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  • ग्वालियर में चूरन नोट गैंग का खुलासा: 10 गुना मुनाफे का झांसा देकर लोगों से ठगी, आरोपी गिरफ्तार

    ग्वालियर में चूरन नोट गैंग का खुलासा: 10 गुना मुनाफे का झांसा देकर लोगों से ठगी, आरोपी गिरफ्तार


    ग्वालियर। शहर में नकली नोट के नाम पर ठगी करने वाले एक शातिर चूरन नोट गैंग का पर्दाफाश हुआ है। महाराजपुरा थाना पुलिस ने घेराबंदी कर गैंग के एक सदस्य को गिरफ्तार किया, जो एक डेयरी व्यवसायी को 30 लाख रुपये के नकली नोट देने पहुंचा था।

    10 गुना मुनाफे का लालच देकर फंसाता था आरोपी
    गिरफ्तार आरोपी आजाद अली लोगों को 1 रुपये के बदले 10 रुपये देने का लालच देता था। वह खुद को नकली नोटों का बड़ा कारोबारी बताकर दावा करता था कि उसके नोट असली जैसे ही हैं और आसानी से बाजार में चल जाते हैं।

    पहले असली नोट देकर जीतता था भरोसा
    पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए आरोपी शुरुआत में 500, 200 और 100 रुपये के असली नोट देता था और उन्हें नकली बताता था। जब ये नोट बाजार में आसानी से चल जाते, तो लोगों को उसकी बात पर यकीन हो जाता और वे बड़ी डील के लिए तैयार हो जाते।

    असली के बीच चिल्ड्रन बैंक नोट छिपाकर देता था माल

    पुलिस के अनुसार, आरोपी असली नोटों की गड्डियों के ऊपर एक-दो असली नोट लगाकर नीचे चिल्ड्रन बैंक चूरन नोट रख देता था और इसी तरह लोगों को ठगता था।

    3 लाख के बदले 30 लाख की डील

    दतिया के डेयरी कारोबारी सोनू पाल को भी आरोपी ने इसी तरह फंसाया। व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क कर उसने 3 लाख के बदले 30 लाख देने का झांसा दिया। भरोसा बनाने के लिए पहले असली नोट दिए और बाद में 40 हजार रुपये एडवांस भी ले लिया।

    शक हुआ तो पुलिस को दी सूचना

    जब कारोबारी को संदेह हुआ, तो उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने जाल बिछाया और आरोपी को दीनदयाल नगर के टाइगर चौक पर बैग के साथ पकड़ लिया।

    बैग खोलते ही सामने आया सच
    तलाशी के दौरान पुलिस को 500, 200 और 100 रुपये की कुल 20 गड्डियां मिलीं। हर गड्डी में ऊपर असली नोट और नीचे चिल्ड्रन बैंक के नोट भरे हुए थे। पुलिस ने 500 की 13, 200 की 5 और 100 की 2 गड्डियां जब्त की हैं।

    नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

    पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी पहले भी कई लोगों को इसी तरह ठग चुका है। फिलहाल पुलिस उसके नेटवर्क और अन्य साथियों की तलाश में जुटी है।

  • ‘CBI अफसर’ बनकर 2.52 करोड़ की ठगी, साइबर गैंग के 3 और आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार

    ‘CBI अफसर’ बनकर 2.52 करोड़ की ठगी, साइबर गैंग के 3 और आरोपी दिल्ली से गिरफ्तार


    ग्वालियर । 2.52 करोड़ रुपये की हाई-प्रोफाइल साइबर ठगी के मामले में ग्वालियर क्राइम ब्रांच को बड़ी सफलता मिली है। एयरफोर्स के रिटायर्ड रेडियोलॉजिस्ट को सीबीआई अधिकारी बनकर ठगने वाले गिरोह के तीन और आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। इस केस में अब तक कुल 7 आरोपी पकड़े जा चुके हैं।

    गिरफ्तार आरोपियों को ग्वालियर लाया गया है, जहां उन्हें कोर्ट में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा। पुलिस जांच में सामने आया है कि ठगी की रकम को पहले कुछ चुनिंदा खातों में डाला गया और फिर 15 राज्यों के 300 से ज्यादा बैंक खातों में ट्रांसफर कर ट्रेल छिपाने की कोशिश की गई।

    दिल्ली से पकड़े गए आरोपी, बैंक नेटवर्क का खुलासा
    जांच में पता चला कि करीब 28 लाख रुपये इंडसइंड बैंक के एक खाते में ट्रांसफर किए गए थे। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम दिल्ली पहुंची और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके पास से पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फर्जी बैंक खाते खुलवाकर उन्हें “म्यूल अकाउंट” के रूप में साइबर ठगों को बेचते थे। पूरा नेटवर्क टेलीग्राम के जरिए संचालित होता था।

    कौन क्या करता था
    हरीश गढ़वाल (27) – छिंदवाड़ा निवासी, दिल्ली में रहकर बैंक खाते खुलवाता और ऑपरेट करता था।
    सौरव यादव (23) – इसके खाते में 28 लाख रुपये ट्रांसफर हुए थे।
    शरद डेहरिया (20) – सौरव के साथ जॉइंट अकाउंट संचालित करता था।

    300 से ज्यादा खातों में पहुंचाई गई रकम
    ठगी की राशि सबसे पहले दिल्ली, नोएडा, आंध्र प्रदेश के गुंटूर और वाराणसी के पांच खातों में भेजी गई। इनमें आंध्र प्रदेश के दो खातों में करीब 1.5 करोड़ और दिल्ली-यूपी के खातों में लगभग 1 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद यह रकम देश के 15 राज्यों के 300 से अधिक खातों में फैलाई गई।

    फर्जी फर्म के जरिए लेनदेन
    जांच के दौरान दिल्ली की एक फर्म “जिंग्गा क्रंच एंड स्नैक्स” के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर होने का खुलासा हुआ। पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ की, जिन्होंने बताया कि यह फर्म दूसरों के कहने पर खोली गई थी और बदले में उन्हें 2.5 लाख रुपये कमीशन मिला था।

    ऐसे रचा गया ठगी का जाल
    ग्वालियर के विंडसर हिल्स निवासी 90 वर्षीय रिटायर्ड डॉक्टर को आरोपियों ने व्हाट्सऐप कॉल कर खुद को सीबीआई अधिकारी बताया। आधार और पैन कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया। आरोपियों ने 27 दिनों तक उन्हें वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और इस दौरान अलग-अलग खातों में 2.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए।