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  • गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम! भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा के लिए जानें क्या करें क्या दान दें और किन नियमों का रखें ध्यान

    गुरुवार को भूलकर भी न करें ये काम! भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की कृपा के लिए जानें क्या करें क्या दान दें और किन नियमों का रखें ध्यान


    नई दिल्ली । हिंदू धर्म में सप्ताह के सातों दिनों का अपना अलग धार्मिक महत्व बताया गया है। इनमें गुरुवार यानी बृहस्पतिवार का दिन भगवान विष्णु और देवगुरु बृहस्पति को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन श्रद्धा और नियम के साथ पूजा पाठ करने से जीवन में सुख शांति समृद्धि और सकारात्मकता बनी रहती है। गुरुवार को गुरु ग्रह से भी जोड़ा जाता है इसलिए इस दिन किए जाने वाले पूजा पाठ व्रत और दान का विशेष महत्व माना गया है। यही वजह है कि कई लोग गुरुवार को अपने जीवन में अच्छे बदलाव और मनोकामना पूर्ति की भावना से विशेष पूजा करते हैं।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु का स्मरण करना शुभ माना जाता है। कई धार्मिक परंपराओं में स्नान के पानी में हल्दी मिलाने और पीले रंग के वस्त्र धारण करने की मान्यता भी है। इसके बाद पूजा स्थान की साफ सफाई करके भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाया जा सकता है। पूजा में पीले फूल हल्दी चने की दाल गुड़ और केला अर्पित करने की परंपरा कई जगहों पर प्रचलित है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार विष्णु सहस्रनाम या बृहस्पति से जुड़े मंत्रों का जाप भी करते हैं। ॐ बृं बृहस्पतये नमः मंत्र का जाप 108 बार करने की परंपरा भी बताई जाती है।

    गुरुवार की पूजा में केले के पेड़ का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार केले के वृक्ष को भगवान विष्णु और बृहस्पति से जोड़कर देखा जाता है। यदि घर के आसपास केले का पौधा उपलब्ध हो तो उसकी जड़ में जल अर्पित करके हल्दी और पीले फूल चढ़ाए जा सकते हैं। इसके पास दीपक जलाकर भगवान विष्णु का ध्यान किया जाता है। हालांकि यह जरूरी नहीं कि हर व्यक्ति के पास केले का पेड़ उपलब्ध हो। ऐसी स्थिति में भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने श्रद्धा से पूजा करना भी सरल विकल्प हो सकता है।

    गुरुवार को दान करने की परंपरा भी काफी पुरानी मानी जाती है। इस दिन जरूरतमंद व्यक्ति को चने की दाल हल्दी गुड़ केला या पीले वस्त्र दान करना शुभ माना जाता है। दान का उद्देश्य केवल धार्मिक लाभ प्राप्त करना नहीं बल्कि जरूरतमंद की सहायता करना भी होना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार किया गया छोटा दान भी सेवा की भावना को मजबूत करता है। धार्मिक मान्यताओं में पीले रंग को गुरु तत्व से जोड़ा गया है इसलिए गुरुवार की पूजा में पीली वस्तुओं का इस्तेमाल विशेष रूप से किया जाता है।

    गुरुवार के व्रत को लेकर भी अलग अलग परंपराएं हैं। कुछ लोग पूरे दिन उपवास रखते हैं जबकि कुछ लोग फलाहार या एक समय सात्विक भोजन करते हैं। व्रत रखने वाले व्यक्ति को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार ही नियम अपनाने चाहिए। धार्मिक परंपराओं में गुरुवार को नमक से परहेज करने की मान्यता भी कुछ स्थानों पर मिलती है। इसी तरह बाल कटवाने नाखून काटने और कुछ घरेलू कामों से बचने की परंपराएं भी अलग अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इन नियमों को धार्मिक आस्था और परंपरा के रूप में देखना चाहिए।

    गुरुवार के दिन सबसे महत्वपूर्ण बात केवल पूजा की सामग्री नहीं बल्कि मन की श्रद्धा और व्यवहार को माना जाता है। किसी का अपमान करना झूठ बोलना क्रोध करना या किसी जरूरतमंद की अनदेखी करना पूजा की भावना के विपरीत माना जाता है। इसलिए इस दिन भगवान विष्णु का स्मरण करने के साथ अपने व्यवहार में संयम और सकारात्मकता लाने की कोशिश करनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार का दिन ज्ञान गुरु सम्मान सेवा और सात्विकता से जुड़ा है। ऐसे में पूजा पाठ के साथ अच्छे कर्म और जरूरतमंदों की सहायता को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    इस तरह गुरुवार के नियम केवल पूजा तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह दिन श्रद्धा संयम सेवा और सकारात्मक सोच को जीवन में अपनाने का अवसर भी माना जाता है। पीले वस्त्र पहनना भगवान विष्णु की पूजा करना केले के पौधे की आराधना करना मंत्र जाप करना और जरूरतमंदों को पीली वस्तुओं का दान करना धार्मिक परंपराओं में शुभ माना गया है। आस्था रखने वाले लोग अपनी सुविधा और परंपरा के अनुसार इनमें से नियम अपना सकते हैं।

  • गुरुवार व्रत का पूरा विधान: सुबह से शाम तक ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, सुख-समृद्धि की मान्यता

    गुरुवार व्रत का पूरा विधान: सुबह से शाम तक ऐसे करें भगवान विष्णु की पूजा, सुख-समृद्धि की मान्यता


    नई दिल्ली। हिंदू धर्म में सप्ताह के प्रत्येक दिन का अपना विशेष धार्मिक महत्व माना गया है और गुरुवार का दिन भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान के साथ व्रत एवं पूजा करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और परिवार पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरुवार का व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने और आर्थिक व पारिवारिक परेशानियों को दूर करने में भी सहायक माना जाता है। विशेष रूप से जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति की स्थिति कमजोर मानी जाती है वे भी इस दिन पूजा और व्रत करते हैं।

    गुरुवार के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इस दिन पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है इसलिए संभव हो तो पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पूजा स्थल को साफ करने के बाद भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें और पूरे मन से व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान विष्णु को पीले फूल चढ़ाएं और हल्दी से तिलक करें। पूजा में चने की दाल, गुड़, केले और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाया जा सकता है।

    गुरुवार की पूजा में भगवान विष्णु को पीला चंदन और तुलसी दल अर्पित करने की भी परंपरा है। मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा तुलसी के बिना अधूरी मानी जाती है। इसके बाद दीपक जलाकर भगवान की आरती करें और विष्णु मंत्रों का जाप करें। श्रद्धालु ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप कर सकते हैं। इसके साथ ही देवगुरु बृहस्पति की कृपा प्राप्त करने के लिए बृहस्पति देव का स्मरण करना भी शुभ माना जाता है।

    गुरुवार का व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण कर सकते हैं। इस दिन तामसिक भोजन से दूरी बनाकर रखने की मान्यता है। व्रत के दौरान मन में किसी के प्रति नकारात्मक विचार नहीं रखने चाहिए और यथासंभव क्रोध तथा विवाद से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल भोजन का त्याग करना ही व्रत नहीं है बल्कि मन और व्यवहार की शुद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

    पूजा के बाद गुरुवार व्रत की कथा सुनने या पढ़ने की परंपरा भी है। कथा के माध्यम से भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की महिमा का स्मरण किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा के साथ व्रत कथा सुनने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है। शाम के समय भगवान विष्णु की दोबारा आरती कर प्रसाद का वितरण करना शुभ माना जाता है।

    गुरुवार के दिन जरूरतमंद लोगों को पीली वस्तुओं का दान करना भी शुभ माना जाता है। चने की दाल, हल्दी, पीले वस्त्र, केले या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि दान और सेवा से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। हालांकि पूजा और व्रत का सबसे महत्वपूर्ण आधार सच्ची श्रद्धा और विश्वास है।

    मान्यता है कि नियमित रूप से गुरुवार का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। जीवन में आने वाली बाधाओं से लड़ने की शक्ति मिलती है और व्यक्ति के मन में धैर्य तथा सकारात्मकता का विकास होता है। इसलिए गुरुवार के दिन पूजा करते समय केवल मनोकामना पूर्ति की इच्छा ही नहीं बल्कि भगवान के प्रति सच्ची आस्था और कृतज्ञता का भाव भी रखना चाहिए।