Tag: Gwalior Central Jail

  • ग्वालियर केंद्रीय जेल में बड़ा खुलासा प्रहरी के आरोपों के बाद खुद ही हुआ निलंबित

    ग्वालियर केंद्रीय जेल में बड़ा खुलासा प्रहरी के आरोपों के बाद खुद ही हुआ निलंबित


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित केंद्रीय जेल एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है जहां जेल के भीतर कथित रूप से रुपए के लेनदेन और भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं इस बार आरोप किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं बल्कि जेल के भीतर कार्यरत एक प्रहरी ने ही लगाए हैं जिससे पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है

    जेल प्रहरी पवन शर्मा ने सहायक जेल अधीक्षक नीरज यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि केंद्रीय जेल में बंद कैदियों से विभिन्न सुविधाओं के नाम पर अवैध वसूली की जाती है उन्होंने आरोप लगाया कि रुपए न देने पर कैदियों को प्रताड़ित भी किया जाता है जिससे जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं

    प्रहरी के मुताबिक जेल के अंदर प्रतिबंधित गतिविधियां भी पैसों के बल पर संचालित हो रही हैं उनका आरोप है कि कैदियों को रुपए लेकर गांजा और अन्य नशीले पदार्थ उपलब्ध कराए जाते हैं इतना ही नहीं बैरक बदलवाने के नाम पर कैदियों से 50 हजार रुपए तक वसूले जाते हैं वहीं फोन पर बात कराने के लिए 2 मिनट के 500 रुपए तक लिए जाने का भी आरोप लगाया गया है इसके अलावा कैदियों की मांग के अनुसार अन्य सामान भी पैसे लेकर उपलब्ध कराया जाता है

    इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद जेल प्रशासन हरकत में आया लेकिन कार्रवाई का रुख कुछ अलग ही नजर आया जेल अधीक्षक विदित सिरवैया ने आरोप लगाने वाले प्रहरी पवन शर्मा को ही निलंबित कर दिया बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई झूठे और निराधार आरोप लगाने के आधार पर की गई है

    वहीं इस पूरे मामले में सहायक जेल अधीक्षक नीरज यादव पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है हालांकि इस घटनाक्रम ने जेल प्रशासन की पारदर्शिता और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं

    यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब पहले भी प्रदेश की जेलों में अवैध गतिविधियों और भ्रष्टाचार को लेकर चर्चाएं होती रही हैं ऐसे में ग्वालियर केंद्रीय जेल का यह मामला न केवल प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है बल्कि जेल सुधार व्यवस्था पर भी बहस को तेज कर सकता है

    फिलहाल इस पूरे प्रकरण में आगे क्या जांच होती है और सच्चाई क्या निकलकर सामने आती है इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं लेकिन इतना जरूर है कि इन आरोपों ने जेल व्यवस्था की छवि पर एक बार फिर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है

  • ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक

    ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का उल्लास, एक हजार से अधिक बहनों ने बंदी भाइयों को किया मंगल तिलक



    ग्वालियर। होली की दूज पर ग्वालियर सेंट्रल जेल में भाईदूज का विशेष पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर जेल में बंद अपने भाईयों से मिलने के लिए एक हजार से अधिक बहनें जेल पहुंचीं। जेल प्रशासन ने इस आयोजन को सफल और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की थीं। जेल के बाहर सुबह से ही काउंटर लगाकर बहनों का पूरी तरह से सत्यापन (वैरिफिकेशन) किया गया। केवल सत्यापित बहनों को ही जेल के अंदर प्रवेश की अनुमति दी गई।

    जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की।जेल परिसर में बहनों ने परंपरागत रीति-रिवाजों का पालन करते हुए रंग, गुलाल, रोली, चावल और चंदन से भाइयों का तिलक किया और मिठाई खिलाकर उनके लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना की। हालांकि जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि बाहर से कोई भी पूजन सामग्री लाई नहीं जा सकती। इसके चलते बहनों ने जेल परिसर में ही शुल्क देकर लड्डू और अन्य पूजन सामग्री खरीदी। जेल प्रशासन ने सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम की पूरी मॉनीटरिंग की।

    भाईदूज का यह पर्व उन कैदियों के लिए विशेष महत्व रखता है, जो संगीन मामलों में जेल में बंद हैं और लंबे समय से अपने परिवार से मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इस अवसर ने जेल में बंद भाइयों के चेहरे पर मुस्कान और खुशी की लहर दौड़ा दी। जेल अधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन से कैदियों और उनके परिवारों के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है। यह न केवल भाई-बहन के रिश्तों को सशक्त बनाता है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।

    जेल के अधिकारियों के अनुसार, कार्यक्रम को व्यवस्थित करने के लिए सुबह से ही विशेष काउंटर लगाए गए थे। बहनों का नाम, पहचान पत्र और संबंध की पुष्टि करने के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया गया। जेल प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी अनुचित घटना न हो और कार्यक्रम पूरी तरह से शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो। जेल में तैनात सुरक्षा कर्मियों ने पूरे आयोजन पर नजर रखी और आवश्यकतानुसार बहनों और कैदियों की मदद भी की।

    कार्यक्रम में कई बहनों ने बताया कि यह उनके भाईयों से मिलने का एक दुर्लभ अवसर होता है। लॉकडाउन और अन्य सुरक्षा कारणों से पिछले साल या महीनों में कई बार मिलने का अवसर नहीं मिला। इसलिए आज का दिन उनके लिए बेहद खास और भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण था। बहनों ने अपने भाईयों के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य की कामना करते हुए उन्हें स्नेहपूर्वक तिलक किया।

    जेल प्रशासन ने बताया कि इस आयोजन में हिस्सा लेने वाली बहनों की संख्या पहली बार इतनी बड़ी रही है। इससे पहले के वर्षों में इस कार्यक्रम में कुछ सौ बहनें ही शामिल होती थीं। इस बार बड़ी संख्या में बहनों की भागीदारी ने भाईदूज के पर्व की गरिमा और उल्लास को और बढ़ा दिया।

    भाईदूज पर जेल में आयोजित इस प्रकार के कार्यक्रम से यह संदेश जाता है कि कठिन परिस्थितियों में भी परिवार का महत्व और पारंपरिक रीति-रिवाजों की गरिमा कायम रहनी चाहिए। जेल प्रशासन ने भी इस अवसर को शांति और अनुशासन के साथ सफल बनाने का प्रयास किया।

    इस आयोजन ने साबित कर दिया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, भाई-बहन का स्नेह और त्यौहारों का महत्व कभी कम नहीं होता। जेल में बंद कैदियों के लिए यह एक सुखद और यादगार अनुभव बन गया, जिसने उनके और उनके परिवार के बीच भावनात्मक दूरी को कम किया।