ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • गुना में जैन समाज का मौन आक्रोश: रीवा कांड की SIT जांच और संत सुरक्षा नीति की उठी मांग

    गुना में जैन समाज का मौन आक्रोश: रीवा कांड की SIT जांच और संत सुरक्षा नीति की उठी मांग


    मध्य प्रदेश । गुना में सोमवार को जैन समाज का आक्रोश शांत स्वर में लेकिन बेहद प्रभावी रूप में सड़कों पर दिखाई दिया। रीवा में जैन साध्वी आर्यिका श्रुतमति माताजी एवं उपशममति माताजी की सड़क दुर्घटना में हुई असामयिक समाधि को लेकर पूरे समाज में गहरा शोक और आक्रोश व्याप्त है। इसी घटना की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर गुना सहित प्रदेशभर में जैन समाज के हजारों लोग सड़क पर उतर आए।

    गुना शहर में मौन जुलूस की शुरुआत चौधरी मोहल्ला स्थित श्री पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर से हुई। हाथों में तख्तियां, आंखों में आंसू और चेहरों पर गहरी पीड़ा लिए समाज के पुरुष, महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। बिना नारेबाजी के यह जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों बताशा गली, हाट रोड, रपटा और हनुमान चौराहा से होते हुए कलेक्टोरेट पहुंचा।

    कलेक्ट्रेट परिसर में समाज के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री के नाम जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई कि रीवा की घटना केवल एक सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं हो सकती, बल्कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध वीडियो और परिस्थितियों को देखते हुए इसकी SIT या न्यायिक जांच कराई जाए। साथ ही पूरे प्रकरण में किसी भी तरह की साजिश या लापरवाही की आशंका को गंभीरता से जांच के दायरे में लिया जाए।

    समाज ने मांग की कि घटनास्थल के आसपास के सभी CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित किए जाएं और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में कोई सुनियोजित साजिश सामने आती है, तो संबंधित धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

    जैन समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि जैन साधु-संत पूरी तरह अहिंसक और निहत्थे होते हैं, जो पैदल विहार कर धर्म और शांति का संदेश देते हैं। ऐसे में उनके साथ हो रही लगातार दुर्घटनाएं और घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।

    समाज ने देशभर में “राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति” और “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” लागू करने की भी मांग की है। इसमें विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, ट्रैफिक नियंत्रण, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस गश्त और विशेष चेतावनी संकेतक लगाने की बात शामिल है। इसके साथ ही संत सुरक्षा समन्वय प्रकोष्ठ और आपातकालीन संपर्क व्यवस्था स्थापित करने की मांग भी रखी गई।

    इस मौन जुलूस में पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह सलूजा, वैश्य समाज अध्यक्ष राजेश मोहन अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में सामाजिक प्रतिनिधि और नागरिक शामिल हुए। पूरे जिले में आरोन, राघौगढ़, बीनागंज और कुंभराज सहित कई क्षेत्रों में भी इसी तरह ज्ञापन सौंपे गए और विरोध दर्ज कराया गया।

  • गुना में दहेज का दर्दनाक मामला: 5 लाख की बाइक की मांग बनी मौत की वजह

    गुना में दहेज का दर्दनाक मामला: 5 लाख की बाइक की मांग बनी मौत की वजह


    गुना। मध्यप्रदेश के गुना जिले के म्याना थाना क्षेत्र में दहेज प्रताड़ना का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां 24 वर्षीय नवविवाहिता भावना यादव ने लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से परेशान होकर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मृतका के पति गिर्राज यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि सास, ससुर और देवर फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं।

    ढाई साल पहले हुई थी शादी, दहेज के लिए बढ़ता दबाव
    मृतका भावना यादव की शादी करीब ढाई साल पहले अशोकनगर जिले के कदवाया निवासी परिवार से म्याना के नसीरा गांव में हुई थी। परिजनों के अनुसार शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष द्वारा 5 लाख रुपये की मोटरसाइकिल और अन्य दहेज की मांग को लेकर उसे लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि 13 मई को जब भावना का भाई उसे मायके लाने पहुंचा, तो ससुराल में उसके साथ मारपीट की गई। इसी दौरान वह मानसिक रूप से टूट गई और दोपहर में जहरीला पदार्थ खा लिया।

    मारपीट और धमकी का आरोप, अस्पताल ले जाते समय भी बर्बरता
    मृतका के भाई अभिषेक ने बताया कि जब वह बहन को लेने पहुंचा तो पति और ससुर ने उसके साथ भी मारपीट की। ग्रामीणों के हस्तक्षेप के बाद उसे बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ ही देर बाद ससुराल पक्ष ने बताया कि भावना ने जहर खा लिया है। परिजनों का आरोप है कि शुरुआत में उसे अस्पताल ले जाने में भी देरी की गई और बाद में रास्ते में भाई को गाड़ी से उतार दिया गया। जब परिवार अस्पताल पहुंचा, तो भावना को मृत घोषित कर दिया गया।

    ऑडियो से खुला राज: 5 लाख की बाइक की मांग
    इस मामले में एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें पति गिर्राज यादव अपनी पत्नी से 5 लाख रुपये की मोटरसाइकिल की मांग करते हुए सुनाई दे रहा है। ऑडियो में वह धमकी देता है कि पैसे न मिलने पर रिश्ता खत्म समझा जाए। यह ऑडियो मामले में अहम सबूत माना जा रहा है, जिसने दहेज प्रताड़ना के आरोपों को और मजबूत कर दिया है।

    पुलिस जांच में चारों पर केस दर्ज, पति गिरफ्तार
    एसडीओपी स्तर की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि पति, सास, ससुर और देवर मिलकर नवविवाहिता को दहेज के लिए लगातार प्रताड़ित कर रहे थे। इसके बाद पुलिस ने चारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने पति गिर्राज यादव को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है।

  • गुना में छात्रा ने खाया जहर, 12वीं में फेल होने से थी तनाव में खौफनाक कदम, हालत स्थिर

    गुना में छात्रा ने खाया जहर, 12वीं में फेल होने से थी तनाव में खौफनाक कदम, हालत स्थिर


    गुना मध्यप्रदेश के गुना में परीक्षा परिणाम के बाद मानसिक तनाव का एक चिंताजनक मामला सामने आया है। कैंट थाना क्षेत्र की आजाद कॉलोनी में रहने वाली 20 वर्षीय छात्रा ने 12वीं बोर्ड में फेल होने के बाद चूहामार दवा खाकर आत्महत्या की कोशिश की। फिलहाल जिला अस्पताल में उसका इलाज जारी है और डॉक्टरों के मुताबिक उसकी हालत अब स्थिर है।

    रिजल्ट के 6 घंटे बाद उठाया खतरनाक कदम

    जानकारी के अनुसार, छात्रा मध्य प्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं कक्षा की छात्रा थी और शहर के महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में पढ़ती थी। बुधवार को घोषित हुए बोर्ड परीक्षा परिणाम में वह अनुत्तीर्ण हो गई। परिजनों ने बताया कि रिजल्ट आने के करीब 6 घंटे बाद वह गहरे तनाव में चली गई और शाम करीब 5 बजे घर में रखी चूहामार दवा खा ली।

    समय पर अस्पताल पहुंचने से बची जान

    जहर खाने के बाद छात्रा की तबीयत बिगड़ने लगी, तब परिजनों को इसकी जानकारी हुई। तुरंत उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया। चिकित्सकों का कहना है कि समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बच गई और अब उसकी हालत खतरे से बाहर है।

    ‘बहुत मेहनत की थी, लेकिन रिजल्ट उम्मीद जैसा नहीं आया’

    उपचार के दौरान छात्रा ने बताया कि यह उसका 12वीं का पहला प्रयास था और उसने काफी मेहनत की थी। अच्छे परिणाम की उम्मीद थी, लेकिन असफलता ने उसे मानसिक रूप से तोड़ दिया, जिसके कारण उसने यह कदम उठा लिया।

    प्रशासन और पुलिस की अपील

    प्रशासन और पुलिस ने छात्रों से अपील की है कि परीक्षा का परिणाम जीवन का अंतिम फैसला नहीं होता। असफलता के बाद भी आगे कई मौके मिलते हैं। शिक्षा विभाग ने भी फेल छात्रों को दोबारा अवसर देने की बात कही है, ताकि वे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।

    बढ़ती मानसिक दबाव की समस्या

    यह घटना दिखाती है कि परीक्षा परिणाम के समय छात्रों पर मानसिक दबाव कितना अधिक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में परिवार और समाज को बच्चों का मनोबल बढ़ाना चाहिए।