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  • ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल

    ग्वालियर हादसे में 15 मौतों के बाद पीड़ित परिवारों का दर्द, सीएम से 3 से 7 मिनट की मुलाकात, घायलों ने इलाज पर उठाए सवाल


    ग्वालियर । ग्वालियर के शीतला माता मंदिर के प्रवेश द्वार पर हुए भीषण हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवारों में नाराजगी बनी हुई है। हादसे में अपनों को खोने वाले परिजन प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ग्वालियर दौरे से पहले पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सक्रिय हो गए। जिला प्रशासन पुलिस और नगर निगम के अधिकारियों ने अस्पताल से लेकर पीड़ित परिवारों के घरों तक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर रुचिका चौहान और एसपी धर्मवीर सिंह यादव भी मुख्यमंत्री के पहुंचने से पहले संबंधित स्थानों पर पहुंचे और तैयारियों की जानकारी ली।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट के साथ पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे। हालांकि कई परिवारों के साथ उनकी मुलाकात तीन से सात मिनट तक ही रही। इस दौरान परिजनों ने नौकरी आवास और आर्थिक सहायता की मांग रखी। लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच ट्रक मंदिर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई जैसे सवाल इन मुलाकातों में प्रमुखता से सामने नहीं आए।

    मुख्यमंत्री के ट्रॉमा सेंटर पहुंचने के दौरान बाहर मौजूद कुछ घायलों और उनके परिजनों ने इलाज को लेकर नाराजगी जताई। शिवम ने आरोप लगाया कि ट्रॉमा सेंटर में उचित इलाज नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी अस्पताल जाना पड़ा जहां 15 हजार रुपये खर्च हुए। उनका कहना था कि प्रशासन मुफ्त इलाज की बात कर रहा है लेकिन खर्च की गई रकम वापस नहीं मिली। वहीं कोमल ने शिकायत की कि घायल कल्पना परिहार को 24 घंटे तक जरूरी पट्टा नहीं मिला और उन्हें बाजार से 15 हजार रुपये में खरीदना पड़ा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शैलेंद्र शर्मा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के आने से पहले अस्पताल में पंखे लगाए गए जाले हटाए गए और बेडशीट बदली गईं। उन्होंने मुख्यमंत्री से नहीं मिल पाने की भी शिकायत की।

    महेशपुरा में मुख्यमंत्री शाम करीब 4 बजकर 57 मिनट पर पहुंचे। इससे पहले स्थानीय नेता वीरेंद्र गुर्जर मृतक दिव्यांश कुशवाह के भाई शुभम को समझाते नजर आए। मुख्यमंत्री के काफिले के आने की सूचना मिलने पर उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने दिव्यांश के पिता अशोक कुशवाह और उनके बेटे शुभम को सांत्वना दी। बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार के मकान और आवास योजना के बारे में पूछा। अशोक कुशवाह ने बताया कि उनका एक कमरे का अपना मकान है और उन्होंने शुभम के लिए नौकरी की मांग रखी। करीब तीन मिनट में यह मुलाकात समाप्त हो गई।

    इसके बाद मुख्यमंत्री महलगांव में मृतक सतेंद्र गुर्जर के घर पहुंचे। वहां उनके पिता जगदीश गुर्जर भावुक हो गए। सतेंद्र के ताऊ रामचित्र ने परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग रखी। पार्षद गिर्राज कंसाना के अनुसार मुख्यमंत्री ने जरूरी दस्तावेज भेजने को कहा और आर्थिक सहायता का चेक देकर आगे बढ़ गए। गल्ला कोठार में मुख्यमंत्री ने मृतक प्रिंस और निकेश के परिवारों से मुलाकात की। परिजनों ने कमाने वाले बेटों की मौत से आजीविका पर आए संकट की जानकारी दी और नौकरी तथा आवास की मांग रखी।

    गदाईपुरा के शिवनगर में मुख्यमंत्री ने मृतक हेमंत राठौर पवन राठौर और लव अमन तथा अशोक त्यागी के परिजनों से भी मुलाकात की। यहां कांग्रेस नेता सुनील शर्मा और स्थानीय लोगों ने ज्ञापन सौंपकर मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये घायलों को 10-10 लाख रुपये और प्रत्येक प्रभावित परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की। हादसे के बाद परिवारों के सामने आर्थिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता बनी हुई है। वहीं ट्रक मंदिर परिसर तक कैसे पहुंचा और सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी इन सवालों का जवाब हादसे की जांच के लिहाज से अहम बना हुआ है।

  • ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल

    ग्वालियर के हजार बिस्तर अस्पताल में बड़ी लापरवाही, फायर हाइड्रेंट के उपकरण गायब, ICU और नवजातों की सुरक्षा पर सवाल


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से बने हजार बिस्तर अस्पताल की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल में आग बुझाने के लिए लगाए गए फायर हाइड्रेंट सिस्टम के कई जरूरी उपकरण गायब मिले हैं। इनमें पाइप नोजल और होज रील कपलिंग जैसे सामान शामिल हैं। हैरानी की बात यह है कि इन उपकरणों के गायब होने की जानकारी अस्पताल प्रबंधन को सिस्टम की जांच के दौरान मिली। जिस अस्पताल में रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं वहां आग जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

    हजार बिस्तर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 200 से 300 मरीज भर्ती रहते हैं। इनमें आईसीयू में उपचार करा रहे गंभीर मरीज नवजात शिशु उनकी माताएं और बुजुर्ग भी शामिल हैं। ऐसे मरीजों को आग लगने की स्थिति में सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना आसान नहीं होता। बहुमंजिला अस्पताल में मरीजों को बाहर निकालने के लिए पर्याप्त समय और प्रशिक्षित कर्मचारियों के साथ काम करने वाली अग्निशमन व्यवस्था जरूरी होती है। ऐसे में फायर हाइड्रेंट सिस्टम के अहम उपकरणों का गायब होना मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाता है।

    अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नई बिल्डिंग हैंडओवर होने के बाद फायर सेफ्टी के कुछ उपकरण चोरी होने की बात सामने आई है। हालांकि उपकरण कब चोरी हुए और कुल कितने सामान गायब हैं इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। इस मामले ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और नियमित निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर फायर सिस्टम के उपकरण लंबे समय से गायब थे तो समय रहते उनकी कमी का पता क्यों नहीं चला यह भी जांच का विषय है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर सुरक्षा उपकरणों का नियमित भौतिक सत्यापन बेहद जरूरी है ताकि किसी भी कमी को आपात स्थिति आने से पहले दूर किया जा सके।

    मौके पर लगे फायर बॉक्स की हालत भी चिंता बढ़ाने वाली बताई गई है। इसके अलावा अस्पताल में लगे कुछ अग्निशमन सिलेंडरों पर एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से नहीं मिली। ऐसे में केवल उपकरणों की मौजूदगी ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उनका सही हालत में होना और जरूरत पड़ने पर काम करना भी जरूरी है। आग लगने की स्थिति में शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि जरूरी पाइप और नोजल उपलब्ध नहीं हों तो आग पर शुरुआती स्तर पर काबू पाने में परेशानी हो सकती है। इससे मरीजों को सुरक्षित निकालने और आग को फैलने से रोकने की चुनौती बढ़ सकती है।

    हजार बिस्तर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुधीर सक्सेना ने बताया कि अज्ञात चोर फायर सेफ्टी के उपकरण चुरा ले गए हैं। नए उपकरण खरीदने के लिए वरिष्ठ कार्यालय को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने कहा कि आग लगने की स्थिति से निपटने के लिए सिस्टम दुरुस्त है। उपकरणों की जांच के लिए निजी एजेंसियों से बातचीत चल रही है और जल्द ही मॉक ड्रिल भी कराई जाएगी। हालांकि फायर हाइड्रेंट के कुछ जरूरी उपकरणों के गायब मिलने के बाद पूरी व्यवस्था की वास्तविक स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण हो गया है।

    इस घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल में सुरक्षा गार्ड और जिम्मेदार अधिकारी तैनात होने के बावजूद उपकरण कैसे गायब हुए और नियमित जांच में इसका पता क्यों नहीं चला इस पर जवाबदेही तय करना जरूरी है। नए उपकरण खरीदने का प्रस्ताव भेजना एक कदम हो सकता है लेकिन इसके साथ पूरे फायर सिस्टम का निरीक्षण करना सभी उपकरणों की कार्यक्षमता जांचना और कर्मचारियों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण देना भी आवश्यक है। अस्पताल में भर्ती मरीज अपनी सुरक्षा के लिए व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इसलिए अग्नि सुरक्षा में किसी भी कमी को जल्द दूर करना और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए निगरानी मजबूत करना बेहद जरूरी है।